मंगलवार, जुलाई 31, 2007

ये क्या कर रहे हो चिट्ठाकारों

यहां मैं एक सवाल उठा रहा हूं. किसी को नाराज करने के लिए नहीं सिर्फ सवाल करने के लिए सवाल उठा रहा हूं.
विभिन्न एग्रीगेटरों पर हाल में जो शीर्षक मुझे दिखे हैं उनमें से कुछ नीचे मैं दे रहा हूं, आप भी पढ़िये-
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maiN bujh gayaa to hamesha ko bujh hi jaaungaa...
DATING VERSUS DATES OF BILLS
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Colourful paintings - रँग बिरँगी तस्वीरें - Quadri colorati
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O PIYAA
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अब आप बताईये यह सब क्या हो रहा है? क्या यह हिन्दी चिट्ठाकारी के लिहाज से ठीक है? एक तरफ हमारे आलोक भैया हैं नई-नई हिन्दी शब्दावली का श्रृजन करते रहते हैं. अब देखिए आज ही उनकी पोस्ट आयी है शब्दकोष गूगल पट्टी में. और दूसरी तरफ वे लोग भी हैं जिन्हें हिन्दी में शीर्षक देने से भी परहेज हो रहा है.

हम ऐसा क्यों कर रहे हैं?

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लो चन्द बातें

शिकार,जंगल औ सूखी धरती

वे लिख रहे हैं ये चन्द बातें

तो कोई तन्हाईयां बस सजाकर

सवाल करते बिताता रातें



कहीं दिशायें सवाल करतीं

तो कोई दुनिया के रू-ब-रू है

यहाँ रफ़ी की है याद जीवित

हैं साथ भूली औ' बिसरी बातें



कमाले शाहरुख जो कह न पाये

वे पूछते हैं, हूँ कौन मैं भी

ये न्यूज चैनल का जो नजरिया,

की हैं बताते असल की बातें



जो चीर देता है हर युवा को

कहां चमकता है बोलो सूरज

कुछ ऐसे लेकर सवाल मन में

पखेरू करता है तुमसे बातें



यों बात तो हैं हजार लेकिन

न वक्त इतना बतायें सारी

यहाँ क्लिक कर अगर पढ़ेंगे

तो पढ़ सकेंगे हज़ार बातें



अगर न मैं ये लिखूँ जनमदिन

तुम्हें मुबारक ओ लाल साहब

न तुम कहोगे कुछ पर ये दुनिया

उठायेगी दस हज़ार बातें

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