बुधवार, दिसंबर 02, 2009

ग़र मतला दर्द में पागल होके ना झूमे

कल अनूप जी को एस एम एस करके मैंने बता दिया कि; "हिंदी ब्लागिंग छोड़कर नहीं जा रहा हूँ. जो करना हो कर लीजिये." मेरे एस एम एस के जवाब में उन्होंने लिखा; "हिंदी ब्लागिंग छोड़कर नहीं जा रहे हो तो इसका सुबूत दो और कल चर्चा कर डालो."

इसे कहते हैं अनुभवी ब्लॉगर. उन्होंने सोचा होगा; "पता नहीं कब टंकी पर चढ़ जाए. इससे पहले ही इससे सुबूत ले लो."

तो समझिये कि हम चर्चा नहीं कर रहे बल्कि सुबूत दे रहे हैं. क्या कहा आपने? किस बात का सुबूत? तो इस बात का सुबूत कि कौन-कौन सी पोस्ट मैंने देखी और पढ़ी.

पी सी गोदियाल जी की मानें तो उनके हाथ अंग्रेजी में साफ़ नहीं हैं. अब हाथ साफ़ करने की बात तो कहीं और कही जाती है लेकिन गोदियाल जी ने यहाँ यह बात एक कविता के सन्दर्भ में कही है. यह कहते हुए उन्होंने अपने अंग्रेजी कविता पब्लिश की है. आप पढ़िए;

Once, without knowing its fate,

You wrote ‘l’ ‘o’’v’’e’, four alphabets.

willingly or unwillingly don’t know,

Like on the keffiyeh of fresh Snow


सुन्दर कविता है. ज़रूर बांचिये.

बिजेन सलाम का लेख पढ़िए. मणिपुर की परिस्थियों के बारे में वे लिखते हैं;

"अहम बात यह है कि एक तरफ प़ढाई ठप है तो दूसरी तरफ छात्रों को परीक्षा भी देनी है. दसवीं और बारहवीं की परीक्षा तो सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा होती है, क्योंकि यहीं से भविष्य की राह खुलती है. छात्रों का कहना है कि इस तरह तो हमारा भविष्य ही अंधकारमय हो जाएगा. इस बार दसवीं कक्षा के 27000 से अधिक और बारहवीं कक्षा के 19000 से अधिक छात्रों को परीक्षा देनी है. इनके साथ-साथ अभिभावक भी चिंतित हैं. उन्होंने सरकार और पुनबा लुप से अपील की है कि दोनों मिलकर कोई ऐसी राह निकालें, जिससे छात्रों का भविष्य चौपट होने से बचाया सके"


बच्चों के साथ अन्याय ही हो रहा है. शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने का क्या फायदा अगर सरकार ऐसे मामलों में कुछ नहीं कर सकती?

विशाल गौरव जी की रचना पढ़िए. विशाल लिखते हैं;

ग़र मतला दर्द में पागल होके ना झूमे

ग़र मक़ता घाव की पपड़ी को जा ना चूमे
तो ग़ज़ल कहां की ग़ज़ल हुयी...


नेता अगर व्यस्त रहे तो क्या-क्या हो सकता है? अंशुमाली रस्तोगी जी का लेख पढ़िए. वे लिखते हैं;

"नेताओं का व्यस्त रहना बेहद जरूरी है। केवल व्यस्त नेता ही देश और समाज की चिंता कर सकता है"


सुन्दर लेख है. सच बात है. अगर नेता व्यस्त न रहे तो खुराफाती हो जाएगा. व्यस्त रहे तो भी खुराफाती ही रहेगा. इसी विषय पर हमारे पूजनीय सिद्धू जी महाराज कहते हैं;

"गुरु, नेता वो होता है जो लोगों को आपस में जोड़ सकता है. उन्हें तोड़ सकता है. हाथ जोड़ सकता है तो गर्दन भी मरोड़ सकता है. नेता फालतू है तो नेता माजीद भी है. कभी दिलदार है तो कभी बदतमीज भी है. नेता की गहराई को समझना इतना आसान नहीं है गुरु. ये वो जली है जो नुक्कड़ की पान दूकान से लेकर संसद तक फ़ैली है. जो बंदूकें चलवा दे वो चम्बल की वैली है, और कुल मिलकर गुरु, राम तेरी गंगा मैली है.".....:-)



डा. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक' की रचना पढ़िए. शास्त्री जी लिखते हैं;

सुख का सूरज सजे गगन में, बादल अमृत बरसायें,
विश्व गुरू बनकर हम जग को, पावन पथ दिखलायें,
तब सचमुच ही कहलाएगा, मेरा भारत देश महान।
अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।


राजीव तनेजा जी का व्यंग पढ़िए. नेता पर है. राजीव जी लिखते हैं;

"आपने हमारे यहाँ की कच्ची गलियों को कंक्रीट की बनवा हमें कीचड़ एवं बदबू भरे माहौल से मुक्ति दिलवा दी ...इसके लिए हम आपके बहुत-बहुत आभारी हैँ...लेकिन इन गलियों के कच्चे से पक्के होने के पूरे प्रकरण में आपके कितने घर कच्चे से पक्के हो गए?...ये बतलाने की कृपा करेंगे आप?..."


अब नेता जी कृपा कर भी दें तो क्या इतनी कृपा करेंगे कि अपने कच्चे-पक्के घर कर हिसाब देने लगें? बढ़िया व्यंग है. ज़रूर पढ़िए.

मंहगाई के बारे में कहीं बातें नहीं होती. आप अगर मीडिया से शिकायत करें तो शायद मीडिया यह कहकर पल्ला झाड़ ले कि; "मंहगाई ही तो दिखा रहे हैं. सलमान खान का शूट कम मंहगा है या फिर बच्चन साहब का चश्मा? हम मंहगाई की ही तो बात कर रहे हैं."

मंहगाई पर प्रोफ़ेसर आनंद प्रधान का लेख पढ़िए. वे लिखते हैं;

"असल में, इन बयानों से न सिर्फ केंद्र सरकार की लाचारी झलकती है बल्कि उसकी हानेबाजी और चालाकी का भी पता चलता है. कभी वह सूखे को कभी वैश्विक वित्तीय और आर्थिक संकट को और कभी बिचौलियों और राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराकर अपना पल्ला झाडना चाहती है. अपनी सुविधा के अनुसार हर मंत्री और अफसर कारण खोज रहा है. यही नहीं, केंद्र इस महंगाई से निपटने का जिम्मा भी राज्य सरकारों के मत्थे मढ़ने पर
तुला हुआ है. गोया इस महंगाई के लिए केवल राज्य सरकारें जिम्मेदार हो और उसका इससे कोई लेना-देना नहीं हो."


बहुत सधा हुआ लेख है. ज़रूर पढ़िए.

रजनी भार्गव जी की रचना पढ़िए. वे लिखती हैं;

ठौर-ठौर पिये

चाँदनी का दोना लिये,

मढ़ती रात

तारों के धागे लिये


पूरी रचना पढ़िए. रचना की सुन्दरता पूरी रचना में झलकती है.

देखिये आदि कहाँ दम आजमा रहा है.

प्रशांत चेन्नई से बंगलूरू गए थे मार-कुटाई करने. वहां के किस्से बता रहे हैं. पढ़िए. पुरानी यादों की गारंटी है. प्रशांत लिखते हैं;

"अब शुरू हुआ नीता के इंतजार का सिलसिला जिसके चक्कर में मैंने पूजा और रोजी को मना कर दिया था इस बार मिलने से.. मगर वह तब आयी जब चंदन ने अपने घोड़े(बाईक) को उसके घर तक लगभग 35 किलोमीटर दौड़ाया.. फिर रात ढ़लने से पहले ही उस जगह भी पहूंच ही गये जहां पार्टी चल रही थी.. इसके लिये नीता और प्रियंका भी जिम्मेदार थी जो आश्चर्यजनक रूप से बस 10 मिनट में ही तैयार हो गई थी.. "


पैराग्राफ की पहली लाइन के लिए प्रशांत से कुछ पूछा जाना चाहिए...:-)

पूर्णिमा बर्मन जी दीवार में छेंद के बारे में कुछ बता रही हैं. बहुत दिलचस्प है. ज़रूर पढ़िए.

बहुत दिनों बाद चर्चा से वापस जुड़ा हूँ. इसलिए बड़ी चर्चा कर गया....:-) असल में करीब एक महीने से ज्यादा ब्लागिंग से कटे रहने की वजह से ठीक वैसा ही आभास हो रहा है जैसा उस इंसान को होता है जिसे २१ दिन के बुखार के बाद डॉक्टर ने खाना खाने की परमीशन दी हो और उसके मन में आ रहा हो कि बस समोसे, पकौड़ियों और भजिये पर टूट पड़ें. लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए न. पहले दाल का पानी...फिर खिचड़ी...फिर रोटी.....

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26 टिप्‍पणियां:

  1. पी डी से पहली लाईन के लिए तो पुछा ही जाना चाहिए.. क्या चक्कर है भाई..?

    बाकी आपने चर्चा तो फर्राटेदार की है.. रही टंकी पे चढ़ने की बात तो आप रिस्क मत लीजिये.. कही किसी ने वापस उतारा नहीं तो...?

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  2. puja to bhai ham hain, ye roji kaun hai ji? aur hamein to mana karne ka kuch aur hi karan bataya tha shaitaan PD ne...aajkal bada ghumakkad ho gaya hai...photo-shoto bhi kheenchta hai bahut(hero type pose dekar). kush ki ghudchadhi ke sath iska koi plan to nahin hai ;)
    anand pradhan hamein IIMC mein padhate the...unke lekh bilkul teekhi chot karte hain samasya par. bahut helpful rahe hain hamesha wo.

    par aaj ki charcha ke liye is liye bada sa thank you ki aaj rajnigandha blog par gayi yahin se...bahut hi pyaari aur adbhut bimbon wali kavitayein mili.
    aapne anoop ji ko dhamki di thi...aisa hi kuch hone ka andesha hona chahiye aapko :)
    charcha ke liye anoop ji ko dhanyavad :)

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  3. gajab ittifaq hai, kush ko tippani mein lapeta aur wo hamare type karte karte tippani de gaya.

    hindi transliteration mein problem aa rahi hai mujhe...isliye roman mein tippani kar rahi hoon.

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  4. सुन्दर चर्चा.. अच्छा लगा आपको पुःन सक्रिय देख कर..

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  5. कुश का कहना सही है। तबियत वैसे ही खराब चल रही है। टंकी पर चढ़ने का रिक्स लेना ठीक नहीं है।
    आपने चर्चा की; आपको धन्यवाद और हमें बधाई!

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  6. बहुत सुन्दर मिश्रा जी, और आपका तहे दिल से आभार !

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  7. शिव बाबू

    ये क्या है..न तो अजय ने जाने का एस एम एस भेजा और न आपने न जाने का...हमें तो कोई याद ही नहीं कर रहा. शुकुल जी को कम से कम आप वाला मिल गया तो स्टॆटस बरकरार रही आई.

    तबीयत में उठान दृष्टिगत है इस चर्चा के माध्यम से.

    जारी रहिये...स्वस्थ रहिये..एस एम एस करते रहिये.

    शुभकामनाएँ.

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  8. आपकी बहुत दिनों बाद की गयी चर्चा सुन्दर लगी । आभार ।

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  9. मैं आपकी मेहनत का अँदाज़ा लगा सकता हूँ,
    एन्काइलॉज़िंग डिसऑर्डर होती ही ऎसी हैं ।
    इस नाते चर्चा अच्छी बन पड़ी है, पी.डी., कुश और कु. पूजा जी की नोंकझोंक में मैं कूश नहीं बोलूँगा,
    कुश की गुडचढी* के साथ इनका क्या प्लान है, पिडी बस इतना भर बता दें !


    * kush ki gudchadhi :)

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  10. सही है..आपकी चर्चा के बहाने अनूप जी को सबूत मिल गया..और हमें कुछ बेहतरीन लिंक्स..आज की शाम गर्क करने के लिये..शुक्रिया ;-)

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  11. स्वास्थ लाभ की बधाई॥
    कुश की टिप्पणी महत्त्वपूर्ण है :)

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  12. अजी टंकी पे सर्दियो मै मत चढे,अगर सर्दी लग गई तो, ओर आज कल वो मुआ स्वाईन फ़लू भी हर जगह फ़ेला है,इस लिये गर्मियो तक अभी इस प्रोगराम को रद्द कर दे

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  13. प्रमाण मिल गया, हम संतुष्ट हो गये!!

    सस्नेह -- शास्त्री
    http://www.IndianCoins.Org

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  14. ब्लॉगिंग छोड़के नहीं जा रहे हैं, इसमें आश्चर्य कैसा। जिसको यह लत लग जाए, वह छोड़ सकता है क्या?
    --------
    अदभुत है हमारा शरीर।
    अंधविश्वास से जूझे बिना नारीवाद कैसे सफल होगा?

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  15. जिस टंकी पर आप चढ़ना चाह रहे थे वह पहले ही ढह गई है सो अब टिप्पणी चर्चा के अलावा और कोई चारा नहीं है और आप वह कर ही रहे हैं ।

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  16. अरे!...इसमें तो मेरे व्यंग्य का भी जिक्र है... बहुत-बहुत आभार...

    बढिया चिट्ठाचर्चा

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  17. जिस किसी को उन दोनों नामों से शिकायत है उसमें से एक का खुलासा तो पूजा ने खुद कर दिया.. रही बात दूसरे की तो आप इस लिंक पर जायें, आपको उसकी जानकारी मिल जायेगी.. Orkut Pic Link

    आपत्ती जताने वाले सभी मित्र मेरे और्कुट प्रोफाईल के फ्रेंड लिस्ट में हैं, सो कोई समस्या नहीं होगी उन्हें वह देखने में.. :)

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  18. जब यह पोस्ट आयी थी तब नेट की दुनिया से बाहर चल रहा था और इस पर नजर नहीं गई थी.. आज ही देखा इसे.. :)

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