शनिवार, अगस्त 27, 2005

चाय की चुस्की के साथ ब्लागिंग के सूत्र

ऐसा भी कहीं होता है कि आप सुनील दीपक की बनाई चाय की चुस्कियां लेते हुये फुरसतिया के ब्लागिंग के सूत्र घोंट रहे हों। अतुल तो कहते हैं कि ऐसा केवल भारत में ही संभव है। उधर स्वामीजी अपनी चुनरी का दाग दिखा रहे हैं, उसी के बगल में खड़े लक्ष्मीगुप्त पर किसी महाकवि की आत्मा सवार हो गई जिसका इलाज शायद यही है कि रवि रतलामी से भारतीय भाषाओं में काम करने का तरीका सीखा जाये तथा प्यार का इम्तहान दिया जाय।

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