सोमवार, मार्च 15, 2010

हिन्दी में गुणवत्तापूर्ण लेखन, द्विवार्षिकी और शुभकामनाएँ

गत दिनों "हिन्दी में गुणवत्तापूर्ण लेखन को पुरस्कारों की घोषणा" की गई थी, जिस पर विचार करते हुए  कुछ बिन्दु यों उभरे थे -


मेरे विचार से सामग्री की नेट की आनुपातिक कमी का कारण संसाधनों की  कमी अथवा गंभीर लेखकों का संसाधनों के प्रति  कथित दुराव ही  वे कुछ कारण नहीं हैं और न ही उपक्रमों से लोग बेखबर है, अपितु कारण कुछ और भी हैं,  इनमें  -

 १)  उपक्रमों व लेखकों, विचारकों के बीच एक `सकारण' की दूरी भी बड़ा कारण है| 

२) तिस पर छपास  की बीमारी के चलते तथाकथित लेखक केवल और केवल अपने लेखन पर ही अपना सारा श्रम, ऊर्जा, धन, समय लगाना चाहते हैं|  मानो आज और उन से पहले भाषा में कभी कोई सार्थक लेखन कर के ही नहीं गया, जिसे सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य हो|  नेट उनके हाथ में एक उस्तरे की मानिंद आ गया है; सो, कहावत तो  पूरी होगी ही|

३) जिस देश में पुरस्कार की राशि अपनी जेब से देकर ( ..आदि जैसे हजारों काले कारनामें कर के )  कुछ ज्ञात /सर्वज्ञात/अल्पज्ञात,   बहुकालिक/अल्पकालिक/टुच्चे/ श्रेष्ठ  आदि सभी प्रकार के  पद, पुरस्कार, प्रकाशन हथियाने की बिसातें  बिछती हैं  वहाँ उस जाति ( हुँह, हिन्दीजाति) से भला क्या और कैसा लेखन सुरक्षित करने की आशा की जाए? इनकी पूरी जाति में तो केवल और केवल वे स्वयं ही महान हुए हैं|

उक्त लेख पर आए कुछ विचार-

चन्द्रमौलेश्वर जी ने कहा
हिंदी लेखन की अंतरजाल पर कमी के कारण आपने गिना ही दिए है। वरिष्ट साहित्यकारों के एक पूरी पीढी इस नये माध्यम ए नहीं जुड पाई है और यह भी एक कारण हो सकता है यहां स्तरीयता के अभाव का॥
रंजना सिंह जी ने कहा
Aapka diya link to abhi nahi dekh paayi hun,par aapki baton se poorntah sahmat hun....

Vastutah maine anubhav kiya hai ki antarjaal par hindi me likhne walon kee jo sankhya hai usme achche/stareey likhne walon ki bahut kami hai...apne hi shahar me dekhti hun to dekhti hun ki yahan jaise likhne wale hain,vartmaan me is star ke likhne waale bahut kam log hi hindi bloging me hain,par chunki we net istemaal nahi karte to unki rachnayen bhi antarjaal par hindi padhnewalon tak nahi pahunch paati....

हिमांशु का कहना था
शायद गूगल के इस प्रयास से हिन्दी का गुणवत्तापूर्ण लेखन विस्तार पाये ।
आभार सूचना के लिये ।


अब उक्त स्पर्धा के बाद नेट पर "गुणवत्तापूर्ण लेखन" कितना व किस अनुपात में किस ओर गया हो, यह  तो गूगल को बेहतर पता होगा या हिन्दुस्तान को किन्तु हमें तो आपको केवल इतनी सूचना देनी है कि उक्त स्पर्धा का परिणाम घोषित हो चुका है व प्रत्येक वर्ग में श्रेष्ठ प्रविष्टि की सूची यों है - 



प्रत्येक विषय में उत्तम प्रविष्टि



मनोरंजन संस्कृति और साहित्य
रचयिता: विनीत शुक्ला
प्रविष्टि: ​ राम और बाली संवाद
 
​यात्रा
रचयिता: ​मयंक अरोरा
प्रविष्टि: ​ मेट्रो - मंज़िल अब दूर नहीं |
 
​खेल
रचयिता: ​हर्ष वर्धन हर्ष
प्रविष्टि: ​ “खेल-क्रान्ति” के इन्तजार में हमारा भारत देश।
 
स्वास्थ्य
रचयिता: ​अरविन्द दुबे
प्रविष्टि: ​ खतरे में हैं आधी दुनिया के हकदार
 
​सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दे
रचयिता: ​दिलीप तिवारी
प्रविष्टि: ​ सड़क..
 विजेताओं को उनके जीतने का समाचार भेजा गया है | लैपटॉपें, गिफ्ट वाउचरें, 6 महीने के मुफ़्त इंटरनेट सब्सक्रिप्शनें और Google टी-शर्टों के विजेताओं को उनके पुरस्कारों के बारे में सूचित किया गया है | उन सभी को बधाई जिनकी वजह से इस प्रतियोगिता को सफलता प्राप्त हुई |


हमारी ओर से भी सभी विजेताओं को बहुत बहुत बधाई ! उत्तरोत्तर उत्तम लेखन की शुभकामनाएँ।


 आने वाला दिन इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि

नारी  ब्लॉग  का  दूसरा  जन्मदिन  जो   है


  कल से नवरात्री शुरू हो रही हैं । नारी की पहली पोस्ट ०८ अप्रैल कि नवरात्रि की पहली तिथि पर आयी थी । सो हमने सोचा अग्रेजी कलेंडर को दरकिनार कर के हम हिन्दी तिथि से आज आप को सूचना दे दे की आज नारी ब्लॉग को दो वर्ष पूरेहुए ।


आप इस सामूहिक प्रयास के सदस्यों  की  सूची को देखें व इस समेकित प्रयास को बधाई दें, जिसके मूल में वस्तुत रचना ही है|
इस ब्लॉग की  आधार परिचयपंक्ति है -

हिन्दी ब्लोगिंग का पहला बाइलिन्गुअल कम्युनिटी ब्लॉग जिस पर केवल महिला ब्लॉगर ब्लॉग पोस्ट करती हैं
इसके सदस्यों की सूची यों है -


 आप भी उपर्युक्त दोनों  सन्दर्भों से जुड़े लेखकों को बधाई दें और मुझे विदा ।  :)

और हाँ,  आप  सभी पाठकों / लेखकों/ साथियों / मित्रों / अमित्रों को भारतीय नववर्ष (युगादि ) विक्रमी सम्वत २०६७ पर हार्दिक मंगलकामनाएँ। सभी के लिए यह आनेवाला  नया वर्ष अत्यन्त सुखद हो, शुभ हो, नित नूतन उँचाइयों की ओर ले जाने वाला हो व परिवार में सभी को मंगलमय आह्लाद से भरे। 

यही दिन आर्यसमाज स्थापना दिवस भी है, सो

"जयतु ओम्-ध्वज व्योमविहारी"

















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19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा लगा आपको फ़िर से चर्चा करते देखकर।
    गूगल जी को मेरी समझ में हर माह ये प्रतियोगिता कराते रहना चाहिये।
    तब शायद और खूब लोग लिखें और तमाम लेख आयें।
    सभी विजेताओं को बधाई।

    नारी ब्लॉग के दो साल होने पर खास तौर पर इस ब्लॉग की सभी सदस्याओं को बहुत-बहुत बधाई! ब्लॉग जगत में नारी ब्लॉग की उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण है।

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  2. आर्य समाज स्थापना दिवस की भी मुबारकबाद!

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  3. चर्चा की गली के चक्कर लगाते रहने की आदत है, अरसे बाद आपको आज पुनः अपने मध्य देख प्रसन्नता हुई ।
    सुआगत है, आपका.. आर्यप्रणाली की पुनरस्थापना दिवस का.. और सभी विजेताओं का ..

    आगँतुक पाठकों में क्या कोई इस जीतो-फेनामिना पर बधाईंयों के अलावा कुछ अन्य मन्तव्य प्रकट कर सकता है ?
    क्योंकि मेरा मानना है कि इन अपरिभाषित गुणवत्ताओं के प्रति सचेत होकर लिखने से भाव और विचारों की आत्मा कहीं न कहीं खँडित होती ही है । स्वःस्फूर्त नैसर्गिकता बनाव सिंगार की भेंट चढ़ कर कृत्रिम लगने लगती हैं ।
    रही बार प्रतिस्पर्धा की.. तो इसके दबाव में लेखन असहज हो जाता है ! एक रचनाधर्मी को इससे दूर ही रहना चाहिये.. समीक्षाओं में खरे उतरने का मानसिक दवाब तो होता ही हैं... साथ ही उसकी रचनात्मकता में प्रयोगधर्मिता के अवसर अनुपलब्ध होते हैं ।
    नित नूतन की खोज रचनाकार के गुण-दोष का अनिवार्य तत्व है ।

    हो सकता है, मेरे विचार सिरे से ख़ारिज़ कर दिये जायें, मेरे तज़ुर्बों को ललकारा जाय.. कोई वाँदा नहीं क्योंकि मेरे दूध के दाँत अभी टूटे ही कहाँ हैं, पर यह मेरी निजी सोच है ।
    यदि महाकवि निराला इँगला-पिंगला, मात्रा, लघु औ’ दीर्घ में ही उलझे रहते.. तो भला यूँ अकड़ कर डपट सकते थे.. " अबे सुन बे, गुलाब :) "

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  4. बहुत सुन्दर और मनभावन!
    भारतीय नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  5. क्रमी सम्वत २०६७ पर हार्दिक मंगलकामनाएँ। सभी के लिए यह आनेवाला नया वर्ष अत्यन्त सुखद हो, शुभ हो, नित नूतन उँचाइयों की ओर ले जाने वाला हो व परिवार में सभी को मंगलमय आह्लाद से भरे।

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  6. डॉ अमर कुमार जी की बात मार्के की है -कुछ लेखक केवल पुरस्कारों के लिए ही लिखते हैं -यह निस्वार्थ सेवा नहीं है !
    डॉ अरविन्द दुबे मेरे मित्र है ,प्रतिभाशाली हैं ,एक चिकित्सक के रूप में बहुत ब्यस्त हैं , हिन्दी ब्लागिंग में नहीं हैं मगर पुरस्कार( के लिए )लेखन का समयनिकाल लेते हैं -डॉ अमर कुमार की तरह नहीं हैं और मौके का फायदा उठाना जानते हैं !
    और उठाया भी जाना चाहिए ! क्यों कविता जी ?

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  7. बहुत अच्छा लगा आपको देखकर इस चर्चा-मंच पर फिर से एक लंबे अंतराल के बाद....और अचानक से वो दुर्लभ मुलाकात याद आ गयी।

    नवसवंत्सर की आपको और सभी चिट्ठा-चर्चाकारों को शुभकामनायें!

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  8. नवसवंत्सर की आपको और सभी चिट्ठा-चर्चाकारों को शुभकामनायें!

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  9. चर्चा पढ़कर अच्छा लगा . बहुत अच्छा

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  10. अच्छी चर्चा रही...शुक्रिया
    नवसवंत्सर की शुभकामनायें!

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  11. रोचक और विचारपूर्ण चर्चा के लिए बधाई!

    युगादि एवं चैत्री नवरात्र के अवसर पर हार्दिक मंगल कामनाएँ!

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  12. नवरात्री,नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं....
    सार्थक सुन्दर चर्चा जो कि बहुत सुखद भी लगी......
    आभार.

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  13. रोचक और विचारपूर्ण चर्चा .सभी विजेताओं को बहुत बहुत बधाई

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  14. आपकी चर्चा हमेशा कोई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है ... एक कारण ...गंभीर लेखकों का संसाधनों के प्रति अज्ञानता भी है .शायद कंप्यूटर से इस उम्र से जुड़ना उन्हें असहज मालूम होता है .....पर इससे अनजाने में हिंदी का नुक्सान होता है .कम से कम अंतरजाल पर तो .......यकीन मानिये इस विधा पर भी गंभीर पाठक बहुतेरे है देश विदेश दोनों जगह.....विधा कोई भी गलत नहीं होती है .उसका इस्तेमाल गलत होता है......
    छपास की बीमारी बहुत बड़ी है .कंटाजीयस भी है.....

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  15. नवसवंत्सर की शुभकामनायें! धन्यवाद।

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