tag:blogger.com,1999:blog-16767459.post152221177546997567..comments2007-03-19T08:23:13.971+05:30Comments on चिट्ठा चर्चा: ये भी सच है कि मोहब्बत में नहीं मैं मजबूरआशीष श्रीवास्तवhttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.comBlogger12125tag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-7592541774384129042007-03-19T08:23:00.000+05:302007-03-19T08:23:00.000+05:30मैंने किसी क्षमा की उम्मीद से अपनी बात नहीं लिखी थ...मैंने किसी क्षमा की उम्मीद से अपनी बात नहीं लिखी थी..एक भावावेश था..सबके सामने आ गया..किसी को ठेस पहुँचाने की भी नीयत नहीं थी..आप सब की बातें पढ़ने के बाद मेरे दिल में किसी के लिये कोई कलुष नहीं..आशीष को मेरा शुभाशीष.. और आगामी जीवन के लिये शुभकामनायें..अभय तिवारीhttp://www.blogger.com/profile/05954884020242766837noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-890988514776020152007-03-18T23:07:00.000+05:302007-03-18T23:07:00.000+05:30अभय जी,आपकी आलोचना के लिये धन्यवाद! जब मैने यह चर्...अभय जी,<BR/>आपकी आलोचना के लिये धन्यवाद! जब मैने यह चर्चा की थी, तबसे मुझे आलोचना की पूरी उम्मीद थी।<BR/>आपको मेरी भाषा ठेस से लगी जिसके लिये मुझे खेद है।<BR/>मै गंभीर विषय विशेषतः आत्मा, परमात्मा, धर्म , अध्यातम जैसे विषयो का ज्ञान नही रखता हूं। आज की चर्चा मे ऐसे विषय कुछ ज्यादा आ गये थे।<BR/>रहा सवाल मद्रासी लहजे का, वह मैने हल्के फुल्के अंदाज मे चर्चा के लिये प्रयोग किया था। मेरी हिन्दी इतनी अच्छी तो नही लेकिन बूरी भी नही है। मै चेन्नई मे पिछले पांच साल से हूं और अपने तमील दोस्तो से इसी तरह की हिन्दी मे वार्तालाप करता हूं। मेरे कीसी भी दोस्त ने कभी इसे दिल से नही लिया, उल्टे वे इसका आनंद उठाते है।<BR/><BR/>आपकी भावनाओ को ठेस पहुचाने के लिये क्षमाप्रार्थी हूं।<BR/>आशीषआशीष श्रीवास्तवhttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-85486736549542831052007-03-18T18:49:00.000+05:302007-03-18T18:49:00.000+05:30अभय भाईआपका आभार कि आपने इस ओर हम लोगों का ध्यान आ...अभय भाई<BR/><BR/>आपका आभार कि आपने इस ओर हम लोगों का ध्यान आकर्षित किया. कभी लगता है कि यूँ ही आपा-धापी और भाग-दौड़ भरे जीवन में कुछ हल्का फुल्का हास्य भी मिल जाये तो ठीक. अक्सर देखा गया है कि जहाँ हास्य लेखन (आशीष ने इस भाषा का इस्तेमाल शायद इसीलिये किया है, वरना तो आप उनका चिट्ठा पढ़ें, बहुत अच्छी हिन्दी लिखते हैं) अधिकतर लोगों को उमंगित करता है निश्चित तौर पर किसी को ठेस भी पहुँचाता है मगर शुद्ध हिन्दी में लिखी अव्यवाहरिक बातें तो सभी को ठेस पहुँचाती हैं जो कि आप स्वभाविक भावावेष में लिख गये. मैं कदाचित आपको गलत या आशीष को सही या कम गलत नहीं ठहरा रहा हूँ. मुझे लगता है कि चर्चा को मनोरंजक बनाने के लिये हर चर्चाकार अपने अनुरुप पूर्ण प्रयास करता है अन्यथा तो इतनी सारी पोस्टों पर एक सिरियस मोड में रोज दर रोज बात करना तो लिखने और पढ़ने दोनों वर्गों के लिये उबाऊ सा हो जायेगा. चर्चाकार कभी मुन्ना भाई बन जाता है तो कभी मद्रासी तो कभी कुछ और-ऐसे वक्त भाषा से ज्यादा आवश्यक यह हो जाता है कि उसने जो भी पात्र सोचा है उसे निभा पाया कि नहीं. फिर भी आपका सुझाव अच्छा है. प्रयास किये जायेंगे कि जब हास्य व्यंग्य की बात चले तो या तो गंभीर मुद्दों को न कवर जाये और या तो अलग से लिंक देकर काम चला दिया जाये. रही बात पीठ ठोकने की तो वो तो हम उनकी मेहनत, लगन और कल्पनाशीलता को देखकर और भविष्य में ऐसा ही उत्साह वो दिखाते रहें, इसलिये भी करते हैं, उसका अन्य कोई अर्थ न लें.<BR/><BR/>बाकि तो हमारे वरिष्ठ फुरसतिया जी अपनी बात कह ही चुके हैं. पुनः आपका आभार और आपको पहुँची ठेस के लिये हम क्षमाप्रार्थी हैं.Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-84767911423765858292007-03-18T15:13:00.000+05:302007-03-18T15:13:00.000+05:30इतनी बुरी भी नहीं यह चर्चा कि अभय जी और बेजी जी...इतनी बुरी भी नहीं यह चर्चा कि अभय जी और बेजी जी को पसन्द ना आई खैर यह तो व्यक्तिगत विचार है उनके।<BR/>नये चर्चाकार पहली बार चर्चा करते हैं तब हो सकता है कि कुछ गलतियाँ हो जाये इसके लिये बताना भी चाहिये पर नये चर्चाकार को समय मिलना चाहिये ताकि वह अपनी गलती ना दोहराए। <BR/> और रही बात भाषा की तो आशीष भाई ध्यान रखेंगे कि अगली बार यह भाषा प्रयोग ना करें।<BR/>वैसे मुझे चर्चा पसन्द आईSagar Chand Naharhttp://www.blogger.com/profile/13049124481931256980noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-21643566986300610962007-03-18T15:11:00.000+05:302007-03-18T15:11:00.000+05:30मैं रवि जी से सहमत हूँ, अभय जी कुछ महीनों बाद आप य...मैं रवि जी से सहमत हूँ, अभय जी कुछ महीनों बाद आप ये बात न कह सकेंगे।Shrishhttp://www.blogger.com/profile/15264688244278112743noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-64305277268616279172007-03-18T14:46:00.000+05:302007-03-18T14:46:00.000+05:30ऐसी भाषा में चर्चा पढ़कर दुख हुआ । भाषा तो स्वयं म...ऐसी भाषा में चर्चा पढ़कर दुख हुआ । भाषा तो स्वयं में सक्षम है कि अपने व्याकरण और उच्चारण में रह कर भी हास्यापद हो सकती है । कभी चिट्ठों पर ऐसी भाषा देखने को मिलती है...जो फिर भी स्वीकार्य हो सकती है....क्यूँकि यह व्यक्ति विशेष की अभिव्यक्ति है । पर चर्चा में सही भाषा का उपयोग ही सही है।Bejihttp://www.blogger.com/profile/16964389992273176028noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-78507393740759759312007-03-18T13:27:00.000+05:302007-03-18T13:27:00.000+05:30बोले तो झकास!भाई, हमें तो बहुतेइच मजा आया. अभय जी ...बोले तो झकास!<BR/><BR/>भाई, हमें तो बहुतेइच मजा आया. अभय जी भी मजे लेंगे - चिट्ठाजगत् में साल भर गुजारलेने के बाद!Raviratlamihttp://www.blogger.com/profile/07878583588296216848noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-20168504645477228752007-03-18T12:40:00.000+05:302007-03-18T12:40:00.000+05:30भाई अभय तिवारी, आपका लेख अभी पढ़ा। यह लेख गम्भीर और...भाई अभय तिवारी, आपका लेख अभी पढ़ा। यह लेख गम्भीर और चर्चा हल्की-फुल्की है। इससे आपके बुरा लगा इसका हमें अफसोस है। लेकिन हमको आशीष की हल्का-फुल्का अन्दाज अच्छा लगा इसलिये तारीफ़ की। आपने जैसा समझा वैसा लिख दिया यह अच्छी बात है। हम कोई बहाना नहीं बना रहे कि आप इसे मजाक में लें या आप बुरा न माने। लेकिन आप इस बार पर फिर से विचार करियेगा कि जिस खिचड़ा भाषा के लिये नाराजगी जाहिर की उससे और आगे के शब्द इस्तेमाल किये जो कि गैरजरूरी थे। उनके बिना आपका आक्रोश बेहतर तरीके से जाहिर हो रहा था। बहरहाल, आपको जो कष्ट हुआ इस चर्चा की खिचड़ी भाषा से, जो कि हमें पसंद आई, इसके लिये अफसोस है। यह हमारे लिये उपलब्धि है कि चिट्ठाचर्चा में अब मुंहदेखी तारीफ़ें ही नहीं बल्कि कमियों की तरफ़ भी इशारा होने लगा है भले ही भावुकता में हो और भाषा की शुद्धता की बातें करते-करते भाषा में खिचड़ी भाषा के आगे के, निपटाने वाले शब्द, शामिल हो गये।अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-38970726136849989232007-03-18T09:29:00.000+05:302007-03-18T09:29:00.000+05:30क्यों करते हैं आप लोग इस तरह की चर्चा.. मुझे समझ न...क्यों करते हैं आप लोग इस तरह की चर्चा.. मुझे समझ नहीं आया आज तक.. सामान्य भाषा में की गई चर्चा भी बेमतलब ही लगती थी.. इस फूहड़ मद्रासी में इस का स्तर शक्ति कपूर के हास्य जैसा हो गया है.. आप सब लोग धुरन्धर लोग हैं.. मैं नया हूँ..हो सकता है आपकी परिपाटियों और परम्पराओं से अपरिचित हूँ.. लेकिन जिस तरह से मेरे गम्भीर लेख का भद्दा मजाक यहां बनाया गया वो आप सब को पढ़ने में बड़ा मज़ा आया .. ये जानकर थोड़ी हैरत हुई ..इस बातपर नहीं कि गम्भीर का मज़ाक बनाया गया.. मज़ाक हमेशा गम्भीर का बनता रहा है.. उसमें कोई हैरानी नहीं..मगर जिस मंच से बना.. और पीठ ठोंकने वाले उड़नतश्तरी और अनूप शुक्ला जैसे शालीन छवि के लोग हैं.. ये अच्छा नहीं लगा.. हो सकता है अब कई लोग कहें कि अरे भाई आप तो झुट्ठे बुरा मान गये.. अरे ये तो हलका फुलका मजाक रहा.. आप हमारे लिखे को खिचड़ी कहिये और हम आप के लिखे को गू कहें.. आपने तो खिचड़ी खा के हग दिया.. तो कैसा रहे.. तब अभद्र हो जायेगा.. कौन तय करेगा अभद्रता की सीमायें... हो सकता है मैं जबरिया भावुक हो रहा हूँ अपने लिखे पर..जैसा भी है.. समझे आप लोग.. मुझे जो लगा मैंने लिखा..अभय तिवारीhttp://www.blogger.com/profile/05954884020242766837noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-90649553717233283672007-03-18T08:30:00.000+05:302007-03-18T08:30:00.000+05:30अच्चा लीखा। भौत मजा आया सब कुछ को पढ़कर। ये तो जरूर...अच्चा लीखा। भौत मजा आया सब कुछ को पढ़कर। ये तो जरूरी था कि तुम चर्चा करो। चर्चा नहीं करते तो इधर-उधर फोन करते। होने वाला बीबी को डिस्टर्ब करते। उसका एक्जाम खराब होता। अब हम खुश हैं।अनूप शुक्लाhttp://hindini.com/fursatiyanoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-51430676162465622972007-03-18T08:15:00.000+05:302007-03-18T08:15:00.000+05:30वाकई, आशीष, तुमको पढ़ कर आनन्द आ गया. और रवि रतलामी...वाकई, आशीष, तुमको पढ़ कर आनन्द आ गया. और रवि रतलामी जी को जहाँ भांजी की सगाई के लिये बधाई वहीं तुमको भी थोड़ी बहुत बधाई तो दी ही जा सकती है. बाकि तो कार्ड का इंतजार रहेगा फिर हम डिसाईड करेंगे कि लड़के की तरफ से आये हैं कि लड़की वालों की तरफ से. :)Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-56935241564248701832007-03-18T04:00:00.000+05:302007-03-18T04:00:00.000+05:30खूब, अमको पड़ के बोत मजा आया जे। :)खूब, अमको पड़ के बोत मजा आया जे। :)Amithttp://eye.amitgupta.in/noreply@blogger.com