रविवार, जून 24, 2007

तो यूं हुआ अल्लाह और शिव के बीच संवाद

हिंदी ब्लॉगिंग अब धीरे धीरे युवा हो रही है ! यहां विवाद भी हैं , संवाद भी हैं ! सपने हैं अपने हैं , तकरार है , कटाक्ष है , कराह है –भक्ति ,धर्म, आध्यात्म, विज्ञान , सामाजिक सरोकार ,अपील, प्रेम, लालित्य मौसम क्या है जो यहां नहीं है! आज से सौ वर्ष पहले जब हिंदी साहित्य अपने नए रूप में जन्म ले रहा था तब भी यही महत्वपूर्ण था कि लिखा जाए , खूब लिखा जाए ! आचार्य द्विवेदी उस समय के लेखकों से कहते हैं कि ---चींटी से लेकर पहाड तक , मनुष्य से लेकर निर्जीव तक सब पर लिखा जा सकता है –आज हिंदी चिट्ठाजगत भी मानो इसी रास्ते पर चल रहा है और विषयगत विविधता इसे बचपन से यौवन की दहलीज पर ले जा रही है ! अस्तु ! यहां हमें कल के चिट्ठों की चर्चा करनी है सो यहां देखॆं कि कल क्या लिखा गया !

इयत्ता में बारास्ता मसिजीवी और अतानु डे बताया है कि असल फुरसतिया कौन है जरूर पढें ! रचनाकार मॆं अंतरिक्ष में अस्तित्वहीनता पर वैज्ञानिक नजरिऎ से लिख गया लेख प्रस्तुत किया है रवि जी ने ! रचनाकार के माध्यम से रवि जी के सारे प्रयास हिंदी ब्लॉग के गहरे हित की सोच को प्रकट करते हैं ! चक्रधर की चकल्लस मॆं एक नन्हीं बच्ची के पिता की मृत्यु को उसकी ही वाणी में कहा गया है ! लाल्टू जी के यहां कवि मोहन राणा की सिर्फ तस्वीरों को देखा जा सकता है टिप्पणी में उडन तश्तरी ने आग्रह किया है कि अब कविताएं भी सुनवाई जाएं ! अजदक वाले प्रमोद जी ने नेम ड्राप करने की प्रवृत्ति और बकरी द्वारा लॆंडी गिराने में अद्भुत साम्य दिखाया है क्या यही साम्यवाद तो नहीं प्रमोद जी ;) !


लेकिन कभी-कभी यह भी होता कि यह सधी सारंगी थोड़ा अनियंत्रित होकर फैल जाती.. बकरी की लेंड़ी की पट्-पट् की जगह- गाय के छेरने के कड़क-पड़ाक-ठां-डिड़ि‍क-ठेर्र का सुर प्रभावी सुर हो जाता.. और माहौल फिर तो एकदम ही बसाइन हो उठता.. लोग चौंकन्‍ना होकर जयराज को गालियां देने लगते.. तब उसे भी अंदाज़ हो जाता कि आज नेम ड्रॉपिंग थोड़ी ज्‍यादा हो गई..
अफलातून जी ने जीना से मिलवाया है आप भी मिलें ! जिंदगी के ख्वाबों का चेप्टराइजेशन लावण्या जी के चिट्ठे पर किया गया है ! जिंदगी में मरकर मजा लेने का हुनर-- यह सुभाष जी के चिट्ठे पर जाकर ही मालूम होगा ! उत्‍तराखंड के चिट्ठे पर इतनी पोस्‍ट हैं कि क्‍या बताएं, बस जाकर देख लें।

सुनीता विलियम्स का यान मोदी विरोधी खेमे में क्योंकर गिरा जीरो कॉलम में विचारा गया है जबकि भारत रत्न किसे व क्यों मिले पर थोडा चिंतन भानुमति के पिटारे से निकला हुआ भी देखनीय है ! राजेश रोशन जी के यहां सुनीता जी और भारत रत्न पर विचारा गया है! मसिजीवी जी के चिट्ठे पर आप जाऎगे तो जान पाऎंगे कि हम सब में से कौन हैं मंगलू –पग्गल और कौन हैं नॉनमंगलू – नॉनपग्गल ! यहां तो आप जरूर जाऎं! यदि आप इन नामों से नवाजा जाना पसंद नहीं करते तो अमित जी के चिट्ठे पर जाना न भूलें !
वोट डालकर ताज को बचाएं तो जरूर पर कामरान परवेज जी को भी पढ लें ! सुषमा कौल जी द्वारा सामान्य ज्ञान की क्लास लगाई गई है अटेंड करना न भूलें ! और यदि क्लास के बाद समय बचे तो दीपक बाबू को समझ आऎं कि शाश्वत प्रेम क्या होता है ( वैसे डर वाली बात है क्योंकि वे कह रहे हैं कि ‘पहले’ समझाओ कि शाश्वत प्रेम क्या होता है यदि समझा दिया फिर ? ) ;) माइ हिमाचल में शर्मा जी स्त्री- सशक्तिकरण के नए पहलू को दिखा रहे हैं ! जबकि कमल शर्मा जी मनी के जादू को दिखा रहे हैं शेयर वेयर मॆं मन रमता हो जरूर पढें!
और जाते जाते भोजपुरी में अल्लाह—शिव संवाद को सुनें और हो सके तो गुन भी लें ! और यदि भूखे पेट भजन -गुनन - मनन न हो रहा तो समीरलाल जी के घर फलाहारी दावत पर हो आएं -

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5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी चर्चा है

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  2. हम्म्म बहुत सही चर्चा है

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  3. चर्चा जारी रखें. ब्लोगिन्ग की विधा को स्थापित करने में यह प्रक्रिया बहुत सहायक होगी. अच्छी बात है कि ब्लोग के अपने आलोचक बनें. हाँ, सावधानी की जरूरत बस इतनी है कि ये भी बाद में साहित्य के आलोचकों की तरह गुटबाजी का शिकार होकर तीतर को बटेर न बताने लगे. संक्षेप में पर्याप्त सूचना और अच्छी समीक्षा के लिए साधुवाद स्वीकारें.

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  4. बढ़िया चर्चा. जारी रखें. :) बधाई. फलाहारी दावत का आमंत्रण आपको भी है.

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  5. " लिन्कित मन " की नीलिमा जी ने हमारे धारावाहिक "ज़िँदगी ख्वाब है" को इस चिठ्ठा चर्चा मेँ सम्मिलित किया है
    इस कारण हमेँ अपनी टाइपिँग की मेहनत सफल होती लग रही है :-)
    अन्यथा यूँ सोच रही थी कि किसी ने शायद पढा ही नहीँ -
    धन्यवाद व शुभ कामना सह:
    स्नेह सहित,
    --- लावण्या

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