रविवार, अगस्त 26, 2007
द साईलेंस इज़ डेफनिंग
चर्चाकारः
debashish
जी हाँ आपने "खामोशी की आवाज़" जैसे जुमले सुने होंगे पर उदाहरण ज्यादा न देखे होंगे। तो पढ़िये अशोक जी चक्रधर की नवीनतम पोस्ट जो उन्होंने न्यूयॉर्क में संपन्न विश्व हिन्दी सम्मेलन पर लिखा। और शायद ये हिन्दी ब्लॉगजगत की पहली ऐसी पोस्ट है जिसे बिना कुछ लिखे टिप्पणियाँ मिलीं। फुरसतिया ध्यान दें ;)
शनिवार, अगस्त 25, 2007
बया में रवीशी, अजदकी और अनामदासिया बयां
चर्चाकारः
रवि रतलामी
"...ग़ौरतलब है कि प्रस्तुत व्यंग्य कथाओं में से तीन हिन्दी के ब्लौगों से प्रिंट माध्यम में पहली बार आ रही हैं."ये व्यंग्य कथाएँ कौन सी हैं, ये हैं -
- रवीश की मुंशी प्रेमचंद की पहली विदर्भ यात्रा
- प्रमोद सिंह की बुरी हिन्दी कैसे लिखें और,
- अनामदास की सुविधा की फांस और अभाव की आजादी.
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