बुधवार, अगस्त 15, 2007

जश्न-ए-आजादी मुबारक हो..!

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां प्यारा



आज आजादी का दिन है सो एक बार फिर हाजिर हैं। बोलने की आजादी है सो थोड़ा सा बतिया भी लें।

हमने चिट्ठाचर्चा इस रूप में शुरू किया इसके पीछे आलोक पुराणिकजी का आग्रह मुख्य है। हमारे चिट्ठाचर्चा के तमाम साथी अपनी विभिन्न व्यस्तताऒं के चलते इसमें योगदान नहीं कर पा रहे हैं। आशा है वे फ़िर खाली होंगे और चर्चा का बक्सा भरेंगे।
साथियों में अनुरोध है कि वे जब समय मिले तब चर्चा करें। जिस रूप में मन आये करें। बस करते रहें। पाठक ही तय करेंगे कि उनकी चर्चा का स्तर और अस्तर क्या है।

समय की कमी के कारण कभी-कभी सभी चिट्ठों की चर्चा नहीं हो पाती। इसे अपने लिखे के प्रति अनादर और उपेक्षा के रूप में लेकर अपने प्रति अन्याय करने से बचें।

हमारी चर्चा का मूल स्वर मौज-मजे का है। किसी को चोट पहुंचाना या खिल्ली उडाना इसमें कहीं से शामिल नहीं है। फिर भी जिन साथियों को मौज-मजे से परहेज है वे संकेत दे देंगे तो उनकी ब्लाग-पोस्ट की चर्चा से परहेज किया जायेगा ताकि उनको कष्ट न हो। हम भी अपने अनुभव से सावधान रहने का प्रयास करेंगे। :)

आज के चित्रों में पहला चित्र वीरेंद्र विज की पोस्ट से और दूसरा चित्र संगीता मनराल की पोस्ट से लिया गया। आभार सहित भाई!

आज चौदह अगस्त के चिट्ठों की टाइटिल चर्चा हुई। सारे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं।

१.जी. टी. रोड - चौक - घंटाघर - इलाहाबाद - GT Road -Chowk - ClockTower - Allahabad : सब एक दाम, हिंदी अनुवाद साथ में! आइये मिसिरजी की दुकान पर!

२.पढूं या सोच : दोनों ही काम लेटे-लेटे हो जायेंगे। न हो तो सिक्का उछाल लें।

३.देखिये :ख़ून के आंसू क्यों रोता जा रहा है आदमी!

४.सुन के देखो :मजा आ जायेगा

५.धूम्रपान के शौकीनों की संख्या में इजाफा :सच क्या है यह तो पीने वाला ही जाने लेकिन यह बात सरासर गतल है।

६.धन्नो का देशप्रेम :जरा , आंख मे भर लो पानी।

७.शब्दों की वापसी : स्वागतम, अथ स्वागतम!‘आओ’ ,’जाओ’,’खाओ’,’नहाओ’!

८.न जाने कैसी आज़ादी……? : अपनों के ज़ुल्म देखकर, रूह थर्राई है….!


९.आज़ादी को सलाम :अभी भी कई सारे मसले हैं जिनकी तरफ देखकर यही अहसास होता है कि हम अब भी आज़ाद नहीं है! इसलिये सलाम वापस! :)

१०.स्वतन्त्रतादिवस की पूर्व सन्ध्या पर : तस्लीमा को भारत की नागरिकता दी जाये

११. आगरा की तस्वीरें:बहुत बढिया पर तस्वीरो को चोरी से बचाए रखे।

१२.123 एग्रीमेन्ट और सांसदो/विधायकों की समझ :अच्छा खासा कामेडी का कार्यक्रम है!समझे या आप भी सांसद/विधायक हैं!

१३.झंडा ऊंचा रहे हमारा : ये तो टेढे़ हैं, एक दूसरे से बंधे हैं ऊंचे कैसे होंगे!

१४.वैदिक संस्कृत स्वर चिह्नों का यूनिकोड मानकीकरण :इस सम्बन्ध में अभी तक हुई प्रगति तथा कुछ तकनीकी जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है।

१५ हीन से हीनतर की धारा: हम तो इसी धारा के साथ बहेंगे।

१६.कुण्डलिनी ध्यान :
किसी कैसेट को चालू कर लें. जो संगीत आपको पसंद हो उसे लगा लें. और पंद्रह मिनट उस संगीत की धुन पर नाचिए. बस हो जायेगा!

१७.राष्‍ट्र वन्‍दना : करें मन को आराम मिलेगा। सारी खिचखिच दूर!

१८.राजनीति के ’पिंजर’ में फंसा लोकतंत्र :पिंजरा खोलते ही लोकतंत्र उड़ जायेगा!

१९.
१४ अगस्त, मंगलवार :श्री भोपाला राम पुत्र मूला राम माली निवासी प्रतापजी प्रोल बाड़मेर ने चोटे आना आदि धारा २७९, ३३७ भा० द० स० के तहत पुलिस थाना कोतवाली पर मुकदमा दर्ज करवाया।

२०.जश्न-ए-आजादी : मुबारक हो..!

२१.इस जालचोरी के पीछे क्या है राज ?? : राज को राज रहने दो।

२२.मां का आंचल :यह गीत अपने बच्चों को सिखायें !

२३.देश उर्फ विंडोज 1947 :अंधेरे और उजाले का फ्यूजन ही फ्यूजन है, फ्यूजन क्या विकट कनफ्यूजन है।

२४.खूब मनाओ जश्न आजादी का पर :पर देख लो कोई छूटा तो नही है!

२५.ये बच्चा किसका बच्चा है.... :सबका है क्योंकि इस जग में सबकुछ रब का है, जो रब का है वो सबका है।

फ़तेहपुर सीकरी की दरगाह

२६.रिक्शा चलाया प्यार में :ये प्यार दिन दूना रात चौगुना बढ़े!

२७. दम दमा दम इन्डिया: लगे रहो मुन्ना भाई!

२८.आज़ादी के साठ बरस : गलत मत कहो..!

२९.गधा आजाद है चरने को : हम भी साथ लग लिये। आप भी आप न!

३०. मैं, मुक्तिबोध, राजेश जोशी और आसमान की सैर:यह चांदनी भी बडी मसखरी है. तिमंजिले की एक खिडकी में बिल्ली के एक सफेद धब्बे सी चमकती हुई!

३१.ब्लॉगवाणी में अपने ब्लॉग को लेकर मैं धर्मसंकट में :इसका अर्थ है कि मुझे अपना लिखा स्वयं पसन्द नहीं है ।

३२. दांत गया:अब मैं खाना कैसे खाऊंगा ।

३३.कहीं से नहीं आए जहाँपनाह, हम यहीं थे और हमारे ज़ख्मों से खून रिस रहा है आलमपनाह

३४.जन-गण-मन की धुन किसने बनाई :राम सिंह ठाकुर ने!


३५.तब तक सब प्रश्न अनुत्तरित होंग : मेरी ही तरह किनारे खड़े होंगे!

३६.15 अगस्त की कुछ यादें : ठंडे बस्ते से।

३७.60 साल की स्वतंत्रता : हो गयी अब तो पी के गायेंगे आजादी के गाने!

३८.एक मर्म, जो दिल को छूता है : महफिल में सब वाह-वाह कर उठे।

३९. भारत में एक अदद भारतीय की खोज: हम हिंदुस्तानी ...

४०.बुंदेलखंडी मज़दूरों के गाने :और उन तक अब पहुंचना असंभव है!

४१.
60 साल का भारत....क्या सचमुच?
: हां भाई आपको क्या विश्वास नहीं होता। देखिये न सब तरफ़ सठियाये लोग टहल रहे हैं।

४२.नोकिया फोन प्रयोग करने वालों के लिये जरूरी सूचना :फट सकती है नोकिया की बैटरी!
४३. कितने पिये है दर्द: दीवानगी में कट गए मौसम बहार के/अब पतझड़ों के खौफ से दामन बचाऊं क्या?

४४.स्वतन्त्रता दिवस यानी आजादी : फ़िर आ गया स्वतंत्रता का सरदर्द

४५.जिन वेगस नहीं वेख्या... : वे दूसरे की रक्षा क्या करेंगे

४६.लिखते हुए कभी नहीं डरना कि दो बार अवतरित होते-होते रह गए बुद्ध

४७.तकदीर ले आना मेरी थोड़ा काम है उससे!

४८.शैशव’ पर अतिक्रमण और शैशव की ताकत : राज्य सभा में चर्चा - एड्स में कमी

४९. बैकअप जो लिया होता …..: तो सेकेट्री किसी के साथ भागती नहीं!

५०. इसका गुलशन फूंक दूं उसका शबिस्तां फूंक दूं: जो करना हो करो लेकिन पहले फ़ायर ब्रिगेड बुला लो।

५१.हाथ धोने की औपचारिक नोटिस : मेरा बकवास है!

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4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब। हमेशा की तरह दिलचस्प

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  2. ठीक है, फिर से मुबारक हो जश्ने आजादी.

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  3. are aaj to hm bhi shamil hai.

    swatantrata divas ki badhai.

    english me likhne ke liye maafi chahenge kyunki hamare blog me kuch problem ho gayi hai. aasha hai bura nahi maanege.

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  4. प्रिय अनूप

    बहुत अच्छा चुनाव है. चित्रों का चुनाव भी बहुत सही किया है.

    आगे से हर चर्चा में चित्रों को भी जरूर चुनें. एक चित्र एक पूरी कहानी कह जाता है -- शास्त्री

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