शनिवार, मई 17, 2008

एक था राजा एक थी रानी पर कुछ अलग ये कहानी

हम चिट्ठाचर्चा जैसे सामुहिक मंच के दुरुपयोग के लिए कुख्‍यात रहे हैं :) तो लंबी छुट्टी के बाद आज इस चर्चा में इसी दुरुपयोग की परंपरा का जारी रखते हुए जिस चिट्ठे की चर्चा कर रहे हैं वह एक अंग्रेजी चिट्ठा है। उसकी भी एक पोस्‍ट भर, बस पसंद आ गई तो लीजिए आपके लिए पेश है।

अपने अंग्रेजी चिट्ठे "अरे क्‍या बात है" में हिन्‍दी के (भी) चिट्ठाकार सुनील दीपक ने इतालवी फिल्‍मकार रोबर्टो रोसेलिनी और उनकी भारतीय प्रेशर सोनाली के प्रेम संबंध की शानदार खोजपरक पड़ताल की है। ये खोजपरकता उस शुष्‍क विश्‍वविद्यालयी शोध से बिल्‍कुल अलग है जिससे हमारा साबका रोजाना पड़ता है। 51 साल के रोसेलिनी फिल्‍म निर्माण के सिलसिले में भारत आते हैं और यहॉं एक प्रतिष्ठित फिल्‍मनिर्माता की 27 वर्षीय पत्‍नी सोनाली से प्रेम कर बैठते हैं जो दो बच्‍चों की माता भी है। भारत के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री के गुपचुप सहयोग के साथ ये युगल इटली भाग जाता है, एक बच्‍चा सोनाली साथ ले जाती हैं किंतु दूसरा यहॉं पिता के पास छूट जाता है। इसके बाद सोनाली-रोसेनिली की कहानी के सूत्र मिलने बंद हो जाते हैं। पर यहीं तो चिट्ठाकार का चिट्ठाकारपना शुरू होता है-

All these questions were going around in my head as I searched for answers. I could piece together many things because I could search in English and Italian, as well as some minor sources in Spanish and French that gave crucial information. This search was exclusively through internet. I didn’t find much about how people had felt, the emotional part of this story and perhaps it is better that way since I can imagine that even after all these years, many of these memories must be still very painful for all those who are still alive. Roberto died in 1977. Harisadhan Dasgupta probably died in 1986 or around that. It is not clear if Sonali Rossellini is still alive. Yet their children are around and probably they carry the scars of this event.

एक शानदार पोस्‍ट जिसके लिए लिखने वाले का सुनील दीपक होना जरूरी है। जो भारतीय है और इतालवी भी, संस्‍कृति व भाषा के स्‍तर परिपक्‍व भी। चवन्निया नैतिकता के आग्रहों से मुक्‍त। एक शानदार पोस्‍ट जो लिखी तो अंग्रेजी में गई है पर संभव हो तो आपको भी पढ़नी चाहिए।

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4 टिप्‍पणियां:

  1. चूक गये थे इसे पढ़ने से-आभार आपका बताने के लिए.

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  2. जरा नियमित करिये चर्चा जी।

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  3. यह चिट्ठा पढ़ा तो आप की टिप्पणी का अर्थ समझ में आया, धन्यवाद.

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