
व्यंग्य की विधा बडी मनोरंजक और मारक होती है ।उसके पाठक हर तरह के होते हैं ।कमअक्ल पाठक मज़ाक समझ कर हँस लेते हैं और मज़ेदार सी टिप्पणी कर के खिसक लेते हैं ।समझदार पाठक उसमेँ निहित व्यंग्यार्थ तक पहुँच जाते हैं । बीच के पाठक संत की सी हँसी हँस कर-कि देखो दुनिया में त्राहि त्राहि हो रहे है और इन्हे बचकानी बातें सूझ रही हैं -- या मुँह बिचकाते हुए निकल जाएँंगे मानो सोच रहे हो-अरे यार क्या सोच कर आये थे क्या मिला ।
जो भी हो ;व्यंग्य अधिक लोकप्रिय विधा है ।हाशिया पर अरुन्धती राय का लम्बा सा आलेख पढने की बजाय लोग कहीं हास्य-पुराण पर टिपियाते नज़र आयेंगे ।
वैसे व्यंग्य के माध्यम से अपनी बात कहना भी सबके बस की बात नही ।कडी बात को चासनी में लपेटने के समान है ।यह ‘सूरी ऊपर नट विद्या’ के समान है ।
समीर जी इसके पक्के खिलाडी हैं ।उनकी उडंतश्तरी कल्पना की ऊँची उडान भरती है ।भारत यदि अमरीका बन जाए तो क्या-क्या होगा पर तीखी –मज़ेदार रचना ----
जो भी हो ;व्यंग्य अधिक लोकप्रिय विधा है ।हाशिया पर अरुन्धती राय का लम्बा सा आलेख पढने की बजाय लोग कहीं हास्य-पुराण पर टिपियाते नज़र आयेंगे ।
वैसे व्यंग्य के माध्यम से अपनी बात कहना भी सबके बस की बात नही ।कडी बात को चासनी में लपेटने के समान है ।यह ‘सूरी ऊपर नट विद्या’ के समान है ।
समीर जी इसके पक्के खिलाडी हैं ।उनकी उडंतश्तरी कल्पना की ऊँची उडान भरती है ।भारत यदि अमरीका बन जाए तो क्या-क्या होगा पर तीखी –मज़ेदार रचना ----
इसी कड़ी में एक और घटना होगी कि लादेन लाख कोशिश कर लें, उसके जवान बिना स्टाईल बदले शहीद नहीं हो पायेंगे. वो हवाई जहाज हाई जैक करके बिल्डींग में घूसने की तैयारी करेंगे तो अव्वल तो उतनी ऊँची बिल्डींग मिलेगी ही नहीं, जिसमें हवाई जहाज घूस जाये. और गर मिल भी जाये, तो सुबह सुबह ९-१० बजे दफ्तर में होगा कौन? गिरा लो बिल्डींग. कोई मरा ही नहीं. कई बार तो मुझे लगता है कि बिल्डींग में हवाई जहाज घुसे, उसके पहले ही हवाई जहाज की इत्ती तेज आवाज से ही बिल्डींग गिर जायेगी और हवाई जहाज उड़ते हुये दूसरी तरफ निकल जायेगा. लो फिर हवाई जहाज का भी कोई नहीं मरा.
आपदाओं में सुअवसर तलाशते नेताओं,ब्यूरोक्रैटस, पत्रकारों पर मसिजीवी ने व्यंग्य-बाण छोडा है ।अगला मैगस्ऐसे मिलेगा जिस किताब को उसका नाम होगा –एवरीवन लव्स ए गुड फ्लूद ....सारी....फ्लस....ओह..सॉरी फ्लड कीबोर्ड सही टाइप नही कर रहा –
वैसे बाढ़ सबके लिए आनंद लाती है- नेता, नौकरशाह पत्रकार तो चलो भौतिक कारणों से खुश होते हैं और बच्चे जो बच जाएं वो इस बात से खुश हो जाते हैं कि इस बहाने नौका विहार का आनंद मिलता है, स्कूल नाम की कोई चीज हो तो उससे छुट्टी मिलती है। बड़े
इसलिए खुश हैं कि गंगा/यमुना/ब्रह्मपुत्र मैया या जो भी मैया हो वह घर आकर दर्शन देती है। तो कुल मिलाकर ये कि बाढ़ मैया को हम कोई पसंद करता है- एवरीबॉडी लव्स ए गुड फ्लड।
अमिताभ बच्चन की खैर खबर ली है आलोक जी ने ---
मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती-यह गीत एक जमाने में किसान भाईयों के लिए गाया जाता था। पर बाद में इस गीत पर अमल किया प्रापर्टी डीलरों ने। हर जगह जमीन कब्जिया ली इस उम्मीद में कि थोड़े दिनों बाद सोना उगलेगी। सच भी है कि इस देश की धरती ने सोना उगला है, प्रापर्टी डीलरों के लिए, नेताओं के लिए।
अपनी चकल्लस में चक्रधर जी बचपन में पढी’भेडे और भेडिये ‘ वाली कहानी कहानी का व्यंग्य कविता मेँ उडेल लाए हैं ।
शिवकुमार मिश्र और ज्ञनदत्त जी ने “ अखिल भारतीय निंदक महासभा”का गठन किया है ।निन्दक और निन्दक नियर राखिये वाले लोग मेम्बर हो सकते हैं।
अब थोडा गैर रूमानी गैर व्यंग्य यानी विचारात्मक लेख ।
मोहल्ला पर कभी कभी कुछ सार्थक भी मिल जाता है ।दीपक मंडल क लेख अच्छा है ।हिन्दी-सेवा का दम्भ वाले ज़रूर पडें...सॉरी...पढें।
हिंदी में ज्ञान का क़ारोबार नहीं होगा, लेकिन उसी हिंदी में मनोरंजन बिकेगा। मनोरंजन चैनलों में भी मनोरंजन बिकेगा और न्यूज चैनलों में भी मनोरंजक ही बिकेगा। इस मायने में हिंदी अगर अंग्रेज़ी बनने की कोशिश करेगी तो नाक़ामयाब हो जाएगी।काशीविश्वविद्यालय पर बनारस के प्रसंग पढ सकते है वैयक्तिक विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के साथ ।
गंगा में लम्बे समय तक डुबकी लगाने के आदि शम्भू को एक बार कुँए में डूबे व्यक्ति की लाश निकालने के लिए कुदाया गया और पत्थर से टकरा कर उनकी मौत हो गयी
और अंत में एग्रीगेटर्स के बारे में ।अब चड्डी पहन कर चार फूल खिल चुके हैं हिन्दी के बियाबाँ में तो ग्राफ ऊपर-नीचे भी होंगे ही ।नीलिमा जी के शोध के परिणामोँ पर ही एक चर्चा चल रही है टिप्पणियों में ।
देख लीजिए खुद ही ---
भाए विपुल और आलोक गीमेल...सॉरी जीमेल पर चैटिया काहे नही लेते :)
सिद्ध हुआ कि ब्लाग चर्चा का सार्थक मन्च है ।
आप भी जाकर अपना स्टैट काउन्टर देखो और टपिया कर यहां का स्टैट बढाओ जी !!
आपने http://indianphotos.wordpress.com/ से जो छायाचित्र लिया है उसके लिये आभार. यदि कडी और दे देते तो "रचनात्मक आम प्रतिलिपि अधिकार" की सारी शर्तें पूरी हो जाती. अत: आपका काम इस टिप्पणी द्वार मैं ने कर दिया है !!!
जवाब देंहटाएंयह बहुत जरूरी है कि हिन्दी के बहुत सारे रचना कर्मी अपनी कृतियों को "रचनात्मक आम प्रतिलिपि अधिकार" के अंतर्गत लायें
अच्छी चर्चा.
जवाब देंहटाएं"हिंदी में ज्ञान का क़ारोबार नहीं होगा"
जवाब देंहटाएंइस ज्ञानी को प्रणाम.
सत्य वचन:
जवाब देंहटाएंएवरी वन लव्स ए गुड चर्चा....खास तौर पर जब हमारी इतनी खास तारीफ की गई हो, बहुत साधुवाद और आभार. हमेशा ऐसे ही सुविचार आपके दिलो दिमाग पर आच्छादित रहें, इस हेतु अनेकों शुभकामनाऐं. :)
'Flood' का उच्चारण 'फ़्लड' होता है , 'फ्लूद' नहीं । 'बाढ़' से अपरिचितों के लिए 'फ़्लड' का परिचय प्रासंगिक है ।
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