रविवार, अगस्त 12, 2007

इस ब्लागिंग के चक्कर ने निकम्मा हमें बनाया...

एक धांसू च फ़ांसू शेर है-

मेरे सहन( आंगन) में उस तरफ़ से पत्थर आये,
जिधर मेरे दोस्तों की महफ़िल थी।

आदत हो गयी है अब तो इसकी। गाहे-बगाहे पत्थरबाजी होती रहती है। आज का पत्थर उड़नतश्तरी से था। मुस्कराते हुये उलकापिंड पर लिखा था-यह स्टाईल बेहतरीन है, जारी रखें. और भी अच्छा कर सकते हैं आप यदि बंदे की पोस्ट भी कवर करें. शुभकामनायें.

अब बंदे का टाइटिल कवर करें, उसकी पोस्ट कवर करें। कल को आप बोलोगे- बंदे को भी कवर करो, उसके घर वालों को भी कवर करो। किसको-किसको कवर करें भाई! ई हमसे न होगा समीर भाई! आप करके दिखाइये, हम फ़ालो करने का
असफ़ल प्रयास करेंगे। आपकी सुविधा के लिये टाइटिल चर्चा को सामूहिक जगह पर ले आये हैं। मुलाहिजा फ़रमाया जाये।

मेरी पसंद


१.एडिसन, न्यू जर्सी 'इंडिया-डे परेड' में उर्मिला मातोंडकर: क्या कर रही हैं?

२.ये हैं हिन्दुस्तान के असली हीरो ! : इनको आदर देना शुरू करें क्या!

३.गायब गोल्डन चिड़िया : आलोक पुराणिक के यहां बरामद! श्रीश ने सुकून से मरने की पेशकश की।

४.चूसने चखने का चस्का :आम और खास सब इसके लपेट में।

५.आईफोन के ऐसे प्रयोग… : करने से बचें।

६.पत्रकारिता जनता से दूर होती जा रही है :दूरी बढ़ती जा रही है। जनता (पत्रकारिता के) विरह में करवटें बदल रही है।

७. इंटरनेट बना हर मर्ज की दवा: दर्द बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की।

८.सांसद को पकड़वाएं, ढाई हज़ार रुपये पाएं:इत्ते में कैसे होगा भाई, कुछ पैसे बढ़ायें।

९.स्टेटस सिम्बल पार्ट-३ : स्टेटस सिम्बल के टुकड़े-टुकड़े हो गये। ये तीसरा है। संभालो।

१०.इतवारी टाइटल चर्चा : छुट्टी में तो बख्सो यार। ठेलते रहते हो जबरिया, हर दिन हर वार!

११.अम्मा जी :भाग : वर्ना आपका सम्मान हो जायेगा।

१२.अमरीका में अखबार :बहुत स्वस्थ होते हैं। लगता है वे भी पिज्जा खाते हैं, ऐडियाते हैं।

१३. जंगल में लोकतंत्र:राजा की मति फिर गयी है।वह जोर-जोर से हंस रहा था।

१४. जीवन और कहानी: एक ही पैक में।

१५.राइनाइटिस ऍलर्जी का आयुर्वेदिक उपचार : तुरन्त शर्तिया फ़ायदा। फ़ायदा न होने पर टिप्पणी करें।

१६.ब्लू अम्ब्रेला : नीली छतरी वाले सिनेमा घर की सबसे अच्छी फ़िल्म है।

१७.राह देख देख कर कही ऐसा न हो.: कि बैठे बैठे आंख नम हो जायें, काली रात भी रंगीली लगे,हिन्दी से एक बार फिर प्यार हो जाये,जिन्दगी पीछे छूट जाये ..।

१८.एक अनकही बात :अभी तो मुझे चुराने हैं,कुछ रंग इन,रंगबिरंगी तितलियों से। वैधानिक चेतावनी:- चोरी संज्ञेय अपराध है।

१९. बारिष आयी: जो आया है सो जायेगा, राजा रंक फ़कीर।

२०.स्वार्थी पुत्र :अपनी मां को डांटता है। निस्वार्थी दूसरों की मां को ?

२१.किस-किस की नींद असहज हो रही है? : जहालत के अंधेरे से। जबकि अभी तक हमारी लज्जा कोरी है। पता नहीं वह काली है या गोरी है।

२२. 60 साल भारत: युवा पीढी को क्या मिला?:हाथों में लैपटॉप और हाथों मे सिगरेट। माडल और ब्रांड भी बताना मांगता क्या?

२३.हिंदी टूलबार के बारे में विस्तार से : अपने आइने में देखें। मुंह सामने की तरफ़ रखकर भाई!

२४.ये बुर्जुवा सरकार कब समझेगी ? : समझेगी भाई, समझ भी जायेगी। अभी तो आप खुद ही बता रहे हैं कि सरकार कपडे उतार कर नाच रही है ।

२५.सास-बहू का सीरियल और झगडा :सास-बहू में कोहराम मचा हुआ था। डर लग रहा था। इसीलिये ये कविता लिख डाली। बुरा मत माने प्लीज!

२६.आशंका है किसी दिन यूं ही मार डाली जाऊंगी : ऐसा नहीं है तस्लीमाजी, आपके लिये बेहतर इंतजाम करेंगे। इलाहाबाद में आपके वक्तव्य का प्रोग्राम कैंसल किया न!

२७.दिल्ली की लड़कियां संकोची नहीं थी।बात करते करते उनका हाथ दोस्तों के कंधे तक चला जाता। अरे सच भाई, रवीश ने खुद देखा है।

२८.हरेली : हमारे लिये बेकार है क्योंकि हरेली का अर्थ या हरेली क्या है यह वही जान समझ सकता है जिसने छत्तीसगढ़ में कुछ साल गुजारें हों और यहां के लोक-व्यवहार का अध्ययन किया हो। हम कभी रहे नहीं न वहां धान के कटोरे में।

२९.चक दे इंडिया - ‘भारत माता’ की जय : कहानी लड़कियों की, जय माताजी की। सब तरफ़ घपला है भाई!

३०.पुनर्जन्म हो यदि मेरा ! : तो ब्लाग यही मेरा मिल जाये।

३१.गंगा और रामचरितमानस से मुक्ति का क्रूर प्रसंग :बुढ़ापे में भी जवान लड़कियों का स्तन पकड़ लेने वाला राजेन्द्र यादव,चार्ल्स शोभराज द्वारा चंद्र शेखर आज़ाद को गाली। विषय प्रवर्तन -मसिजीवी।

३२.हँसना जरूरी है - आखिर क्‍यों ? :क्योंकि बीवी और टीवी में कोई अंतर नहीं है दोनों चार्ज होने पर चलती है।

३३.एक पत्रकार की दुखद मौत, हमारी श्रद्धांजलि : बहुत याद आओगी ठकुराइन...

श्रद्धांजलि


टिप्पणी/प्रति टिप्पणी:



१.टिप्पणी:तकनीकी लोचे अपनी जगह हैं और ग्राहक की भाषा का 'चौड़ापन' अपनी जगह लेकिन उसके बाबजूद दुकानदार के चौड़ेपन पर भी विचार करें- पहले ही आप और जीतू की ऐंठ ने हिंदी अंतर्जाल से उसकी ऐ जीवंत चौपाल लगभग छीन ही ली है।ये आपकी ही पोस्‍ट का लिंक है केवल एक बार पढें और देखें कि कहीं आप अपने ही कहे का विरोध तो नहीं कर रहे हैं- सुनील नारद तक कंटेंट ला रहे हैं यानि ग्राहक हैं- बाकी आपकी दुकान है उसे उजाड़ने से हम आपको कैसे रोक सकते हैं- मसिजीवी।
प्रतिटिप्पणी
मसिजीवी
आपके बारे मे कुछ कहने को बचा ही नही, आपने आकर हिन्दी चिट्ठाजगत मे जो द्वेष/नफ़रत को फैलाया है वो सर्वविदित है, मै आपके तमाशे चुपचाप देख रहा हूँ, लेकिन शायद अब पानी सर से ऊपर हो रहा है। जीतेंन्द्र चौधरी।
दोनों यहां हैं।


मेरी पसंद


छः महिने की छुट्टी लेकर हम तो बहुत पछताये,
दो हफ़्ते में ही देखो लौट के बुध्दू घर को आये...

सिगरेट,कोकीन के जैसे ही ब्लागिन ने नशा चढा़या
इस ब्लागिन के चक्कर ने निकम्मा हमें बनाया...

जाकर ऑफ़िस में जब बैठे, लेखन का ही ध्यान रहा
बिजिनेस मीटिंग में भी ,कविता का ही भान रहा...

चाय के सब ऑडर हमने उलट-पलट कर डाले
मैनेजर,क्लर्क सभी को कविता पर भाषण दे डाले...

छोड़ काम-धाम सभी जब बैठे तुकबंदी करने
एक-एक कर लग गये सभी कविता लिखने...

कुछ ना पूछो भैया सबने कैसा हुड़दग मचाया
अच्छे खासे ऑफ़िस को कवि-बंदर-छाप बनाया...

दो हफ़्ते की इस दूरी ने कितना हमे रूलाया
भूले बिजिनेस हम ,जब ख्याल कविता का आया...

न जायेंगे अब छोड़ तुम्हे ए कविता,
कहते है गुड़ खाके...
रहे सलामत अपनी ब्लागिन
करें टिप्पणी बरसाके...


सुनीता(शानू)

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10 टिप्‍पणियां:

  1. भई वाह-वाह
    शुक्रिया आपके वन लाइनर लगातार आते रहें, ऐसी शुभकामना है।
    चाहे जिसे कवर करें, आपकी मर्जी है। अपनी तो सिर्फ यही अर्जी है कि ये रेगुलर हो। मतलब सिर्फ अर्जी है, बाकी आपकी मर्जी है।

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  2. अरे मेरी किसी भी पोस्ट का कोई उलेख नहीं है । मेने तो सोचा था इतना बाये बावेला मचने के बाद हमारी कवितायों पर भी नज़र जरुर जायेगी । कोई बात नहीं आप चर्चा करते रहें हम पढ़ते रहेगे । ओर जीतेंन्द्र चौधरी जी की प्रतिटिप्पणी से मन के द्वेष खतम होगये , उनके मौन से संताप बढ़ा था क्योकि हिंदी ब्लोग्गिंग मे मुझे वोही लाये है । आज यहाँ दो पंक्तियाँ कोट कर रहीं हूँ , आज से ३२ साल पहले डा सत्यपाल चुघ { किरोड़ी मल , दिल्ली विश्वविद्यालय से कार्य निवृत ओर अब परलोकवासी } मेरे पिता के सहयोगी ने हमारे घर पर सुनाई थी
    "हिंदी है भारत माँ के माथे की बिंदी
    पर माँग अभी भी अग्रेज़ी की है "

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  3. रचना सिंह> "अरे मेरी किसी भी पोस्ट का कोई उल्लेख नहीं है ।"
    गलत बात सुकुल जी. रचनाजी की पोस्ट ही नहीं टिप्पणियों का भी उल्लेख किया करें. खैर, यह संतोष की बात है कि उनका संताप समाप्त हो गया है.

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  4. शुक्रिया अनूप जी क्या कहने इतना सम्मान जब मिलेगा तो भला कोई आप सब को छोड़ कर कैसे जा सकता है,

    आजादी की ६० वी सालगीरह पर आप सभी को मेरी शुभ-कामनाये...

    सच कहती हूँ बात पते की,
    ये छोटी सी दुनियाँ ब्लागिन की...
    कुछ खट्टी कुछ मीठी बातों के संग...
    जैसे पार्टी चाय संग समोसे की...

    सुनीता(शानू)

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  5. चिट्ठाचर्चा एक महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है. "कालजयी" http://kaaljayee.blogspot.com/ के हिसाब से तो कल की पीढियां अनुसंधान के लिये आपके चर्चों का उपयोग करेगी -- शास्त्री जे सी फिलिप

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

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  6. आपकी इस चर्चा पर मेरा कहना यह है कि इसकी जितनी तारीफ की जाए कम है. आप मन से लिखते हैं कमाल करते हैं. वाद-विवाद-संवाद क्या नहीं है इस चर्चा में.
    बड़े भाई हैं बधाई कैसे दूं. यही कह सकता हूं आपने अन्य चर्चाकारों को एक नयी विधा दे दी है.

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  7. माहौल का असर, वो बैठे हैं घर पर
    फूल जो उछाला, वो समझे हैं पत्थर.


    जिनसे सीखा है, उन्हें हम क्या सिखायेंगे
    आप जिस राह चलें, हम उसी पर आयेंगे.


    कहीं पे हँसी तो कहीं गंभीर नजारा भी है
    थोड़ी सी मौज लेने का हक, हमारा भी है.


    --ऐसा भी क्या है, महाराज. सब बेहतरीन तो है. बहुत बढ़िया रही यह चर्चा भी. जारी रहें.

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  8. मस्त है फ़ुरसतिया जी!!
    आपके वन लाईनर तो धांसू च फ़ांसू होते जा रहे हैं दिन ब दिन!!
    शुक्रिया कि आपने इस बंदे की पोस्ट का उल्लेख किया!!

    "हरेली" आपके काम की नही पर "हम लोग" आपके काम का हो सकता है शायद!!
    नज़र डाल लें!!

    आभार!!

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