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नये ब्लॉग

December 20, 2005 को प्रकाशित। लेखकः Debashish

मुम्बई के शशि सिंह लाए हैं बॉलीवुड से सिने गॉसिप और आस्ट्रेलिया स्थित रितेश साहू ने प्रारंभ किया है अपना यात्रा ब्लॉग घूमते फ़िरते.

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ब्लॉगिंग के दौर में हिंदी वाले पीछे क्यों रहें?

December 13, 2005 को प्रकाशित। लेखकः अनूप शुक्ल

आशीष ने अपनी चिरपरिचित अंदाज में बचपने को याद किया-वर्तनी की चिरपरिचित लेकिन कम होती अशुद्धियों के साथ। लाल्टू जी एक माह के लिये गये थे लेकिन लिखने का मोह उन्हें वापस फिर खींच लाया की बोर्ड पर । वे लिखते रहे गेट बंद होने तक। अपने जन्मदिन(१० दिसम्बर) के अवसर पर लिखा:-

उम्र दर उम्र
ढूँढते हैं
बढ़ती उम्र रोकने का जादू

भरे छलकते प्याले हैं
एक-एक टूटता प्याला
लड़खड़ाते सोच सोच कि
टूटने से पहले प्यालों में
रंग कुछ और भी होने थे


कविता लिखी जाये तो ऐसा बहुत कम होता है कि प्रत्यक्षा प्रतिकविता न लिखें। फाइलों से समय चुराकर उन्होंने प्रतिकविता लिखी:-

कई बार
दरकते प्याले भी
सहेजते रहे
छिपाते रहे
टूटे निशान
और ओढते रहे
चेहरे पर
एक नारा
मुस्कुराते रहो


मानसी के हाथ में कैमेरा आया तो कितने आसमान आ गये देखा जाये-अकेला आसमान ,उजला आसमान,जलता आसमान,लजाता आसमान,उलझा आसमान,हमसफ़र आसमानजीतेंदर तथा पंकज ने अपनी अनुगूंज की पोस्ट लिखीं। बमार्फत रमनकौल पता चला इंडिक ब्लागर अवार्ड के बारे में तथा रविरतलामी का भाषाइंडिया में छपा लेख भी- ब्लॉगिंग के दौर में हिंदी वाले पीछे क्यों रहे?सुनील दीपक लंदन घूमने निकले तो वहां के विवरण अपनी डायरी में दर्ज किये।सुनील दीपक की लंदन डायरी पढ़िये मनमोहक चित्रों के साथ।रविरतलामी दिखा रहे हैं भारतीय राजनीति के दो विरोधाभाषी चित्र।दिल्ली वालों को लगता है कि आज तक का यह खुलासा यह साबित नहीं करता कि सभी सांसद बेईमान हैं और न ही यह कि इस ऑपरेशन में जो नहीं पकड़ाए, वे ईमानदार हैं।देबाशीष का संदेश है:-
१५वीं अनुगूँज में पंकज ने विषय दिया था कि हम फिल्में क्यों देखते है? १५ प्रविष्टियाँ मिली अनूगूँज के एक वर्ष पूर्ण होने पर और घोषणानुसार हमें सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को पुरस्कृत करना है। तो बतायें कि कौन सी प्रविष्टि आप को सब से अच्छी लगी? मतदान करने की अंतिम तिथि है १६ दिसंबर।

हार नहीं माने हैं दिएगो गार्सिया के लोग

December 12, 2005 को प्रकाशित। लेखकः अनूप शुक्ल

सर्दी आ गई यह तब पता चला जब अनाम के ब्लाग की तस्वीर की बर्फ दिखी। हार नहीं माने दियेगो गार्सिया के लोग। इस लेख में हिंदी ब्लागर ने दिएगो गार्सिया के मूल निवासियों की ब्रितानी सरकार से क़ानूनी लड़ाई के बारे में बताया कि कैसे मुट्ठी भर लोग सबसे बड़े साम्राज्यवादी देश से लड़ाई लड़ रहे हैं, यह एक मिसाल है। हिंदी की हालत के बारे में बताते हुये बताया गया कि हालात ऐसे ही रहे तो जल्द ही लोग अंग्रेज़ी की जगह हिन्दी बोलने की कोचिंग ले रहे होंगे!!रजनीश मंगला हीरो बने हिंदी की वर्ड फाइल छाप के पढ़ा रहे हैं सबको।प्रतीक से अपहरण के बारे में जानिये।अनुगूंज के विषय पर फुरसतिया ने अपना लेख लिखा जिस पर विनय जैन ने टिप्पणी लिखी जो कि उनकी प्रविष्टि बनी।लाल्टूजी चले गये छुट्टी अपनी पुरानी कवितायें छापने का तर्क बताकर।। जीतेन्दर ने शिकायत की कि उनके सुझाव पर अनूप शुक्ला उनको गरिया रहे थे अनूप बोले हम गरियाये कहां हम तो मौज ले रहे थे।

मेरा विश्‍वास तुमसे मुठ्ठी भर कम है

December 10, 2005 को प्रकाशित। लेखकः अनूप शुक्ल

अलकायदा के तीसरे साथी के बारे में जानना हो तो देशदुनिया देखिये।पियक्कड़ मुर्दे का ताबूत देखिये जापानी साथी मत्सु से।लाल्टूजी अपना सारा पुराना स्टाक छापे दे रहे हैं नेट पर भी। मसिजीवी ने सूरज कविता के जवाब में प्रतिकविता लिखी।

मेरा विश्‍वास तुमसे मुठ्ठी भर कम है
कि सारी दुनिया सूरज सोच सकेगी
पर यकीन मानो मैं इस खयाल से भयभीत नहीं हूँ
मेरी चिंता फर्क है
और वह यह है मेरे दोस्‍त
कि इसकी राह देखती तुम्‍हारी ऑंखें
कहीं पथरा न जाए
चिर आसन्‍न प्रसवा पृथ्‍वी डरती है
पथराई ऑंखों के सपनों से।


क्या स्वतंत्रतता भी बंधक बन सकती है!- अतुलबतायेंगे।आपका दिमाग कैसे काम करता है बतायेंगे कनिष्क रस्तोगी।
जीतेन्द्र योगाभ्यास दिखाने लगे। उधर स्वामीजी के कहने पर रविरतलामी,आशीष श्रीवास्तव तथा फ़ुरसतिया आदर्शवादी संस्कार के बारे में अपने विचार लिखने को मजबूर हुये।

रचनाकार में रविरतलामीजी ने हितेश व्यास की कवितायें पढ़ाईं। हितेश व्यास का वसन्त कहता है:-

ज़्यादा से ज़्यादा तुम क्या कर सकते हो?
हजामत! कर दो, रुण्ड मुण्ड कर दो
मैं आऊँगा पेड़ों के विग लगाता हुआ
इससे अधिक तुम्हारी औक़ात क्या है


अनूप जी (कौन वाले यह नहीं बताया)का ब्लाग देखकर रति सक्सेना जी भी कविता में गणित ले आईं।
ब्लाग लिखने से हुये फायदे-नुकसान का लेखा-जोखा अतुल सबनीस कर रहे हैं।खेल-खेल में पैसा कमाने के गुर सिखाने में जुटे हैं पंकज।रजनीश मंगला को कुछ गाने चाहिये ।सूची देखें। हों तो भेजें।कविता ,ज्योतिष व हायकू के बाद अब मानसी ने बाल कविताओं पर हाथ आजमाना शुरु किया। बाल कवितायें आप भी पढ़ें-लिखें।

सैन्टा बाबा उनको तोहफ़ा देते
जो मम्मी-पापा का कहा सुनते
आओ हम अच्छे बच्चे बन जायें
क्रिस्मस में मन के तोहफ़े पायें


लक्ष्मी गुप्त जी नये अंदाज में सबअर्ब की गाथा लिख रहे हैं:-

कोमल तन की सुघर मेहरियाँ रहतीं सबै सबर्बिया माँ
चंचल नैनन वाली गोरियाँ चितवत रहैं सबर्बिया माँ
नाचैं, गावैं, भाव बतावैं बारन और किलबिया माँ
मन लागो मेरो यार....


महावीर शर्मा जी विचारोत्तेजक लेख में हिंदी को जानबूझकर गलत अंदाज में उच्चारित किये जाने के बारे में बता रहे हैं।यह देखा जा रहा है कि हर क्षेत्र में व्यक्ति जैसे जैसे अपने कार्य में सफलता प्राप्त करके ख्याति के शिखर के समीप आजाता है, उसे अपनी माँ को माँ कहने में लज्जा आने लगती है।

आज की टिप्पणी:जीतू की पोस्ट में सूर्य नमस्कार करते हुये बालक के आगे-पीछे कोई शब्द नहीं था तब यह टिप्पणी की गई थी-देखो जीतू, तुम जब तक लिख नहीं रहे थे तब तक यह सूर्य नमस्कार करता बालक चुपचाप खड़ा रहा। तुम्हारी पोस्ट देखते ही ये बालक सूर्य दंड पेलने लगा। बेचारा नमस्कार करते करते गिर जायेगा लेकिन देखेगा उधर ही जिधर इस पोस्ट का कोई शब्द नहीं दिखेगा। क्या बात है। बकिया लेख जैसा कि होता है बढ़िया है। बाद में जीतू ने बालक के तीनो तरफ शब्दों की बाड़े-बंदी कर दी।

लिख चुके प्यार के गीत बहुत

December 07, 2005 को प्रकाशित। लेखकः अनूप शुक्ल

प्रेमचंद की १२५ वीं वर्षगांठ पर लाल्टू के लेख से वर्षों पराने दोस्त मिले तथा आह निकली लाल्टू की कविताओं पर। जापान में भारत के बारे में बदलते नजरिये के बारे में जानिये मत्सु से। यूनानी कला के बारे में प्रतीक बता रहे हैं। नेपाल पर भारतीय नेता की गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी के बारे में सालोक्य के विचार तथा सशक्त भारत चर्चा समूह के बारे में अनुनाद सिंह का लेख। जीतेंद्र से जानिये फ़िल्मी पाडकास्टिंग के बारे में तथा आशीष से बदलते रिश्तों के बारे में। टूथब्रश के सफर के बारे जानिये देशदुनिया से. रवि रतलामी रचनाकार में पेश कर रहे हैं शमशेर सिंह की कविता:-

वकील करो-
अपने हक के लिए लड़ो.
नहीं तो जाओ
मरो.


विजय ठाकुर तथा रति सक्सेना काफी दिन बाद फिर से आये चिट्ठाजगत में। रतिजी ने लिखा:-

चोथी बेटी के दिल नहीं होताहै
उसका कोई अपना नहीं होता है
चौथी बेटी उदयपुर की झील है
उसकी आँखें लहराती रहती हैं
चौथी बेटी राजनर्तकी का घुँघरू है
बिन-बात खिलखिला उठती है
आज यही चौथी बेटी
झील के किनारे खड़ी है
अपने पुनर्जन्मों को चुभलाती हुई


रविरतलामीजी ने धनंजय शर्माजी के प्रति सभी चिट्ठाकारों की श्रद्धांजलि दी।महावीर शर्मा की कविता है:-

लिख चुके प्यार के गीत बहुत कवि अब धरती के गान लिखो।
लिख चुके मनुज की हार बहुत अब तुम उस का अभियान लिखो ।।


आज की टिप्पणी:-अतुल के इसरार पर चुनिंदा टिप्पणियां देने की शुरुआत की जा रही है। आज की टिप्पणी है पंकज के लेख लेख पर रविरतलामी की :-
#$^&@ मैं अपने ब्राउज़र को बाइ डिफ़ॉल्ट चित्र प्रदर्शित न करने के लिए सेट कर रखता हूँ, ताकि बहुत सी झंझटों, और खासकर धीमी गति से मुक्ति मिल सके.आपने कहा चित्र देखिए. जनाब उम्मीद यह थी कि आप कोई बर्फीले मौसम का बढ़िया चित्र दिखाएँगे.पर यहाँ तो आप थर्मामीटर का पारा दिखा रहे हैं - वह भी कोई दिखाने की चीज़ है? हमने पहले ही मान लिया था 9 डिग्री होगा, 7 डिग्री भी हो सकता है.दरअसल, देखना चाहते थे आपका थूक या जमी हुई गा@#!$^लियाँ.. वो दिखाओ तो कुछ बात बने…
आप भी टिप्पणियां लिखने में देर मत करा करें।

लिख चुके प्यार के गीत बहुत

को प्रकाशित। लेखकः अनूप शुक्ल

प्रेमचंद की १२५ वीं वर्षगांठ पर लाल्टू के लेख से वर्षों पराने दोस्त मिले तथा आह निकली लाल्टू की कविताओं पर।जापान में भारत के बारे में बदलते नजरिये के बारे में जानिये मत्सु से। यूनानी कला के बारे में प्रतीक बता रहे हैं।नेपाल पर भारतीय नेता की गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी के बारे में सालोक्य के विचार तथासशक्त भारत चर्चा समूह के बारे में अनुनाद सिंह का लेख।जीतेंद्र से जानिये फ़िल्मी पाडकास्टिंग के बारे में तथा आशीष से बदलते रिश्तों के बारे में।टूथब्रश के सफर के बारे जानिये देशदुनिया से. रवि रतलामी रचनाकार में पेश कर रहे हैं शमशेर सिंह की कविता:-

वकील करो-
अपने हक के लिए लड़ो.
नहीं तो जाओ
मरो.


विजय ठाकुर तथा रति सक्सेना काफी दिन बाद फिर से आये चिट्ठाजगत में। रतिजी ने लिखा:-

चोथी बेटी के दिल नहीं होताहै
उसका कोई अपना नहीं होता है
चौथी बेटी उदयपुर की झील है
उसकी आँखें लहराती रहती हैं
चौथी बेटी राजनर्तकी का घुँघरू है
बिन-बात खिलखिला उठती है
आज यही चौथी बेटी
झील के किनारे खड़ी है
अपने पुनर्जन्मों को चुभलाती हुई


रविरतलामीजी ने धनंजय शर्माजी के प्रति सभी चिट्ठाकारों की श्रद्धांजलि दी।महावीर शर्मा की कविता है:-

लिख चुके प्यार के गीत बहुत कवि अब धरती के गान लिखो।
लिख चुके मनुज की हार बहुत अब तुम उस का अभियान लिखो ।।


आज की टिप्पणी:-अतुल के इसरार पर चुनिंदा टिप्पणियां देने की शुरुआत की जा रही है। आज की टिप्पणी है पंकज के लेख लेख पर रविरतलामी की :-
#$^&@ मैं अपने ब्राउज़र को बाइ डिफ़ॉल्ट चित्र प्रदर्शित न करने के लिए सेट कर रखता हूँ, ताकि बहुत सी झंझटों, और खासकर धीमी गति से मुक्ति मिल सके.आपने कहा चित्र देखिए. जनाब उम्मीद यह थी कि आप कोई बर्फीले मौसम का बढ़िया चित्र दिखाएँगे.पर यहाँ तो आप थर्मामीटर का पारा दिखा रहे हैं - वह भी कोई दिखाने की चीज़ है? हमने पहले ही मान लिया था 9 डिग्री होगा, 7 डिग्री भी हो सकता है.दरअसल, देखना चाहते थे आपका थूक या जमी हुई गा@#!$^लियाँ.. वो दिखाओ तो कुछ बात बने…
आप भी टिप्पणियां लिखने में देर मत करा करें।

नागफनी से भुखमरी का इलाज

December 05, 2005 को प्रकाशित। लेखकः Debashish

ब्लाग जगत में सिद्ध लेखकों का आगमन शुरु हो गया है। चर्चित व्यंग्यकार आलोक पुराणिक ने अपना चिट्ठा प्रपंचतंत्र शुरु किया। प्रतीक ने भी अपना नया चिट्ठा शुरु किया है नाम है टाइमपास। नरेन्द्र कोहली की रचना रचनाकार पर देखें।

हायकू के मौसम में सारिका ने भी हायकू लिखने की शुरुआत की।चिंडियामाने चीन + इंडिया के भविष्य के बारे में बता रहे हैं सुनील दीपक। फोन पर जब दो पुराने प्रेमी मिलते हैं तो क्या करते हैं जानिये लाल्टू से। ठंड के हायकू देखिये फुरसतिया पर तथा बर्फ देखिये मानसी के ब्लाग पर।हिंदी चिट्ठों का प्रिंट लेकर लोगों को पढ़ाने वाले रजनीश बता रहे हैं कि कंप्यूटर पर संगीत कैसे लाया जाये।
भूख लगे तो नागफनी खाओ । अटपटा लगता है लेकिन नागफनी से भुखमरी का इलाज कैसे होता है बता रहें हिंदी ब्लागर ।पत्र मेल संदेश की चेन का खुलासा कर रहे हैं रमण कौल
अनुगूंज के अगले आयोजक हैं स्वामी जी। विषय है- (अति)आदर्शवादी संस्कार सही या गलत?इसके पहले पंकज ने अनुगूंज के वर्षगांठ अंक का खूबसूरत अवलोकन किया विषय था -हम फिल्में क्यों देखते हैं?अक्षरग्राम पर ही अतुल की विचारोत्तेजक पोस्ट तथा उस पर विस्तृत टिप्पणियां देखें-क्या लाल रात की कोई सुबह नहीं होती?अपनी पहली (असली )वीडियो प्रविष्ट दिखा रहे हैं अतुल। रूपक अग्रवाल की कविता पढ़िये-प्रियसी।इंडीब्लागीस अवार्ड के बारे में कुछ विचार फुरसतिया के।


हिंदी के ब्लागर धनंजय शर्मा नहीं रहे।उनके असामयिक, दुखद निधन पर उनका परिचय देते हुये जीतेंद्र ने सभी हिंदी चिट्ठाकारों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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Posted by अनूप शुक्ला to gupt at 12/05/2005 01:16:00 PM

धनंजय शर्मा नहीं रहे

को प्रकाशित। लेखकः Debashish

'प्रतीक' के द्वारा पता चला कि कुछ बतकही के लेखक धनंजय शर्मा नहीं रहे। धनंजय शर्मा को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि । ईश्वर उनके परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की क्षमता प्रदान करे।

--
Posted by अनूप शुक्ला to gupt at 12/05/2005 08:05:00 AM

चिट्ठा चर्चा परिचय


दुनिया की किसी भी भाषा के चिट्ठे की चर्चा का प्रयास। इस प्रस्तुति में हमारी कोशिश होगी कि विभिन्न भाषाओं की चुनिंदा प्रविष्टियों का ज़िक्र करें।

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