सोमवार, अगस्त 02, 2010

सोमवार ०२.०८.२०१० की चर्चा

नमस्कार मित्रों!

आज यानी एक अगस्त को “हैप्पी फ़्रेंड्शिप डे!” कहने का दिन है। दोस्तों का दिन! दोस्ती जताने का दिन।

एक तो जीवन में सच्चा दोस्त मिलता नहीं, और अगर मिल भी जाए तो उसको “हप्पी” कहने के लिए साल में एक दिन?

कुछ इसी तरह के ज़ज़्बात लिए संगीता स्वरूप जी का पोस्ट दोस्ती का एक दिन मुझे आकर्षित करता है। कहती हैं

साल भर में एक दिन

दोस्ती का भी होता है

शायद बाकी दिन

लोग दुश्मनी निबाहते हैं ।

उनकी यह बात मुझे सोचने को विवश करती है कि हमारे अहम रिश्तों के लिए दिवस क्यों? मदर्स डे, फादर्स डे, … आदि-आदि। लगता है ये सब पच्छिम वालों के चोंचले हैं। संगीता जी के ही शब्दों में कहें तो

क्या कोई पश्चिमी देश

ऐसी दोस्ती निभा पायेगा ?

जो भारतीयों ने निबाही है

दोस्ती की खातिर

अपनी जान तक गँवाई है ।

सच है,  इन रिश्तों के लिए कोई एक दिन मुकर्रर करके हम क्या सबित करना चाहते हैं! संगीता जी की मानें तो …

फ्रेंडशिप डे और वीक में

दोस्ती को मत बांधो

दोस्ती को दोस्ती रहने दो

इन चीज़ों में मत आंको ...

इस प्रस्तुति पर एक टिप्पणी आई है,

“जो बातें चिरंतन हैं, जैसे माता, पिता, भाई , बहन , मित्र आदि के प्रति हमारे प्यार की भावना और समर्पण, उन्हें साल में किसी दिवस विशेष के लिये प्रदर्शित करने की चेष्टा उन बाकी ३६४ दिनों की भावनाओं को झुठला कर बौना कर देती है जब हम उनके प्रति प्यार के जज्बे से लबरेज रहते हैं !”

“हैप्पी फ़्रेंडशिप डे।”

 

बात मैं दोस्त, दोस्ती और दोस्तों के लिए एक दिन की कर रहा था। यह सच है कि आज के दौर में सच्चा दोस्त मिल पाना आसान नहीं। सच्चे दोस्त के जीवन में महत्व को ध्यान में रखते हुए ही 1935 में यूएस में अगस्त माह के पहले रविवार को फ़्रेंडशिप डे के रूप मनाने की घोषणा की गई।

 

इस दिवस को समर्पित कुछेक पोस्ट मिले। तो चलिए आज की चर्चा उन्हीं पोस्टों से शुरु करते हैं। ,,,

 

** उत्सव के रंग **इस दोस्ती दिवस पर उत्सव के रंग बिखेरते हुए आकांक्षा जी कहती हैं “मित्रता किसे नहीं भाती। यह अनोखा रिश्ता ही ऐसा है जो जाति, धर्म, लिंग, हैसियत कुछ नहीं देखता, बस देखता है तो आपसी समझदारी और भावों का अटूट बन्धन। कृष्ण-सुदामा की मित्रता को कौन नहीं जानता।” … और प्रण लेते हुए अंदाज़ में कहती हैं, फ्रेण्डशिप-डे: ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे!

आकांक्षा जी की एक बात मुझे बहुत भाती है वह यह कि अपने हर पोस्ट में वह गुरु या मर्गदर्शक की भांति कुछ न कुछ संदेश ज़रू दे जाती हैं। इस पोस्ट पर भी वो कहती हैं कि …

सच्चा दोस्त वही होता है जो अपने दोस्त का सही मायनों में विश्वासपात्र होता है। अगर आप सच्चे दोस्त बनना चाहते हैं तो अपने दोस्त की तमाम छोटी-बड़ी, अच्छी-बुरी बातों को उसके साथ तो शेयर करो लेकिन लोगों के सामने उसकी कमजोरी या कमी का बखान कभी न करो। नही तो आपके दोस्त का विश्वास उठ जाएगा क्योंकि दोस्ती की सबसे पहली शर्त होती है विश्वास। हाँ, एक बात और। उन पुराने दोस्तों को विश करना न भूलें जो हमारे दिलों के तो करीब हैं, पर रहते दूरियों पर हैं।

“हैप्पी फ़्रेंडशिप डे !”

 

वैसे तो अजय कुमार झा जी कुछ भी...कभी भी.. कहने को तत्पर रहते हैं पर जब दिन मैत्री का हो तो यह कहने से नहीं चूकते “दोस्ती ..उम्र भर की ....कुछ सालों की ...आभासी दुनिया की ... ...(झा जी रिपोर्टिंग ऑन ड्यूटी )”। दोस्ती और दोस्तों को याद करते हुए कहते हैं कि जो दोस्त मिले .......वो अनमोल रहे ....अमिट रहे .....और अब तक साथ हैं .....खूब जम के कूट कुटौव्वल होती है .......लानत मलामत भी ...।

उन दोस्तों का जिक्र करना भी नहीं भूलते जो अंतर्जाल से निकल कर उनके अंतसमन तक समा चुके हैं। उनकी श्रीमती जी का कहना है कि झा जी  किसी से भी एक बार मिल लें तो वो उनका दोस्त भी बन जाता है। अजय झा जी का फ़ंडा ये है कि ...जब रिश्ता कायम करने के लिए यदि दुश्मनी और दोस्ती ...दो ही विकल्प हैं तो फ़िर ...........दोस्ती ही सही ।

इसके साथ वे अंतरजाल से जुड़े अपने ढेर सारे दोस्तों का नाम गिनाते हैं।

“हैप्पी फ़्रेंडशिप डे … झा जी।”

 

My Photoइस हैप्पी फ़्रेंडशिप डे पर Rajendra Swarnkar जी शस्वरं कह रहे हैं “मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम”! और ये स्वर बड़ा ही शायराना है। देखिए …

समझ नहीं पाया अगर… दोस्त , दोस्त का दर्द !
क्या हक़ है कहलाए वो , दोस्त , मीत ,  हमदर्द ?!

एक ग़ज़ल के ज़रिए वो बात को और स्पष्ट करते हैं

तेरे दिल में ये दर्द सा क्या है
मुझसे कहदे तू सोचता क्या है
मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम
ग़म न बांटें तो फ़ायदा क्या है

साथ हो दोस्त , फिर जहां क्या है
क्या है तक़दीर , फिर ख़ुदा क्या है
दोस्त ही दोस्त को न समझे फिर
बदनसीबी या हादसा क्या है
दोस्त ख़ुश हो जहां भी हो , रब्बा
और राजेन्द्र मांगता क्या है

दोस्ती को समर्पित इससे बेहतर ग़ज़ल और क्या हो सकती है! इस ग़ज़ल के हर एक शे’र पर मैं तो वाह-वाह कर उठा। आप भी दाद दीजिए ना!!
हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

दिल में ऐसे उतर गया कोई.............(ग़ज़ल)................मनोशी. की यह ग़ज़ल प्रस्तुत की गई है हिन्दी साहित्य मंच पर हिन्दी साहित्य मंच द्वारा। दोस्ती दिवस पर एक और इस प्रस्तुति में कहा गया है ..

दोस्त बन कर मुकर गया कोई  
अपने दिल ही से डर गया कोई
आँख में अब तलक है परछाईं
दिल में ऐसे उतर गया कोई

"दोस्त" कैसे बदल गया देखो
मोजज़ा ये भी कर गया कोई

ग़ज़ल की भाषिक संवेदना पाठक को आत्‍मीय दुनिया की सैर कराने में सक्षम है। ग़ज़ल के शे’र मन को छू लेते हैं और रचयैता के सामर्थ्‍य और कलात्‍मक शक्ति से परिचय कराते हैं। नितांत व्‍यक्तिगत अनुभव कैसे समष्टिगत हो जाता है इसे हम उनकी इस ग़ज़ल में देख सकते हैं।

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

मेरा फोटोअपने मित्र को याद करते हुए arun c roy अपना sarokaar स्पष्ट करते हुए कहते हैं “तुम मेरे मित्र!” अपने मित्र को संबोधित करते हुए कहते हैं

जब तुम
आये थे
मेरे जीवन में
जानता नहीं था
मैं तुम्हे
देखा भी नहीं था तुम्हे
कुछ ठीक से

पर जब देखा, सुना, जान, पहचाना तो ऐसी हुई मित्रता कि कहते हैं वो

अब
मेरी मुस्कराहट से है
तुम्हारी हंसी
मेरे सुख में है
तुम्हारा सुख
मेरे दुःख से
दुखती है तुम्हारी आत्मा
व्यथित होते हो तुम
मेरी व्यथा से
मेरी जिम्मेदारियों को
समझा तुमने अपना
मेरे सपनो को दिए तुमने पंख
अपने सपनो की तरह
थामा तुमने मेरा हाथ
जब भी
जहाँ भी
कमजोर पड़ा मैं
बल दिया तुमने
जब भी
निर्बल हुआ मैं
मेरे आंसू
निकले तुम्हारी आँखों से

यह कविता तरल संवेदनाओं के कारण आत्‍मीय लगती है। इस कविता में भावावेग की ऐसी दुनिया दिखती है जिसमें हम खुद को पाने पाने की आकांक्षा पाल बैठते हैं। यहां काव्यनिष्ठ प्रेम की दुनिया का अंकन मिलता है और मिलता है एक अतीत राग।

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

हृदय गवाक्ष पर कंचन सिंह चौहान जी ऐलान कर रहीं हैं “सलामत रहे दोस्ताना हमारा!” फ्रेंडशिप डे पर अपनी मित्रता की गांठों को मजबूत करते हुए बताती हैं अपने मित्र/सखा के बारे में कि …

“मेरी व्हीलचेयर और उसकी कुर्सी के पावे सटे होते। हम दोनो के सिर बहुत नजदीक होते और सारी सारी बातें खुसर फुसर में हो जातीं। लोग मिसाल देते दोस्ती की। चाची झट से लोटे भर पानी उबार देतीं हम दोनो के सिर से। हमारी अपनी अलग अलग सहेलियाँ थीं। मगर बेस्ट फ्रैन्ड हम दोनो थे।”

आगे बताती हैं

लोग कहते "बेचारी कंचन बहुत तेज है पढ़ने में।" वो कहती जब तेज है पढ़ने में तो बेचारी क्यों है। वो कहती मुझे तुम्हारे नाम के आगे से बेचारी शब्द हटाना है। मेरा दूसरा आपरेशन हुआ। बहुत कष्टकारी था। वो फोन करती चिट्ठी देती। हौसला देती। मंदिर में जाती। हर शुक्रवार। वो एक पैर पर एक घंटे खड़े हो कर मेरे लिये ‍प्रार्थना करती। लोग कहते हैं उतनी देर उसके आँसू नही रुकते। जाते जाते वो कह गई थी "किसी और को शायद कम होगी मुझे तेरी बहुत ज़रूरत है।" आज सुबह फोन पर मैने उससे कहा ३४ साल तो हो गये हमारी मित्रता के। उसने हँसे के कहा " अपने जीजाजी को ना बाताना। मेरी उम्र ३० के बाद बढ़नी बंद हो गई है.....! "

दोस्ती के नाम पर न्योछावर इस संस्मरण को पढते वक़्त कई बार आंखें भींगीं, कई बार दिल में हूक उठी, और अंत में हाथ सलाम की मुद्रा में उठ गया। .आप खुसनसीब हैं कि आपको इतनी अच्छी सखी मिली। दु:खों से भरी इस दुनिया में वास्‍तविक सम्‍पत्ति धन नहीं, मित्रता है।

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

 

My Photoदोस्ती के रास्ते लम्बे होते हैं पंजाब स्क्रीन पर Rector Kathuria बताती हैं कि बहुत कुछ लिखा गया है और बहुत कुछ पढ़ा भी गया है फ्रेंडशिप के नाम पर ...मैं तो बस इतना ही कहना चाहूंगी की..... "कहीं तो ये दिल कभी मिल नहीं पाते,कंही पे निकल आयें जन्मों के नाते." ये दोस्ती चीज ही ऐसी है!

कभी कभी विपरीत हालत भी हो जाते हैं. मजबूरियां अपना विकराल रूप दिखाती हैं तो दूरियां पैदा हो जाती हैं. जब कभी ऐसा हो ही जाए तो क्या करना चाहिए.अगर तो दोनों तरफ बराबर की अकड़ रही तब तो काम सचमुच खराब पर अगर थोडा हम चलें थोडा तुम चलो तो बिगड़ी हुई बात भी बन जाती है.

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

इसका शीर्षक भी आकर्षित करता है। इस दोस्ती दिवस पर क्या दोस्ती जरूरी है ? पूछ रहे हैं शुरुआत हिंदी लेखन से पर अंकुर द्विवेदी। कहते हैं यह दिवस केवल भारत में ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व में अति उल्लास और आनन्द के साथ मनाया जाता है। इस दिन कई बिछङे दोस्त, कई पुराने दोस्त एक-दूसरे से मिलकर अपनी दोस्ती के सिलसिले को और आगे बढाते है। अब दोस्तों में इस दिन एक-दूसरे को फ्रेण्डशिप-बैण्ड बाँधने का भी रिवाज हो गया है, पर ऐसा कोई जरूरी नहीं है। दोस्ती एक-दूसरे के प्रति दिल से होनी चाहिये, जो वर्षों तक एक-दूसरे के सुख-दुःख में काम आ सके।

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

My Photoमित्र और मित्रता : एक नज़र डालते हुए   KAVITARAWATBPL पर कविता रावत कहती हैं

मैत्री बहुत उदार होती है पर प्रेम कृपण होता है
मित्र के घर का रास्ता कभी लम्बा नहीं होता है

झूठे मित्रों की जुबाँ मीठी लेकिन दिल बहुत कडुवे होते हैं
झूठे मित्र व परछाई सूरज चमकने तक ही साथ रहते हैं
मित्रों का चयन थोड़े पर चुनिंदा पुस्तकों की भांति कर लिया
तो समझो जिंदगी में हमने एक साथ बहुत कुछ पा लिया

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

मेरा फोटोहैप्पी फ्रेंडशिप डे.........यादें समेटे जिंदगी : जियो हर पल पर प्रीति टेलर बताती हैं

बसमें जल्दी चढ़कर तेरी सिट रोकते थे ,
रिसेसमें गोलाकार बैठकर नाश्ता करते थे ,
स्कुलकी छुट्टीकी घंटी बजते ही
शोर मचाते क्लाससे बाहर दौड़ते थे ......
गणपतकी सायकलकी चाबी चुराकर
तुम मुझे सायकल चलाना सिखाते थे ....

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

My Photoदखलंदाज़ी पर संजय भास्कर दे रहे हैं फ्रैंडशिप- डे की बधाई! कहते हैं

हर रिश्ता मिला है विरासत में  ,

फिर दोस्ती क्यों अलग से बनाई है

क्योंकि बाकी रिश्ते बनाये खुदा ने

और दोस्ती खुद खुदा की परछाई है |

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

दोस्ती दिवस पर कडुवा सच बयान कर रहे हैं 'उदय'। कहते हैं

हमारी दोस्ती, 'खुदा' बन जाए, है इच्छा
अब खुशबू अमन की, 'खुदा' ही बाँट सकता है ।

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

बाल-दुनिया पर Akanksha Yadav कह रहीं हैं आज फ्रैंडशिप डे ...बधाई!! बताती हैं

दोस्ती का दायरा समाज और राष्ट्रों के बीच ज्यादा से ज्यादा बढ़े, इसके मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र संघ ने बकायदा 1997 में लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर विन्नी और पूह को पूरी दुनिया के लिए दोस्ती के राजदूत के रूप में पेश किया।

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

पाखी की दुनिया पर Akshita (Pakhi) भी कहती है फ्रैंडशिप- डे की बधाई!

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

फ्रैंडशिप डे -ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगें ये आकांक्षा है आकांक्षा जी का और वो शब्द-शिखर पर कह रही हैं

अच्छा दोस्त मिलना वाकई एक मुश्किल कार्य है। दोस्ती की कस्में खाना तो आसान है पर निभाना उतना ही कठिन। आजकल तो लोग दोस्ती में भी गिरगिटों की तरह रंग बदलते रहते हैं। पर किसी शायर ने भी खूब लिखा है-दुश्मनी जमकर करो/लेकिन ये गुंजाइश रहे/कि जब कभी हम दोस्त बनें/तो शर्मिन्दा न हों।

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

 

कुछ अन्य पोस्ट

धीमी धीमी साँसे

चल रही हैं

मैंने कहा..

अब मुझे

उस शय्या पर लिटा दो..

जहाँ मैं चिरकाल की

नींद सो सकूँ

मुझे जाना है

अब विदा होना है .

My Photoये अनामिका की सदाये... पर  अनामिका की सदायें हैं। एक प्रश्‍न “आत्मा कहाँ जाती है?”  है उनके समक्ष जिसका शायद उत्तर ढूंढने की कोशिश कर रहीं हैं। प्रश्न गहन है। पर जब हम आत्मा की मार मार कर जीते रहते हैं तो मरने के बाद बहुत जाकर ही छुटकारा पाती होगी हमारी आत्मा। बड़े ही दार्शनिक तरीक़े से अपनी बात रखते हुए कहती हैं …

मुझे तो अब जाना ही है

इस मृत्युलोक की

जीवनावधि पूरी कर..

वहाँ की यात्रा के लिए

गमन करना है .

इस मोह-माया से

बंधन मुक्त हो

खुले आकाश में

विचरण करना है

इस नश्वर शरीर से

इस आत्मा को

अब मुक्ति पाना है .

जीवन की नश्‍वरता को जो जान लेते हैं, वे सत्य को समझ लेते हैं। जिन्हें भी सत्य की अनुभूति हुई है, उन सबने यही कहा है कि जीवन झाग का बुलबुला है, जो इस घड़ी है, अगली घड़ी मिट जाएगा। जो इस नश्‍वर को शाश्‍वत मान लेते हैं, वे इसी शरीर में डूबते और नष्ट हो जाते हैं, लेकिन जो इसके सत्य के प्रति सजग होते हैं, वे एक ऐसे जीवन को पा लेने की शुरुआत करते हैं, जिसका कोई अंत नहीं।
इस कविता को पढने के बाद लगता है, कवयित्री इस सत्य के प्रति सजग हैं। सचमुच ही जो जीवन का सत्य पाना चाहता है, उन्हें जीवन की यह सच्चाई जाननी ही पड़ती है। इसे समझकर वे अनुभव कर पाते हैं कि एक स्वप्न से अधिक न तो जीवन की कोई सत्ता है और न ही जीवन का सत्य।

 

तुम जीतना चाहते हो

मैंने अपनी हार कहीं मानी नहीं

आग की आँच को तुम भूलते नहीं

मैंने आग को बुझाने में हाथ पैर जलाये

मेरा फोटोये है अंतर्द्वंद रश्मि प्रभा... जी का। मेरी भावनायें... पर अपने मन की बात बताते हुए कहती हैं,

इस अकेले कमरे में मेरी यादों का

मेरी चाहतों का

मेरे गीतों का जमघट होता है

तुमको ये शोर लगेंगे

या कोई बचकानी

अव्यवहारिक हरकत !

तुम बेवजह बड़ी-बड़ी बातें करोगे

और मैं - बहुत छोटे एहसासों में जीती हूँ

इस कविता में कवयित्री का अंतर्द्वंद्व निश्चित रूप से खुलकर सामने आया है । कहीं कहीं कविता तात्‍कालिक प्रतिक्रिया जैसी लग सकती है, लेकिन ज्‍यादातर कवयित्री ने अपनी ऊर्जा का प्रयोग काव्‍यात्‍मक सिद्धि के लिए ही किया है। यह चकित करती कविता है। ठेठ रश्मि प्रभा अंदाज में भावावेग से भरी कविता!

उच्चारण पर डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक बता रहे हैं “… खुद चलके आती नही” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

मेरा फोटोअब जला लो मशालें, गली-गाँव में,
रोशनी पास खुद, चलके आती नही।
राह कितनी भले ही सरल हो मगर,
मंजिलें पास खुद, चलके आती नही।।

लक्ष्य छोटा हो, या हो बड़ा ही जटिल,
चाहे राही हो सीधा, या हो कुछ कुटिल,
चलना होगा स्वयं ही बढ़ा कर कदम-
साधना पास खुद, चलके आती नही।।

बिल्‍कुल अपठनीय और गद्यमय होते जा रहे काव्‍य परिदृश्‍य पर शास्त्री जी की यह कविता इसलिए भी महत्‍वपूर्ण है कि वे कविता की मूलभूत विशेषताओं को प्रयोग के नाम पर छोड़ नहीं देते। उनकी बेहद संश्लिष्‍ट इस कविता में उपस्थित लयात्‍मकता इसे दीर्घ जीवन प्रदान करती है। कविता का पूरा स्वर आशामूलक है। यह आशा वायवीय नहीं बल्कि ठोस ज़मीन पर पैर टिके रहने के कारण है।

उन लोगों का क्या, जिनके मुकद्दर में देस परदेस बन जाता है और अपनी मिटटी से दूर, वतन से दूर,अपनी भाषा और संस्कृति से दूर कहीं परदेस में जाकर उन्हें अपना घर, बसाना पड़ता है ?

मृण्मय तन, कंचन सा मन शीर्षक आलेख के द्वारा लावण्यम्` ~अन्तर्मन्` पर लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` यह प्रस्‍न पूछ रहीं हैं। कहती हैं

इंसान अपनी जड़ों से जुडा रहता है । दरख्तों की तरह। कभी पुश्तैनी घरौंदे उजाड़ दिए जाते हैं तो कभी ज़िंदगी के कारवाँ में चलते हुए पुरानी बस्ती को छोड़ लोग नये ठिकाने तलाशते हुए, आगे बढ़ लेते हैं नतीज़न , कोई दूसरा ठिकाना आबाद होता है और नई माटी में फिर कोई अंकुर धरती की पनाह में पनपने लगता है ।

भारत भूमि के नागरिक, बिहारी भाई मुम्बई की जगमगाहट व कामधंधे की बहुलता की आकर्षक बातों को सुनकर मुम्बई नगरी में अपनी क़िस्मत आजमाने के लिए, खींचे चले आये हैं । क्या उन्हें कोई हक़ नहीं मुम्बई में अपना ठौर ठिकाना ढूँढने का ?

आलेख बहुत अच्छा है। आरम्भ से ही स्थायित्व खोजता हुआ मानवमात्र प्रवासी रहा है।  उस पर भी भारत और अमेरिका जैसे राष्ट्र तो प्रवासियों की विविधता से भरे हुए हैं. समाज में पहले से जमे लोगों को हर आगंतुक से खतरा ही दिखाई देता है तभी तो देशों की सीमाओं पर प्रहरी और गाँवों/मुहल्लों में चौकीदार होते थे. मगर भय भी तो अज्ञान का ही एक रूप है।

राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन की जयंती पर विशेष प्रस्तुति ग्राम चौपाल पर अशोक बजाज द्वारा।

हिंदी के परम पक्षधर को नमन...

 

मेरा फोटोराजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन,भारत के महान  स्वतन्त्रता सेनानी थे।उनका जन्म १ अगस्त १८८२ को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद मे हुआ। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन अपने उदार चरित्र और सादगीपूर्ण जीवन के लिए विख्यात थे तथा हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाने में उनकी भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। सामाजिक जीवन में टंडन के महत्वपूर्ण योगदान के कारण सन १९६१ में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न"से सम्मानित किया गया। टंडन के व्यक्तित्व का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष उनका विधायी जीवन था, जिसमें वह आज़ादी के पूर्व एक दशक से अधिक समय तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। वे  संविधान सभा,लोकसभा और राज्यसभा के भी सदस्य रहे।वे  समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे।

तो अब दीजिए इज़ाज़त!

अगले हफ़्ते फिरमिलते हैं!

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

Post Comment

Post Comment

रविवार, अगस्त 01, 2010

हिंदी सबके लिए

लीजिए, आज आपके लिए पेश है हिंदी संबंधी ढेरों कड़ियाँ. साभार हिंदी सबके लिए. बहुत सी नई कड़ियाँ भी हैं. उम्मीद है,  आपके लिए कोई न कोई कड़ी काम की होगी ही -

· प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ ऑनलाइन परीक्षाओं की मॉडल प...

· हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के लिए कुछ और भी

· हिंदी यूनीकोड के लिए ज़रा इन्हें भी आजमाइए

· बोलचाल की हिंदी क्रेज़ी लस्सी हिंदी lessons के सौज...

· ज़रा बताएं तो भारत कोश में क्या नहीं है !!

· ग़ालिब की शाइरी के लिए

· यूनीकोड क्या है?

· हिंदी में श्री गुरुग्रंथ साहिब: gurbanifiles.org क...

· हिंदी प्रवीण ऑनलाइन परीक्षा देते हुए प्रशिक्षार्थी...

· हिंदी प्रवीण ऑनलाइन परीक्षा के लिखित भाग की परीक्ष...

· हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में र्इ-मेल और ऑनलाइन हिंद...

· प्रवीण नोट्स : विलोम शब्द एवं वाक्यों में प्रयोग

· प्रवीण नोट्स : पर्यायवाची शब्द एवं वाक्यों में प्र...

· प्रवीण नोट्स : पदबंध एवं उनका वाक्योँ में प्रयोग

· प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक

· किसी भी भारतीय भाषा की लिपि तथा बारहखड़ी तथा संसार...

· वरिष्ठों की फरमाइश पर एक बार फिर से बेसिक हिंदी लि...

· हिंदी वर्तनी एवं उच्चारण पर एक अच्छा लेख

· हिंदी संपादक एवं वर्तनी की जाँच

· हिंदी में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखने के लिए

· उर्दू पोएट्री के लिए सागर

· उच्च स्तरीय हिंदी भाषा-साहित्य के अध्ययन के लिए

· श्रीमदभगवद्गीता श्लोक दर श्लोक पढ़िए-सुनिए

· संस्कृत-अँग्रेज़ी शब्दकोश

· उर्दू- हिंदी परिवर्तक

· देवनागरी से ब्रेल लिपि में बदलने के लिए लिंक

· कार्यालय पद्धति नियम पुस्तक : डाउनलोड लिंक

· प्राज्ञ पाठमाला/कार्यालयीन पद्धति के लिए अँग्रेज़ी ...

· अँग्रेज़ी-हिंदी-अँग्रेज़ी निशुल्क अनुवाद उपकरण

· प्राज्ञ नए पाठ्यक्रम के लिए नोट्स

· गीतामृतम् : भोजपुरी में श्रीमद्भगवद्गीता का पद्यान...

· प्रवीण नोट्स - 6

· प्रवीण नोट्स - 5

· प्रवीण नोट्स - 4

· प्रवीण नोट्स - 3

· प्रवीण नोट्स -2

· प्रवीण नोट्स -1

· दुष्यंत कुमार की कुछ ग़ज़लें : कविताकोश के सौजन्य से...

· मधुशाला बनाम भाषा शिक्षण और बच्चन जी

· डाक प्रमाणित पत्र कैसे भेजा जाता है?

· अन्तर्विभागीय टिप्पणी तथा पृष्ठांकन के मसौदे

· कार्यालय आदेश तथा आदेश की प्राज्ञ पाठमाला में दी ग...

· पत्र, अर्ध सरकारी पत्र तथा कार्यालय ज्ञापन के प्रा...

· प्राज्ञ परीक्षा-प्रथम प्रश्न पत्र - मई 2001 (उत्तर...

· प्राज्ञ परीक्षा प्रथम प्रश्न पत्र, मई 2000

· प्राज्ञ परीक्षा प्रश्न पत्र द्वितीय, नवम्बर 1999

· प्राज्ञ परीक्षा द्वितीय प्रश्न पत्र, मई 2000

· प्राज्ञ : परीक्षा प्रश्न पत्र : द्वितीय : मई 2001 ...

· प्रवीण परीक्षा के लिए पाठ सारांश

· प्रबोध - प्रश्न पत्र - द्वितीय

· प्रबोध - प्रथम - प्रश्न पत्र

· सामान्य बोलचाल की हिंदी के कुछ पाठ

· गूगल ट्रांसलेट की एक और सुविधा

· प्रबोध पाठमाला आधारित संक्षिप्त निबंध/पाठ सार

· पर्यायवाची, विलोम, समोच्चरित, एकार्थक लगने वाले शब...

· प्रबोध पाठ्यक्रम : परीक्षा नोट्स

· मुफ़्त मुफ़्त मुफ़्त: मगर कितना चाहिए!!

· एक और हिन्दी-अंग्रेज़ी/ अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्दकोश

· एक और निशुल्क हिन्दी वर्णमाला शिक्षक

· हिंदी क्रियाओं के लिए शायद यह मददगार हो...

· हिंदी फिल्मी गीत पढ़िए भी और सुनिए भी -2

· एक और ऑनलाइन हिन्दी व्याकरण पुस्तक

· मधुशाला बनाम भाषा शिक्षण और बच्चन जी

· लोकप्रिय हिंदी कथाएँ - यू ट्यूब वीडियो

· हिंदी का संक्षिप्त इतिहास अँग्रेज़ी में

· एक मजेदार अक्षर पहेली वर्णमाला से जुड़ी

· आओ हिन्दी सीखें - Let's Learn Hindi एक और अच्छा लि...

· निशुल्क हिंदी व्याकरण हिंदी में

· बच्चों के हिंदी में नाम ...

· हिन्दी वर्णमाला के लिए एक और भी

· सामान्य हिंदी व्याकरण अभ्यासार्थ

· एक बार फ़िर से हिन्दी वर्णमाला अभ्यास

· हिंदी साहित्य का इतिहास

· हिंदी सीखने की पुस्तकें सीमित अवलोकनार्थ

· गूगल टूल बार से स्वत: अनुवाद

· कंप्यूटर के बारे में हिंदी में सामान्य जानकारी

· हिंदी माध्यम से अंग्रेज़ी सीखें

· थोड़ी सी संस्कृत भी हो जाए Let us learn SANSKRIT al...

· खेल-खेल में सीखें हिंदी

· हिन्दी कविताएँ, साक्षात्कार और भी बहुत कुछ है यहाँ...

· कंप्यूटर के समाधान -2

· कंप्यूटर के समाधान -1

· एक और बोलने वाला अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्दकोश

· माडर्न हिंदी व्याकरण पुस्तक निशुल्क डाउनलोड

· पसंदीदा गायकों,शायरों, गीतकारों, संगीतकारों के गीत...

· हिन्दी फिल्मी गीत देवनागरी या रोमन में...

· अँग्रेज़ी कहावते और हिंदी भावार्थ - लिंक

· सरल हिंदी-अंग्रेजी व्याकरण Simple Grammar

· सामान्य हिंदी पाठ्यक्रम निशुल्क डाउनलोड

· हिंदी की एक सम्पूर्ण पाठशाला

· ताज़ा तरीन हिन्दी समाचार पढ़ने की सुविधा

· हिंदी संयुक्त व्यंजन Hindi/Consonant combinations

· सामान्य बोलचाल के वाक्यांश:simple hindi phrases

· उपयोगी है -TBIL फॉण्ट कन्वर्टर

· हिंदी शार्टहैंड निशुल्क पुस्तक डाउनलोड link

· उर्दू व्याकरण पुस्तक डाउनलोड के लिए link

· हिंदी व्याकरण पुस्तक निशुल्क डाउनलोड link

· हिन्दी टाइपिंग शिक्षक मुफ्त डाउनलोड link

· हिंदी शब्द भंडार बढ़ाने के अभ्यास के लिए link

· एक और English to hindi शब्दकोष डाउनलोड link

· हिन्दी के प्रमुख अखबारों के लिए links

· कुछ ऐसे ब्लॉग जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है.

· नगर राजभाषा कार्यालय के लिए link

· राजभाषा विभाग की अद्यतन सूचनाओं के लिए link

· सुनिए और सीखिए : अंग्रेजी भी और हिंदी भी

· ब्राह्मी लिपि भी जरा जाने तो कैसा रहे

· ऑनलाइन बोलचाल की हिंदी सीखने के लिए link

· अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्दकोश : डाउनलोड links

· एक और रोमन से देवनागरी लिप्यांतरण उपकरण

· प्लैट्स के बहुभाषी शब्दकोष के लिए link

· हिंदी सीखें एक नई कड़ी

· हिंदी पाठ्य पुस्तक डाउनलोड link

· हिन्दी कथा साहित्य: विकी स्रोतः साहित्य का खजाना

· बेहतरीन उर्दू ग़ज़लों के लिए लिंक

· बैंकिंग, प्रशासनिक एवं लेखा शब्दावली के लिए link

· एक अंग्रेजी-हिन्दी/मराठी Dictionary

· कड़ी से कड़ी - हिंदी: सर्वनाम A LINK FOR HINDI PR...

· कड़ी से कड़ी -हिंदी: संज्ञाएँ A LINK FOR HINDI NOU...

· बच्चों के लिए एक उपयोगी हिंदी link

· विभिन्न भाषाओं के लिए इलेक्ट्रानिक शब्दकोष -link

· शब्दार्थ एवं वाक्य प्रयोग के लिए link

· सामान्य हिन्दी प्रश्नोत्तरी के लिए link

· हिंदी मुहावरों के लिए link

· हिन्दी कहानियों के लिए link

· हिंदी की सामान्य शब्दावली के लिए एक अद्भुत लिंक

· हिंदी फिल्मी गीतों से हिंदी सीखने के लिए link

· अनुवाद उपकरण से पूरे वेब पृष्ठ का अनुवाद

· हिंदी दिवस पर परिचर्चा -

· HINDIFORYOU अब आप अपनी लिपि में पढ़ें

· सी-डेक और राजभाषा विभाग के लीला पाठ्यक्रम

· कबीर के दोहों एवं अन्य रचनाओं के लिए link

· अक्षर अभ्यास के बाद A DOOR INTO HINDI से आगे बढ़ें

· राजभाषा हिंदी से संबंधित घटनाक्रम के लिए link..(श्...

· कड़ी से कड़ी-3 : हिंदी व्यंजन - ओष्ठ्य

· कुछ नायाब ग़ज़लों के लिए link (खड़गपुर से मिले पा...

· कड़ी से कड़ी-2 : हिंदी व्यंजन - मूर्धन्य एवं दंत्...

· दुष्यंत कुमार की शाइरी के लिए लिंक

· डॉ कुंवर बेचैन की कविताओं के लिए लिंक

· वसीम बरेलवी की शाइरी के लिए लिंक

· हिन्दी कविताओं के लिए लिंक

· वसीम बरेलवी जी की दो गज़लें जो भुलाई नहीं जातीं

· कुछ कड़ियां गहरी साहित्यिक रूचि वालों के लिए

· कड़ी से कड़ी - हिंदी व्यंजन कंठ्य एवं तालव्य

· राजभाषा हिंदी के प्रयोग से संबंधित सरकारी आदेशों क...

· आपकी सुविधा के लिए सभी कड़ियाँ (1 से ...6 तक ) यहाँ...

· सरल हिन्दी सीखने तथा हिन्दी संख्याओं के लिए लिंक ...

· हिंदी सीखने के लिए लिंक-6 यानी छठी कड़ी

· हिन्दी सीखने के लिए लिंक -5 यानी पांचवीं कड़ी

· हिंदी सीखने के लिए लिंक-4 यानी कड़ी नंबर-4 ( link-...

· हिन्दी सीखने के लिए लिंक -3

· हिन्दी सीखने के लिए लिंक -2

· हिन्दी सीखने के लिए लिंक-1 how to start hindi le...

· रोजमर्रा इस्तेमाल में आने वाली कुछ टिप्पणियां (प्र...

· प्रबोध पाठमाला (मूल हिन्दी पाठ)

· प्रबोध पाठमाला का अंग्रेज़ी अनुवाद

· कन्नड़ लिपि में प्रबोध पाठमाला

· तेलगु लिपि में प्रबोध पाठमाला

· बांग्ला लिपि में प्रबोध पाठमाला

· मलयालम लिपि में प्रबोध पाठमाला

· तमिल लिपि में प्रबोध पाठमाला

· "कंप्यूटर पर हिंदी में काम: इतना सरल इतना आसान कि ...

Post Comment

Post Comment

Google Analytics Alternative