मंगलवार, सितंबर 18, 2007

कौन कर रहा मटरगश्तियां

फ़ुरसतियाजी कहां कर रहे मटरर्गश्तियां हमें पता है
संस्मरण में रवि रतलामी ने देखो क्या आज कहा है
इंतज़ार में खड़े सारथी कोई कहीं धनुर्धर होगा
बता रहे आलोक पुराणिक सेंसेक्स का क्या क्या होगा

करें बिहारी बाबू आकर राम सेतु का लेखा जोखा
गीतकार की कलम बताये, भारत यात्रा का क्या होगा
उड़नतश्तरी चित्रकारिता करने को अब होती आतुर
मेरे पन्ने पर मिलता है रोज रोज ही नया एक गुर

अभिनव लिंक यहां लाये हैं सुनें रेडियो पर कवितायें
कहां खोमचा गया देखिये, ये काकेश यहां बतलायें
निशा खिलाने को लाईं हैं मेवे की यह खीर मनोहर
गूँज रहा है गीतकलश पर नये गीत का फिर से इक स्वर
,
मां की कलम और लावण्या, ज्ञानदत्तजी की तलाश है
हिन्दी की सेवा की मेवा देखें किसको मिली खास है
बाकी सारे चिट्ठों का अब यहां आप आनंद उठायें
चर्चा यह सम्पूर्ण हो गई, पब्लिश पर माऊस चटकायें

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2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही वापसी रही, महाराज.चलो, बंद सिलसिला खुला तो. आभार.

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  2. बहुत अच्छा सोचा और लिखा आपने।

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