ग़लती किसकी? किरण बेदी का हिन्दी चिट्ठा बनाम चंद ऑनलाइन अख़बारी चिट्ठे

Sunday, November 08, 2009 Leave a Comment

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अंग्रेज़ी अख़बारों के ऑनलाइन संस्करणों व अंग्रेज़ी समाचार साइटों में ब्लॉग और ब्लॉगरों को बहुत पहले से जमीन दी जा चुकी है. अमरीका ऑनलाइन में पाँच हजार से अधिक चिट्ठाकार नियमित तौर पर लिखते हैं और अगले साल तक यह संख्या दो गुना हो जाने की उम्मीद है.
हिन्दी समाचार साइटों / हिन्दी अख़बारों के ऑनलाइन संस्करणों में स्थिति क्या है? स्थिति भले ही अभी नाजुक लगे, मगर शुरूआत तो हो चुकी है. शुरूआत भले ही धमाकेदार न दिखती हो, मगर उपस्थिति में दम नजर आता तो है.
आधुनिक तकनीक के यूनिकोड हिन्दी फ़ॉन्ट को पहले पहल अपनाने वाली चंद महत्वपूर्ण और प्रमुख साइटों में बीबीसी हिन्दी का नाम प्रमुखता से जुड़ता रहा है. ब्लॉग की महत्ता को स्वीकारते हुए बीबीसी हिन्दी ने अपने साइट में ब्लॉग को स्थान दिया है. बीबीसी हिन्दी ब्लॉग में लिखने वाले प्रमुख चिट्ठाकार हैं –

ये सभी नाम जाने पहचाने से हो सकते हैं क्योंकि आमतौर पर प्राय: सभी मीडिया से जुड़े हुए व्यक्तित्व हैं. परंतु फिर भी इनके ब्लॉग पोस्टों में बेतरतीब, सरसरी नजर भी मारें तो वेराइटी रीडिंग का भरपूर मसाला तो मिलता ही है.
नव भारत टाइम्स ने भी अपने ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म में ब्लॉग की ताकत को स्वीकारते हुए लंबी चौड़ी जगह दी है. यहाँ पर आपको विषय वार ब्लॉग मिलेंगे. देश दुनिया, कल्चर, मनोरंजन, साइंस-टेक्नोलाजी, सोसाइटी, खेल, राजनीति विषयक ब्लॉग हैं यहाँ.
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चिट्ठाकारों में देखें तो जहाँ आलोक पुराणिक भी अपनी खूंटी यहाँ जमाए दिख रहे हैं तो किरण बेदी भी. नवभारत टाइम्स ब्लॉग की पूरी सूची में 21 चिट्ठाकार हैं, और सभी अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित, बढ़िया लिखने वाले –

दिल्ली दा मामला लेखक आलोक पुराणिक

गलती किसकी? लेखक किरन बेदी
किसी से ना कहना... लेखक नमिता जोशी
जो है सो है लेखक राजेश कालरा
छोटी-सी बात लेखक शिवेंद्र सिंह चौहान
दिल में है दिल्ली लेखक दिलबर गोठी
भारतीयम लेखक तरुण विजय
नॉनस्टॉप लेखक पूनम पांडे
ज़िंदगीनामा लेखक संजय खाती
अपना मोर्चा लेखक सौरभ द्विवेदी
दूसरा पहलू लेखक सुंदरचंद ठाकुर
दरभंगा to दिल्ली लेखक प्रभाष झा
अकथ्य लेखक पूजा प्रसाद
रैबिट पंच लेखक विवेक आसरी
ख्याली पुलाव लेखक आलोक सिंह भदौरिया
भेजा फ्राई लेखक नमिता जोशी
आठवां सुर लेखक अनुराग अन्वेषी
अंधेर नगरी लेखक प्रणव प्रियदर्शी
बारामासा लेखक राकेश परमार
Tech इट ईज़ी लेखक आशीष पांडे
एकला चलो लेखक नीरेंद्र नागर
अब देखना ये है कि और भी तमाम हिन्दी अख़बारों के ऑनलाइन संस्करण और हिन्दी की महत्वपूर्ण साइटें जैसे कि हिन्दी एमएसएन / याहू इत्यादि कब ब्लॉगों की ताकत को पहचानेंगे, और, इससे भी बड़ी बात, कि कब वे हम जैसे पारंपरिक चिट्ठाकारों को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर नियमित लिखने का कॉन्ट्रैक्ट देंगे?

# अद्यतन : राष्ट्रीय सहारा में भी ब्लॉग के लिए जगह दी गई है. वहां पूजा बत्रा, सुरेंद्र देशवाल, दीपक शर्मा, प्रमून कुमार मिश्र लिख रहे हैं. 

20 टिप्पणियाँ »

  • काजल कुमार Kajal Kumar said:  

    जैसे दूध-अखबार वाले बांध लेते हैं लोग, वैसे ही इन मीडिया साइट्स ने अपने-अपने ब्लागर बांध रखे हैं. कोई गुरेज़ नहीं, प्लेटफ़ार्म इनके हैं तो मर्ज़ी भी इनकी...अलबत्ता जब तालाब का पानी सड़ने लगता है तो बरसात की ज़रूरत पड़ती ही है..ताज़ा हवा चाहिये तो खिड़कियां तो इन्हें भी खोलनी ही होंगी, सवाल इतना है कि कब (?)

  • सुलभ सतरंगी said:  

    वह वक़्त जब आएगा तब स्वागत जरुर करेंगे.
    फिलहाल चिटठा चर्चा के लेखकों को कम से कम पाठको के मामले में दुखी होने की जरुरत नहीं है.

    हाँ इतना जरुर है, बीच बीच में पारिश्रमिक मिलते रहने से लेखकीय ऊर्जा का स्रोत कभी सूखता नहीं है. बस एक यहीं पर अखरता है.

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    बहुत बढिया खबर है. शुभकामनाएं.

    रामराम.

  • अनुनाद सिंह said:  

    यह जानकारी तो बहुत शुभ और उत्साहवर्धक है।

  • गौतम राजरिशी said:  

    ये ग़ज़ब के लिंक दिये हैं रवि जी आपने...

    शुक्रिया मेहरबानी!

  • परमजीत बाली said:  

    बहुत बढ़िया जानकारी व चर्चा।आभार।

  • Mithilesh dubey said:  

    बहुत ही उम्दा जानकारी प्रदान की आपने।

  • Meenu Khare said:  

    बहुत अच्छे लिंक्स के साथ एक जानकारी भरी पोस्ट.

  • अजय कुमार झा said:  

    हमेशा की तरह आपकी वाली विशिष्ट चर्चा ..बहुत सुंदर लगी ॥

  • Ashok Pandey said:  

    ज्ञानवर्धक चर्चा। धन्‍यवाद।

  • डा० अमर कुमार said:  


    ख़बर आप अच्छी लाये हैं, व बहुत अच्छी भी नहीं.. ..
    काश हिन्दी ब्लॉगमँडल से जुड़े वर्तमान लोग भी मुद्दों के लिफ़ाफ़ों का मज़मून भाँप उसकी विवेचना और व्याख़्या से इन मुद्दों की नीयत को बेनकाब करने की इच्छाशक्ति सँजो पाते । हममें से कईयों में यह सामर्थ्य तो है, पर वह टिप्पणियों की अदूरदर्शी टी.आर.पी. पर ही टिक कर रह गयें हैं । वसीतुल्लाह, राजेश कालरा, राजेश कालरा, नमिता जोशी इत्यादि अच्छा तो लिखते हैं, पर इतना भी अच्छा नहीं लिखते कि हिन्दी ब्लॉगमँडल उनके सम्मुख पानी भरने लगे । कॉन्ट्रेक्ट को लेकर आपकी उत्साहवर्धक आशा, समय से पहले ही पल्लवित हो पड़ी है । आज ज़रूरत तो आप जैसे वरिष्ठ चिट्ठाकार और चर्चाकार के ललकार और सँगठित उद्बोधन की है । यह तो निश्चित है कि, हम होंगे कामयाब.... एक दिन !

  • Raviratlami said:  

    "...वसीतुल्लाह, राजेश कालरा, राजेश कालरा, नमिता जोशी इत्यादि अच्छा तो लिखते हैं, पर इतना भी अच्छा नहीं लिखते कि हिन्दी ब्लॉगमँडल उनके सम्मुख पानी भरने लगे । कॉन्ट्रेक्ट को लेकर आपकी उत्साहवर्धक आशा, समय से पहले ही पल्लवित हो पड़ी है । आज ज़रूरत तो आप जैसे वरिष्ठ चिट्ठाकार और चर्चाकार के ललकार और सँगठित उद्बोधन की है । यह तो निश्चित है कि, हम होंगे कामयाब.... एक दिन !..."

    आपने एकदम सही कहा. हिन्दी ब्लॉगों पर बहुत से लोग उम्दा लिख रहे हैं - हर मामले में. और यह तो तय है कि आने वाले समय में यहाँ से ही लोग-बाग उठाए जाएंगे ऑनलाइन कंटेंट रचने के लिए. अपनी बात करूं तो एक बड़े ऑनलाइन समाचार समूह से ख़ाकसार को बहुत पहले निमंत्रण मिल चुका था और एकाध ब्लॉग पोस्ट वहां लिखा (http://hindi.webdunia.com/news/it/news/0801/10/1080110014_1.htm ) भी था. मगर बाद में मामला कॉपीराइट के मसले को लेकर अटक गया.

  • पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said:  

    चर्चा बहुत ही बढिया रही.... खबर भी अच्छी लाए
    धन्यवाद्!!

  • Ratan Singh Shekhawat said:  

    बहुत बढिया खबर है. शुभकामनाएं

  • dhiru singh {धीरू सिंह} said:  

    ब्लॉग के बारे में नाक मुँह सिकोड़ने वाले भी ब्लॉग पॉवर को मानने लगे

  • cmpershad said:  

    जिस प्रकार समाचार पत्र की अपनी जगह है उसी तरह ब्लाग जगत की भी अपनी जगह है। अब साहित्यकार/पत्रकार ब्लाग की दुनिया में आ रहे हैं, उसी प्रकार ब्लाग जगत से साहित्यकार/पत्रकार की दुनिया में जाएगे। जब तक रचनाकार अपने को वाटर-टाइट कम्पार्टमेंट में नहीं बांध रखता उसे दोनों जहान मिल सकते हैं:)

  • काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said:  

    हिन्दी ब्लोगिंन अभी अपने बचपन में है और बच्चों को लोग सिरीयसली नही लेते है...फ़िक्र मत कीजिये बहुत जल्द लेने लगेंगे

  • अर्कजेश said:  

    जानकारी तो थी , पर आपने काफ़ी विस्तार से दी है ।

    यह विभिन्न विधाओं में ब्लॉगिंग के घुसपैठ की शुरुआत है । अच्छी बात इन अर्थों में है कि लोगों को समझ आयेगी कि अच्छे लेखन का अनिवार्य संबंध छापने वाले मंच की प्रसिद्धि से नहीं है ।

    क्योंकि हिन्दी ब्लॉग जगत में बहुत कुछ बेहतर लिखा जा रहा है , कई बार अखबारों में छपने वाले स्तंभों से भी बेहतर ।

  • शरद कोकास said:  

    रवि भाई इस " पारम्परिक चिठ्ठाकार " शब्द का जवाब नहीं । इसे तो पेटेंट करा ही लीजिये वरना और कोई इसे अपना लेगा ।

  • आपकी प्रतिक्रियाये हमारे लिए महत्वपूर्ण है!

    चिट्ठा चर्चा हिन्दी चिट्ठामंडल का अपना मंच है। कृपया अपनी प्रतिक्रिया देते समय इसका मान रखें। असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।