रविवार, मई 02, 2010

ये क्या कबाड़िया पोस्ट है?

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कबाड़खाना नाम का ब्लॉग आपकी नजरों से अछूता नहीं रहा होगा जो अपने नाम के उलट, दुनिया जहान से हीरे चुन-चुन कर पेश करता है. पर, क्या कोई ऐसा ब्लॉग भी है वो भी हिन्दी में जो सचमुच कबाड़ की बात करे? हाल ही में दिल्ली में एक कबाड़ी की दर्दनाक मौत सिर्फ इसलिए हो गई कि उसने दिल्ली विश्वविद्यालय का वो कबाड़ खरीद लिया था जिसमें मारक रेडिएशन फैलाने वाला रेडियोएक्टिव कोबाल्ट मौजूद था.

धन्य है कि कबाड़ीवाला नाम से एक ऐसा ब्लॉग हिन्दी (वस्तुत: यह द्विभाषी है – हिन्दी-अंग्रेज़ी दोनों में ही) में भी आ गया है जिसमें दुनिया भर के जंक की, कबाड़ की और उससे संबंधित मुद्दों की बात कही और उठाई जाती है. हाल ही में कुंभ मेले में अपने पाप धोने के चक्कर में धर्मालुओं ने और भी बड़े, अक्षम्य, जघन्य पाप कर डाले. कैसे ? ये बयान देखिए -

कुंभ का कचरा राजाजी पार्क में

हरिद्वार महाकुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगा कर अपने पाप तो धो डाले लेकिन पीछे छोड़ गए छह हजार मीट्रिक टन कूड़ा-कचरा, जो वन्य जीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। राजाजी नेशनल पार्क की सीमा में फेंके गए पालीथिन, सड़े हुआ खाने तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थो को चीतल, सांभर, हाथी, तेंदुआ सहित लगभग सभी वन्य जीव खा रहे हैं। वन्य जीव वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इसे बेहद खतरनाक मान रहे हैं। महाकुंभ के साथ ही राजाजी नेशनल पार्क की सीमा में स्थित मंशा देवी और हरिद्वार चंडीदेवी मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा। मंशा देवी मंदिर प्रांगण के पीछे पार्क है। पार्क का करीब आधा किलोमीटर का यह क्षेत्र इन दिनों श्रद्धालुओं द्वारा फेंके गए भोजन, पालीथिन बैग, कूड़े-कचरे से पटा हुआ है। मनुष्यों के लिए जहर साबित हो चुकी पालीथिन चीतल, सांभर, हाथी, तेंदुआ आदि खा रहे हैं जो उनकी मौत का सबब बन सकती है। पर्यावरणविद् डा. बीडी जोशी के मुताबिक, वन्य जीवों के लिए तीन से पांच सौ ग्राम पालीथिन भी मुश्किल खड़ी कर सकती है। यदि पालीथिन आंतों में फंस जाए तो वन्य जीवों की मौत निश्चित है। उन्होंने कहा, पालीथिन पानी की रिसाइकलिंग रोकने और भू-क्षरण का भी काम करती है। राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड के सदस्य दिनेश पाण्डेय और राजेन्द्र अग्रवाल बताते हैं कि वन्य जीवों के लिहाज से यह बेहद खतरनाक है। यदि जल्द ही कचरे को साफ नहीं किया गया तो वन्य जीवों की मौत का सिलसिला शुरू हो सकता है। राजाजी पार्क के निदेशक एसएस रसायली बताते हैं कि महाकुंभ खत्म हो चुका है। शीघ्र ही पार्क की सफाई का अभियान चलाया जाएगा।

 

एक और पोस्ट में स्टील स्क्रैप घोटाले की पोल खोली जा रही है -

नेफेड में स्टील स्क्रैप से 80 करोड़ का घोटाला

नई दिल्ली भारत सरकार के उपक्रम नेफेड में अधिकारियों द्वारा स्टील स्क्रैप के आयात और बिक्री में 80 करोड़ रुपये का घोटाला सीबीआई ने उजागर किया है। सीबीआई ने घोटाले के आरोप में नेफेड के असिस्टेंट मैनेजिंग डायरेक्टर और एक निजी कंपनी के चेयरमैन को बृहस्पतिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। दोनों को कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट एसीएमएम राकेश पंडित की अदालत में पेश किया। नेफेड के एएमडी ने जमानत के लिए याचिका दायर की। सीबीआई ने आरोपियों को 14 दिन के रिमांड पर देने की मांग की। अदालत ने सीबीआई की अपील को खारिज करते हुए आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। सीबीआई सूत्रों के अनुसार दिसंबर, 2007 को सीबीआई को सूचना मिली थी कि नेफेड में हेवी मेल्टिंग स्टील स्क्रैप के आयात और बिक्री में कुछ अधिकारियों द्वारा करोड़ों की घपलेबाजी की जा रही है।>>> आगे पढ़ें

 

ये तो थी दुनिया जहान में फैले जंक और कबाड़ की बातें. ब्लॉग जगत में भी बहुत कूड़ा फैला है. सवाल ये है कि मोती कैसे चुनें और पहचानें? हाल ही में ब्लॉगवाणी – चिट्ठाजगत हाटलिस्ट पर बड़ा बवाल मचा. जाहिर है, ऐसे नक़ली हॉटलिस्टों को पीछे धकेल कर एग्रीगेटरों द्वारा पूर्व के ‘कैफे-हिन्दी’ जैसे प्रकल्प शामिल कर चुनिंदा ब्लॉगों के संकलनों को सामने रखने का प्रयास अब किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को यह भी लगे कि हिन्दी ब्लॉगों में बहुत कुछ सार्थक माल-मसाला आ रहा है. नहीं तो होता ये है कि मची हुई फूहड़ गदर को देख कर नया-पुराना आदमी देखता है और कयास लगाता है – क्या यही हो रहा है हिन्दी ब्लॉग जगत में?!%$#^&??. इस बीच,  हिन्दी ब्लॉगजगत नाम से इसी तरह का एक बढ़िया प्रयास किया गया है जो निश्चित ही साधुवाद के पात्र हैं -

 

हिंदीब्लॉगजगत क्या और क्यों!

हिंदीब्लॉगजगत ब्लॉग एग्रीगेटर नहीं है. यह केवल अच्छे ब्लौगों की नवीनतम पोस्टों को देखने का जरिया है... घटिया ब्लौगों और पोस्टों से दूर. किसी टटपूंजिया ब्लॉग का प्रवेश यहाँ असंभव है. यदि आपका ब्लॉग यहाँ नहीं दिख रहा है तो इसके केवल दो अर्थ हो सकते हैं. पहला - आप औसत लिखते हैं, या दूसरा - आप अच्छा लिखते हैं पर मेरी नज़र में अभी नहीं आये हैं. फ़िक्र न करें, यदि आप अच्छा लिखना शुरू करेंगे या आप अच्छा लिख ही रहे हों तो एक-न-एक दिन मेरी नज़र में ज़रूर चढ़ेंगे (.) हिंदीब्लॉगजगत की ज़रुरत इसलिए पड़ी क्योंकि सामान्य एग्रीगेटरों के फेर में पड़कर घटिया और वाहियात पोस्टें अच्छी पोस्टों को पीछे धकेल देती हैं. यहाँ ऐसा नहीं होगा क्योंकि हिंदीब्लॉगजगत सिर्फ अच्छा लिखनेवालों की पोस्टों को ही दिखायेगा, सबसे नई पोस्टें सबसे पहले (.) अभी यहाँ बहुत काम बाकी है. कल (23-04-2010) ही तो इसे बनाया है मैंने. मैं कौन? मुझे केवल एक जागरूक पाठक जानिए. मुझे सनसनी या टिप्पणियों से कुछ लेना नहीं. मैं बस इतना चाहता हूँ कि आपको अच्छा पढने को मिले. तभी तो आप और अच्छा लिख पाएंगे! (.) हिंदी ब्लौगिंग को समृद्ध करें. इसे आपसी मतभेद, पसंद-नापसंद, कूपमंडूकता, और ओछेपन से दूर रखें. धन्यवाद (.)

 

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चलते चलते – आपने जौली अंकल को पढ़ा क्या? नहीं तो यहाँ चटका लगाएँ.

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9 टिप्‍पणियां:

  1. वैसे हमें एक कबाड़ी बड़ा प्यारा है ...जिसके खाने का नाम कबाडखाना है ....

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  2. घटिया ब्लौगों और पोस्टों से दूर. किसी टटपूंजिया ब्लॉग का प्रवेश यहाँ असंभव है.

    very good.

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  3. इसी कबाड़ पर एक पोस्ट जल्दी ही ।

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  4. आपका प्रयास सफल हो ऐसी मैं आशा करता हूँ!अभी तक तो पूरे ब्लॉग जगत में किसी ब्लॉग का सही मूल्यांकन हुआ नही है१अब आपसे कुछ उम्मीद है...शुभकामनाये!!

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  5. बहुत ही विशिष्ट चर्चा लगी , हमेशा की तरह , आप की मार्का
    अजय कुमार झा

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  6. अच्छा कबाड़ है - कोबाल्ट ६० वाले से बेहतर।

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  7. आपने सही कहा कि एग्रीगेटरों द्वारा पूर्व के ‘कैफे-हिन्दी’ जैसे प्रकल्प शामिल कर चुनिंदा ब्लॉगों के संकलनों को सामने रखने का प्रयास अब किया जाना चाहिए,

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  8. वाह हमारे जैसे भूखों के लिये कई और दस्तरख्वान भी सजे हैं..भई हम तो लंच के लिये हमेशा ’कबाड़-खाने’ ही जाते हैं.. :-)

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