बुधवार, सितंबर 16, 2009

कौन है आज का ब्लोगर ऑफ़ द डे?

chittha_charcha copy

लमस्कार

चर्चा की शुरुआत में ही हम आपको मिलवा देते है आज के ब्लोगर ऑफ़ द डे से.. आज की ब्लोगर ऑफ़ द डे है बबली जी और क्यों है ये आपको अंत में पता चलेगा.. जो लोग बबली जी से परिचित नहीं है वे कृपया उनके बारे में कुछ जान ले जैसा कि वो अपनी प्रोफाइल में लिखती है..

Blogger of the day!

babli

“मैं बहुत ही दिलचस्प और हँसमुख लड़की हूँ और नए लोगों से दोस्ती करना पसंद करती हूँ!”

अब चलते है आज की चर्चा की ओर
कल का दिवस बड़ा गोल मोल रहा कैसे कैसे जादू मंतर होने लगे हमारे साथ कि क्या बताये.. दोपहर में ब्लोग्वानी पर हमको एक लेख मिला.. एकलव्य नाम के किसी ब्लोगर ने बहुत ही उम्दा व्यंग्य लिखा था.. हमने वहां पर ये टिपण्णी दी

वाह मिश्रा जी बहुत खूब लिखा है आपने..

उसी उम्दा पोस्ट को चर्चा में शामिल करने के लिए उसका लिंक हमने सेव कर लिया था पर जैसे ही उस पर क्लिक किया तो पाया कि ये पेज वहा से रफूचक्कर हो चुका था.. यही नहीं पुरे ब्लॉग का फोर्मेट ही बदल गया..
ब्लोग्वानी वाली तस्वीर में आप मेरी टिपण्णी के साथ उस ब्लॉग का नाम और शीर्षक भी देख सकते है..
eklavy-1
ब्लोग्वानी पर अवशेष उपस्थित
ek-1
डिलीट की गयी पोस्ट

अब हम तो ये सोच रहे थे कि हमने तो मिश्रा जी को इतना उम्दा लिखने के लिए बधाई दी थी फिर भी उन्होंने काहे अपना ब्लॉग डिलीट किया.. ? इसका जवाब तो खुद मिश्रा जी ही दे सकते है..
हम चलते है अगली पोस्ट की तरफ..

राकेश सिंह जी अपनी पोस्ट में बता रहे है कि क्यों मंदिरों के बाहर अश्लील मूर्तियाँ/चित्र अंकित होते है यदि आप भी जानना चाहे तो पढिये उनकी ये पोस्ट


rakesh_sinhहमारे कई मंदिरों मैं अश्लील मूर्तियाँ/चित्र मंदिर के प्रवेश द्वार या बाहरी दीवारों पर अंकित होती हैं | तिरुपति मं भी बिलकुल मुख्य द्वार के ऊपर मिथुन भाव की अंकित मूर्ती देखा तो सहज ही ये प्रश्न दिमाग मैं आया की आखिर हमारे देवालयों मैं अश्लील मूर्तियाँ/चित्र क्यों होते हैं? इधर-उधर बहुत छाना पर इसका वास्तविक और और सही उत्तर मिला मुझे महर्षि वात्सयायन रचित कामसूत्र में |
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वही विवेक रस्तोगी साहब आपको पढ़वा रहे है कुछ बाते कवी कालिदास और मेघदूतम के बारे में


vivek1 शाड़र्गिण: वर्णचौरे – कृष्ण के धनुष का नाम शाड़र्ग है, इसलिये उसे शाड़र्गी कहते हैं। कृष्ण का वर्ण श्याम है तथा मेघ का वर्ण भी श्याम है; अत: उसे कृष्ण के वर्ण को चुराने वाला कहा गया है।
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प्रमोद सिंह जी देर रात का बाजा बजा रहे है.. एक बच्चे के दृष्टिकोण से देखी गयी दुनिया या फिर दुनिया का बच्चे के प्रति दृष्टिकोण पढिये उन्ही के शब्दों में उनके ब्लॉग पर..


google profile june 09 बाहर दूसरे और बच्‍चे हैं लेकिन बच्‍चा समझता है मैं अलग हूं और वे और हैं. बच्‍चों की मांएं तश्‍तरी में खाना लिए उनके पीछे भागती हैं, एक कौर, सिर्फ़ एक और की मिन्‍नत करती हैं, बच्‍चे की कभी ज़रूरत नहीं बनी कोई उसके पीछे घूम-घूमकर मिन्‍नत करे, क्‍योंकि बच्‍चे को भूख लगती है उसे पता होता है कहां देगची में रोटियां ढंककर धरी हैं और कैसे उन्‍हें गुड़ में लपेटकर खा लेने से भूख और कमज़ोरी भूली जा सकती है. कभी ढंकी देगची के भीतर रोटियां न बची रहें तो और क्‍या कैसे खाकर थोड़ी देर ज़िंदा कैसे रहा जा सकता है की तरकीबें जानता है बच्‍चा.
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हिंदी फिल्मो के प्रति यदि आपकी रूचि है और आपको लगता है कि ऐसे ब्लोगों की संख्या कम है तो स्वागत कीजिये एक नए ब्लॉग पिक्चर हॉल का

blog पिक्चर हौल एक प्रयास है फिल्मों के बारे में सीखते हुए उन्हें समझने का। एक फिल्म स्टूडेंट होने के नाते फिल्मों में रुचि है और सीखने की चाह भी है। पिक्चर हौल ऐसे ही लोगों के लिए है जिनकी फिल्मों में रुचि है औ वो मेरी ही तरह सीखना चाहते हैं कि कैसे फिल्मों को मनोरंजन से अलग रखकर तकनीक के नजरिये से भी देखा जाये। उनके मनोविज्ञान को थोड़ा सा टटोला जाये। सिनेमा सलीमा, चित्र और इन्डियन बायस्कोप सरीखे ब्लौग फिल्मों पर एक समझ बनाने का सार्थक प्रयास कर रहे हैं। यह बिना टिकट का पिक्चर हाल आपके लिए खुला है। चैबिसों घंटे।
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फिल्म की बात चली है तो देखिये माधवी जी अपने ब्लॉग पर बात कर रही है...राजेश गांगुली जी की फिल्म 'ब्लू ओरेंजेस' के बारे में वे कहती है

madhvi-112 कल एक फिल्म देखी " ब्लू ओरंजेस " यानि - नीले संतरे . ये फिल्म राजेश गांगुली की है. ये राजेश की पहली फिल्म है. राजेश ने ये अच्छा प्रयास किया है " कम बजट सिनेमा "में जो हमे "चस्मेबद्दुर", "नरम -गरम ", "गोलमाल " जैसी फिल्मो की याद दिला जाती है. हलाकि यह एक डिटेक्टिव फिल्म है पर आप पूरे तौर पर इस फिल्म से जुड़े रहते है शुरू से लेकर अंत तक. कुछ एक बात जो इस फिल्म का प्लस पॉइंट है और कमजोर भी. यह फिल्म कम बजट की फिल्म है और हमारी आँखों को बड़ी बजट की फिल्मो की आदत हो गयी है. दूसरी स्टार कास्ट में प्राय सब नए है सिर्फ राजित कपूर उर्फ़ ( ब्योमकेश बक्शी ) ;शिशिर शर्मा को छोड़ कर.
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ब्लोगर ऑफ़ द डे

अब चलते है ब्लोगर ऑफ़ द डे की तरफ तो आप लोग सोच रहे होंगे कि हमने ब्लोगर ऑफ़ द डे का खिताब बबली जी को क्यों दिया.. पहले पढिये बबली जी की लिखी कालजयी रचना..
कैसे कैसे हादसे सहते रहे,
हम यूँ ही जीते रहे हँसते रहे,
उसके आ जाने की उम्मीदें लिए,
रास्ता मुड़ मुड़ के हम तकते रहे,
वक्त तो गुज़रा मगर कुछ इस तरह,
हम चरागों की तरह जलते रहे,
कितने चेहरा थे हमारे आस पास,
तुम ही तुम मगर दिल में बसते रहे !

इनकी इसी प्रभावशाली रचना को जगजीत सिंह ने चुरा लिया और इतना ही नहीं चुराकर मार्केट में केसेटस भी निकाल लिए..और वो भी उन के पोस्ट लिखे जाने से कई समय पहले.. तकनीक का इतना विकास कि लिखे जाने से पहले ही चोरी होने लगी.. घोर कलियुग..! वैसे ये बबली जी की सदाशयता है कि उन्होंने जगजीत सिंह के खिलाफ किसी प्रकार का कोई कदम नहीं उठाया.. पहले मुझे लगा कि उन्हें इस बात की खबर नहीं होगी पर बाद में पता चला कि पल्लवी त्रिवेदी नाम की एक ब्लोगर ने ने उन्हें इस बाबत सूचित भी किया था कि उनकी ग़ज़ल की चोरी हो रही है.. ये लिखकर


pallavi trivedi said...


मेरी पसंदीदा ग़ज़ल है ये....जगजीत सिंह ने इसे गाया भी बहुत खूब है. इसके शायर का नाम भी आप दे देती तो बेहतर होता! पाठकों को लग रहा है कि ये आपने लिखी है!बहरहाल इसे प्रस्तुत करने का शुक्रिया!
September 15, 2009 4:57 AM

किन्तु निर्मल ह्रदय वाली बबली जी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया ओर उल्टा पल्लवी जी के अकारण जगजीत सिंह पर आक्षेप लागने से त्रस्त होंकर उन्होंने पल्लवी जी की टिपण्णी ही अपने ब्लॉग से हटा दी.. पर चिटठा चर्चा के विश्वसनीय सूत्र ले आये है आपके लिए उस टिपण्णी का स्क्रीन शोट, सिर्फ हमारी चर्चा पर..

उस टिपण्णी का स्क्रीन शोट, सिर्फ हमारी चर्चा पर..babli-1

और बाद में जगजीत सिंह पर आक्षेप लगाती पल्लवी जी की टिपण्णी हटा दी गयी
babli22


और उनकी इसी पोस्ट पर अंतिम समाचार मिलने तक ३६ टिप्पणिया आ चुकी थी.. जिनमे से कुछ टिप्पणिया हम आपको पढ़वाते है

टिप्पणीकर्ता
टिपण्णी
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said... बहुत बढ़िया।
हिन्दी-दिवस की शुभकामनाएँ!!
खुशदीप सहगल said... जब भी ये दिल उदास होता है,
जाने कौन आस-पास होता है...
ताऊ रामपुरिया said... बहुत सही कहा. चाहत शायद इसीको कहते हैं.
रामराम.
सहज साहित्य said... आपकी यह कविता भाव-प्रवण है ।चित्र-संयोजन की बारीकी तो कोई आपसे सीखे।
रामेश्वर काम्बोज
दिगम्बर नासवा said... लाजवाब और खूबसूरत लिखा है .......umeed bandhaati है ये nazm .........
Saiyed Faiz Hasnain said... कैसे कैसे हादसे सहते रहे,
हम यूँ ही जीते रहे हँसते रहे.....is pankti ne to jan leli meri.....sunder post....
राज भाटिय़ा said... कैसे कैसे हादसे सहते रहे,
हम यूँ ही जीते रहे हँसते रहे,
बबली जी बहुत सुंदर लिखा आप ने ओर हर दिल की बात लिख...
धन्यवाद
ओम आर्य said... एक बहुत ही सुन्दर रचना ..........यही तो प्यार मे होता है .......
अजय कुमार झा said... आपने हमेशा की तरह बांध कर रख दिया...
Dr. Kiran Dangwal said... aap dil ko choo lene wale sabdo ko,kaha par sajoo kar rakhti hai, very nice...........keep it up...
अनिल कान्त : said... पंक्तियाँ अच्छी लगीं
मस्तानों का महक़मा said... बहुत अच्छे...
तुम्हारी हर एक पंक्ति में मुझे अकेलेपन का, लाचार का, उदासी का एहसास होता है।
मेरे लिए इन भावो में लिख पाना शायद मुश्किल हो पर में लिखता रहता हूं किसी काश को अपनी ज़िंदगी से जोड़कर.
तुम्हे पड़कर मुझे बहुत अच्छा लगता है।
महेन्द्र मिश्र said... पढ़कर आनंद आ गया धन्यवाद
Udan Tashtari said... तुम ही तुम मगर दिल में बसते रहे !
-वाह वाह!! क्या आगाज है..क्या बात है!! बहुत खूब!!


अब चलते है आज की अंगार खबर की तरफ

फुर्सत चचा का जन्मदिन

हमको बताते हुए आनंद की अनुभूति हो रही है कि कल रात अनूप शुक्ल 'असली फुरसतिया' जबरिया जन्म ले लिए.. हिंदी ब्लोगिंग में इनके जिस जबरिया लेखन से हर कोई भयभीत है.. उसी जबरजस्ती से ये दुनिया में आ ही गए..

किवंदती है कि जन्म लेने के पश्चात इन्होने सबसे पहले नर्स को एक लाईना मारी थी .. बचपन से ही लाईन मारने के शौकीन फुरसतिया कभी भी लाईन में खड़े नहीं रहे.. लाईन तोड़ना इन्हें हमेशा से प्रिय रहा है.. इनके प्रिय संवाद भी यही है कि "हम जहाँ से खड़े हो जाते है लाईन वही से शुरू हो जाती है"

अनूप जी की लोकप्रियता की एक वजह मैं ये भी मानता हु कि वे हर ब्लोगर को समान दृष्टि से देखते है..हर नए ब्लोगर से जुड़े रहना ही उनकी लोक प्रियता का राज है अन्यथा कुछ पुराने ब्लोगर नए लोगो को भाव नहीं देने के कारण विलुप्त हो गए.
anoopji
इनकी निष्ठा और मेहनत देखकर कई ब्लोगर तो इनसे जलते भी है सोचते है कि ई फुरसतिया टाईम कहा से निकाल लेते है?
किसी भी प्रकार के लफडे में इनका हस्तक्षेप उचित रूप से बना रहता है.. साथ साथ ये खिल्ली उडाने के कार्य में भी बड़े दक्ष है जिसे सुरक्षा कारणों से इन्होने 'मौज' का नाम दिया है.. देखा गया है कि इनकी मौज सिर्फ एक नगर विशेष तक ही सीमित है हमारी इनसे रिक्वेस्ट है कि कृपया अपनी मौज लेने वाली इन्तकामी लिस्ट में और भी नाम शामिल करे.. देखते है असर कब होता है..

फिलहाल आप इन्हें भेज सकते है बधाई नंबर सात का तार.. या फिर इनसे मेल द्वारा संपर्क कर सकते है.. और ऐसे मौको पर जो दो चार टिप्पणिया फिक्स है वे भी कर सकते है..


अब हम चर्चा कार्य संपन्न कर लिए है तो चल देते है.. खामख्वाह ऐसे सेंसेटिव ब्लॉग पर टिकाये रहना ठीक नहीं है.. हम चलते है यहाँ से इस उम्मीद के साथ की इस बार चर्चा पर कोई डा. अमर कुमार जी से बढ़िया टिपण्णी करे.. तब तक आप नीचे दी गयी सुचना पर अमल करे..

विशेष सुचना - कृपया अनूप जी को बधाई आपकी टिपण्णी से पृथक कोष्टक में देवे.. यहाँ पर सिर्फ उन्ही के बारे में चर्चा नहीं की गयी है..

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68 टिप्‍पणियां:

  1. बबली जी को नोबुल, ऑस्कर नहीं नहीं। परमवीर चक्र मिलना चाहिए इस कारनामे के लिए। जन्मदिन की बधाई के लिए पाबंदी लगा दी गई है। क्या कहें हाय! वो गुजरे हुए 46 साल! कैसे सुहाने थे, बेचारे चले गए।

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  2. एक बार फिर बधाई

    पहले फुरसत से दे आये हैं हम।

    अब बबली जी के लिए आए हैं हम

    उनके लिखे को गुनगुनाएं जगजीत जी

    अच्‍छे पल जिंदगानी में आए हैं।

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  3. धाँशू चिठा चर्चा है भाई अधिक नहीं कहेंगे पता नहीं किस बात पर लफडा हो जाये शुभकामनायें

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  4. Great !!! अब तक की सबसे बेहतरीन चर्चा ( जो मैंने पढी ) मान सकता हूँ ! बधाई !!!

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  5. खूब लिखा है कुश भाई..दस में दस नंबर...काफी इस बार जयपुर आने पर पक्की...अक्तूबर के पहले हफ्ते तैयार रहिएगा.
    नीरज

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  6. लगता है कल रात कुश भाई के जिगर में " भाई " का भूत सवार हो गया है......इतनी दिलेरी ठीक नहीं भाई....पकडे गए तो सोच लो....जो खुद ही इतना बड़ा जिगर रखते हैं,तुम्हारी दिलेरी कैसे सहेंगे....

    अजब गज़ब काम किया करते हो भाई.....कुशाग्रबुद्दी आइडिया के खान हो सचमुच ...... !!!!

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  7. अंग्रेजों के जमाने के टिप्पणीकार: हम जानते हैं कि आजकल हमारी टिप्पणियों को पसन्द नहीं किया जाता,फ़िर भी एक ठो टिप्पणी ठेल ही देते हैं,

    किसी बिलागर को अपने घर बुलाकर कपड़े उतारना अच्छी बात नहीं,

    फुरसतिया चाचा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में : इन्हें अपना पहला जन्मदिन मुबारक हो( जैसा कि टोपी पर लिखा हुआ है)
    सही टोपी पहना दिए,

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  8. @blogger of the day --
    is ka arth yah hua ki--36 tippanikaron ne Jagjeet singh ki gayi yah gazal nahin suni hui!
    [Udan Tashtari ji ne bhi!!!!!!]

    -agar aap ko yaad hoga-- is se Phale ek 'Natkhat bachche 'ne bhi is blogger ki is tarah ki chori ki rachnaon ko post kiye jane ki baat ko ujagar kiya tha..

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  9. कैसे कैसे हादसे सहते रहे .इस गजल को याद दिलाने का शुक्रिया बहुत दिनों से यह गजल सुनी ही नहीं थी

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  10. आईला !!!!!
    फिर एक लफडा ......
    यूँ भी इत्ती चिटठा चर्चा होने लगी है के पहले देखना पड़ता है कौन से वाली है .......ओर कौन किये है ......अब तो अलग से एक कोरट बैठानी होगी .....मामलात के वास्ते ......
    ब्लू ओरेज देखने की अपनी भी इच्छा है .....
    फुरसतिया जी को टोपी बहुत सूट कर रही है .....भगवान् से यही दुआ करते है की वे अपनी कई बुरी आदतों में से एक ( मौज लेने की) से इस साल पीछा छोडे . वरना" मौज लेने से छुटकारा पाये" के डी एडिक्शन सेंटर पे जाना पड़ेगा .पता नहीं कानपूर में है के नहीं ......... बाकी बुरी आदतों का सार्वजानिक मंच पे खुलासा करना ठीक नहीं है जी .....
    अब आखिर में
    ग़ज़ल बहुत पसंद आयी जी हमें .....किसने लिखी है ?

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  11. सबसे पहले तो फुरसतिया जी को बधाई.
    फिर आपको.
    क्यों ?
    जासूसी जो कर रिये हो. वो भी मय सबूतों के! हिन्दी का पहला जासूस ब्लॉगर बनने पर आपको बधाई.

    और, जानते हैं, इधर मैंने नए चिट्ठों में टिप्पणी देना कम क्यों कर दिया है?
    अरे छोड़ो भी. नहीं बताता. जासूस हो. तनिक पता तो करो
    :)

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  12. टिप्पणी के मामले में सनकी है. किसी को भी दे देते है, बिना अपना स्टेटस देखे :)

    फूर्सतियाजी को फुरसत से बधाई देंगे, पीछली बार वाली पार्टी भी अभी 'ड्यू' है.

    बबलीजी दिचस्प लड़की है, नए लोगो से दोस्ती करना चाहती है और एक आप है जो पंगा ले रहे है. दोस्ती करो और गालिब की किताब भेंट करो ताकी आगे से उम्दा शेर पोस्ट कर सके.

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  13. Are bhai ham to bahute jyada canfusia gaye hain...
    to chor kaun hai ??
    Jagjit Singh ??
    Clear kijiye bhai..

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  14. अरे वाह...मेरी टिप्पणी जो डिलीट कर दी गयी थी, यहाँ दिख रही है!देखिये क्या ज़माना आ गया है....सच बोलो तो कमेन्ट ही डिलीट हो जाता है! बस वाह वाह करते रहो...चाहे गालिब की ग़ज़ल को अपना बनाकर ही क्यों न छाप दो! खैर...सब जानना चाह रहे हैं की जगजीत सिंह ने ही तो कहीं ये ग़ज़ल बबली जी से चोरी नहीं कर ली !ये ग़ज़ल जगजीत सिंह की इनसर्च एल्बम से है! इसको लिखा है वाजिदा तबस्सुम जी ने! बबली जी अब तो ये टिप्पणी डिलीट नहीं कर पाएंगी न कुश?

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  15. बहुत बढ़िया चर्चा कुश जी . कल मेरे मित्र एकलव्य का ब्लॉग इश्वर की कृपा से डिलीट होने से बच गया यह ब्लॉग एकलव्य के लिए मेरे द्वारा बनाया गया है . . पोस्ट पर और अधिक तीर चलाने के चक्कर में एकलव्य जी ने पोस्ट ही डिलीट कर दी . आपको पोस्ट अच्छी लगी ..इसके लिए शुक्रिया .. फुरसतिया जी को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई और ढेरो शुभकामना . दीघार्यु हो निरंतर मौज करे .

    उत्तर देंहटाएं
  16. क्या बात है कुश तुम ने आज वो किया जो मैं जमाने से करना चाह रही थी...! hence proved अपने नाम के आगे बड़ा सा सिंह लगा लेने से कोई शेर नही बन जाता और चौहान लगाने से कोई पृथ्वीराज नही ये तो जिगर वालों का काम है जो एक कुश के अंदर भी (ही) हो सकता है भाई..!

    कहाँ कहाँ नही चर्चा की कि इस बात की कि ये शालीन बबली जी वाले सारे शेर मेरे भतीजे, भतीजियों को पहले से कैसे मिले होते है..?? सब तो मेरे इन बॉक्स में पड़े हुए हैं। और वो स्केच भी जिन्हे वो अपना कहती हैं, वो भी पता नही किसी किसी के लैपटॉप के वालपेपर मे पड़ा मिल जाता है। एक बार तो एक लिंक पर भी बहुत पहले से बबली जी का लिखा हुआ पड़ा था।

    http://www.whereincity.com/shayari/romantic-shayari/14176.html

    ऐसा नही कि सिर्फ मित्रों से चर्चा की थी, बबली जी को भी इस चमत्कार के बारे में बताया था। मगर एक शालीन महिला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण देते हुए बबली जी ने अपने डॉउन टु अर्थ होने का पूरा परिचय दिया और ऐसी प्रशंसा भरी किसी भी टिप्पणी को अपने ब्लॉग पर प्रकाशित नही होने दिया....!

    अक्सर जा कर देखती हूँ, बड़े बड़े गज़लकार. बड़े बड़े विद्वान, बड़े बड़े दार्शनिक, बड़े बड़े कलाकार, बड़े बड़े बड़े बुज़ुर्ग बबली जी की कला के सामने घुटने टेके मिलते हैं।

    चित्र की खूबसूरती के हिसाब से कमेंट की संख्या बढ़ती रहती है।

    "आपकी कलम और कूँची दोनो ही शानदार है "

    "ooooooooooooooooooo,,,,,!!!!!!!!!!

    kamaal ki painting....
    laajwaab oil colours.......
    ek dam se lajwaab...........
    aapkaa haath hi boltaa hai babli ji,,,,,,,,,,,

    you are realy ...
    GREAT......!!!!!!!!!!!!!"
    "आप के तस्वीर का क्या कहना जो एक से एक है ।"
    और बबली जी बस मुस्कुरा कर धन्यवाद दे देती हैं।

    मेरे एक छोटे भाई ने तो उन्हे गुरु जी की शागिर्दी के लिये भी सलाह दे दी... उसे ये भी पता नही था कि गुरू जी जैसे लोगों की शागिर्दी में सीखने जैसा अब बबली के पास कुछ नही बचा है...! वो उन सब से ऊपर उठ चुकी हैं।

    बबली जी के प्रशंसक जब घूमते टहलते मेरे ब्लॉग पर उसी तरह की टिप्पणी मुझे देते..तो सच कहूँ कि मन वितृष्णा से भर जाता....! हमारा स्तर उनके समान कहाँ है भाई..!

    कुछ लोग जिनका सम्मान प्रिय था, उनसे व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना की भी की जब तक रहस्य उजागर नही हो जाता बबली जी की रचनाएं कैसे बहुत पहले से ही चोरी हो गईं कृपया तब तक ऐसे जादूगरों से दूरी बना लें..!


    खैर उम्मीद है बबली जी अब इस रहस्य के बारे में ज़रूर कुछ कहेंगी....! हम इंतजार में है इस रहस्य के ऊपर से पर्दा हटने के...

    फिर भी ये कहूँगी कि इसी तरह का प्रमाण तलाश रही थी, मगर कुश जो तुमने किया मैं कभी कर ही नही सकती थी...!

    अनाम खाते से किसी ने ये बात इस लिंक पर उठायी थी
    http://murakhkagyan.blogspot.com/2009/05/blog-post_17.html

    मगर कौन सुनता देखता है भाई

    और अब एक बात और क्या कोई सेंसर बोर्ड नही है ब्लॉग जगत के लिये...!

    उत्तर देंहटाएं
  17. वाह परसाई जी बहुत खूब लिखा है आपने..
    (खैर, हम न चाहेंगे कि आप ये पेज गायब कर दें!)

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  18. और अब एक अलग से बधाई फुरसतिया जी को...! ईश्वर उनकी फुरसत को बरकार रखे और हम जैसे लोगों को ब्लॉग लिखने में उनका प्रोत्साहन मिलता रहे...!

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  19. अल्पना जी आश्चर्यचकित हैं. स्वभाविक है लेकिन मैने यह गज़ल वास्तव में नहीं सुनी थी. सुनी होती तो सरियाने में भी खटक जरुर जाती. मुझे अच्छी तरह याद है कि जब कमेंट करने गया था, मैं इसमें कुछ सुधार बताने वाला था कि ऐसा कर लें तो बेहतर रहेगा. फिर आदत के अनुसार रहने दिया और वाह वाह कर आया वरना तो आज इससे भी बत्तर हालत होती मेरी और मौज ली जाती कि गालिब को सुधारने निकले हैं (अगर ये गज़ल गालिब की है तो) :) बच ही गये समझो!!

    (अनूप जी को बधाई- पुनः . यह आपसे जाना कि ४५+१=४६ के हो गये. चलो, अच्छा है, अब बड़े हो गये इसलिए केक की तो बनती है)

    { बाकी चर्चा के विषय में- साहसी चर्चा }

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत ही तबियत से मेहनत पूर्वक, अनुसंधान के पश्चात की गई इस यादगार चर्चा के लिये हार्दिक धन्यवाद.

    रामराम.

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  21. फ़ुरसतिया जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं. ईश्वर करे पूरे शतायु होने तक मौज लेते रहें.

    रामराम.

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  22. समीर लाल जी ने आज की चर्चा को बिल्कुल सही नाम दिया--साहसी चर्चा!!! :)

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  23. साहसी चर्चा के लिये फुरसतिया जी को बधाई.
    हार्दिक धन्यवाद.

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  24. babli ji ka waakaya mast raha!! jagjit singh ji ko aisa nahi karna chahiye tha unke sath..

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  25. @समीर जी ..'उड़न तश्तरी 'के बारे में सब की एक राय होती है की वे सर्वज्ञानी हैं..उन्हें सब मालूम है..इसलिए ऐसा आश्चर्य व्यक्त करने की धृष्टता हो गयी..क्षमा!

    @-खोजी टीम का अगला assignment [hoga]-
    -'बबली मिल गयी अब 'बँटी [bunty]'को ढूँढा जाये.

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  26. फुरसतिया जी को बधाई....... AUR HAAN GAZAL JAGJEET JI NE GAAYEE HAI HUMKO BHI PATA NA THAA ....... ACHEE LAGI TO COMMENT DIYA ......

    उत्तर देंहटाएं
  27. लमस्कार के साथ चिट्ठा चर्चा बढ़िया रही।
    बबली उर्फ उर्मी चक्रवर्ती का कथन बिल्कुल सही है।
    “मैं बहुत ही दिलचस्प और हँसमुख लड़की हूँ और नए लोगों से दोस्ती करना पसंद करती हूँ!”

    अब बिल्कुल फरसत के साथ फुरसतिया जी को जन्म-दिन की
    शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।

    यह भी तो बता दें कि "लमस्कार" क्या बला है???.....

    उत्तर देंहटाएं
  28. कुश जी
    हम तो आज उनका पूरा ब्लॉग छान आये ओर माँ कसम क्या क्या कमेन्ट दिए है भाई लोगो ने शुक्र है आपने कमेन्ट भी दे दिए ,वरना लोग वहां से अपना नाम साफ़ कर देते ,मैंने तो पिछली चर्चा में भी कहा था की देखो कितने महान लोग वहां झुके बड़े दंडवत कर रहे है .
    ये देखिये खुशदीप सहगल जो कल बड़ी बड़ी बात कर रहे थे क्या कह रहे है .हा हा हा
    वैसे आप जासूसी की बात करते है फ़िर ब्लॉग वकील को पकड़ने में कैसे चूक गए ?ताऊ ओर ब्लॉग वकील में कुछ कनेक्शन नही मिला .
    गौर कीजिये समझ जायेगे .

    उत्तर देंहटाएं
  29. kush...u r great....tussi great ho!!!!!

    the one blog that i felt like vomiting on, finally gets torn apart!

    i owe you a big treat for this whenever i visit jaipur!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  30. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  31. कालजयी रचनाकार को बधाइयां. और भी गज़लसाज उनकी चीजों को उठाते रहें. टिप्पणीकारों को मय टिप्पणियों के घसीट लाये, ये सबसे अच्छा किया. बधाई.

    और मौजपंथ के कुशल प्रणेता अनूप जी को जन्मदिन की अनेकानेक शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  32. लगता है कुश जी ने जासूसी फुरसत से की है..
    बधाई
    फुरसतिया जी को जन्मदिन की बधाई, शुभकामनाएं ..

    उत्तर देंहटाएं
  33. आज तो सब गड़बड़्झाला है और क्यों न हो....लाइन में खडे़ पहले आदमी का जन्मदिन जो है...लाइन वहीं से शुरू जो होती है जहां वे खडे़ होते है:) तो बधाई स्वीकारें फ़ुर्सत से फ़ुरसतियाजी और मौज लें इस खोजी चर्चा का।

    इस चर्चा में बहुत कुछ है जी... शेर के सिंग तो सिंह के सिर से सिंग गायब, .... हसीन लड़कीनुमा नारी.... रचना किसी की नाम किसी का... अब क्या क्या गिनवायें जी... गालिब साहब कह ही गये हैं--
    मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ.... आज गालिब गज़लसरा न हुआ...आज गालिब बबली हो गया:)

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  34. हम भी कभी उस धाम गये थे। बिन्दास फोटुआ देखकर लौट आये थे। उन्होंने ऐसा गुल खिलाया यह जानकर मजा आ गया।

    सोच रहा हूँ ज्यादा साहसी कौन है...

    बबली जी या कुश भाई ?:)?

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  35. 1. सभी साथियों को जन्मदिन की शुभकामनायें और मुबारक बाद देने के लिये शुक्रिया।

    2. एकलव्य ब्लाग के बारे में समीरलालजी ने एक दिन अपनी टिप्पणी दिखाई थी राजा बेटा की तरह कि देखिये हमने चिट्ठाचर्चा दल की बुराई करने वालों को कित्ता करारा जबाब दिया है- लाओ हमारा कीर्ति पुरस्कार। हमने जलन के मारे उनसे कहा कि ये ब्लाग आप ही लिखते हो और आप ही टिपियाते हो और फ़िर अच्छा बच्चा बनने के लिये हमको दिखाते हैं! गन्दी बात!

    फ़िर पता चला कि इस ब्लाग के प्रणेता महेन्द्र मिश्र मिश्र जी हैं। आज पता चला कि ये ब्लाग गरम आलू की तरह एक हाथ से दूसरे हाथ होते हुये महेन्द्र मिश्र जी के एक मित्र के पास पहुंच गया। बीच में इसमें ईश्वर का हाथ भी होने की बात बताई महेन्द्र मिश्र जी ने। अब जब ईश्वर सीधे दिलचस्पी ले रहा हो किसी ब्लाग में तो उसके बारे में कुछ कहना ईश्वर, समीरलालजी, महेन्द्र मिश्रजी और उनके मिश्र को नाराज करना होगा। यह सब हमारा करना आज शोभा नहीं देता काहे से कि आप तो जानते ही हैं कि हम आज ही पैदा लिये हैं। सब लोग कहेंगे कि पैदा होते ही लोगों को नाराज करने लग गया।

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  36. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    अच्छी चर्चा,
    कुश जी, धन्यवाद...आप सामने लाये एक कड़वे सत्य को...
    ऐसे बहुत से गुमनाम कवि और शायर हैं देश में जो इन्टरनेट की इस मायावी दुनिया से आज की तारीख में बहुत दूर हैं मेरा काफी अर्से से एक शक रहा है कि ब्लॉग जगत में कुछ लोग उनका लिखा धड़ाधड़ छाप रहे हैं अब जो पकड़ा गया वो चोर बाकी तो हीरो बने रहेंगे... कम से कम पकड़े जाने तक...

    जिन लोगों का आउटपुट बहुत ज्यादा है (रोजाना एक गजल या गीत)... Their writings should be taken with a pinch of salt...

    एक स्वीकारोक्ति मेरी भी, बबली जी के ब्लॉग पर २-३ बार जाकर मैं भी टिपियाया हूं...(बदले में)...स्पष्ट करता हूं कि वो तारीफ केवल और केवल रचना के मूल रचनाकार के लिये ही है (चाहे वह कोई भी हो)

    एक जगह पढ़ा था "जहां 'उडन तश्तरी' न टिपियाये उन जगहों से सावधान रहो" पर यहां पर समीर जी को भी धोखा हो गया लगता है...वजह उन्होंने बता ही दी है...

    फुरसतिया जी को जन्मदिन की बधाई, शुभकामनाएं ...

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  38. और रही बात बबलीजी की तो आप सब लोग एक दिलचस्प और हंसमुख लड़की जो नये लोगों से दोस्ती करना पसंद करती है से जलभुनकर उसकी इत्ती बुराई कर दिये। सब साजिश है जी।

    अरे भाई बबलीजी ने ये थोड़ी कहा कि अपने ब्लाग पर जो कवितायें, शेर शायरी उन्होंने पोस्ट की उनको उन्होंने लिखा भी है। यह तो इसी तरह हुआ जैसे कि सड़क किनारे किसी कार के पास मैं खड़ा हो जाऊं या फ़िर कोई कार चलाता दिखूं तो आप कहो कि मैं उस कार को अपनी बता रहा था। बाद में साबित कर दो कि मैं झूठ बोल रहा था और कार को अपनी बता रहा था।

    बबलीजी ने रचनायें पोस्ट कीं यह तो कहा नहीं कि वे उनकी हैं। सबकी टिप्पणियों पर मुस्कराती होंगी यह सोचकर कि देखो कित्ते भोले ब्लागर हैं समीरलालजी की तरह। बिना देखे टिपियाये जा रहे हैं(समीरलालजी का नाम इसलिये लिखे कि अल्पनाजी ने भी उनका नाम लिया। जब उनके नाम की फ़ाइल खुल गयी तो दूसरी क्यों खोलें)!

    जिन लोगों ने बबलीजी के ब्लाग पर कमेंट किये उन्होंने भी कोई गलत नहीं कहा। पढ़कर अच्छा लगा, बहुत खूब, सुन्दर लिखा है, क्या खूब लिखा है। इससे यह तो नहीं जाहिर होता कि उन्होंने यह मान लिया है कि वे शेर/गजल बबली ने लिखी हैं। इससे सिर्फ़ और सिर्फ़ यह साबित होता है कि पोस्ट बबली ने किया है और लिखने वाले ने अच्छा लिखा है।

    लिखने वाला कोई भी हो सकता है। किसी दूसरे की गजल बबलीजी ने अपने नाम से लिख दी कहकर उनकी बुराई करना उसी तरह है जिस तरह इंस्पेक्टर मातादीन ने चांद पर अपराधी पकड़े थे।

    सच बताऊं मैं इसीलिये वीनस के बहुत उकसाने के बावजूद गजल नहीं लिखता। काहे से कि लिखेंगे तो अच्छा ही लिखेंगे। और जब अच्छा लिखेंगे तो कोई न कोई उसे अपने ब्लाग पर पोस्ट भी करेगा जैसे बबलीजी ने किया। फ़िर लोग उनकी बुराई करेंगे और वो हमें अच्छा नहीं लगेगा।

    बबलीजी ने अपने बारे में जो भी लिखा वो सब सच लगा मुझे। वे हंसमुख हैं तभी सबके एतराज को हंसी में उड़ा दिया। सारा मामला ही दिलचस्प है यह इत्ते कमेंट से लगता ही है। नये लोगों से दोस्ती करना उनको पसंद है यह भी सच है क्योंकि हमारी उनसे अभी तक दोस्ती नहीं हुई।

    कहीं इसीलिये खुंदक में (नये लोगों से दोस्ती करना बबलीजी को पसंद है)तो नहीं बबलीजी की जासूसी की गयी। कुश तो अब पुराने ब्लागर हो गये! :)

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  39. बहुत दिनों बाद कुश ने चिठ्ठाचर्चा की है और बबली जी की तस्वीर तो बहुत धांसू लगायी है। हमें भी लगता है कि फ़िल्मों से जुड़े ब्लोग कम हैं, कुश भी फ़िल्मों को आधार बना कर एक ब्लोग शुरु करेगें ऐसा सुनने में आया है।
    अब जाते हैं बधाई काउंटर पर

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  40. ऒऎ भाई कुश, मैं अमर कुमार हूँ, कोई लाला अमरनाथ नहीं कि हर चौके छक्के पे टिप्पणी करता फिरूँ ?
    इस भरी पँचायत को जरा यह भी बता दे कि, यह चर्चा ज़ेन्डर बायस्ड क्यों नहीं है ?

    किबला आपके शेरों को वन्स-मोर ले गये, बाकी जो बचा था वह चोर ले गये .. उननै छोड़ तू बबली जी के पाछै लाग ग्या,

    इनको पढ़ने की कोशिश में मैं सोता ही रह गया
    जाओ खुश रहो तुम दूर जाती हुई तितलियाँ

    कि, और भी ब्लागचूल्हे हैं, ऎसी दाल गलाने को
    हम ज़ाहिल भड़भुजवों को यह भाड़ मुबारक
    कि, जाओ खुश रहो तुम दूर जाती हुई तितलियाँ

    रहा सवाल फ़ुरसतिया जी ’असल” के पैदा होने का.. तो जाँच समिति की रिपोर्ट का इंतेज़ार है
    आख़िर फ़ुरसतिया की किलकारियाँ किन किनने सुनी, जिनकी तहरीर पर तू इतना बड़ा ज़ोखिम मोल ले रैया है ।
    वह तड़ से हाज़िर हो जायेंगे, और भड़ से मौज़ ले लेंगे कि, भाई अभी तो अपना हैलो वन टू थ्री माइक्रोफोन चल रहा था
    यहाँ आप सब बेकारै नाचन कूदन लाग्यै, रजा चवन्नी उछाल के

    आज के दिन या रात अनूप शुक्ल का जन्म तो हुआ था, असली फ़ुरसतिया तो 20 अगस्त 2004 को पैदा हुये रहे,
    पहिलेन एक्ठो क़न्फ़्यूज़ियाई किलकारी मारिन, " अब कबतक ई होगा ई कौन जानता है "
    हैप्पी बड्डडे, फ़ुरसतिया जी.. वईसे मौज़ की पैदाइश हमहूँ हैं.. भाई जी

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  41. अनूप जी आप तो शोले के ठाकुर होने के बदले जय हो लिए, अब ये बात तो माननी पड़ेगी कि कुछ भी हो जाए आप के मुंह से सबके लिए तारीफ़ ही निकलती है, बड़ा ढाढस बंधता है लोगों को ये देख कर। जय हो……॥आप यूं ही हिन्दी ब्लोगजगत के मौजूं ब्लोगर भाइयों की मौज लेते रहें और घेरे गये ब्लोगरों के लिए हनुमान सिद्ध होते रहें।
    जन्म दिन मुबारक हो, 46 कैंडल वाला केक तो खि्लाइए

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  42. हम तो अपने मोबाइल पर चर्चा पढ़ कर सीधे कानपुर से भागे चले आ रहे हैं कि,
    आज की तारीख़ में टिप्पणी दे दें, चलो बुलावा आया है चर्चाकार कुश ने टिपियाने को बुलाया है
    अउर इहाँ फ़ुरसतिया की किहाँ किहाँ गूँज रही है.. बबली जी को दुलरा रहे हैं
    सच्ची यह फ़ुरसतिया जो हैं ना, वही हैं " अब कबतक ई होगा ई कौन जानता है !"

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  43. @डॉग्डर साहेब

    समीरलालजी का नाम इसलिये लिखे कि अल्पनाजी ने भी उनका नाम लिया। जब उनके नाम की फ़ाइल खुल गयी तो दूसरी क्यों खोलें--फाईल पर चिड़िया तो बैठाय दो कि चैक कर लिए हो, कौनो दोष नहीं पाया गया. :)


    ॒ फुरसतिया जी:

    यह सब हमारा करना आज शोभा नहीं देता काहे से कि आप तो जानते ही हैं कि हम आज ही पैदा लिये हैं- सही कहे हैं लेकिन पूत के पांव पालने में दिखाई दे रहे हैं. :)

    जिओ!! ढ़ेर शुभकामनाएँ जन्म दिन की.

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  44. कुश की कलम की तेज धार और जासूसी दिमाग ..हम भी कहेंगे
    भई वाह ..!!
    फुरसतिया जी को बधाई और शुभकामनायें ..!!

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  45. बस शुक्रिया ,देर से आया !

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  46. @ समीरलाल, फ़ाइल क्लियर करने के पहले तमाम कार्यवाहियां होंगी। पूछा जायेगा कि आंख मूंद कर क्यों कमेंट करते हैं? एक बार जब कमेंट कर दिया तो उसकी रक्षा के लिये अपनी बात पर अड़ते क्यों नहीं। कोई विश्वनीयता ही नहीं। एकदम ब्लागर की तरह हरकतें। फ़ाइल एक बार खुल जाने पर आसानी से बन्द नहीं होती।

    पूत की पांव पर ही नजर रखिये। कल्याणकारी रहेगा। :)

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  47. @ अनूप जी

    एक साथ ३६ लोग आँख नहीं मूंदते. कतई आवश्यक नहीं कि हर रचना के रचनाकार को आप जाने ही या उसे सुना ही हो तो यह भूल अति स्वभाविक है अगर आप किसी के उत्साहवर्धन करने के लिए आगे आते हैं. वरना अपने आप में तो यूँ भी मुदित रहा जा सकता है.

    कमेंट में त्रुटि होने के लिए पहले कमेंट करना जरुरी है. बिना कर्म किए सभी सेफ हैं, भले ही हालात कैसे भी हो जायें..लेकिन भारत इसी अभिशाप का परिणाम भुगत रहा है मेरे भाई. आशा है आप मर्म समझेंगे.

    वैसे पांव पर नजर बनाये हैं मगर लात पर नजर रखने की आदत नहीं. थोड़ा कन्नी काट लेते हैं उससे. :)

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  48. समीर जी की बात से सहमत हूं की कमेंट में त्रुटि होने के लिए पहले कमेंट करना जरुरी है.

    उत्तर देंहटाएं
  49. गौतम राजरिशी, भाई आपने मुझे याद रखा, बहुत बहुत शुक्रिया...मेरी भी वही खता है जिसका ज़िक्र समीर लाल जी समीर कर चुके हैं...मैंने भी पहले वो गजल नहीं सुनी थी...और जो सीमा फिल्म के गाने के दो बोल...जब भी ये दिल उदास होता है, जाने कौन आस-पास होता है, मैंने टिप्पणी में लिखकर भेजे वो फोटो के भाव को लेकर थे...मैं नहीं जानता कि आपकी सोच कहां तक जा रही है...लेकिन सोच तो सोच है, उस पर टैक्स कोई लगता है...वैसे ये बात कहीं पढ़ चका हूं कि टिप्पणी पोस्ट के भाव पर दी जानी चाहिए...न कि जनसंपर्क बढ़ाने की गरज से सिर्फ वाह-वाह की चालीसा गाने के लिए...एक बार फिर शुक्रिया बबलीजी की पोस्ट पर टिप्पणियां देने वालों को आपकी पारखी नज़रो ने महान तो समझा...

    उत्तर देंहटाएं
  50. मैं बहुत देर से पहुंचा पर पहुंचा। चर्चा बहुत ही साससिक थी। एक अच्छी चर्चा सब कुछ समा दिया। अब विवाद से मैं बचता ही हूं। पर पारखी नजर की दाद तो देनी ही पड़ेगी। बस सलाह ये हैं कि साभार लिखने में कुछ जाता नहीं है।

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  51. यदि बबली जी वही हैं जो ऊपर लगी हुई फोटो में दिख रही हैं, तो भैया हम तो इन्हीं की तरफ हैं,

    अब कोई बुरा माने या भला!

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  52. देखो कुश..! बात सिर्फ उस टिप्पणी की नही है, जो कल की गज़ल पर दी गई। बात इस बात की है कि हम सब शायद इतने मूर्ख भी नही हैं, कि बबली का प्रोफाईल और उस ब्लॉग पर लगे चित्रों को देख कर ये ना समझें कि वहाँ क्या हो रहा है...! और अगर हैं तो नही रहना चाहिये। हम सब लिखत पढ़त का काम कर रहे हैं। जितना पढ़ा..जितनी वैचारिकता रखी ....! उसमें इतनी समझ कैसे नही पनपी कि हम ब्लॉग देख कर उसका उद्देश्य समझ लें...?

    और फुरसतिया अंकल की इस बात पर कि बबली ने कभी ये नही कहा कि ये हमारा लिखा नही है ..! असल में बबली ने कहा अश्वत्थामा मरो नरों वा कुंजरो...! जब जब हमारे कुछ बहुत संवेदन शील गज़लकारों, कवियों ने बबली की यह कहते हुए प्रशंसा की कि "आप जो भी लिखती हैं मन से लिखती है, बहुत गहरे भाव हैं आपके" तब तब बबली जी ने कहा कि ये तो आपका बड़प्पन है। न तो उन्होने ये कहा कि भईया चोरी मन से की है और न ये कह कि मन तो किसी और का है मैने तो बस मन से लगाया है यहाँ।

    और केवल उन एसएमएस जैसे शेरों की बात नही है, बात उन स्केचेज़ की भी है जिसके विषय में अक्सर पूँछा जाता है कि तैल चित्र है ? या किस रंग का प्रयोग किया है ? तो वो कभी नही कहतीं कि ये बात तो गूगल बाबा जाने हम क्या जाने ?

    वहाँ जो भी है, जितना भी है सब अच्छे की श्रेणी में तो कतई नही है..! इसके बावज़ूद प्रोत्साहन नकारात्मक प्रोत्साहन है। अगर लड़खड़ाते कदम को प्रोत्साहन देना कदम स्थिर करता है। तो तहस नहस करते कदम को प्रोत्साहन देना बहुत कुछ अस्थिर करता है।

    बात ये है कि एक दिन कुश ने प्रूफ सहित बात रख दी..होता उस ब्लॉग की हर पोस्ट पर यही है...!

    @ खुशदीप सहगल
    और ये खुशदीप जी गौतम राजरिषी जी की किस बात का आभार व्यक्त कर रहे हैं भाई यहाँ तो जो दिख रहा है, उसमें तो गौतम जी ने कुछ अंगरेजी में लिखा है और उस पर जब बहुत दिमाग लगाये तो लगा कि कुश को शाबाशी देते हुए जयपुर में एक पार्टी देने और अपनी मितली या भोमिटिंग जइसी किसी समस्या का जिकर किया है....! याद भला किसको रखा उन्होने शिवाय बबली के :)
    कुछ लोग अपना क्रेडिट इतना अच्छा बना लिये हैं कि बिना बात के ही आभार लिये जा रहे हैं...! :)

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  53. अब क्या टिपयाएं हम!!!बहोत लोग टिपीया गये। हमारे पास कुछ बचाही नहिं।

    मिलते हैं 'फ़ुरसत'में। एक ब्रेक के बाद।

    एक दिन लेट ही सही। आज फुरसतीयाजी एक दिन के हो गये। जन्मदिन मुबारक।

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  54. कंचन जी क्या बात कहीं हैं..बहुत सही.....
    हमहूँ सोचते रहे की 'राजरिशी जी; का कोमेंत्वा मा 'खुश जी' कहाँ थे ...हाँ 'कुश' को कोई 'खुश' सोच लिए हैं .....
    और बबली जी का कोमेंत्वा ताऊ जी का ब्लोग्वा पे देख कर तो और हम छत से गिर गए हैं न.....
    दीमाग से पैदल प्राणी है भाई....
    जन्मदिन मुबारक।

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  55. कौन है आज का ब्लॉगर ऑफ़ द डे?

    कुश.

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  56. वाह फुरसतिया जी के जन्मदिन में आप जासूसी कर रहे थे. ;)

    -x-

    और कल उन्होंने इतनी बड़ी पार्टी करी की बेचारी उनकी साईट भी थक हार के चूर हो गयी. अब स्वामी जी से इलाज करवा रही है.

    और इस कारण हम एक लम्बी पोस्ट पढ़ने से वंचित रह गये. खैर जो भी हुआ. "चचा" जैसी हस्ती पा कर हिन्दी ब्लॉग जगत धन्य है. वे स्वास्थ्पूर्ण जीवन जीते रहें, लिखते रहें. यही हमारी कामना है.

    -x-

    वैसे यह तो एक कड़वा सच है कि महिला ब्लॉगरों को बिन बात भी "दाद" मिल जाती है और यह दूजी बात है कि इससे पुरुष ब्लॉगरों को "खाज" होती हो. पर दु:ख किनसे कहें उन्हें दाद देने वाले तो अपनी ही बिरादरी के हैं. ;)

    -x-

    और चर्चा के बारे में....बोले तो झक्कास.

    उत्तर देंहटाएं
  57. अब खुशदीप सहग्ल जी ने हमें क्यों धन्यवाद दिया, भगवान जाने...!!

    अब दे ही दिया है तो हम ले लेते हैं...

    बाकि "फुरस्तिया देव’ को विलंब से जन्म-दिन की मुबारकबाद!

    उत्तर देंहटाएं
  58. गौतम राजरिशी भाई, क्षमा कीजिएगा, मैंने ऊपर वाले कमेंट में गलती से आपका नाम ले लिया..दरअसल आपका कमेंट तीखी बात के कमेंट के ठीक नीचे था, इसलिए वो आपका समझ लिया...ये तीखी बात तो जनाब छदमनामी निकले...चलिए मैंने जो कहना था, ऊपर ही कह दिया था, आपका नाम नाहक ही लिख गया...कंचन सिह जी चौहान, आपका भी शुक्रिया जो इस ओर ध्यान दिलाया.

    उत्तर देंहटाएं
  59. फ़ुरसतिया जी को बधाईयां.

    बबली जी को टिप्पणी डीलीट नहीं करनी थी. गलती हो सकती है, मगर गलती पर गलती?

    अभी भी समय है. बिरादरी में माफ़ी मांग लेंगी तो बेहतर.

    उत्तर देंहटाएं
  60. आपका ब्लाग बहुत ही दिलचस्प और हँसमुख है और नए लोगों से दोस्ती करना पसंद करता है....

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  61. भाई कुश आपकी इसी बेबाक शैली के तो सभी फैन हैं . वैसे इस प्रकरण से क्यों कोई कुछ सीख लेगा ?
    पता नहीं

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  62. अनूप जी देर से ही सही हैप्पी बर्थडे
    अब क्या करें केक वेक मिलता तो कुछ पहले भी पता चलता

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  63. कुश बाबा तुम एक साल पहले भी ऎसेच ही थे.. सारे लिन्क्स बहुत अच्छे है ;)

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