शनिवार, जुलाई 11, 2009

शनीचरी चर्चा आधी रात को

आज सुबह ही भूतपूर्व मद्रास में शिवकुमार मिश्र की सैद्धांतिक विवेचना वाली पोस्ट बांची। इसमें ब्लाग और साहित्य का जबाबी कीर्तन कराया गया था। इत्ते पर कुछ और पन्ने भर-भरा दिये जाते और् कौनौ कायदे की युनिवर्सिटी में जमा कर दिया जाता पोथन्ना तो पीएचडी की डिग्री भरभरा के उनकी गोदी में आकर पसर जाती। पीएचडी का विषय होता- ब्लाग और साहित्य एक तुलनात्मक अध्ययन। चूंकि मामला तुलना मतलब तौलने से संबंधित है अत: ऐसा कत्तई संभव है कि इस थीसिस को कोई धर्मकांटे वाला स्पान्सर भी कर देता।

ब्लाग अभिव्यक्ति का एक माध्य्म है। इसमें साहित्य भी शामिल हो सकता है। लेकिन अभी साहित्य के लोग ब्लगिंग को उत्ती सहजता से लेने में शायद सहज नहीं हैं।

किंचित इसका कारण यह भी हो कि जिस आला दर्जे की खिंचाई साहित्यकार लोग आपस में कर सकते हैं उस तक पहुंचने में ब्लागरों को अभी समय लगेगा। पता चला कि उदय प्रकाशजी कोई इनाम ले आये गोरखपुर से। इसकी सैद्धांतिक विवेचना साहित्यिक भाषा में हो रही है। उदयप्रकाश जी को माफ़िया बताया जा रहा है खरी-खरी सुनाई जा रहीं है। उदयप्रकाशजी भी बकौल, रंगनाथ सिंह, खंभठोंक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हम अभी पूरे मसले का मजा ले नहीं पाये हैं लेकिन ब्लागर साथी इस मसलें से प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं कि किस परिपक्वता से साहित्य से जुड़े लोग आरोप-प्र्त्यारोप करते हैं और किस अदा से अपना पक्ष रखते हैं।

वैसे यह जानना मजेदार बात है कि दुनिया जहान की खबरों पर अपनी निगाह रखने वाले उदयप्रकाशजी को यह जानकारी नहीं हो पाती कि जिससे वे कोई इनाम लेने जा रहे हैं उसकी सार्वजनिक छवि कैसी है? या अगर जानते भी हैं तो वे यह साबित करते हैं कवि/साहित्यकार मूलत: भावुक व्यक्ति होता है और किसी का भी अनरोध ठुकरा नहीं पाता (खासकर जब अनुरोध उसको सम्मानित किये जाने का हो)।

ब्लागजगत के नयेनवेले साथियों का अंदाज शहंशाही होता है। एकदम अमिताभ बच्चन टाइप्- जहां हम खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं से शुरू होती है । आशीष खण्डेलवाल की आज की पोस्ट कुछ यही आभास देती है। भाई साहब पूछते हैं- क्या हिन्दी जगत में ब्लॉग पर टिप्पणी पाने के लिए खुद भी उनके ब्लॉग पर टिपियाना ज़रूरी है ??? हमारे इस पोस्ट को लेकर दो ठो एतराज हैं:

पहिला एतराज तो ई है कि इस तरह की सवालिया पोस्ट लिखने का अधिकार ब्लाग जगत में किसी और के लिए सुरक्षित है। इसके बावजूद आशीष ने अईसा क्यों कर किया? क्या मिल गया उनको? चालीस के करीब टिप्पणियां ही तो!!! वो भी सब उन्हीं लोगों की जो रोज के उनके तारीफ़ करने वाले हैं!

दूसरा और ज्यादा मौजूं सवाल है कि जब पहिले ही इस पर विद्वान लोग कह चुके हैं तो उसका उल्लेख किये बिना इत्ते महत्वपूर्ण विषय पर माउस क्यों चलाया गया? :)

ये पहले के (अ)कालजयी लेख देख लीजिये:

  • कहीं आप ही तो लल्लू नहीं :

  • टिप्पणी_ करी करी न करी :

  • टिप्पणी न कर पाने के कुछ मासूम बहाने:


  • छतीसगढ़ ब्लागरों का अड्डा बनता जा रहा है। पाबलाजी के माध्यम से जानिये कि छत्तीसगढिया ब्लागरों ने क्या गुल खिलाये रायपुर में। फ़ोटॊ-शोटॊ भी हैं जी।

    आज मनविदर भिंबरजी का जन्मदिन है। उनको हमारी शुभकामनायें।

    एक लाइना



    1. दहश्तगर्दों के खिलाफ़ फ़तवा आखिर कब? : प्रतीक्षा करें फ़तवा कतार में है!

    2. रायपुर में सजी ब्लागरों की महफिल : ब्लागर भी अब महफ़िल सजाने लगे!!

    3. झा जी इस्टाईल , चिट्ठी चर्चा का मजा लीजिये: चिट्ठाचर्चा में आकर इस्टाईल् मारिये न झा जी

    4. क्या टिप्पणी पाने के लिए खुद भी टिपियाना ज़रूरी है ??? :कुछ पाने के लिये कुछ खोना तो पड़ता है झा जी

    5. हुन्दै ले लो हुन्दै! :तौल देओ भाई एक पाव

    6. एक बन्दर ट्रेन के अन्दर!! : सुन्दर

    7. शीर्षक में क्या रखा है ? आप बस पढ़िये :काहे पढ़ें? कौनौ जबरदस्ती है? हम तो टिपियाके फ़ूट लेंगे!!

    8. बेईमानी का उदय और चुप्पी साधे हिंदी वीर : ऐसे चलते हैं विमर्श के तीर

    9. वही बात...ब्लॉग को साहित्य कहा जा सकता है या नहीं? http://shiv-gyan.blogspot.com/2009/07/blog-post_10.html : वही बात कहो जो कहना हो! कौन रोकता है?


    चलते-चलते


    बड़े बिलागर एक मिल गए, बेचत फ़िरते हुन्दै कार
    जिज्ञासा की तो बतलाया, पार्ट टाइम है यह रुजगार
    शिवकुमार जी एक ले रहे, ताऊ जी द्वय को तैयार
    आधी कार खरीदी कुश ने, आधी ले गए इनके यार
    एक पाव लेकर फ़ुरसतिया, बिलागरन का नाम डुबायँ
    विवेक सिंह की जेब कट गई, शीश शर्म से रहे झुकाय


    विवेक सिंह

    और अंत में


    अभी रात को ग्यारह बजे रात के जहाज से दिल्ली आये। नेट पर बैठे तो विवेक सिंह मिले। बोले चर्चा कर डालो। हमने कहा अब क्या करें दिन तो ससुरा बीत गया। विवेक बोले- अभी बचा है घंटा! हमने कहा घंटे भर में चर्चा क्या होगी ?- घंटा!!! विवेक ने सुझाया- यह तो चर्चा का टापिक हो गया- चर्चा क्या होगी घंटा? आगे वो बोले -टापिक हमने बता दिया अब चर्चा आप कर डालिये।

    चूंकि अब विवेक गायब हो गये (चलते-चलते मेलिया के)इसलिये उनके शीर्षक को भी हम गायब करके चर्चा पोस्ट कर दे रहे हैं। आप पढकर आराम से सो जाइये। टिपियाने के लिये परेशान न् होइये। सुबह टिपिया दीजियेगा। न आप कहीं भागे जा रहे हैं न् ये ब्लाग।

    सब कुछ शुभ-शुभ।

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    19 टिप्‍पणियां:

    1. कल काहे टिपियायें ? कौनौ जबरदस्ती है? हम तो टिपियाके फ़ूट लेंगे!

      वीनस केसरी

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    2. आदरणीय अनूपजी शुक्ल
      आज आपकी चिठ्ठाचर्चा मुझे अच्छी लगी, कारण साफ है हिन्दी ब्लोगरो के हीत की बात की गई ।
      .......
      कमेन्ट को लेकर मेरी व्यक्तीगत सोच इस तरह है।

      1 तुम मुझे खुन दो मै तुम्हे आजादी दुगा।
      2 प्यार के बदले प्यार।
      3 लेन देने बराबर हो।

      उपर लिखे तीनो बातो मे याचक ने लेने के बदले कुछ देने की बात कही है।
      फिर यह बात किसी के गले क्यो नही उतरती कि "टीपण्णी के बदले टीपणी!"

      हिन्दी ब्लोगरोको यह श्लोगन अपने ब्लोग पर लटका लेने मे हर्ज नही।
      "तुम्ह मुझे टीपणी दो मै भी तुम्हे टीपणी दुगा।"

      या फिर किसी को "टीपण्णी के बदले टीपणी!" नही देनी है तब एक स्कीम ही निकाली जाए कि ५० टीपण्णी पर एक शर्ट और १०० टीपण्णी पर शर्ट पेन्ट फ्रि!


      आभारजी!
      जयजिनेद्र
      महावीर बी सेमलानी
      आभार/मगलभावानाओ सहित
      मुम्बई टाईगर
      हे प्रभु यह तेरापन्थ

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    3. बेकार परेशान हुए न !

      जहाज को कानपुरै ले जाते तो नजदीक पड़ता, टाइम भी बचता, चर्चा आराम से हो जाती, वैसे हड़बड़ी में आप नेचुरल चर्चा कर बैठे हैं :)

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    4. का शुकल जी...इतना बडका लोग के बीच में हमको घुस के ..लपद्खच्चु बनाइएगा का....? काहे बचवा को डराते हैं....का इश्टाईल विश्ताईल मारेंगे...ऊ तो बस ....चर्चा तो आप लोगन करते हैं..एकदम झक्कास इश्टाईल में...पढ़ के मजा आ जाता है ...

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    5. चर्चा सँज्ञान में ली गयी,
      टिप्पणी की प्रतीक्षा करें !

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    6. आधी रात को भी इतनी मस्त चर्चा.. अच्छा है..

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    7. ऐसी चर्चा घण्टा दर घण्टा होवै क चाही!

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    8. जनाब आपकी बातों का और ताजा करदूं, वह यूं कि अब उस पोस्ट में 54 कमेंटस (उनका कमेंटस नहीं, अधिकतर गिन्‍ती में उनका भी होता है) हैं,जिसमें दो delete कर दिये गये हैं एक अजनबी का एक मेरा, अब दुनिया तो यह समझेगी कि मैने भद्दी भाषा का प्रयोग किया होगा, जबकि सच यह है मैंने वहां प्रतिक्रिया शक्ति की मिसाल पेश की थी, जिस से कमेंटस का हिन्‍दी ब्‍लागर उचित प्रयोग कर सकें, आपकी बात ठीक है कमेंटस में वही लोग अधिक हैं जो रोज उनके गुणगाण करते हैं, मैं भी उसमें से एक हूँ, थोडा मकसद जुदा है, इशारा करूँ तो यह समझो कि वह मैं ही हूँ जिसने ब्लागर के विचार बदल दिये, इनके अबके विचार कुछ दिन पहले का पोस्ट से जुदा हैं, देखिये इनकी ''बेनामी टिप्पणीकारों, तुम्हारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता''
      उनको ब्लाग टिप्स देने चाहिये थे जिसके लिये कि ब्लाग देखा जाता है, अगर टाइमपास था तो मेरा कमेंटस क्‍यों डिलिट किया है
      देखिये किया अनुचित है इसमेंः

      प्रतिक्रिया शक्ति शक्ति हवा(लेख) का रूख मोड सकती है, टिपियाना ज्‍रूरी नहीं,
      हमें comments power का सदुपयोग करना चाहिये
      इस power को कोई देखना चाहे तो देखे एक इस्लाम दुशमन के yugkipukar.blogspot.com पर oct 2007 का लेख "इसलाम और कुरान पर महापुरुषों के द्वारा दिए वीचार" फिर उस पर मेरे कमेंटस

      अल्लाह के चैलेंज
      islaminhindi.blogspot.com (Rank-2)
      कल्कि व अंतिम अवतार मुहम्मद सल्ल.
      antimawtar.blogspot.com (Rank-1)
      ...............................
      कमेंटस के उपर वाले हिस्से पर ऐतराज जायज नहीं कमेंटस से संबंन्धित है दूसरे नीचे के हिससे पर ऐतराज नहीं होना चाहिये कि ऐसे दूसरों का भी‍ दिया हुआ है, देखें श्यामल सुमन का कमेंटस

      ब्लागर का जवाब
      मोहम्मद उमर जी,
      आपके विचारों का पूर्णतः सम्मान करता हूं।
      क्षमा कीजिए, मुझे आपकी यह टिप्पणी बहस से हटानी पड़ी है। आपने पोस्ट में विशेष रूप से उल्लेखित नियम का उल्लंघन किया है। वहां साफ लिखा था कि टिप्पणी में किसी ब्लॉग या ब्लॉगर का उल्लेख वर्जित है।
      दूसरी बात यह कि हिन्दी ब्लॉग टिप्स से वे टिप्पणियां भी हटा दी जाती हैं, जिन पर किसी ब्लॉग का प्रचार लिंक हो।
      आपके ब्लॉग बहुत अच्छे हैं और मैं उनकी सफलता की कामना करता हूं। मेरे लायक कोई सेवा हो तो ज़रूर लिखें।
      सादर
      आशीष खण्डेलवाल

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    9. मेरा कमेंट नहीं लगा रहे आशीष खण्डेलवाल, बताईये इसमें किया नुक्‍स है, मैंने सोचा यह पोस्ट भी उनसे संबंधित ही यहीं सही, यह है विजेट ''पोस्ट की पाठक संख्या का हिसाब-किताब और भी आसान (per post hit counter widget)''
      तीसरी बार अब यहां लिख रहा हूँ, चौथी बार कहीं ओर जाकर लिखूंगा, यह ब्लागिंग हित में नहीं है,ःःःःः

      जांच पडताल के बादः- गुरू लोग कहगये दुनिया में मूर्ख अधिक होते हैं, इसको अपने ब्लाग में लगाने का मतलब है पाठक अपने विवेक से नहीं इस मिनती से धोका खाकर लेख पढेगा जो होसकता है मूर्खों द्वारा संख्‍या बढायी गई हो,, स्‍वयं 15 अथवा 20 बार इस पोस्ट को खोला है, ना कि पढा है, इस बार भी पोस्ट खोलकर सीधे नीचे कमेंटस बाक्‍स पर पहुंच गया पढा नहीं, इस‍लिये इस विजेट में इतनी बार पढा गया नहीं, इतनी बार खुला लिखना उचित होगा,
      मेरी राय में तो यह लगाना ठीक नहीं, कियोंकि जो लेख कम पढा जायेगा वह अच्छी पोस्ट होते हुये भी कम संख्‍या दिखने के कारण कम पढी जायेगी, लेकिन फिर भी में अपने मित्रों को आपके इस ब्लाग से पढवाता हूँ तो बहुत खुश होते हैं, बधाई

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    10. Mohammed Umar Kairanvi जी, यह सही मंच नहीं है अपनी बात रखने का। फिर भी आप रख रहे हैं तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं। आप अपने कमेंट में से ब्लॉग्स के प्रचार लिंक निकाल कर कमेंट कीजिए। फ़िर देखिए कि आपके कमेंट पब्लिश होते हैं या नहीं। मेरे पास आपके सभी कमेंट्स सुरक्षित हैं और सभी में आपने प्रचार लिंक का इस्तेमाल किया है।

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    11. आशीष साहब से गलतफहमी दूर हो गई, उन्‍होंने बताया कि वह अब कमेंटस में किसी का प्रचार नहीं होने देंगे, इसी लिये मेरा कमेंटस नहीं पब्लिश कर रहे थे, जबकि में दूसरों को प्रचार करता देख ही प्रचार करने लगा था,
      इस बहाने जनाब फुरसतिया जी को पता चल गया होगा कि,सभी तारीफ करने वाले नही हैं,

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    12. मेरे ब्लौग के लिंक में अभी तक काम नहीं कर रहा चिट्ठा-चरचा का फ़ीड...जाने क्या वजह है?
      और इन तमाम विवादों से ये हिंदी-ब्लौगिंग कब दूर होगा?

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    13. गुरूजी आशीष खण्‍डेलवाल जी निम्न लिखित कमेंट 4-5 बार प्रयत्न करने पर भी पब्लिश नहीं कर रहे, कारण पूछा तो खामोश,
      सोचा आपसे मालूम करलूं आपका तो नाम ही फुरसतिया है फुरसत से जवाब देदेंगे,
      ''उर्दू में Rank-5 भी होता है, इसके आधार पर कह सकते हैं कि विश्‍व जगत में उर्दू वेबसाइटों का अधिक देशों में अवलोकन होता होगा, या किस कारण urdu में Rank-5 होता है यह भी आप बतादें तो हमारे ज्ञान में बढोतरी हो, ऐसी एक Rank-5 वेब का मैं नुमाइन्‍दा हूँ, www.urdustan.com
      क्षमा के साथ नाम लिख रहा हूँ, वैसे भी Rank-5 को प्रचार की आवश्‍यकता नहीं होती''
      केवल आरम्भ की तीन लाइन भी comment की तब भी नहीं उनके पब्लिश ना करने से एक कारण मुझे यह खटक रहा है कि हिन्‍दी जगत यह सुनने को तैयार नहीं कि urdu में Rank-5 होता है, वह पब्लिश कर लेते तो बात खत्म थी, तब बात आप जैसों के कानों तक तो ना पहुंचती,,

      आशीष जी बतायें इसमें किया हटाया या लगाया जाए कि आप पब्लिश करेंगे,

      यहाँ कमेंटस पब्लिश होने के पश्‍चात देखूंगा कि ब्लाग सेंटरों ने इसे अपने बोर्ड पर पब्लिश करने की हिम्मत दिखाई कि नहीं, वह भी नही करेंगे तो फिर यह पोस्ट के रूप में हिन्‍दी जगत को सुनना पडेगा,

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    14. Mohammed Umar Kairanvi जी, मैं आपको फ़िर से कह रहा हूं कि यह अपनी बात रखने का सही मंच नहीं है। आपके जितने भी कमेंट पोस्ट से संबंधित होते हैं, वे सभी पब्लिश कर दिए जाते हैं। लेकिन जिन कमेंट्स का पोस्ट के साथ कोई संबंध ही न हो और जो कमेंट्स महज़ प्रचार के लिए लिखे जाते हों, उन्हें रिजेक्ट करने का अधिकार ब्लॉगस्वामी को है। ऊपर आपने अपने कमेंट की सामग्री लिखकर स्वयं ही साबित किया है कि कमेंट के जरिए आप वेबसाइट का प्रचार चाहते हैं।

      भविष्य में भी आप सूचित रहें कि केवल वे ही कमेंट पब्लिश किए जाएंगे, जो पोस्ट की सामग्री से संबंधित हों।

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    15. गुरूजी कितना मासूम सा जवाब दे रहे हो, आपके भूतपूर्व 'शीर्ष टिप्पणीकार' को एकबार तो बताया होता कि इसमें किस बात पर आपत्ति है, खेर निम्न लिखित कमेंटस की मैंने एक घंटे प्रतीक्षा की अब इसमें बताइये इसमें किया हटाना है किया लगाना हैः

      अपने ब्लाग के 'शीर्ष टिप्पणीकार' बनने पर बधाई हो गुरूजी, या मुझे बधाई दें कि मेरे कारण आपको इस पदवी पर बैठना पडा, किया जादूगर हैं आप कल तक खाकसार 16 कमेंटस के सार्थ top पर था, आपके अतिरिक्‍त किसमें मजाल थी कि 'शीर्ष टिप्पणीकार' की पदवी हमसे छीनले, जरा सा गुस्सा आये तो एक सिटिंग में 80 कमेंटस तक कर चुका है आपका शिष्‍य,
      परन्तु गुरूजी यह कैसे सम्‍भव हुआ, आपने मेरे हर कमेंटस को delete भी नहीं किया, 16 वाला टिप्पणीकार' कैसे नहीं दिखाई देरहा ज‍बकि 9 वाला टिप्पणीकार अवलोकित हो रहा है, बहुतों ने यह विजेट 'शीर्ष टिप्पणीकार दिखाएं' अपना रखा है, उनको भी ऐसी टिप्स की आवश्‍यकता होगी उन्‍हें भी लाभन्वित होने दें तो आभारी होंगे,
      जवाब यहीं देदें या फिर वहीं जवाद देंगे जहां अबतक देते रहे हैं''

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    16. कोई आशीष खण्डेलवाल से पूछे यह कमेंट कियूं पब्लिश नहीं कर रहे जो कि उनके विजेट शीर्ष टिप्पणीकार दिखायें बारे में है,

      ''आजकल आप स्वयं अपने ब्लाग के 'शीर्ष टिप्पणीकार' बने हुये हैं, पाठकों को धोके में रखने की बधाई गुरू जी अपने 'शीर्ष टिप्पणीकार' के साथ वही कर रहो जैसा कि गूगल की सेवा शर्तों को तोडने में करते हो, इस विजेट 'शीर्ष टिप्पणीकार दिखाएं' में अपना ^नाम हटाएं' में अपने बजाय मेरा (16 टिप्पणी) हटाया हुआ है, मेरा अनुमान है इसीलिये आजकल आप स्वयं अपने ब्लाग के 'शीर्ष टिप्पणीकार' बने हुये हैं, और मैं गायब ज‍बकि 9 टिप्पणी वाले दिखाई दे रहे हैं,
      आपका भूतपूर्व शीर्ष टिप्पणीकार''

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    17. भाई लोग मेरे उपरोक्‍त कमेंटस के पीछे पड रहे हैं, यह सब मैंने संभाल लिये हैं, हटाया गया तो चिटठाचर्चा पर अगली ईद तक सिर्फ इन कमेंटस पर ही चर्चा होगी, वेसे भी यह गुरू शिष्‍य का मामला है, कुछ समझ सको तो कहीं और का कमेंट यहां दे रहा हूं समझ लो,

      ''ऐ janokti के निवासियों (ब्‍लागरों), मेरी गुरू दक्षिणा स्‍वीकार कर ली गई, गुरू आशीष खण्‍डेलवाल जी को मुझ पर गर्व है, उन्होंने मेरे से दक्षिणा मांगी थी जो उपर के comments में फिरसे पढलो कि मैंने उनसे कहा था कि मैं उन्‍हें दक्षिणा में आलोचना दूंगा, मैंने दी उन्‍होंने स्‍वीकार की देखो एक आलोचना के जवाब में वह मुझ पर गर्व करते हैं, और ईमेल में लिखते हैं
      ''आप मेरे ब्लॉग के सम्माननीय पाठक हैं, अच्छे आलोचक हैं और आप जैसा पाठक पाने पर मुझे गर्व है।''

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    18. बहुत अच्छी जानकारी दी आपने ! मेरे ब्लॉग को भी सामिल करे में आपका बहुत आभारी रहूँगा ! सामिल करने पर मेल के द्वरा मुझे सूचित करे ! मेरा ब्लॉग तकनिकी को समर्पित हे !

      http://hiteshnetandpctips.blogspot.com

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    चिट्ठा चर्चा हिन्दी चिट्ठामंडल का अपना मंच है। कृपया अपनी प्रतिक्रिया देते समय इसका मान रखें। असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।

    नोट- चर्चा में अक्सर स्पैम टिप्पणियों की अधिकता से मोडरेशन लगाया जा सकता है और टिपण्णी प्रकशित होने में विलम्ब भी हो सकता है।

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