रविवार, अगस्त 22, 2010

कुछ ब्लॉगरोल

बहुत से चिट्ठाकारों ने अपने चिट्ठों पर अपनी पसंदीदा चिट्ठा-सूचियाँ टांग रखी हैं. इससे उनके पसंद और विचार का आभास तो होता ही है, साथ ही उन  चिट्ठों में पहुँचने का आसान लिंक भी मिलता है. 

ऐसे ही 2 चिट्ठों के ब्लॉगरोल नमूनार्थ पेश हैं. ब्लॉग रोल कहाँ से उठाए हैं ये महत्वपूर्ण नहीं हैं, महत्वपूर्ण ये है कि देखिए कि कुछ चिट्ठे इन ब्लॉगरोलों में रिपीट क्यों हो रहे हैं – सार्थक सामग्री या शीयर गुटबाजी?

ब्लॉग रोल 1

 

ब्लॉगरोल 2

चिंतन मेरे मन का

आवाज़

ज्ञान दर्पण

एक आलसी का चिठ्ठा

अमीर धरती गरीब लोग

राजू बिन्दास!

बतंगड़ BATANGAD

कर्मनाशा

क्वचिदन्यतोअपि..........!

काव्य मंजूषा

मेरी शेखावाटी

मेरे मन की

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नुक्कड़

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KISHORE CHOUDHARY

व्योम के पार......

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Sehar

"प्रेम ही सत्य है"

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डॉ. चन्द्रकुमार जैन

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मुक्ताकाश....

अंतर्ध्वनि

लावण्यम्` ~अन्तर्मन्`

ठुमरी

उपस्थित

टूटी हुई बिखरी हुई

शिखा दीपक

आरसी

ज़ख्म, परेशां है चुप्पी से...

मुझे कुछ कहना है

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ओझा-उवाच

पहलू

मानसी

माझी माय सरस्वती

रचनाधर्मिता

आलोक

दिल एक पुराना सा म्यूज़ियम है

संचिका

क़ासिद

प्रत्यक्षा

Meri Katputliyaan

सारथी

अमृता प्रीतम की याद में.....

इंद्रजाल कॉमिक्स का स्वप्नलोक

चाय-चिंतन

मनको कुरा

प्रभाकरगोपालपुरिया

वैतागवाड़ी

Yayawar Ki Diary

मोहल्ला

॥दस्तक॥

today's CARTOON

एक हिंदुस्तानी की डायरी

देसी पंडितजी

नन्ही कोपल

विज्ञान » चर्चा

कुछ हम कहें

हिन्दुस्तानी एकेडेमी

प्राइमरी का मास्टर

Kumauni Culture

रमता जोगी बहता पानी....

मदिरा ज्ञान

कछु ह‍मरी सुनि लीजै

लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से.....

अर्थात

राही मासूम रज़ा

बाल किशन का ब्लॉग

RD Saxena : Spreading fragrance of Malwa

वाणी

सस्ता शेर

खेती-बाड़ी

जुनून: कोई भी सफलता मंजिल नहीं होती

पर्यानाद्

कुन्दकुन्द कहान

Pratham

Samayiki

अनामदास का चिट्ठा

बिना वजह

Sharing is Exploring.

राज़ की बातें

http://www.tanhaazad.com

HINDI VANGMAY ALIGARH हिन्दी वाडमय

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स्वर सृजन

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●๋• लविज़ा ●๋•

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हरा कोना

राष्ट्रचिन्तन

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Pratham

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चिट्ठे सम्बंधित कार्टून

गुलाबी कोंपलें

भूतनाथ

एकोऽहम्

ब्लॉग बुद्धि

अछूत कौन थे?

विज्ञान विश्व

बात पुरानी है !!

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24 टिप्‍पणियां:

  1. अब आपने यह ब्लॉग रोल कहाँ से लिए है यह तो आप जाने हम तो इतना बता सकते है कि हम और हमारे ब्लॉग कहीं नहीं है इन सूचियों में ! आगे रब राखा !!

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  2. यदि दो अलग अलग ब्लोग्स के ब्लॉग रोल में कुछ चिट्ठे समान है तो इसमें "शीयर गुटबाजी" नहीं मानी जा सकती ये तो अपनी अपनी पसंद है !!

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  3. इसको शेयर गुटबाजी कतई नहीं कहा जा सकता है ... बल्कि ये अपनी अपनी पसंद है......आभार

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  4. पहला ब्लॉग-रोल तो जाना पहचाना है !
    कोई गुटबाजी नहीं है! पसन्द का मामला है !

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  5. मुझे भी यही लगता है कि यह गुटबाजी नहीं अपनी पसंद मात्र है।

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  6. जो अच्छे ब्लौग हैं वो तो कई-कई ब्लौगरोलों में रिपीट होंगे...

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  7. अरे आप ने इतनी मेहनत से इसे तेयार किया, सच मै आप बधाई के पात्र है, बहुत अच्छा लगा.धन्यवाद,

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  8. ये लिस्ट मेहनत से तैयार की गयी है ... आप की है तो आप बधाई के पात्र हैं .. किसी के ब्लॉग्रोल से ली गयी है तो वो बधाई के पात्र हैं ...

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  9. मैं खुश हूँ... आदित्य दोनों में है.. :)

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  10. .
    लाली देखन मैं चला......
    सभी दिक्खै लाल
    जो घर देखा आपना
    तो खुद ही ठहरा लाल
    ________________

    तू स्पैम ठहराये या माडरेट करे
    हम तो हैं तेरे दीवानों में
    हम शम्मह का सीना रखते हैं
    रहते हैं मगर परवानों में

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  11. बड़े भाई, आपका ब्लॉग एक में देवनागरी
    और दूसरे में रोमन लिपि में है... यूँ तक़लीफ़ का अफ़साना आप क्योंकर गुनगुनाये ?

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  12. मैं लम्बे समय से अपने ब्लौग रोल को अपडेट नहीं कर पाया हूँ पर मैंने कुछ ब्लौगों में देखा कि मेरे ब्लौग रोल को ही कॉपी-पेस्ट करके उपलब्ध कराया गया है. इसमें कोई दोष नहीं है. जो अच्छे ब्लौग है वे जितनी ज्यादा जगहों पर दिखें उतना ही अच्छा है.

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  13. रवि साहब,
    वजह कुछ भी हो सकती है। सार्थक लेखन, शीयर गुटबाजी, अपनी पसंद, अपनी नापसंद(कई ब्लॉग्स नापसंदगी के कारण भी फ़ॉलो किये जाते हैं)। इनमें से कई ब्लॉग्स उन ब्लॉग्स की सूची में भी जरूर होंगे जहां आप विचरण करते हैं, और जिनका आपने अपनी पोस्ट में जिक्र किया था शायद दो दिन पहले।
    बहरहाल, बहुत से लिंक्स तो मिल ही जाते हैं इन ब्लॉगरोल्स से।
    और आपके प्रयास की तो सराहना ही कर सकते हैं, इतनी खोजबीन करना बहुत मेहनत का काम है।
    आभार।

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  14. लग रहा है बहुत मेहनत कर डाली आपने ...

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  15. निर्गुटों का गुट बनेगा शायद रवि की अगुवाई में?! :)

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  16. रवि जी,

    कहाँ मैं चुपचाप वेबदुनिया के किसी कोने पड़ा अपने हिन्दी ब्लॉगर होने का एकाकी सुख भोग रहा था और किसी दिन आपकी दी हुई समझाइश ने मुझे ब्लॉगस्पॉट से जोड़ दिया।

    यह तो मेरा सौभाग्य ही हैं कि किसी के ब्लॉगरोल में मेरा ब्लॉग "कवितायन" भी शामिल है।

    वैसे ब्लॉगरोल किसी गुटबाजी न होकर विशुद्ध रूप से पसंद पर आधारित ही है ऐसा मेरा मत है...आगे आप सुधिजन जाने.....

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  17. मैंने तो सारे ब्लॉग लिंक कापी मार के अपने ब्लॉग पर लगा लिए हैं .. अब सुविधा हो जायेगी नए नए ब्लॉग खोजने और पढ़ने मे ... रही बात ब्लोगरोल की तो जिसकी जैसी पसंद ... और जैसी जिसकी नियति ... कोऊ नृप होहिं हमहिं का हानी

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  18. मेरा ब्लॉग तो एक ही रोल में है , फिर भी मैं समझता हूँ कि अलग अलग ब्लॉगरोल में किसी ब्लॉग की उपस्थिति किसी गुटबाजी की वजह से नहीं.

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  19. पहले हम भी दोनों में हुआ करते थे । अब ऊपर वाले ने शायद निष्कासित कर दिया ।

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  20. पसन्द का मामला है. गलत भी नहीं. निर्गूटता भी एक तरह की गूटबाजी ही है.

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  21. गुटबाजी भी हो सकती है पर केवल गुटबाजी नहीं। हम अब विकिपीडिया एवं अन्य औजारों सम्बन्धी काम में व्यस्त होने से चिट्ठाजगत में सक्रिय नहीं न ही अन्य लोगों से सम्पर्क रख पाते हैं पर भी कई चिट्ठों के ब्लॉगरोल में हैं। उन सभी मित्रों को आभार।

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