शनिवार, जून 09, 2007

एक अल्हड-अक्खड चिट्ठा चर्चा,, अन्धेरे में......

इस बार की चर्चा की प्रेरणा मुझे राकेश खंडेलवाल जी से प्राप्त हुई है । कई बार सोचा कि उनके अन्दाज़ में चर्चा करूँ सो आज अवसर लग ही गया :)
वैसे इसके लिए वे अंगूठा नही मांगेंगे , इसका मुझे विश्वास है :)
खैर , एक बडा अंतर यह है कि प्रस्तुत चर्चा अतुकांत है । राकेश जी की तरह तुक मिलाने की भी कोशिश की थी पर .......:)
और अपनी तरफ से कम से कम शब्द इस्तेमाल की कोशिश रही है ।
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आप मुझे जानते हैं ,
दिलबर जानी ,
गंगा के देश में
मैं एक पत्रकार हूँ ....A high caste hindu woman ……!

नयनो से भीगे जलकण
सुखी कौन ,विजयी कौन ?
life in a metro ………….

इसलिए
डी एल एफ के आई पी ओ में निवेश करने से पहले,
शुक्रवार ,8 जून ,2007
84 बीयर और 73 पव्वे ........अ समझे ?!
न्याय हम होने नही देंगे क्योंकि
व्यवस्था हमारे हाथ मे
है
और
गरीबी नही , मिटायी जा रही है गरीबों की पहचान !
इन झूठों का क्या होगा?
दुनिया किसकी मुट्ठी में?
मैं पत्थरों पर गुलाब उगाने चला था नही मालूम था .....
सरकारों ने की भगत सिंह की हत्या
1857 का स्वतंत्रता संग्राम या 1857 का गदर ?
आपका ध्यान किधर ?
धधक रहे हिमाचल के जंगल ,
सिहरन...
उजाले की परछाईं !
किसान पर एक कार्टून !!!
ह्ह !! यही होगा ।
चिट्ठों की भाषा में
उर्दू से हिन्दी ,
तुम से आप !
नीन्द और क्षणिकाएँ ...........
जब भी मुझे
डर लगता है
सोचता हूँ शोर किया जाए
या गायाजाए एक अल्हड गुजराती गीत
चीनी कम और सुकून ज़्यादा !!

इसे चर्चा ही माना जाए , कविता बहाना है ।चर्चा करते हुए , मन भी तो बहलाना है J
तो टिप्प्ण वर्षा आरम्भ हो .....................................

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6 टिप्‍पणियां:

  1. बढिया तुकबंदी
    इधर छत्‍तीसगढ में भी इंद्रदेव की बरसात शुरू हो गयी है

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  2. बदला हुआ ज़माना है अब, गुरु ही देते गुरू दक्षिणा
    और अंगूठा मांगा नहीं, दिखाया जाता सुनो आजकल.
    रही बिहारी की परिपाटी, शब्द तनिक हों मतलब गहरे
    चिट्ठा चर्चा अच्छी की है, उसी रंग में कलम साध कर

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  3. इसे चर्चा ही माना जाए---ठीक है, मान लेते हैं. :)

    वैसे, है भी अलग सा प्रयास..बढ़िया है. बधाई.

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  4. अरे यह क्या हो रहा है? हर जगह कविता बम काहे गिर रहे हैं भई? बचाओ....!!! ;)

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