रविवार, अक्तूबर 10, 2010

साला न कहें भाई साहब कहें





सबेरे के नास्ते के बाद हम लोग सेवाग्राम देखने गये। दस मिनट की दूरी पर स्थित आश्रम में आज सुबह सबसे पहले शायद हमारी टीम ही पहुंची। गांधी जी से जुड़ी तमाम वस्तुएं देखीं। गांधी जी दिन प्रतिदिन की दिनचर्यी का विवरण देखकर हम सभी को एक बार फ़िर लगा -गांधीजी अद्भुत व्यक्तित्त्व थे। कई लोगों ने इस बात को वहां रखे रजिस्टर में भी लिखी।

गांधी आश्रम के बाद हम पास ही स्थित विनोबा भावे जी का आश्रम देखने गये। आश्रम के पास बहती पवनार नदी की तरफ़ सब पहले गये। वहां फ़ोटो सोटो हुये। आश्रम से हम लोग सुबह नौ बजे लौट आये।

लौटकर नाश्ता करते हुये आलोक धन्वा जी का कविता पाठ सुना। उनका वक्तव्य रिकार्ड किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने कल कही बातें भी दोहराई। गुजरात दंगो पर उनकी बात पर संजय बेंगाणी की त्वरित प्रतिक्रिया थी कि जब यह वक्तव्य पोस्ट किया जायेगा तब वे अपनी टिप्पणी करेंगे। संजय बेंगाणी ने यह भी कहा कि उनको तो दुनिया बहुत अच्छी लगती है।

नाश्ते के बाद शुरु हुये सत्र में ब्लागरों ने अपने विचार व्यक्त किये। शुरुआत सुरेश चिपलूनकर ने की। नये ब्लागरों को अपनी तरफ़ से उन्होंने ब्लागिंग के गुर सिखाये। उन्होने बताया कि दूसरे के ब्लाग पर टिप्पणी करना सबसे अच्छा तरीका ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिये। तत्थात्मक बातें लिखनी चाहिये। सामग्री स्रोत का लिंक देना चाहिये। माडरेटर के बारे में उन्होंने बताया कि विरोधी बातों का शालीलना से जबाब देना चाहिये। बहुत गुस्सा आये तो आप साले की जगह भाईसाहब शब्द का इस्तेमाल करते हुये कह सकते हैं- भाई साहब आप बहुत हरामी हैं।

हर्षवर्धन त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य की शुरुआत वर्धा विश्वविद्यालय को और खासकर विभूति नारायण राय और सिद्धार्थ त्रिपाठी को इस बात को धन्यवाद देते हुये कही कि उनके सहयोग से यह संभव हुआ कि ब्लॉगिंग पर बातचीत करने के लिये मंच मुहैया कराया। हर्षवर्धन ने आचारसंहिता को सिरे से खारिज करते हुये यह बताया आप जो भी लिखें पूरी बात पक्की जानकारी से लिखे। उन्होंने विस्फ़ोट,मोहल्ला,भड़ास, अर्थकाम.काम का उदाहरण देते हुये बताया इन ब्लाग में उद्यमिता के माडल के रूप में लिया जाना चाहिये। हम समय और आवश्यक्ता के अनुरूप के साथ बदलते हैं। आज यशवंत सिंह उतने ही आक्रामक नहीं हैं जितने शुरुआती दिनों में थे। वे आज ज्यादा समझदार से हुये हैं। यह वित्तीय जरूरत से पैदा यह समझ है। और ब्लागिंग अनामी ब्लागर के बारे में अपनी राय रखते हुये हर्षवर्धन ने कहा कि व्यक्तिगत हिसाब निपटाने के लिये बेमानी ब्लाग लिखना अनुचित है लेकिन जनहित में संस्थागत लड़ाइयां लड़ने के लिये बेनामी की आवश्यकता पड़ सकती है। उनका मानना है कि ब्लाग पर विश्वनीयता बनाये रखे के लिये खबरें तथ्यात्मक होनी चहिये।

रवीन्द्र प्रभात ने अपने ओजपूर्ण वक्तव्य में बताया कि हम अच्छे बनें, धनात्मक रहें, खुश रहें। हम अपनी पत्नी को नहीं बदल सकते है, साथ जुड़े अन्य लोगों को नहीं। लेकिन हम प्रयास कर सकते हैं कि अपने आप को बदल सकते हैं। कई उदाहरण देते हुये उन्होंने बताया कि कैसे हम अच्छे विचार ब्लागर बन सकते हैं।

अविनाश वाचस्पति ने कहा कि आचार संहिता की बात अगर न भी मानें तो मन की बात माननी चाहिये और ऐसी बातें करने से बचना चाहिये जिससे लोगों को बुरा लग सकता है।

प्रवीण पाण्डेय ने राजा बेटा की तरह अपना और अपने ब्लॉग का परिचय देते हुये दुविधा जाहिर की वे उन लोगों के सामने अपनी बात कहने आये हैं जिनको पढ़ते हुये उन्होंने ब्लॉगिंग शुरु की। इसे वे अपना सम्मान समझे या यह कि उनको कठिन इम्तहान में खड़ा कर दिया गया है। प्रवीण जी ने अपनी ब्लाग यात्रा के बारे में बताया कि टिप्पणियों और वुधवासरीय पोस्ट से शुरु कर के वे अब अपने ब्लाग पर लिखने लगे हैं- न दैन्यम न पलायनम।

प्रवीण जी ने अतियों से बचने के अपने सहज स्वभाव के बारे में बताते हुये नदी के उदाहरण के माध्यम से बताते हुये बताया कि अतियों पर चलने वाले लोग या तो किनारे पर रुक जाते हैं या भंवर में फ़ंस जाते हैं। लिखने से ज्यादा पढ़ने और जितनी टिप्पणियां उनको मिलती हैं उससे पांच गुनी ज्यादा करने की बात भी प्रवीण जी ने कही।

सुश्री गायत्री शर्मा ने अपने ग्रुप का प्रस्तुतिकरण करते हुये ब्लागिंग की सामाजिक उपयोगिता पर समूह के विचार पेश किया। उन्होंने सुनामी ब्लॉग का उदाहरण देते हुये ब्लॉग की सामाजिक उपयोगिता के बारे में अपनी बात कही। गायत्री शर्मा की बातचीत अलग से पूरी टेप में पेश की गयी है।

कल की तरह आज भी दो मिनट छीनकर यशवंत सिंह मंच पर आ गये हैं। उनका कहना है कि हम हिंदी पट्टी के लोग अतियों में जीते हैं। या तो हम अराजक हो जाते हैं या फ़िर बेहद भावुक। अंग्रेजी के लोग तार्किक होते हैं इसलिये वे गाली और गप्प को कम तथ्य को ज्यादा तरजीह देते हैं। हम हिंदी वाले गाली और गप्पों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, तथ्य पर कम। यशवंत ने अपनी यादों का जिक्र करते हुये यह कहा कि शायद पिछले समय में उन्होंने भी एक आम हिंदी ब्लॉगर की तरह अतियों पर रहते हुये तमाम बेवजह बातें और दूसरों को दुख पहुंचाने वाली पोस्टें लिखीं। लेकिन अब समय के साथ हमारी सोच में बदलाव आया है और अब वे इस तरह की दूसरों को दुख पहुंचाने वाली बेवजह पोस्टें लिखना बंद कर दिया है।

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33 टिप्‍पणियां:

  1. आज का शो तो सुरेश चिपलूनकर जी ने चुरा लिया। रही सही अक्सर रवीन्द्र प्रभात जी ने।
    मजा आ गया जी।

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  2. .
    आप लिखते चलो, मैं पढ़ता रहूँगा
    मज़ा आ रहा है, कुछ बोलूँगा नहीं !

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  3. ‘गांधी आश्रम के बाद हम पास ही स्थित विनोबा भावे जी का आश्रम देखने गये।’

    दोनो बूढे तृप्त हो गए होंगे भाई साहब :)

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  4. वर्धा का ये आंखों देखा वर्णन पढ़ कर बहुत मज़ा आ रहा है
    बहुत अच्छी और तार्किक बातें भी पढ़ने को मिल रही हैं

    धन्यवाद आप सब का

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  5. बहुत अच्छी रिपोर्टिंग है. रवींद्र प्रभात ज़ी, अविनाश वाचस्पति ज़ी के वक्तव्य ने बहुत प्रभावित किया. यही असली ब्लागिंग है. गुणों को पकड़कर चलते रहने से ही मंजिल मिलती है. सम्मलेन की उपलब्धियों के बारे में जानकार बहुत प्रसन्नता हुई.

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  6. अच्छा लगा..... हम जैसे भावुक और अपेक्षाकृत कम ग्यानी लोगों को कुछ सिखने को मिल रहा है. आप बताते रहिये.........

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  7. सुरेश चिपलूनकर जी आप छा गये, आप की रिपोर्ट बहुत अच्छी लगी धन्यवाद

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  8. हा हा हा क्या सुरेश जी ..सालों को साला ही कहिए ...अब सालों को भाई साहब कहने लगेंगे तो ....भाई साहबों को साला कहना पडेगा ...इसलिए पहले वाली स्थिति ठीक है ...

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  9. बहुत अच्छी रिपोर्टिंग चल रही है. सब की बातें हम तक पहुँच रही है.
    एक अनुरोध था की जो आपने फोटो लगाये हैं कुछ ब्लोगर्स को हम चेहरे से नहीं जानते हैं..अगर आप सभी का फोटो के साथ नाम से परिचय करवा देते तो अच्छा रहता कम से कम हम जो इन सब से अपनी कल्पना शक्ति से जो चेहरा बना कर बात करते हैं...उस से मिलान तो कर पाते और वास्तविकता से रु-ब-रु हो जाते.

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  10. अनामिका जी वाला ही अनुरोध मेरा भी है की सभी की फोटो के साथ में नाम से परिचय करवायें ,बाकी तो आप सबको बधाई एवं शुभकामनायें

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  11. चित्र परिचय:
    ऊपर वाला पहला चित्र- दाएँ से बाएँ- सुरेश चिपलूनकर और संजय वेँगाणी जिनके पीछे खड़े हैं प्रियंकर पालीवाल; विवेक सिंह, हर्षवर्धन त्रिपाठी व जय कुमार झा जिनके पीछे से झाँक रहे है डॉ.महेश सिन्हा; गायत्री शर्मा के पीछे खड़े हैं उनके सगे भाई साहब; जाकिर अली रजनीश, अविनाश वाचस्पति,अनिता कुमार जिनके पीछे सफ़ेद शर्ट में अशोक कुमार मिश्र; डॉ कविता वाचक्नवी जिनके पीछे खड़े संजीत त्रिपाठी सूचनापट बाँच रहे हैं;डॉ.अजित गुप्ता,रवीन्द्र प्रभात, अनूप शुक्ल(सबसे बाएँ)

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  12. भूल सुधार-ऊपर के चित्र में गायत्री शर्मा के दाहिने खड़े हैं शैलेश भारतवासी उनके दाएँ ज़ाकिर

    दूसरा चित्र (नीचे- बाएँ से दाएँ)
    अनूप शुक्ल,शैलेश भारतवासी,डॉ. कविता वाचक्नवी,अनिता कुमार,अविनाश वाचस्पति,रवीन्द्र प्रभात, हर्षवर्धन त्रिपाठी, दाहिनी ओर खड़े है डॉ. ऋषभदेव शर्मा और पीछे खड़े हैं ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

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  13. अच्छी प्रस्तुति ,चिपलूनकर जी का अंदाज अच्छा लगा ।

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  14. इस तरह का मिलन सद्भाव तो बढ़ाता ही है,ज्ञान और अनुभव को भी आपस में बांटता है,एक उपयोगी चर्चा!

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  15. भाई साहब आप बहुत हरामी हैं।

    itni sahridyta.......balihari jaoon....

    हा हा हा क्या सुरेश जी ..सालों को साला ही कहिए ...अब सालों को भाई साहब कहने लगेंगे तो ....भाई साहबों को साला कहना पडेगा ...इसलिए पहले वाली स्थिति ठीक है ...bat to sahi hai.......


    pranam.

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  16. मित्रों आपको मेरा वक्तव्य अच्छा लगा… धन्यवाद… :) :)

    @ अजय झा साहब, असल मे मैं टिप्पणी में भाषा की मर्यादा के बारे में कह रहा था… कि यदि सौ बार गालियाँ खाने के बाद आपको गुस्सा आ ही जाये तो "साले तू हरामजादा है…" कहने की बजाय शालीनता से "भाई साहब आप तो बड़े हरामजादे हैं" कहना उचित होगा… :):) हरामजादे को भी महसूस होना चाहिये कि उसे सम्मान दिया गया है… :)

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  17. बहुत सही इस रिपोर्ट से मैं अपने घर में बैठकर पूरे हिंदी ब्लॉगजगत को दिशा-दशा दे रहे ब्लोगिंग के अनुभवी आगंतुकों के द्वारा किये जा रहे विमर्श को पढ़ रहे हैं , यह वैचारिक जागरूकता बनी रहनी चाहिए .....वैसे रवीन्द्र प्रभात जी ने बड़ी ही अद्भुत और प्रासंगिक बाते कही है कि हम रातों-रात अपनी पत्नी, बच्चों, सहयोगियों को नहीं बदल सकते पर स्वयं को बदल सकते हैं ....यदि ऐसा हो गया तो मेरा विशवास है हिंदी ब्लोगिंग एक दिन अंग्रेजी ब्लोगिंग से बहुत आगे निकल जायेगी ........अविनाश जी और हर्षवर्द्धन जी के भी विचार अच्छे लगे ,,,,,जानकारी के लिए आभार !

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  18. ajay kumar aur ajay jha mae farak haen suresh ji

    yae do vyakti haen

    blog seminar apni jagah haen
    blog likhna apni jagah
    sakriyataa sae badaa kuch nahin haen sakriyae honae sae ajay kumar auar ajay jha kaa antar pataa rehtaa haen !!!!!!!!!!!

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  19. बड़े हस्ताक्षरों के दर्शन हो गये इस संगोष्ठी में।

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  20. मिलने जुलने से आपस में एकदूसरे के प्रति जो जिम्‍मेदारी की भावना विकसित होती है, वही नैतिकता है और ब्‍लॉगर मिलन समारोह सदैव आयोजित होते रहने चाहिए। सभी अपने अपने और जहां जहां पर जब जब भी जाएं, आपस में अवश्‍य मिले-मिलाएं।

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  21. जवाब दिया जाएगा और बराबर दिया जाएगा :)


    वे कहते है बहुत अँधेरा है.
    मैं कहता हूँ आँखे बन्द रखोगे तो दिखेगा कैसे?

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  22. @प्रविणजी, हमारा हस्ताक्षर बहुत छोटा है. हम भी बड़े हस्ताक्षरों को देख धन्य धन्य हो गए. आपसे सक्षिप्त ही सही, मुलाकात बहुत अच्छी लगी.

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  23. प्रवीण भाई,
    संजय बेंगाणी जी की टिप्पणी को मेरा भी वक्तव्य समझा जाये… :)
    @ रचना जी - मैं अजय कुमार जी से माफ़ी चाहता हूं… जल्दी-जल्दी में अजय झा टाइप हो गया…

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  24. इस रिपोर्ट को पढ़ कर एक बार फ़िर यादों में खो गये( वैसे अभी तो उबरे भी नहीं उनसे) हम भी प्रवीण जी की ही तरह इन सब वरिष्ठ ब्लोगरों से रु ब रु हो कर धन्य हो गये।

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  25. kai sawaal hai jo mere dimaag mein aa rahe hain is sammelan aur isake swaroop ke baare mein !

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  26. Lagta hai Mahatma Gandhi Hindi Vishwavidyalaya men saare moorkh wahan ka blog chala rahe hain . Shukrawari ki ek 15 November ki report Priti Sagar ne post ki hai . Report is not in Unicode and thus not readable on Net …Fraud Moderator Priti Sagar Technically bhi zero hain . Any one can check…aur sabse bada turra ye ki Siddharth Shankar Tripathi ne us report ko padh bhi liya aur apna comment bhi post kar diya…Ab tripathi se koi poonche ki bhai jab report online readable hi nahin hai to tune kahan se padh li aur apna comment bhi de diya…ye nikammepan ke tamashe kewal Mahatma Gandhi Hindi Vishwavidyalaya, Wardha mein hi possible hain…. Besharmi ki bhi had hai….Lagta hai is university mein har shakh par ullu baitha hai….Yahan to kuen mein hi bhang padi hai…sab ke sab nikamme…

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  27. Praveen Pandey has made a comment on the blog of Mahatma Gandhi Hindi University , Wardha on quality control in education...He has correctly said that a lot is to be done in education khas taur per MGAHV, Wardha Jaisi University mein Jahan ka Publication Incharge Devnagri mein 'Web site' tak sahi nahin likh sakta hai..jahan University ke Teachers non exhisting employees ke fake ICard banwa kar us per sim khareed kar use karte hain aur CBI aur Vigilance mein case jaane ke baad us SIM ko apne naam per transfer karwa lete hain...Jahan ke teachers bina kisi literary work ke University ki web site per literary Writer declare kar diye jaate hain..Jahan ke blog ki moderator English padh aur likh na paane ke bawzood english ke post per comment kar deti hain...jahan ki moderator ko basic technical samajh tak nahi hai aur wo University ke blog per jo post bhejti hain wo fonts ki compatibility na hone ke kaaran readable hi nain hai aur sabse bada Ttamasha Siddharth Shankar Tripathi Jaise log karte hain jo aisi non readable posts per apne comment tak post kar dete hain...sach mein Sudhar to Mahatma Handhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya , Wardha mein hona hai jahan ke teachers ko ayyashi chod kar bhavishya mein aisa kaam na karne ka sankalp lena hai jisse university per CBI aur Vigilance enquiry ka future mein koi dhabba na lage...Sach mein Praveen Pandey ji..U R Correct.... बहुत कुछ कर देने की आवश्यकता है।

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  28. MAHATMA Gandhi Hindi University , Wardha ke blog per wahan ke teacher Ashok nath Tripathi nein 16 november ki post per ek comment kiya hai …Tripathi ji padhe likhe aadmi hain ..Wo website bhi shuddha likh lete hain..unhone shayad university ke kisi non exhisting employee ki fake id bhi nahin banwai hai..aur unhone program mein present na rahne ke karan pogram ke baare mein koi comment nahin kia..I respect his honesty ..yahan to non readable post per bhi log apne comment de dete hain...really he is honest...Unhen salaam….

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  29. महोदय/महोदया
    आपकी प्रतिक्रया से सिद्धार्थ जी को अवगत करा दिया गया है, जिसपर उनकी प्रतिक्रया आई है वह इसप्रकार है -

    प्रभात जी,
    मेरे कंप्यूटर पर तो पोस्ट साफ -साफ़ पढ़ने में आयी है। आप खुद चेक कीजिए।
    बल्कि मैंने उस पोस्ट के अधूरेपन को लेकर टिप्पणी की है।
    ये प्रीति कृष्ण कोई छद्मनामी है जिसे वर्धा से काफी शिकायतें हैं। लेकिन दुर्भाग्य से इस ब्लॉग के संचालन के बारे में उन्होंने जो बातें लिखी हैं वह आंशिक रूप से सही भी कही जा सकती हैं। मैं खुद ही दुविधा में हूँ।:(
    सादर!
    सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय
    वर्धा, महाराष्ट्र-442001
    ब्लॉग: सत्यार्थमित्र
    वेबसाइट:हिंदीसमय

    इसपर मैंने अपनी प्रतिक्रया दे दी है -
    सिद्धार्थ जी,
    मैंने इसे चेक किया, सचमुच यह यूनिकोड में नहीं है शायद कृतिदेव में है इसीलिए पढ़ा नही जा सका है , संभव हो तो इसे दुरुस्त करा दें, विवाद से बचा जा सकता है !

    सादर-
    रवीन्द्र प्रभात

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