गुरुवार, जुलाई 09, 2009

दिल्ली में एक मौत... और माइकल जैक्सन के नाम एक चिट्ठी


कुछ दिनों पूर्व ही खबर आई कि माइकल जैक्सन नहीं रहे.

खैर, वे रहे तो न्यूज थे. मरे तो भी न्यूज ही थे. माइकल बाबू अपनी पचास साला जिन्दगी में कम से कम तीस साल इंसान बनकर नहीं बल्कि एक न्यूज बनकर जिए. अब नहीं रहे तो भी कम से कम पंद्रह साल तो न्यूज बने रहेंगे.

उनकी इस प्रतिभा को प्रणाम करते हुए एक हिंदी न्यूज चैनल के प्रोड्यूसर ने उन्हें चिट्ठी लिख डाली है. मजे की बात यह कि चूंकि प्रोड्यूसर साहेब हिंदी न्यूज चैनल के हैं, लिहाजा मीडिया मार्ग पर चल रहे ब्लॉगर बंधु ने प्रोड्यूसर साहेब की चिट्ठी उड़ा ली. प्रोड्यूसर साहेब ने पूरी चिट्ठी "सच्चाई की स्याही और ईमानदारी के कलम" (है न हिंदी न्यूज चैनल पर बोला जानेवाला वाक्य टाइप?) से लिखी है.

चिट्ठी का एक अंश पढिये;

"प्रिय माइकल,
मैंने तुम्हारे बारे में बहुत पढ़ा माइकल. तुम्हारे बारे में गूगल पर बहुत सर्च भी किया. सैकडों वीडियो देख डाले. जिस दिन सोचता हूँ कि अब तुम आराम से दूसरी दूनियाँ में पहुँच चुके होगे, ये दूनियाँ भी तुममे अब मिस्ट्री नहीं तलाशेगी, उसी दिन नै कहानी आ जाती है माइकल. अब देखो न. कल ही तुम्हारी शव-यात्रा निकली. हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि दी. करोडों लोगों ने टीवी पर देखा. मैंने भी दिन भर में कई स्टोरी अपने चैनल के लिए बनाई. रात में तीन घंटे तक लाइव किया. फिर चैन से सो गया कि तुम्हारा खेल अब ख़त्म हो गया. तुम भी आराम करोगे और मैं भी. दोपहर को दफ्तर गया तो पता चला कि ताबूत से तुम्हारी लाश ही गायब हो गई है माइकल. ये क्या बात हुई माइकल. तुम कैसी-कैसी लीला रच रहे हो. जीते जी तो तुम मिस्ट्री बने ही रहे, मरने के बाद भी क्या चाहते हो....तुम्हारी लाश के गायब होने पर मंथन करके एक कार्यक्रम बनाने की सोच ही रहा था कि कोई बता गया कि तुम क्लोन भी बनाना चाहते थे...अमा यार....क्या करना चाहते थे तुम...."

प्रोड्यूसर जी की चिट्ठी से ही पता चला कि माइकल बाबू ने हिंदी न्यूज चैनलों के लिए कभी काम नहीं किया. प्रोड्यूसर जी ने लिखा;

"वैसे एक बात कहना चाहता हूँ माइकल...हमारे यहाँ चैनलों ने तुम्हें खूब दिखाया....इतना जितना तुम दो-चार सौ शो करके भी नहीं दिख पाते.......हमारे चैनलों को रोज खुराक दे रहे हो....टीआरपी दे रहे हो...टी आर पी समझते हो न माइकल...कहाँ से समझोगे...तुमने किसी हिंदी न्यूज चैनल में तो काम किया ही नहीं..."

वैसे तो लोग कहते हैं कि किसी की चिट्ठी नहीं पढ़नी चाहिए लेकिन यह चिट्ठी पूरी तरह से सार्वजनिक है. इसे आप पढ़ सकते हैं. नैतिकता आड़े नहीं आएगी.

माइकल के मुरीद इन प्रोड्यूसर साहेब ने अपनी चिट्ठी की इति करते हुए लिखा;

"तुम्हारा मुरीद
एक चैनल का अदना सा प्रोड्यूसर (नाम नहीं बता सकता माइकल, नौकरी चली जायेगी)"

मैं तो कहता हूँ कि इस चिट्ठी के ब्लॉग पर लीक होने के बाद हो सकता है आज रात को ही विशेष देखने को मिले जिसमें एंकर कहते हुए सुना जाय;

"जी हाँ. माइकल जैकसन को एक हिंदी न्यूज चैनल के प्रोड्यूसर ने लिखी चिट्ठी. एक अदने प्रोड्यूसर ने. कौन है यह अदना प्रोड्यूसर जो माइकल को मरने के बाद भी चिट्ठी लिख रहा है? तो क्या माइकल जैकसन जिन्दा हैं? तो जिसको दफ़न किया गया वो कौन था? यह चिट्ठी छोड़ जाती है कई सवाल. कौन देगा इन सवालों के जवाब?......"

माइकल जैकसन को श्रद्धांजलि दी है हरिशंकर राढ़ी जी ने. श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने लिखा;

"उनके वस्त्रालंकार की तो बात करना ही बेमानी है।पता नहीं क्या-क्या पहने, क्या-क्या खाए! आवष्यकतानुसार चेहरा-मोहरा भी बदला।प्लास्टिक सर्जरी भी कराई, कभी मम्मी बने तो कभी पापा! ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है। पैसे को उन्होंने पैसा समझा ही नहीं। इतने फकीर थे कि करोड़ों डालर के कर्ज में डूब गए। यह सब देखकर विदर्भ के किसानों की सोच पर मुझे बड़ी चिढ़ आई। छोटे से कर्जे पर नासमझ आत्महत्या कर लेते हैं। उन्हें भी पोजिटिव होने का गुण उनसे सीखना चाहिए। पर वे ऊँची बातें सोचते ही नहीं!"

आप श्रद्धांजलि पढिये.

माइकल जैकसन जी की बातें हो रही थी कि उन्ही दिनों हमारे देश में बजट तरशीफ ले आया. अब आया तो आया. जिस ब्रीफकेस में आया था, वहीँ बैठा रहता. क्या ज़रुरत थी बाहर निकलने की?

निकला तो पता चला कि ब्रांडेड ज्वेलरी का दाम घट गया. एलसीडी टीवी सस्ता हो गया और जीवन रक्षक दवाएं भी. लेकिन नीरज बधवार जी बाज़ार गए तो पता चला कि इन सब बातों का असर आलू, प्याज वगैरह पर कुछ नहीं पड़ रहा. उन्होंने आलू को समझाया भी कि......

छोडिये, आप उनसे ही सुनिए उन्होंने क्या-क्या किया;

"बेशर्मी ने अपना दायरा बढ़ाया है। इंसानों से होते हुए वो सब्जियों तक जा पहुंची है। मैं आलू को समझाने की कोशिश कर रहा हूं, मगर वो नहीं समझ रहा। लाखों करोड़ की सब्सिडी का हवाला देता हूं, फ्रिंज बेनिफिट टैक्स के खात्मे की याद दिलाता हूं, नौ फीसदी विकास दर का भी ज़िक्र करता हूं, मगर सब नाकाम। औसत चाकू से कट जाने वाला आज किसी तर्क से नहीं कट रहा। एक सीटी में गल जाने वाला आज किसी दलील पर नहीं पिघल रहा। किसी क़ीमत पर अपनी क़ीमत कम करने को तैयार नहीं है।"

बेशर्म आलू. लेकिन आलू भी क्या करे? वित्तमंत्री ने उसके ऊपर तो कोई पॉलिसी अनाऊंसमेंट किया ही नहीं. खैर, आप नीरज जी की पोस्ट पढिये और आलू की इस बेशर्मी पर उसे कमेन्ट देकर कोसिये.

निर्मला कपिला जी की कविता पढिये. वे लिखती हैं;

कुछ कवितायें
कहीं लिखी नहीं जाती
कही नहीं जाती
बस महसूस की जाती हैं

पूरी कविता आप निर्मला जी के ब्लॉग पर पढिये.

भारतीय पक्ष पर कमलेश्वर जी की कहानी दिल्ली में एक मौत पढिये. अगर आपने पहले नहीं पढ़ी है तो ज़रूर पढें. बहुत पसंद आएगी कहानी. अद्भुत शब्द-चित्र हैं. एक बानगी देखिये;

"सख्त सर्दी है। सड़के ठिठुरी हुई हैं और कोहरे के बादलों को चीरती हुई कारें और बसें हार्न बजाती हुई भाग रही हैं। सड़कों और पटरियों पर भीड़ है, पर कुहरे में लिपटा हुआ हर आदमी भटकती हुई रूह की तरह लग रहा है।

वे रूहें चुपचाप धुंध के समुद्र में बढ़ती जा रही हैं… बसों में भीड़ है। लोग ठंडी सीटों पर सिकुड़े हुए बैठे हैं और कुछ लोग बीच में ही ईसा की तरह सलीब पर लटके हुए हैं-बाहें पसारे, उनकी हथेलियों में कीलें नहीं, बस की बर्फीली, चमकदार छड़ें हैं।

और ऐसे में दूर से एक अर्थी सड़क पर चली आ रही है।

इस अर्थी की खबर अखबार में है। मैंने अभी-अभी पढ़ी है। इसी मौत की खबर होगी।"

अरविन्द मिश्र जी अपनी चिट्ठाकार चर्चा में आज मिलवा रहे हैं जीशान हैदर जैदी जी से. जीशान जी के बारे में बताते हुए मिश्र जी लिखते हैं;

"एक जेनुईन निष्ठावान रचनाकर्मी ,शीर्षस्थ विज्ञान कथाकार मगर उतने ही अन्तर्मुखी ,विनम्र ,विनयशील व्यक्तित्व के धनी जीशान हैदर जैदी से आपको मिलवाते हुए मुझे एक सत्कर्म करने का सा बोध हो रहा है !"

आप मिश्र जी के ब्लॉग पर जीशान जी से मिलिए.

नेता, अभिनेता वगैरह सवालों के घेरे में रहते ही हैं. अब ईवीएम मशीन उसी घेरे में आ गई है. इस बारे में पढिये हिमांशु शेखर जी का लेख.

आज राजेश पटेल जी का जन्मदिन है. उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं.

आज के लिए बस इतना ही.

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9 टिप्‍पणियां:

  1. माइकल बाबु चले गये.. पर कई लोगों के लिये रोजगार छोड गये...

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  2. राजेश पटेल जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं और इस बेहतरीन चर्चा के लिए शिव मिश्रा जी को हार्दिक बधाई.

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  3. रोचक और विचारोत्तेजक !

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  4. चर्चा रोचक रही । कुछ और लिंक मिलने चाहिये थे इस चर्चा को ।
    राजेश जी को जन्मदिन की शुभकामनायें । आभार ।

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  5. क्या ? माइकल जैक्सन नहीं रहे !

    शोक !

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  6. जीते जी तो तुम मिस्ट्री बने ही रहे - और अब हिस्ट्री बने रहोगॆ:)

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  7. लगता है हड़बड़ी में थे.....इतनी छोटी चर्चा कर भाग लिए.....खैर यह मैं इसलिए कह रही थी ,पढने में इतना मजा आ रहा था की इतनी जल्दी ख़त्म हो जाना खटक गया..

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  8. राजेश पटेल जी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ!

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