शुक्रवार, फ़रवरी 02, 2007

शुक्रवारी प्रश्न माला

प्रश्न : विंडोज विस्टा के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर : लगता है आपने आईना नहीं देखा।

प्रश्न : लालूजी आजकल क्या कर रहें है?
उत्तर : लालूजी आजकल मौज-मस्ती के तरिके इजाद कर रहें है। नये साल का जश्न मनाये हुए एक माह बीत चुका है, नये जश्न का बहाना चाहिये तो लालू भक्त बनकर भारतीय रेल में मौज मस्ती करने का सुनहरा अवसर है, इसके पक्ष में मनिषाजी का कहना है -


भारतीय रेल के उपक्रम भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी IRCTC) ने भारत के विभिन्न भागों के पर्यटन स्थलों के लिये पैकेज टूर आयोजित करने की घोषणा की है। इन पैकेजों में भारतीय रेल विभाग यात्रियों के आने-जाने, खाने, रहने और घूमने की व्यवस्था करेगा।

प्रश्न : मौहल्ले में क्या हो रहा है?
उत्तर : प्रमोद सिंह जी लम्बा-चौड़ा भाषण दे रहें है और उमाशंकर सिंह जी अपनी डायरी लेकर आयेंगे इसका अग्रिम प्रचार हो रहा है।

प्रश्न : भारत से अमेरिका पहुँचने में कितना समय लगेगा?
उत्तर : मात्र 45 मिनट

प्रश्न : कहानी बम-विस्फोट के रचियता कौन है?
उत्तर : संजीव पालीवाल।

प्रश्न : वाई-फाई क्या है? विस्तार से समझाओ।
उत्तर : वाई फाई (वायरलेस फिडेलिटि) एक वायरलेस नेटवर्किंग सुविधा है, इसका एक सीमित क्षेत्र होता है जिसमें हम अपना पीसी या लेपटॉप बिना इंटरनेट केबल कनेक्शन के नेट से जोड़ सकते हैं. जैसे एयरपोर्ट पर अपना लेपटॉप ऑन करते है तो नेट से लेपटॉप पीसी अपने आप कनेक्ट हो जाता है इसमें बिना किसी इंटरनेट केबल के आप नेट से कनेक्ट होकर ईमेल, चेटिंग तथा सर्फिंग कर सकते है। विस्तार से जानने के लिए यहाँ चटका लगायें।

प्रश्न : संगीत सुनने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर : एक शाम मेरे नाम

प्रश्न : वेरोनिकाजी ने किसे और क्यों पत्र लिखा?
उत्तर : यह जानकारी “जो कह ना सके” पर दीपकजी दे चुके है, खालीपीली टाईम खोटी मत करो।

प्रश्न : भारत में आन्दोलन के लिए कौन तैयार है?
उत्तर : छात्र

प्रश्न : यादों के दीपक कहाँ जले हैं?
उत्तर : गीतकलश में।

प्रश्न : आदित्य तिवारी किसको देखकर काव्य रच रहें है?
उत्तर : चुलबुली लड़की को।

प्रश्न : सबसे ज्यादा सवाल कौन पुछता है? उनके बारे में संक्षिप्त में बताओ।
उत्तर : लाल पुछक्कड़ चाचा। वो लम्बी छुट्टियाँ बिताने के बाद फिर से हाज़िर हैं। वो निकले थे दुनियाँ की सैर पर. बहुत सारे देश देखे, बहुत सारे लोगों से मिले. अमीरों से मिले, ग़रीबों से मिले, फ़कीरों से मिले, लकीरों के फ़कीरों से मिले. बड़े से बड़े भिखारी देखे, पैसों के पीछे पागल शिकारी देखे, रोटी को तरसते लोग देखे, पंचतारा होटलों के भोग देखे. टॉमी को मखमल के गद्दे में सोते देखा, हरिया को कड़ाके की सर्दी में रोते देखा.... अब उन्होनें और क्या-क्या देखा यहा आप उन्हीं से पुछियेगा, इससे पहले की वो सवाल पुछ बैठे।

प्रश्न : उत्सव मनाना और खोजना, दोनो अलग-अलग प्रक्रिया हैं या सेम?
उत्तर : हमारी तो समझ में नहीं आया। आपकी समझ में आये तो हमें भी बतलायें। पंडितजी मंत्रोचार में व्यस्त हैं, ऑरकुट का जन्मदिन मना रहे हैं और उसमें डूब-डूबकर अपने डूबे हुए मित्रों (लंगौट वाले) को उबारने का प्रयत्न कर रहे हैं, आप खुद देखिये, क्या-क्या नहीं कर रहे है? –

आज ऑरकुट पर गया तो पता चला कि ३० जनवरी को ऑरकुट का तीसरा जन्मदिन था। ऑरकुट भी अधिकतर गूगल सेवाओं की तरह गूगलदेव का दत्तक-पुत्र है। यह काफी पहले की बात है जब ऑरकुट ज्वाइन किया था। सोशल-नेटवर्किंग शब्द अक्सर सुनता तो था पर जानता न था कि क्या बला होती है। उन दिनों ऑरकुट ज्वाइन करने के लिए इन्विटेशन की जरुरत होती थी। तो एक बार एक इंग्लिश ब्लॉग पर Ryan Wagner महोदय हर टिप्पणीकर्ता को इन्विटेशन भेज रहे थे। मैंने भी एक टिप्पणी की और भूल गया। कुछ समय बाद उनकी इन्विटेशन आई तो ज्वाइन कर लिया और उनका धन्यवाद कर दिया, अपने ब्लॉग के About पेज पर उसका बैज लगा दिया। ऑरकुट पर गया तो कुछ खास समझ न आया कि चक्कर क्या है। मुझे लगा ये भी उन बकवास डेटिंग साइटों जैसी ही चीज है। दुबारा उधर कभी गया ही नहीं।
प्रश्न : आज के जुगाड़ क्या है? घुमा-फिरा कर समझाओ।
उत्तर : कभी पिछे के दरवाजे-खिड़कियों में छेद कर भागने की कोशिश में फंस जाने वाले ताऊ श्रीमान जीतु जुगाड़ी आज दो-दो नोटबुक और पसंदीदा फिल्मों को सजाने के लिए अलमारी लेकर आये हैं, पता नहीं अब इस उम्र में का-का पढ़ेगे। भोलारामजी का जैसा नाम है उसके ठीक विपरित काम, ऐसे-ऐसे जुगाड़ लाये जा रहें है कि बस आप देखते जाओ। आपके चिट्ठे पर कौन आया, कौन गया? सबकुछ देखिये, क्लॉज सर्किट कैमरे से। कैसे? यह तो भोलाराम मीणाजी ही बतायेंगे की गुगल का कमाल क्या है?

प्रश्न : एक तारा कितना विशाल हो सकता है ?
उत्तर : खुले तारासमुह पिसमीस २४ मे एक तारे के बारे मे अनुमान है कि वह सूर्य से २०० गुना बडा हो सकता है जो कि एक रिकार्ड है। यह अनुमान उसकी पृथ्वी से दूरी, चमक और मानक सौर माडलो पर आधारीत है। मगर तारा तो इससे भी बड़ा हो सकता है, आप तो सौरमण्डल के बारे में जानकारी लेते रहें अंतरिक्ष से।

प्रश्न : जिहाद क्या है? अरबी शब्द “ जिहाद” का अर्थ क्या है ?
उत्तर : इसका एक उत्तर पिछले सप्ताह मिला जब सद्दाम हुसैन ने अपने इस्लामी नेताओं से कहा कि वे समस्त विश्व के मुसलमानों से अपील करें कि वे “ दुष्ट अमेरिका ” के विरुद्ध जिहाद में भाग लें .बाद में सद्दाम हुसैन ने स्वयं अमेरिका के विरुद्ध जिहाद की धमकी दी .इससे ध्वनित होता है कि जिहाद एक “पवित्र युद्ध ”है . इससे भी अधिक स्पष्ट शब्दों में कहें तो इसका अर्थ गैर – मुसलमानों द्वारा शासित राज्य क्षेत्र की कीमत पर मुसलिम राज्य क्षेत्र का विस्तार करने का कानूनी , अनिवार्य और सांप्रदायिक प्रयास है . दूसरे शब्दों में जिहाद का उद्देश्य आज इस्लामिक आस्था का विस्तार नहीं वरन संप्रभु मुस्लिम सत्ता का विस्तार है (संप्रभुता के विस्तार से आस्था का विस्तार स्वाभाविक रुप से होगा ) इस प्रकार जिहाद नि:संकोच भाव से आक्रामक स्वरुप का है जिसका उद्देश्य संपूर्ण पृथ्वी पर मुस्लिम आधिपत्य की स्थापना है

प्रश्न : MLM क्या है? इसके क्या-क्या फायदे-नुकसान हैं?
उत्तर : जब से हमारे देश की आबादी ज्यादा ही बढ़ी है, तब से पता नही् क्यों विदेशों कि तरह ही हमारे भारत में भी Multi Lavel Marketing कपंनीयों कि बाढ़ सी आ गई है । ये नेटवर्क कंपनीयां मेम्बरशिप व चेन बनाकर व्यवसाय करने के नाम पर अपने उत्पाद काफी आसानी से बेच रही है । क्या होता है कि मान लो किसी व्यक्ती को कुछ सामान की जरुरत नहीं है अब कम्पनी उसको वो सामान कैसे बेचे । तो ये MLM वाले छोटे से छोटे कस्बे व गांव तक भी पहुंच जाते हैं फिर हवाई किले बनाए जाते हैं ईनकि सेमिनारों मे। शहर में तो कई लोग भागते हें, कि कोई मिलने वाला या रिश्तेदार किसी स्कीम में मेम्बर बनाने नहीं आ जाए ।

प्रश्न : भाग्य क्या है? एक उदाहरण देकर समझाओ।
उत्तर : किस्मत को ही भाग्य कहते हैं। यह कभी भी बदल सकता है, उदाहरणार्थ - बुढ़ापे में जहां लोग मोह-माया से दूर भागते हैं, वहीं, रायटर की एक खबर के अनुसार एक 84 वर्षीय अमेरिकी की 25.4 करोड़ डालर(करीबन 11.4 अरब रुपए) की लाटरी लग गई है। ये जैकपाट इस बुजुर्ग के लिए मुश्किल बन गया है, उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल कहां किया जाए। ताउम्र मध्यमवर्गीय जीवन बिताने के कारण शिकागो के मिसौरी निवासी जेम्स विल्सन इतनी अधिक रकम पाकर स्वयं चकित हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के सेनानी रहे विल्सन को गत 24 जनवरी को पावरबाल लाटरी का विजेता घोषित किया गया। विल्सन ने महज पांच डालर में लाटरी का टिकट खरीदा और थोड़ी ही देर में कंप्यूटर के जरिये निकाले गए ड्रा में उनका नंबर लग गया। पत्नी और तीन बेटों के साथ रह रहे विल्सन पिछले कई साल से लाटरी के टिकट नियमित रूप से ले रहे हैं, लेकिन उनकी किस्मत इतनी तेजी से बदलेगी यह उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था। विल्सन को अब वकील की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं।

प्रश्न : “महात्मा गाँधी के सत्याग्रह प्रयोग की शताब्दी के अवसर पर कांग्रेस पार्टी ने एक अन्तर्राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सत्याग्रह की प्रासंगिकता पर चर्चा की” इस पर अपने विचार कम से कम सौ शब्दों में प्रकट कीजिये।
उत्तर : जी इसके लिए आपको लोकमंच पर चढ़कर प्रश्न दूबारा पूछना होगा।

प्रश्न : सचिन पर अंगुली उठाने से पहले क्यों सोचना चाहिए?
उत्तर : ताकि बाद में राजनीति और समसामयिक विषयों के अलावा क्रिकेट पर बेबाक अंदाज़ में लिखने वाले प्रभाष जोशी जी से खरी-खरी ना सुननी पड़े।

प्रश्न : लोकमंच नया क्या कर रहा है?
उत्तर : लोकमंच की ओर से आध्यात्म धारा नामक एक नया स्तम्भ आरम्भ किया जा रहा है। इस स्तम्भ में कुछ गूढ़ आध्यात्मिक प्रश्नों पर दार्शनिकों के विचार प्रस्तुत किये जायेंगे। इस श्रृंखला में सर्वप्रथम स्वामी विवेकानन्द के कुछ प्रमुख विचार प्रस्तुत हुए हैं। वर्तमान श्रृखला में स्वामी जी द्वारा हिन्दू दार्शनिक चिन्तन के सोपानों के क्रमिक विकास का विवरण है। यह विषय अनेक अंकों में पूर्ण होगा।

प्रश्न : बिना पिये भी नशा हो सकता है?
उत्तर : जी हाँ जरूर हो सकता है, तरिका यहाँ बतलाया गया है।

प्रश्न : भारत-यात्रा में आज क्या ख़ास है?
उत्तर : लेंसडौन गढवाल : पौड़ी से ८१ किलोमीटर दूर, अंग्रेजो द्वारा १८८७ में बसाया गया एक छोटा सा पर्वतीय स्थल।

प्रश्न : आज का चित्र कहाँ है?
उत्तर : यहाँ देखे।

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गुरुवार, फ़रवरी 01, 2007

बीच बजरिया लुट गयी गगरिया

पड़ता डाका देख कर, दिया वो बालक रोय
डाकुन की इस चोट से, बाकी बचा न कोय
बाकी बचा न कोय, कुछ तो सच में लुट गये
बच पाये जो चोट से, वो भी भीड़ में जुट गये
कहत समीर कि हमको तो उसने कचरा माना
एक पोस्ट तो ले जाओ, भले न फिर से आना.



बेनजीर भुट्टो

इस मुंडलिया से कवि का दर्द टपका सा पड़ रहा है। कल का दिन 'चोर मचाये शोर' का रहा। अभी भोर कायदे हुई भी न थी कि जीतेन्द्र भड़भड़ाते हल्ला मचाते हुये उदित हुये और बोले-बीच बजरिया लुट गयी गगरिया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है उनके साथ लेकिन लगा कि पहली बार लुटी है। हड़बड़ी में जीतेंद्र भूल गये कि गगरियां लुटती नहीं फोड़ी जाती हैं और वो भी बाजार में नहीं पनघट पर। और ये काम भी अकेले नहीं पैकेज में होता है। जो गगरी फोड़ता है वहीं बहियां भी मरोड़ देता है। शायद जीतेन्द्र का यही दरद् रहा हो कि हाय वो हमें काहे छोड़ गया!क्या हम लुटने लायक भी न रहे:)

इसके बाद पंडित जी चिल्लाये खबरदार, गांव वालों डाकू आ गये।यह खबर बताते हुये वे अपने यार-दोस्तों से बतियाते रहे। इसके बात संजय बेंगाणी बोलेदिन दहाड़े लुटेरों का मजाक। गोया वे कहना चाह रहे हों-ये भी कोई मजाक का समय है। दिन दहाड़े चले आये। रात विरात आते तो आराम से मजाक-वजाक करते तो कुछ होता-सोता। दिन में धन्धे से ही फुरसत नहीं मिलती मजाक कौन करेगा!

और जहां इस तरह का कोई लफड़ा होता है समाजवादी फौरन मेज बिछा के वार्ता करने लगते हैं। अफलातून बतियाने लगे मैथिलीगुप्त से जो कि बैंक से रिटायर होने के बाद हिंदी की साइट चला रहे हैं और ब्लागर की रचनायें पोस्ट करने के पहले अनुमति नहीं ले पाये। ये कैफ़े हिंदी वाले और दूसरी साइट वाले इस मामले में कामयाब रहे कि इसी हल्ले में देबाशीष करमचंद जासूस बना दिया वे और मैथिली जी का नाम, पता खोज लाये और दो-दो टिप्पणी भी कर गये। इसी सिलेसिले में यह भी जानकारे मिली कि अगर ऐसा गजब होता रहा तो चिट्ठाकारों के चिट्ठे वीरान हो जायेंगे।

सबेरे से समीरलाल की तबियत नासाज थी और तमाम चिट्ठे बीमारी और बर्फवारी का बहाना बनाते हुये छोड़ दिये थे। लेकिन जैसे ही इस बवाल की हवा उनके कानों तक पहुंची तो वे भी आ गये पंचायत करने और कांखते हुये से बोले:-
आज फिर वही, हल्ला सुनकर हम भी भागे रिपोर्ट लिखवाने. सिपाही ने बहुत डांटा कि कहाँ हुई डकैती आपके यहाँ? हम तो अपना सा मुँह लिये खडे रह गये. हमने उनसे कहा कि भईया, कहीं अब न डाका पड़ जाये, इसी से पहले ही एतिहातन रिपोर्ट नहीं लिखवा सकते क्या? बहुत समझाया कि भईया, कुछ ले दे कर रिपोर्ट लिख लो वरना बहुत बदनामी हो जायेगी. मगर बड़ा कर्तव्य निष्ट प्राणी था, नहीं माना तो नहिये माना. अब सब बता रहे हैं कि उनके यहाँ चोरी हुई और हम मुँह छुपाये घूम रहे हैं. अब क्या करें वो द्स्युराज की लूट टीम में एक भी ऐसा पारखी नहीं जो हीरे की परख कर सके तो हम क्या करें. अब हम जीतु तो हो नहीं जायेंगे कि डाका भी नही पड़ा और सबसे जोर नाचे:

हाय! हाय! जे कैसा कलजुग! भरी दोपहरिया, बीच बजरिया, लुट गयी गगरिया। दिन दहाड़े डकैती।
हमसे हालांकि किसी ने पूछा नहीं और पूछता कौन सब अपने दुख में दुखी थे। जो लुटे वे लुटने के दुख में और जो बच गये वे इस दुख में कि हाय, हम क्यों न लुटे! लेकिन हम अपनी तरफ़ से बता दें कि हम तो भैया उन्मुक्तजी और सुनील दीपक के घराने के चिट्ठाकार हैं। हमारा तो जो कुछ् है सब जनता का है। ले जाऒ, छापो और दुनिया भर को पढ़ाऒ। आभार-साभार भी टाइप करने में टाइम मत बरबाद करो। लेकिन हो सके तो लिंक दे दो काहे से जिस दिन किसी कारणवश चोरी न कर पाये उस दिन चोरी का माल पढ़ने वाले हमारे यहां आकर ही कुछ पढ़ लेंगे।

इतना चोरी-चर्चा करने के बाद आपको एक फोटो दिखाते हैं। ये फोटो है बेनजीर भुट्टो की और् इसी पता नहीं कहां से खींच के लाये हैं आगरा के प्रतीक पाण्डेय। बचुआ के इम्तहान अभी ताजे-ताजे खतम हुये हैं न इसीलिये कुछ मस्तियाये हैं। इसके बाद वो ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन को भी देखने का तरीका बता रहे हैं।

पता है आपको पिछली बार जब हमारा नम्बर था चर्चा करने का तो हम एकदम तैयारी कर लिये थे। सारे पोस्ट पढ़ चुके थे और सजा लिये थे ताना-बाना। लेकिन जैसे ही समीरलालजी दिखे नेट पर हम अपना काम भाईजी को टिका दिये। ये आदत हम जीतेंद्र से सीखे हैं। अपना काम दूसरे को थमा दो फिर दुनिया जहान में डांय-डांय घूमो किसी से गगरी लुटवाऒ ,किसी से वाह-वाही करवाऒ। भगवान खुराफ़ात की सजा भी देता है जिसे ज्ञानी लोग 'पोयटिक जस्टिस' कहते हैं। तो भैया हमको भी मिला काव्यात्मक न्याय। कल हम रात सब लिख लिये था चर्चा लेकिन जैसे ही पोस्ट करने वाले थे कि सारी चर्चा उड़ गयी। ये होता है काव्यात्मक न्याय।

बहरहाल पुराने मसाले से एक कविता सुन लीजिये न! ये है हमारे मन की बात:-
गगन में बादल घिरे,
पवन सौरभ भरे,
धरती पर हरियाली फबे,
चलो जय-गान करें
जन्मभूमि के भाव भरें।


वहीं मनीष भैया का दर्द था :-
मैं तुमसे प्यार करता हूँ,
हाँ, बहुत प्यार करता हूँ।
ये बात अलग है कि कह नहीं पाता हूँ।

ये भाई जीतू तनिक बताया जाये कि है कौनो जुगाड़ी लिंक या खाना-खजाना जो इनके प्यार को सही जगह कह सके।

लेकिन भाई मसिजीवी इस सब चक्कर में नहीं पड़ते। जहां इनको मौका मिला ये निकल लिये चकराता। और ये बोले, खैर बोरिया बिस्‍तर बॉंधा, बाल गोपाल समेटे और हो लिए रवाना। और यहॉं हुई गलतियॉं दर गलतियॉं- चलो सूची बनाऍ
लेकिन आप सूची के चक्कर में न पड़ें और देखें कि रंजूजी के यहां पहली मुलाकात में क्या होता है:-
याद रहेगा मुझे ज़िंदगी भर......
वो पहली मुलाक़ात का मंज़र सुहाना....
वो दुनिया से छिप के मिलना मिलाना.......
एक दूसरे को देखते ही अचानक
वो आँखो में चमक का भर जाना
वो पहली बार हाथो का छूना.....
वो तुम्हारा शरारती आँखो से मुस्कराना....


जहां पहली मुलाकात की बात हुयी वहीं महाभारत में विराट नगर में आक्रमण हो गया। ये मुझे ऐसा ही लगा जैसे कल ही फिर एक बार जाट इलाके में प्रेम करने पर प्रेमी युगल को पंचायत ने सरे आम टुकड़े-टुकड़े कर दिया।

अनुराग मिश्र ने अभी पिछले हफ्ते ही वर्जीनिया रेडियो से हिंदी ब्लागर्स की वार्ता प्रसारित की।उससे जुड़े अपने अनुभव बताते हुये उन्होंने आगे की आवश्यकतायें रेखांकित कीं:-
१. वाणिज्य- अभी इस पर बहुत ही कम चिट्ठे हैं। इस विषय में अपार संभावनाएँ और लोगों की रुचि भी है (पैसा किसे नहीं प्यारा होता)
२. कम्प्यूटर - इस पर चिट्ठे तो हैं लेकिन इसकी सामग्री अभी बरसों पीछे है।
३. तनाव - तनाव से निटने के बारे में हिन्दी में कोई सामग्री नहीं है।
४. विवाह - वैवाहिक जीवन की समस्याओं से निपटने के लिए भी कम सामग्री है। विवाह से पहले अपनाए जा सकने वाले सुझावों की भी ज़रुरत है।
५. शारीरिक विज्ञान - शारीरिक समस्याओं के बारे में भी कम जानकारी है।
६. सेक्स - रोज़मर्रा की भाषा में सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं है।
७. किशोर - किशोरों के लिए कोई आकर्षण नहीं है।
८. पाक विधियाँ - पाक विधियाँ बहुत कम हैं।
९. राजनीती - राजनैतिक विश्लेषण मात्र कुछ ही विषयों पर हैं।
१०. तकनीकी विषय - तकनीकी विषयों के बारे में कम जानकारी है। जैसे, भूगोल, भौतिक शास्त्र, रसायन विज्ञान, आदि। मसलन पंखा कैसे चलता है? रिमोट कैसे काम करता है।
११. धार्मिक विषयों मे अधिकतर सामग्री अंग्रेजी में है, जो हिन्दी में है वह रोज़मर्रा की भाषा में कम है।
१२. सकारात्मक विषय नदारद हैं, मसलन मैं यहाँ एक संस्था AID "Association for India's Development" में कभी कभी सहयोग करता हूँ, लेकिन कभी लिखा नहीं। एसे लेख पाठकों का बहुत उत्साह वर्धन करतें हैं। हर कोई कभी ना कभी किसी की मदद ज़रूर करता है, इस बारे में लिखें।

अनुराग भाई इस सब पर कुछ न कुछ शुरुआत हुई है लेकिन आगे और होना है। रही तनाव की बात तो हमारे चिट्ठे पढ़िये न। अगर फिर भी तनाव दूर न हो उसे टिप्पणी में पैक करके छोड़ जाइये, मस्त रहिये।

और अब बारी है वाह-वाह,क्या खूब है कहने की। कल गिरिराज जोशी ने पांच हायकू पेश किये। पांचो हायकू एकदम पांच पांडवों की तरह शानदार। अब द्रौपदी के बारे में हम न बतायेंगे। इन हायकूऒं में से दो आप देखिये और गिरिराज की तारीफ़ कीजिये कोई पैसा नहीं लगता तारीफ़ करने में:-
भंवरा उदास
कहाँ गई बगिया
मॉल खड़ा है

सजा सिन्दूर
बन रही दुल्हन
ओस की बूँद

लोकमंच से आप आज की राजनीति के हाल जान लीजिये:-
दरअसल, राजनीति में अपराधीकरण का यह रोग पुराना है। उत्तर भारत के राज्यों में जातिवाद और क्षेत्रवाद को अपना हथियार बनाकर जब कुछ महत्वाकांक्षी लोग राजनीतिक ताकत बनने की कोशिश करने लगे तभी से यह समस्या लगातार बढ़ रही है। जैसे-जैसे इन क्षेत्रीय ताकतों का दायरा बढ़ता गया, वैसे-वैसे राष्ट्रीय राजनीति में भी यह रोग फैल गया। दबाव से संचालित मीडिया जब भी राजनीति में अपराधीकरण की चर्चा करता है तब यहां बड़ी चतुराई से आंदोलनकारियों को हत्यारों, अपहरणकर्त्ताओं और माफियाओं के साथ तौल दिया जाता है। फिलहाल तो संसद के आंकड़े बताते हैं कि कोई भी राजनैतिक दल इससे अछूता नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक हर चौथा सांसद किसी न किसी मामले में फंसा है। इसमें हर छोटी-बड़ी पार्टी का हिस्सा है।


हम कुछ और लिखें तब तक आप देख लीजियेरोबोटिक पार्क, ई-पंडित का ब्लागिंग का जुगाड़ जिसे संजय कह रहे हैं ये तो पुराना लफड़ा है और रवि रतलामी के साथ कर लीजियेचाय-पानी और फिर आराम से देखिये देखिये आशीष के यहां शनि वलय और जानिये उसकी सुन्दरता का राज । डिवाइन इंडिया पर विसंगतियों के चित्र देखना मत भूलिये और अगर इस सबके बाद आपको थकान लगे तो आपकी बात कहने के लिये आदित्य तिवारी हैं न!:-
आज मुझे सो लेने दो,
दिन भर का थका हुआ हूँ;
नींद में ही सही रो लेने दो।।


भाई आदित्य हालांकि ये आपका निजी मामला है लेकिन हम पाठक की हैसियत से यही कहना चाहते हैं कि पहले आप तय कर लो सोना है कि रोना है। कोई एक चीज करो एक बार में। सो लो या रो लो।

अब देखिये एक और मजाक। कहां लोग टिप्पणी पाने के लिये परेशान रहते हैं और कहां हमारे संजय टिप्पणी करने के लिये हलकान हैं। देश के नेताऒं की तरह ये सेवा का मौका चाहते हैं लेकिन कुछ लोग इनको देखकर शटर गिरा लेते हैं:-


मगर टिप्पणीकार के अपने दुःख भी है. जो बन्धू टिप्पणी पाना चाहते है, मेरे दुःखो का निवारण करे. वरना टिप्पणी न पाने के जिम्मेदार वे स्वयं होंगे. फिर न कहना टिप्पणी क्यों नहीं देते?

वे बन्धू जो ब्लोगर पर अपना डेरा डाले है, टिप्पणी पर से कई प्रकार के अंकुश लगा रखे है, कृपया उन्हे हटा ले. जैसे छवि में देख कर ए.बी.सी.डी. भरो फिर टिप्पणी दो. काहे इतनी कसरत करे? फिर कभी-कभी इसे दो-दो, तीन-तीन बार भी भरना पड़ता है. क्या टिप्पणी करने वाले के पास खाली समय बहुत है? कई बार तो ईमेज दिखती ही नहीं. फिर?

अब दुसरा अंकुश लगा रखा है की पहले ब्लोगर में खाता खोलो फिर ही टिप्पणी करने देंगे. यह जहमत कोई क्यों उठाएगा?

और चलते-चलते अब एक काम की बात। आज अभिव्यक्ति का नया अंक निकला है। यह अंक स्व. कमलेश्वर पर केंद्रित है। जिन साथियों ने मुझसे कमलेश्वर पर लेख लिखने का आग्रह किया था उनसे गुजारिश है कि अभिव्यक्ति का यह अंक देखें और कुछ अच्छा लगा हो तो अभिव्यक्ति की टीम की तारीफ़ करें। अरे भाई इहां नहीं उहां।

अब हमारा दुकाना समेटने का समय आ गया। हमने रात १०३० बजे तक के चिट्ठे यहां चर्चा में शामिल किये। इसके बाद के चिट्ठों पर नजरें इनायत करेंगे हमारे कविराज गिरिराज जोशी जो पिछले हफ़ते तबितत नासाज होने के कारण अपने माउस का जौहर न दिखा पाये। साथ ही देबाशीष से अनुरोध है कि चर्चाकारों में से पंकज बेंगाणी का नाम नदारद है उनको फिर से बुलौवा बोले तो निमंत्रण भेज दें।अगर किसी को हमारी चर्चा के बारे में कुछ कहना हो,कोई तकलीफ़ हो तो यहां टिपिया दे या फिर हमें मेलिया दे। हमारा पता है anupkidak@gmail.com आपने हमें इतने प्रेम से या मजबूरी में पढ़ा इसका आभार!

फाइनली चलते-चलते एक मुंडलिया समीरलालजी के सौजन्य से जिसे उन्होंने कल की कमी पूरे करने के लिये लिखा है:-
दस्युराज के नाम पर, नत मस्तक हो जायें,
हमको भी तो लूटिये, यूँ न बदनाम करायें.
यूँ न बदनाम करायें कि हम भी लिखते हैं,
गीत, कविता, व्यंग्य, सबही पर मिलते हैं
कहे समीर कविराय कि इनको याद कराओ,
दस्यु का ही काम करो, संपादक न हो जाओ.


आज की टिप्पणी


१.सर्वप्रथम पुर्वानुमति के आपका लेख पोस्ट (चोरी) किया, इसके लिये माफ़ी मांगता हूं. यह प्रायोगिक स्वरूप था पूरी साईट तो मैं मार्च के दूसरे सप्ताह तक पूरा करने वाला था.
सृजन शिल्पी जी, क्या आपके लेख केवल समानधर्मा साथियों के लिये हैं, हम जैसे आम आदमियों के लिये नहीं? कैफ़ेहिन्दी लेखकों के लिये न होकर मेरे जैसे आम आदमियों के लिये है.
अरे बाप रे, इतना बडा आंक लिया मुझे कि चिट्ठाकारों के चिट्ठे वीरान हो जाएंगे ?

हम कहां के दाना थे, किस हुनर मैं यकता थे
बेसबब हुआ गालिब, दुश्मन आसमां अपना.

मेरा कसूर यही है कि इस 26 जनवरी को घर में कैद रहने के कारण पिछले दो वर्षों की आंच कैफ़ेहिन्दी का स्वरूप तय करने की कोशिश की.

मुझे जो भी भाई अनुमति देगें सिर्फ़ उन्ही की रचना साभार सहित लिंक सहित उप्योग में ली जायेगी.

पुन: माफ़ी चाहता हूं

मैथिली
मैथिली गुप्त अपना पक्ष रखते हुये


२.मैथिली जी,
हो सकता है आपके विचार अव्यवसायिक हो, लेकिन आपको इस बात को तो मानना ही पड़ेगा, कि आपके किए गए कार्य को गलत ही मानना जाएगा। आप उम्र मे हमसे बड़े है, हमसे ज्यादा दुनिया देखी होगी आपने, इसलिए आपको कुछ भी समझाना, मेरे विचार से गलत होगा। मेरी कुछ प्वाइन्ट है, आप इस बारे मे सिलसिलेवार जवाब देंगे तो मुझे खुशी होगी।

१) क्या आप हमे इस बात की गारंटी दे सकते है कि भविष्य मे भी आपकी इस साइट की गतिविधिया अव्यवसायिक ही रहेंगी।
२) आप अपनी साइट पर एक सूचना चस्पा करेंगे कि, ये सभी चिट्ठाकारों के स्थलों से लिया गया है।
३) प्रत्येक लेख के लिए, हर चिट्ठाकार से अलग से अनुमति ली जाएगी।
४) लेख के मूल स्वरुप से कोई छेड़छाड़ नही की जाएगी, ना कन्टेन्ट मे और ना ही किसी लिंक में।
५) लेख के शुरु और अन्त मे लेखक के ब्लॉग का लिंक दिया जाएगा।
६) आप ब्लॉग लेखकों के ही कन्टेन्ट काहे लेना चाहते है?
७) यदि आपके उद्देश्य व्यवसायिक है तो अभी स्पष्ट करिए, मै व्यवसायिक उद्देश्य को भी गलत नही मानता बशर्ते मुझे पता हो कि आपकी मंजिल क्या है। यदि व्यवसायिक उद्देश्य है तो आप अपना व्यवसायिक योजना सभी चिट्ठाकारों अथवा उनके प्रतिनिधियों से डिसकस करना चाहेंगे?

बाकी यदि किसी और साथी को कोई आपत्ति हो तो बेहतर होगा, आमने सामने बात कर ली जाए।

नोट: इन सवालों के उत्तर पाने के बावजूद भी यह चिट्ठाकार की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वह आपको प्रकाशन की अनुमति देता है अथवा नही।
जीतेन्द्र अक्षरग्राम पर (चोरी की) आचार संहिता बताते हुये

आज की फोटो



आज की पहली फोटो डिवाइन इंडिया से


विसंगतियां


आज की दूसरी फोटो सुनील दीपक के फोटो ब्लाग से


प्राणायाम

आज की तीसरी फोटो आशीष के ब्लाग अंतरिक्ष से

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