०९-११-२००९

शाम की चर्चा में केवल एक लाईना

१.तांक-झांक, एस एम एस की निराली दुनियां मे!:ताक-झांक करते पकड़े जाने तक निरालेपन की गारंटी

२.प्रभाष जोशी के क्रिकेटिया गल्प: स्वाति के कविता पाठ के संग

३. चंद सौलिड ख्वाहिशों का मरहमी लिक्विडिफिकेशन..: किंग साइज विल्स पेनकिलर के संग

४. काग़ज़ पर स्वीमिंग पूल .......:और कागज फ़ाइल में बंद।

५.वंदेमातरम्‌ की नहीं, रोटी की बात करें :कम से कम विषय में नयापन तो होगा।

६.अवसाद में डूबे आत्मकथ्य - 1: मेरे सामान में शामिल हैं

७.पुरानी डायरी से - 7 : तलाश : की नहीं कि डर गये।

८.मैं तो निकल पड़ा हूँ..... तुम भी निकल चलो।

९.हम क्वालिटी बेचते हैं : लेकिन कोई खरीदार नहीं मिलता।

१०. विश्वास रखो, दोस्तों, भगवान सजा देगा इन पापियों को, धैर्य रखो…. :दारू की खाली बोतलों।

११. रामदेव जी, सारी सृष्टि का जन्म ही "वैसी" जगह से होता है तो? उसमें कोई क्या कर लेगा?

१२. खुल रही हैं यादों की परतें:जख्मों की सीवन उधड़ने लगी है।

१३. हद हो गई बेशर्मी की!पहले गहरी नींद सुलाते हैं और फ़िर चिल्लाते हैं जागो,जागो!:वाह भैया एक तो डबल मेहनत करें और आप कहो बेशर्म है।

१४."पुरानों को नमन और नयों को प्रणाम!!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") :बीच के लोगों का कैसे बनेगा काम?

१५.नवाब साहब, किस और बबलगम...खुशदीप :दोनों को आज स्लॉग ओवर में डाल दिये।

१६. मेरी पसंद:अंगारों पर नंगे पांव

१७. बारिश में दास्तान:धर दबोचा ख्बाब ने रंगे हाथों।

१८. वन्दे मातरम् पर देश द्रोहियों को चेतावनी देती एक माइक्रो पोस्ट ......................... Micro post on Vande Matram:समझ गए तो ठीक वरना . एक पोस्ट और लिख देंगे| "

१९.चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-15 :ब्लागरों की खुल रही है पोल हिसाब से।

२०.डरपोक एक 'लघुकथा' :शुक्र है यह उपन्यास नहीं है।

२१.बाबा रामदेव तुमने ये क्या किया :सियासत के लिए!

२२. क्या आप औरतो कि इज्ज़त कर के उस पर अहसान करते है. :औरतों की इज्जत कहां होने लगी भाई!

२३."भगत सिंह होने का मतलब" :भला कुछ आज के जमाने में?

२४. हर कोई बेईमान दिखता है..:नजर दिखवा लेव

२५.धीरे धीरे चल चाँद गगन में :कहीं मोच न आ जाये

२६. समलैंगिकों और किन्नरों का सरकारी पदों पर आरक्छन -एक व्यंग्य:मजाक-मजाक में इसके लिये कन्वेशिंग तो नहीं कर रहे भाई।

२७. मैं रजनी कान्त:मैंने आज तक ना किसी से झगडा किया है (तो अब कर लो)

२८.जीने का दिल करता नही पर मौत है कि आती नही :कृपया प्रतीक्षा करें आप कतार में हैं।

२९.हम सब कर्ज़दार हैं ....... :अच्छा!!!EMI बताओ।

३०.विधानसभा को बना दिया सब्जी मंडी! :मंड़ी वाले पढ़ेंगे तो दौड़ा लेंगे।

३१.दो पाटों के बीच में ...... :ये कोमल कली पिस गई है !

३२.चुप्पी तोड़ो नहीं तो डूब मरो :अपने रिस्क पर! क्रियाकर्म की कोई गारण्टी नहीं।

३३.संतो के प्रवचनों के बाद :सिद्ध हुआ कि गुड तो खाया परन्तु गुलगुले से परहेज किया!

३४.बहुत आँसू तेरे बह गए.. :वाटर हार्वेस्टिंग की तर्ज पर टीयर हार्वेस्टिंग करते तो कित्ता अच्छा होता।

३५. धूम्रपान से दिल के दौरे का खतरा:सही है-जिसका पैसा फ़ुंकेगा उसका दिल तो बैठेगा ही।

३६. मरीज़ों की प्राइवेसी की परवाह कैसी ? :किसलिये, क्यॊं?

३७. नागरिक समाज के लिए लालगढ़ आंदोलन से जुड़ी एक ज़रुरी बहस :अब आंदोलन के बाद क्या बहस भाई!

३८. निजी जिंदगी की अहम पदोन्नति:बिटिया के बने बाप! स्वीकारो बधाई आप!

३९.सब कुछ लुटाकर रह गए :लूटने वाले मुफ़्त के कुली बनकर रह गये।

४०. अवसर… मौका… जो पहला मिले छोड़ो मत… :दूसरा वाला पहले से तेज भागता है।

४१. कुछ दूर तलक साथ चलो,भूल कर शिकवे-गिले:बाद में फ़िर जी भर कर लड़ेंगे दिलजले।

४२.राजस्थान पत्रिका में 'मेरा बसेरा' :पत्रिका में बस गये पाबलाजी? क्या किराया है?

४३.काश ऐसे में तुम चले आते, आज मौसम बड़ा सुहाना था। :क्या हुआ भैये क्या मौसम को चौपट करवाना था?

४४.स्वाइन फ्लू यानी भय का वायरस : सबसे पहले शोले में गब्बर के आदमियों में पाया गया।

४५. फ़ायदेमंद है चाय:बशर्ते कोई मुफ़्त में पिलाता रहे।

४६.महात्मा गाँधी के नाम एक ख़त ! :कौन डिलीवर करेगा उनको जाकर!कौनौ कोरियर सर्विस चालू है क्या यहां से वहां तक?

४७. हमें तो भूतों से शिकायत है:चुड़ैलों के बारे में हम कुछ न कहेंगे!

४८.चार दोस्तों ने पूरी रात कुत्ते को तापकर गुजार दी... :सबेरे कुत्ता उबासी भरता हुआ भाग खड़ा हुआ!

४९. कपूतों के ये सपूत.....:पान की दुकान पर दिखे।
५०.कि मैं जमीन के रिश्तों से कट गया यारों.. :अच्छा गोंद इस्तेमाल करना था, जुड़े रहते।

५१.घूम रही सड़कों पर गैया..... :नाच रहे सब ता-ता थैया.?
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22 टिप्पणियाँ:

श्यामल सुमन on November 09, 2009 7:33 PM ने कहा…

संकलित एक लाईना चर्चा अच्छी रही।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

संगीता पुरी on November 09, 2009 7:39 PM ने कहा…

बहुत अच्‍छी चर्चा !!

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey on November 09, 2009 7:44 PM ने कहा…

वन्दे मातरम!
हम तो समझ गये। याद भी है!

MANOJ KUMAR on November 09, 2009 9:31 PM ने कहा…

एक लाइन पर चलते हुए भी संतुलन नहीं खोना आपकी विशेशता है।

'अदा' on November 09, 2009 9:54 PM ने कहा…

एक लाइन में पूरे चिट्ठे का निचोड़ बताना आसन नहीं है....बहुत सराहनीय कार्य है....ह्रदय से बधाई....आपको...!!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi on November 09, 2009 10:07 PM ने कहा…

आज तो चर्चा बहुत विस्तृत है। अच्छा लगा।

Suman on November 09, 2009 10:09 PM ने कहा…

nice

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर on November 09, 2009 10:21 PM ने कहा…

सुन्दर चर्चा, इससे बहुत कुछ मिल जाता है. बधाई

शिवम् मिश्रा on November 09, 2009 10:38 PM ने कहा…

बहुत बढ़िया लगी यह चर्चा आभार आपका !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on November 09, 2009 10:46 PM ने कहा…

एक लाइन की चर्चा तो बहुत बढ़िया रही।
ङम बी यह प्रयोग आजमा कर देखेंगे!

अर्कजेश on November 09, 2009 11:13 PM ने कहा…

:) x 51

वन्दना अवस्थी दुबे on November 09, 2009 11:15 PM ने कहा…

बहुत बढिया चर्चा. मेहनत का फल दिखाई दे रहा है.

वन्दना अवस्थी दुबे on November 10, 2009 12:02 AM ने कहा…

याद आया कि ये तो चिट्ठा चर्चा की हज़ारवीं पोस्ट है..सो बधाई देने दोबारा चले आये..बधाई हो.

अनूप शुक्ल on November 10, 2009 12:15 AM ने कहा…

शुक्रिया वन्दनाजी लेकिन ये एक कम हजारवीं पोस्ट है। हजारवीं पोस्ट आज आयेगी शायद!

खुशदीप सहगल on November 10, 2009 1:18 AM ने कहा…

अनूप जी,
हज़ारवीं पोस्ट के लिए अग्रिम बधाई...एक लाइन वाली चर्चा...यानि सौ सुनार की और एक लुहार की...

जय हिंद...

हिमांशु । Himanshu on November 10, 2009 6:16 AM ने कहा…

शुभ इक्यावन की एकलाइना चर्चा बेहतर है । आभार ।

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI on November 10, 2009 7:31 AM ने कहा…

बहुत बहुत बधाई

in








advance!!!

वाणी गीत on November 10, 2009 8:05 AM ने कहा…

एक लायना में इतना कुछ ...आप ही कह सकते हैं ...बधाई ..!!

पी.सी.गोदियाल on November 10, 2009 9:31 AM ने कहा…

बहुत सुन्दर,उम्मीद नहीं थी कि लोग एस एम् एस की ताकझांक को इतना पसंद करेंगे !

गौतम राजरिशी on November 10, 2009 10:36 AM ने कहा…

लेजेंडरी एक-लाइना में शामिल हो पाना हमेशा से मुझे एक अजीब से पुलक देता है...शुक्रिया देव!

डा० अमर कुमार on November 10, 2009 2:03 PM ने कहा…


आज एक लाइन में क्या, हम तो एक्कै शब्द में टिप्पणी देबे :
ग़ज़्ज़ब !

इष्ट देव सांकृत्यायन on November 10, 2009 6:05 PM ने कहा…

ज़ोरदार चर्चा. साधुवाद.

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