सोमवार, अप्रैल 22, 2013

खुनचुसवा सोमवार की चिट्ठाचर्चा

सोमवार आ गया,
फ़िर खून चूसने लगा।

इतवार किधर गया,
कुछ पता तो बता।

हाल सब बेहाल हैं,
कुछ हौसला बढ़ा।

चल छोड़ सब यार,
कर जरा चिट्ठाचर्चा

ये सोमवार को खून चूसने वाली बात खुशदीप के ब्लॉग से। उनकी पोस्ट का शीर्षक है-ब्लडी मंडे क्यूं आया ख़ून चूसने... उन्होंने लिखा है:
आज मंडे है...मंडे का नाम अगर आप संडे का सुन लें तो आपको क्या हो जाता है...काम पर जाने वाले हों या स्कूल-कॉलेज जाने वाले बस यही मलाल करते रहते हैं, यार ये मंडे इतनी जल्दी क्यों जाता है...इसी मंडे की महिमा पर आजकल टीवी और एफएम रेडियो चैनल्स पर एक गाना बड़ा पॉपुलर हो रहा... पढ़िए, देखिए, धुनिए...शायद आपकी भी दुखती रग इसके साथ जुड़ी हो...
इस खूनचुसवा सोमवार के बारे में अब क्या कहा जाये? मजबूरी है। जब इतवार आयेगा तो सोमवार को भी झेलना ही पड़ेगा। बहरहाल अब देखिये कुछ ब्लॉग में क्या लिखा गया है। ललित शर्मा ने आज ब्लॉगिंग के चार साल पूरे किये। इसकी सूचना देते हुये वे लिखते हैं:
"ब्लॉगिंग करते कब 4 साल बीत गए, पता ही न चला। आज "ललित डॉट कॉम" की 701 वीं पोस्ट है। इन वर्षों से अनेको ब्लॉगर्स से मुलाकात हुई, हजारों ब्लॉगों को पढा होगा। टिप्पणियों का अदान-प्रदान हुआ और ब्लॉग युद्धों का भी साक्षी बना। लेकिन जो मजा ब्लॉग़िंग का "ब्लॉगवाणी" एवं "चिट्ठा जगत" के रहते था। वह अब कहाँ। इन चिट्ठा संकलकों का स्थान कोई अन्य नहीं ले सका। अभी तक तो उर्जा बनी हुई है लेखन के लिए, कभी थोड़ा उतार चढाव भी आ जाता है। लेकिन ब्लॉगिंग निरंतर जारी है। इस अवसर पर सभी पाठकों को मेरी शुभकामनाएं।"


इन चार सालों में ललित शर्मा ने बहुत यात्रायें कीं और उनके बारे में लिखा। यायावर ब्लॉगर हैं ललित शर्मा। "सिरपुर सैलानी की नजर में" किताब भी दिखती हैं उनके ब्लॉग पर। किलों, खंडहरों, नदी और पुरातात्विक स्थलों की खूब सारी यात्रायें की हैं। उनके बारे में खूब सारा लिखा है। स्थलों से जुड़ी जानकारियां, किंवदंतिया और किस्से-कहानियां लिखते रहते हैं। कम-ज्यादा करके नियमित ब्लॉगिंग से जुड़े रहे हैं। ब्लॉगिंग के चार साल पूरा करने पर ललित शर्मा को बधाई। आगे कई साल तक निरंतर लिखते रहने के लिये मंगलकामनायें। दिल्ली में मासूम बच्ची के साथ हुये दुराचार पर मीनाक्षी जी ने लिखा है:
अन्धेरे कमरे के एक कोने में दुबकी सिसकती बैठी सुन्न सहम जाती है फोन की घंटी से वह अस्पताल से फोन पर मिली उसे बुरी खबर थी जिसे सुन जड़ सी हुई वह उठी कुछ सोचती हुई एक हाथ में दूध का गिलास दूसरे में छोटी सी गोली कँपकँपाते हाथ ...थरथर्राते होंठ , आसुँओं से भीगे गाल नन्ही सी अनदेखी जान को कैसे बचाएगी इस जहाँ से खुद को बचा न पाई थी उन खूँखार दरिन्दों से....
इरफ़ान ने अपने फ़ेसबुक स्टेटस में सवाल किया है:
आज कल राहुल गाँधी कहाँ हैं? आज जबकि देश कानून और व्यवस्था के उन्हींके बैठाए लोगों के तानेबाने से जूझ रहा है।इससे पहले भी जब देश के युवाओं का आन्दोलन बेटियो की रक्षा के लिए देश भर में चल रहा था तब भी राहुल गाँधी नदारद थे. क्या उनको अब भी यह ग़लतफ़हमी है की देश का युवा सिर्फ उनके लम्बे-लम्बे आर्थिक भाषण और उनका 'फेयर एंड लवली' चेहरा देखकर ही उन्हें वोट दे देगा?
अपने कार्टून में इरफ़ान ने हाल बताये हैं आज के समाचारों के। राजेश दुबे ने पोस्टर में बच्ची की मनोदशा बयान की है। देखिये: संयोग से आज राजेश दुबे का जन्मदिन भी है। उनको जन्मदिन की मंगलकामनायें।




 नारी ब्लॉग पर सवाल है-बलात्कार करने वाले ६ महीने से ८ ० साल तक की नारी का बलात्कार कर रहे हैं क्यूँ क्युकी उनको डर ही नहीं हैं 

  उधर अदा कहती हैं- मेरी दोस्ती मेरा प्यार। इस पोस्ट में मामला संता-बंता से शुरु होते हुये दोस्ती पर लेक्चर से गुजरता हुआ अजनबी तुम जाने पहचाने से लगते हो तक गया है। बहुत अच्छी आवाज है अदा जी की। एक सुनिये तो आपको भी लगेगा कि हम झूठ न बोलते हैं।

वन्दनाजी ने अपनी बात कहते हुये नारी ब्लॉग को वोटिंग का आह्वान किया गया है। अपील की गयी है:
अगर आप महिलाओं के उत्थान के पक्षधर हैं, उन्हें बराबरी का दर्ज़ा देने की बात करते हैं, उनका सम्मान करते हैं, तो अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर " नारी" को वोट देकर उसे इस दौड़ में आगे रक्खें. आभार. नीचे दिये गये लिंक पर जा के आप नारी को वोट कर सकते हैं. इसके अलावा आप अपने फेसबुक अकाउंट और ब्लॉग-यूआरएल के ज़रिये भी वोटिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं.
इस पोस्ट में कई लोगों ने टिप्पणी करके अपना मत व्यक्त किया है। सलिल वर्मा लिखते हैं:
रचना जी से मेरे कई बार मतभेद हुए और बहस भी हुई.. लेकिन उनके अंदर की 'नारी' को मैंने भी व्यक्तिगत रूप से महसूस किया है.. जब मेरा ट्रांसफर गुजरात में हुआ तो मेरी बेटी दसवीं में थी और बोर्ड के बीच में मेरा ट्रांसफर उसकी पढाई के लिए बहुत बड़ा झटका था.. रचना जी को जब यह पता चला तो उन्होंने स्वयं यह पेशकश की कि मैं अपनी बेटी को उनके पास छोड़ दूं और बेफिक्र होकर गुजरात चला जाऊं.. इसके पहले हम एक ब्लोगर के रूप में ही एक दूसरे को जानते थे, फोन पर कार्यालयीन बातें भी हुईं थीं उनसे, लेकिन मिले कभी न थे.. उनकी यह पेशकश मुझे अंदर तक प्रभावित कर गयी.. एक तेज-तर्रार ब्लोगर के रूप में कुख्यात नारी का यह ममतामयी रूप मेरे लिए अविस्मरणीय था.. लोग चाहे कुछ भी कहें, मैं व्यक्तिगत रूप से उनका बहुत सम्मान करता हूँ!!
ब्लॉगजगत के भाई साहब सतीश सक्सेना कहते हैं:
बधाई एक अच्छी अपील के लिए ! अपने अख्खड़पन और कसैले स्वाभाव की वज़ह से रचना की हार की संभावनाएं अधिक हैं मगर उन जैसों का होना यहाँ बेहद आवश्यक है ! मैंने उनके धुर विरोधियों से भी अपील की है कि वे खुले मन के साथ विचार करते हुए नारी को ही वोट दें ! इस अड़ियल लड़की का होना ही, तमाम लड़कियों लिए राहत का आधार है ! हार हो या जीत, रचना का आत्मविश्वास सुरक्षित रहेगा , इसका मुझे विश्वास है ! शुभकामनायें "नारी" को !
पोस्ट और इन टिप्पणियों पर अंग्रेजी में टिपियाते हुये डॉ.अरविन्द मिश्र लिखते हैं:
There is another catogary of best person to be followed and Rachana ji's blog does not belong to that...her blog is nominated under best blog category-so other considerations like her persona or being benevolent etc are irrelevant here.
उनको जबाब देते हुये लिखा गया:
डॉक्टर साब, उस कैटेगरी की चर्चा यहां हो भी नहीं रही. मुझे मालूम है, नारी सर्वश्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉग के लिये नामांकित है, मैने पोस्ट में ज़िक्र भी किया है कि रचना जी की उदारता का ज़िक्र मैने वोट बटोरने के लिये नहीं किया है. ये नारियों की आवाज़ को बुलन्द करने वाला ब्लॉग है, सो हम सब नारियों की तो कम से कम जिम्मेदारी है ही अपील करने की. हां, आप वोट करें, न करें ये फ़ैसला लेने के लिये स्वतंत्र हैं ही :)
हम तो पहले ही लिख चुके हैं:
यह बढिया मौका था/है महिला ब्लॉगरों के लिये कि वे नारी/चोखेरबाली ब्लॉग का समर्थन करके ब्लॉगजगत के इनाम जीतने के मामले में पुरुष ब्लॉगरों का चला आ रहा वर्चस्व खतम करने की कोशिश करतीं।


आपको जैसा ठीक लगे वैसा करिये। साथ के ये  दो स्केच संतोष त्रिवेदी की बिटिया के बनाये हुये हैं उनके फ़ेसबुक स्टेटस से लिये।



आप सभी को सप्ताह की शानदार शुरुआत के लिये शुभकामनायें।

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15 टिप्‍पणियां:

  1. ....बिटिया के स्केच शामिल करने का आभार...बाकी,समाज बदले तभी सार्थकता है !

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  2. वैसे अब नाम चिठ्ठा और फ़ेसबुक स्टेटस चर्चा होना चाहिये :)

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    1. मुख्यकाम तो चिट्ठाचर्चा ही है। फ़ेसबुक तो साइड में आ जाता है। :)

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  3. अपील-चर्चा के लिये आभार शुक्ल जी. शानदार चर्चा है. तमाम आदतों की तरह, चर्चा भी एक लत की तरह है. जब लग जाती है, तो लगातार पढने का मन होता है. उम्मीद है अब निरन्तरता बनाये रक्खेंगे.

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  4. और टिप्पणियों का इंतज़ार है !

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    1. अरविंद जी,

      मंडे इतना ख़ून चूस लेता है कि टिप्पणियां करने की लोगों में जान ही नहीं रह जाती...

      जय हिंद...

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    2. आराम से टिप्पणी करिये कोई हड़बड़ी थोड़ी है।

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    3. ye lijiye aaram ki tippani.............

      sunday ke baad monday wakai.....'khoon-chuswa' hi lagta hai.....

      sachhi baat ye ke kal subhah se sham tak 'aur tippaniyon ke intazar' me hi tipne se rah gaya....


      pranam.

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  5. आज बरसों के बाद चर्चा में हम भी हैं, लेकिन बिना ब्लॉग़ लिंक के। जय हो चर्चा देव की। :)

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    1. ब्लॉग का लिंक दिया है देखिये इस जगह (देते हुये वे लिखते हैं)| ब्लॉगिंग के चार साल पूरा करने के लिये फ़िर से बधाई।

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  6. दोनों ही स्केचेस आज की भयावह स्थिति का चित्रण करते हैं.....बहुत बढ़िया हैं
    अच्छे लिनक्स की चर्चा, आशा है कि यह माहौल बदलेगा

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  7. हेडिंगवा ऐसा लगाइयेगा तो यही ना होगा !
    वैसे भी हम कमजोर इंसान हैं, खून-वून का कमी रहता है :)
    आपको बुझाता है तारीफ़ सुनने का आदत हो गया है, चलिए हम भी बोलिए देते हैं, लेखन तो कमाल होता ही है आपका, और आप चर्चा विशेषज्ञ हइये हैं, तो इस बार भी झाकासे रही चर्चा। बचवन लोगन का ड्राईंग देख के बहुत अच्छा लगा। अब जो शुरू हो गए हैं और अभी तक मेंटेन किये हुए हैं और ऐसने चर्चियाते रहिएगा तो हमलोगन को नीमन लगेगा।
    धनबाद परनाम !

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  8. पिछले कुछ दिनों से आपकी बढ़िया चर्चा पढ़ने की आदत सी हो गई है...हमारा लिखा आपकी नज़र में आया यह जानकर अच्छा लगा...

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