सोमवार, जनवरी 26, 2009

आज तो दनादन बधाइयों का दिन है जी

राष्ट्रीय ध्वज
आज तो दनादन बधाइयों का दिन है जी।

सबसे पहले तो देखिये कि सबसे पहले तो पता चला , अरे पता क्या चला सारे देश को उनसठ साल पहले से पता है कि हमारे देश का संविधान आजै के लिये लागू हुआ। सो सबको गणतंत्र दिवस की बधाई। देश भर में झण्डा फ़हराया गया। अच्छा आपको तो पता ही होगा कि देश में पिछले दिनों तमाम लोगों की खिंचाई हुई राष्ट्रध्वज को लेकर। किसी ने इसे गलत फ़हरा दिया किसी ने गलत तरीके से लपेट लिया।

आपको बताते चलें कि राष्ट्रीय ध्वज आई.एस. स्पेशीफ़िकेशन के अनुसार बनाया जाता है। ब्यूरो आफ़ इंडियन स्टैन्डर्ड का सबसे सबसे पहला आई.एस.स्पेशीफ़िकेशन जो बना था वह राष्ट्रीय ध्वज का ही था।
सनत

दूसरे हमारे चर्चाकार आज के ही दिन अपनी खुशियों का इंतजाम किये। विवेक के यहां सनत का जन्मदिन है। अब एक सनत जयसूर्या के बारे में आप जानते ही हैं। भाईसाहब ऐसन धुंआधार खेलते हैं कि अच्छे-अच्छन का धुंआ निकल जाता है। वैसाइच पराक्रम सनत बबुआ अपने जीवन में दिखायेंगे ऐसा विश्वास है। बालक को आशीर्वाद। आशा है बालक लिखा-पढ़ी में भी अपने पिता के कान काटता हुआ उनकी नाक ऊंची करे।

अब बधाई जुगल-जोड़ी शिवकुमार मिश्र और पामेला मिश्र को। आज के ही दिन उनकी शादी का सालगिर गया था सो आज के ही दिन सालगिरह मनाते हैं। कोई कह सकता है दोनों की साजिश रही होगी ताकि हर्र लगे न फ़िटकरी वाले अंदाज में पूरे देश के अपनी शादी की वर्षगांठ मना सकें। उनकी शादी के चौदह साल पूरे हो गये और आज तक तस्वीरों में अलग-अलग हैं। वैसे इस बारे में ज्ञानजी ने जो पोस्ट करी ,फ़ोटॊ सटाई उसके लिये तो वे बधाई के पात्र हैं लेकिन वे एक और बात के लिये बधाई के पात्र हैं। उनकी इस पोस्ट से पर उपदेश कुशल बहुतेरे वाला मुहावरा एक बार फ़िर अपना जलवा दिखा गया।

पामेला मिश्रा
शिवकुमार मिश्र

अब आप पूछेंगे कि वो कैसे ? तो हम कहेंगे कि वो ऐसे कि आज ही सुबह ज्ञानजी ने लेख पोस्ट किया-अपनी तीव्र भावनायें कैसे व्यक्त करें? में ज्ञानजी कहते भये:
तीव्र भावनायें व्यक्त करने में आनन-फानन में पोस्ट लिखना, उसे एडिट न करना और पब्लिश बटन दबाने की जल्दी दिखाना – यह निहित होता है।


इसी पोस्ट में उपदेशामृत का पान कराते हुये उन्होंने लिक्खा:
अपनी तीव्र भावनायें व्यक्त करने के लिये लिखी पोस्टों पर पब्लिश बटन दबाने के पहले पर्याप्त पुनर्विचार जरूरी है। कई बार ऐसा होगा कि आप पोस्ट डिलीट कर देंगे। कई बार उसका ऐसा रूपान्तरण होगा कि वह मूल ड्राफ्ट से कहीं अलग होगी। पर इससे सम्प्रेषण का आपका मूल अधिकार हनन नहीं होगा। अन्तर बस यही होगा कि आप और जिम्मेदार ब्लॉगर बन कर उभरेंगे।


लेकिन ज्ञानजी ने मिसिर दम्पति को अलग-अलग फोटो में सटा के पब्लिश का बटन दिया। किता तो अच्छा होता कि ज्ञानजी मिसिर युगल की हम बने तुम बने एक-दूजे के लिये टाइप फोटॊ लेकर सटाते तो कित्ता तो क्यूट लगते दोनों। अभी आप देखिये कि शिवबाबू कैसे तो सहमें से दूर खड़े दिख रहे हैं। ध्यान से देखिये तो ऐसा भी लगता है जैसे शिवकुमार मिश्र अपने फ़ोटॊ फ़्रेम से निकलकर अपने परिचय के नीचे सीना फ़ुलाकर खड़े हो गये हैं। एक सहमा-सहमा सा पति एक बहादुर ब्लागर होता है का मुजाहिरा टाइप करते हुये। भाई हमें तो पसंद न आयी ज्ञानजी के अदा। चौदह साल के शादी शुदा दम्पति के फ़ोटॊ शादी के दिन अलग-अलग दिखाना अच्छी बात नहीं है।


तीसरी बधाई कविताजी को। कल उनकी पुस्तक समाज-भाषाविज्ञान रंग-शब्दावली : निराला-काव्य का लोकार्पण होगा। हिंदी शोध में अपनी तरह का यह अनूठा काम है। इस अध्ययन पर कविताजी को स्वर्णपदक मिला था। यह पुस्तक हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद द्वारा प्रकाशित की जा रही है। लोकार्पण कार्यक्रम हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद सभागार में दिनांक २७.०१.२००९ दिन मंगलवार को अपराह्न ४:०० बजे होगा।

सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि माननीय मंत्री उच्च शिक्षा डा० राकेश धर त्रिपाठी जी होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति श्री प्रेमशंकर गुप्त जी करेंगे।

इलाहाबाद के समस्त ब्लागर बंधुओं से गुजारिश है कि वे अधिक से अधिक संख्या में लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचकर कार्यक्रम का आंखों देखा हाल बयान करें।

इसके अलावा आज इमरोज का भी जन्मदिन हैं। आप मनविन्दर जी की पोस्ट पर उनके जन्मदिन की बधाईयां दे सकते हैं।

रणथम्भोर का किला


अब इत्ती सारी बधाईयां देने के बाद ताऊ को बधाई न दें तो अच्छा नहीं लगता। है न! ताऊ इसलिये काबिले तारीफ़ हैं कि आज उन्होंने अपनी पत्रिका का साप्ताहिक अंक निकाला। इस छ्ठवें अंक में ताऊ ने पिछली सभी टिप्पणियों को भी दिखाया है। एकदम राजाबेटा ब्लागर की तरह नियमित लेखन करके ताऊ लोगों के पसंदीदा ब्लागर बन गये हैं। लोग उनके खूंटे पर आते हैं, मजा पाते हैं फ़िर आते हैं। उनकी पहेलियां लोगों का ज्ञानवर्धन करने का प्रयास करती हैं और उनको पेश करने का अंदाज ताऊ का ऐसा है कि लोग बार-बार आते हैं उनके ब्लाग पर।

आज ताऊ ने ब्लाग पर टिप्पणियां तिरंगे रंग में रंगी हैं। उनका ब्लाग घणा खूबसूरत लग रहा है। उनके बारे में समीरलाल ने हमारा कमेंट चुरा के लिख मारा है।

ताऊ

ये जो कार्य आप कर रहे हैं और जिस तरह का समर्थन इस कार्य का बढ़ता जा रहा है, यह चिट्ठाकारी के इतिहास का एक स्वर्णिम पहल के रुप में हमेशा दर्ज रहेगा.

ऐतिहासिक धरोहरों से अन्तरजाल के माध्यम से खेल खेल में रुबरु कराने, उनके विषय में उम्दा जानकारी उपलब्ध कराने का इस बेहतर शायद ही कोई तरीका हो.

आप साधुवाद के पात्र हैं और मेरी बधाई एवं शुभकामनायें सदैव आपके साथ है.

आपसे बातचीत होना और आपके मन में अपने प्रति स्नेह देखना, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है. बनाए रखिये.

अब आपको, ताई को और सैम एवं बीनू फिरंगी को गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं.



और अंत में

आज सुबह गणतंत्र दिवस मनाने निकले तो ऐसा निकले कि अभी तक मनाते ही रहे। अब लौटे तो देखा कि इत्ती मंगलघटनायें हो गयीं।

अब इत्ती देर हो गयी और बात क्या बढायें। आप भी आराम करो। हमें भी सब जगह बधाई देनी है जी। ब्लागर व्यवहार निभाना है। :)

पुनश्च: जब पोस्ट कर चुके तो पता चला कि २६ जनवरी के ही दिन ताऊ के बच्चे का भी जन्मदिन पड़ता है। सो ताऊ को भी बधाई उसके बच्चे को आशीर्वाद। ताऊ के लिये जुर्माना ब्लागर पब्लिक तय करे कि वे यहां आये और फ़िर भी बताया नहीं। वो तो कहो कि हम दुबारा ताऊ के ब्लाग पर गये वहां अल्पना वर्माजी के कमेंट से पता कि ताऊ ने विवेक के ब्लाग पर कमेंट करके बताया है कि उनके बच्चे का जनमदिन है। बहरहाल अब फ़िर से बधाई!

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रविवार, जनवरी 25, 2009

२६ जनवरी के पहले एक दूरदर्शन समाचारीय चर्चा

ठहरो यार अभी तक कुछ दिलचस्प मिला नहीं है। क्या है न कि लोग गणतन्त्र दिवस की छुट्टी मना रहे हैं तो लिखने वाले कम हैं।
इसलिए शुरू करते हैं दूरदर्शन।

अचरज की बात है न कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया आने से कोई फ़र्क नहीं पड़ा, अनशन अब भी वैसे ही होते हैं जैसे लाट साहब के ज़माने में होते थे? पर पढ़े अनपढ़े सभी को वोट देने दोगे तो यही होगा न।

अक्षत विचार वाले गूढ़ चिंतन कर रहे हैं अपने संविधान पर, यानि की हारा या जीता?

उसी लय में पासपोर्ट का फ़ार्म ऑन्लाइन होने की सूचना भी दी जा रही है।

और राजसमंद में सार्वजनिक पुस्तकालय का शिलान्यास हो गया।

जनसत्ता अखबार की भाषा के बारे में रोचक लेख छापा कारवाँ वालों ने

जयपुर में साहित्य सम्मेलन हुआ। पैमाना पैमाना।

लेकिन लल्ला लल्ली चले गए अमेरिका बसने। जवाहरलाल नेहरू के शरीर पर सिफ़्लिस के चकत्ते पाए गए।

चीनी के भाव कम होने की आशंका है। लेकिन स्थिति गंभीर किंतु नियंत्रण में है।

मुसाफ़िर जी बता रहे हैं कि वे २६ जनवरी कैसे मनाते थे। लेकिन सपने पर हँसे तो खैर नहीं। हाँ सपने में हँस सकते हैं। क्या इतवार के अलावा दारू नहीं पी जा सकती? कंचन पंत जी आपकी बात दिल को छू गई

माउथ ऑर्गन तो अच्छा बज रहा था, अच्छा प्रयासचाँदनी चौक टु चाइना तो पिटी हुई फ़िल्म है, ज़रा राज़ द्वितीय की समीक्षा भी पढ़ लें।

हापुड़ के पास है चीलों का गाँव। पंचायती राज है क्या वहाँ?

सोनीपत के कलट्टर बरी हो गए हैं।

कुछ व्यापार समाचार - बाप सत्यम् तो बेटा मेटास। दुर्योधन और धृतराष्ट्र की याद दिला दी।

अंत में खेल समाचार। हॉकी में भारत आर्जेंटीना से २-० से हार गया।

समाचार समाप्त हुए।
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जय हिंद!

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