रविवार, जुलाई 26, 2009

चर्चा में कलाकारी

पिछले हफ़्ते फेल ब्लॉग की चर्चा पता नहीं कितनी फेल हुई या पास, पर चलिए इस हफ़्ते कलाकृतियों के ब्लॉगों की चर्चा करते हैं.

कला जगत में वैसे तो भाषा कोई मायने नहीं रखती, मगर फिर भी बहुत से हिन्दी ब्लॉग कला जगत के प्रति समर्पित हैं.

विजेन्द्र एस विज अपनी कलाकृतियों के साथ ब्लॉग जगत में अर्से से मौजूद हैं. उनकी ताजा पेंटिंग तैयब मेहता को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है –

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कोई सालेक भर से हिन्दी ब्लॉग जगत् में सक्रिय उत्तमा अपने ब्लॉग कलाजगत वैसे तो कई विषयों को उठाती हैं, पर प्रमुखत: वे कलाजगत् से संबंधित ही होते हैं. जैसे कि उन्होंने अपनी पोस्ट – आंखों में धूल में लिखा है कि राष्ट्रीय महत्व की तमाम ऐतिहासिक पेंटिंग्स को राजा रविवर्मा के जन्मस्थल – किलिमनूर पैलेस से चोरी कर लिया गया!

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(राजा रवि वर्मा की एक कलाकृति)

उत्तमा की कलाकृतियों की ऑनलाइन गैलरी पिकासा http://picasaweb.google.com/uttama.dixit पर भी है.

कलाकार लोकेंद्र सिंह अपने ब्लॉग में अपनी गतिविधियों व कलाकृतियों को प्रदर्शित करते रहते हैं

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लोकेन्द्र सिंह द्वारा पेस्टल पर बनाई एक और सुंदर कला कृति देखें –

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अभिज्ञात वैसे तो पत्रकार-रचनाकार हैं, परंतु साथ ही वे कलाकार भी रहे हैं. लोकनायक जयप्रकाश नारायण का पोर्ट्रेट उन्होंने कोई 30 साल पहले बनाया था उसे न सिर्फ दिखाया है, बल्कि उससे जुड़े संस्मरण की भी चर्चा की है.

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अमी चरण सिंह साहित्य के साथ साथ कलागतिविधियों के आयोजन में भी शामिल रहते हैं. अपने ब्लॉग के एक पोस्ट में कलाश्रुति राष्ट्रीय कला शिविर का विवरण दिया है तो एक और पोस्ट में मधुबनी लोक कला की महान चितेरी यशोदा देवी के बारे में एक फ़िल्म प्रदर्शित किया है.

भारतीय चित्रकला के नाम से एक ब्लॉग 2007 में बनाया गया था, मगर ये कुल जमा चार सारगर्भित पोस्टों के बाद मृतप्रायः सा है.

धरोहर ब्लॉग में यदा कदा चित्रकारों-कलाकारों पर बातचीत की जाती है. मंजीत बावा पर श्रद्धांजलि स्वरूप एक पोस्ट तब आई थी जब उनका निधन हुआ था –

भारतीय चित्रकला की धरोहर- मंजीत बावा

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भारतीय चित्रकला के सशक्त हस्ताक्षर मंजीत बावा, जिन्हें आदर से लोग बाबा भी कहते थे नहीं रहे. ३ साल तक कोमा में रहने के पश्चात 29 दिसम्बर की सुबह उनका निधन हो गया.
पंजाब के धुरी में 1941 में जन्मे बाबा ने दिल्ली आर्ट कॉलेज और लन्दन स्कूल ऑफ़ प्रिंटिंग से चित्रकारी के गुर सीखे. 'प्यार और शान्ति', 'बांसुरी' , 'कृष्ण' आदि उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ थीं. काली और शिव को वो भारत के प्रतीक के रूप में देखते थे. उनकी कला सूफी दर्शन, आध्यात्म और भारतीय मिथकों से प्रभावित रही. कैनवास पर तीखे रंगों की स्याही से उकेरी गई कला उनकी विशिष्टता थी. अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय चित्रकला को प्रसिद्धि दिलाने में उन्होंने अहम् भूमिका निभाई थी. हाल ही में लगभग १.५ करोड़ में नीलाम की जाने वाली अपनी एक पेंटिंग के लिए भी वो चर्चा में रहे थे.
कला के इस अथक साधक को हमारी और से श्रद्धांजली.

वैसे तो चित्रों को उकेरने के लिए रंग, एक अदद कैनवस और एक कूंची की आवश्यकता होती है. परंतु इससे कला के इतनी विधाएँ, इतने आयाम बन सकते हैं कि उन्हें पारिभाषित करना कठिन होता है. ऐसी ही एक विधा वारलि चित्रकला को समर्पित है वारलि चित्रकला ब्लॉग. एक वारलि चित्रकारी आप भी देखें –

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इसीतरह, मैथिल आर मिथिला में मिथिला चित्रकला के भी अद्भुत उदाहरण दिए गए हैं –

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और अंत में –

हरा कोना के कलाकार-पत्रकार रवींद्र व्यास अपने ब्लॉग में कला जगत् से संबंधित मुद्दों को तो उठाते ही हैं, कविता और चित्रकारी का अद्भुत नमूना पेश करते हैं. एक उदाहरण –

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अद्यतन : रविकुमार का चिट्ठा भूलवश रह गया था. निशांत को धन्यवाद इस चूक की ओर इशारा करने के लिए. रविकुमार रचनाओं और कलाकृतियों की जबर्दस्त जुगलबंदी पेश करते हैं. उनके एक पोस्ट पर छपी उनकी कलाकृति -

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20 टिप्‍पणियां:

  1. कला जगत के इन सुन्दर चिट्ठों को यहाँ चर्चा में लाने का शुक्रिया । उत्तमा जी का ब्लॉग निश्चय ही बहुआयामी है । धन्यवाद ।

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  2. यह कलाकारी तो वाकई बहुत रास आई..

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  3. SUNDAR CHITR.......... कुछ N कुछ DASTAAN कहते HUVE......

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  4. कलाकृतियों पर अच्छी जानकारी के लिए आभार। पर क्या कार्टून भी एक कला नहीं है?:)

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  5. नए-नए कलाचिट्ठों से परिचित करवाने के लिए आभार.

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  6. इतने सारे कलाकृतियों को एक साथ देखना अच्छा लगा । आभार ।

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  7. जानकारी के लिए आभार...अच्छा लगा.

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  8. आज की चर्चा पठनीय तो है ही, दर्शनीय भी। बहुत सुंदर। अब इन सारे ब्‍लॉगों को देखने को मन ललचाने लगा।

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  9. कुछ अनूठे लिंक...रवि जी हमेशा ही कुछ नया लेकर आते हैं\

    और चरचा का फीड अचानक से आज काम करने लगा है..जय हो!

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  10. कलाकृतियों पर अच्छी जानकारी बढ़िया प्रयास. आभार.

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  11. रावतभाटा के रवि कुमार जी का खूबसूरत ब्लॉग http://ravikumarswarnkar.wordpress.com/ आपने क्यों छोड़ दिया?

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  12. leek se hat kar rahi is charcha se kalaa se sambandhit blogs ke baare men jaankar achcchha laga

    bahut bahut shukriya

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  13. निशांत जी, आपको बहुत-2 धन्यवाद - याद दिलाने के लिए. यह चूक हो गई माफी चाहूंगा.

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  14. बेहतरीन चर्चा। रविरतलामीजी की हर चर्चा में नयी थीम का परिचय मिलता है इसलिये इतवारी चर्चा खास हो जाती है। रविकुमार के जिस ब्लाग की चर्चा निशांत जी ने की उसकी हम पहले भी विस्तार से ब्लागर परिचय के अंतर्गत चर्चा कर चुके हैं।

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  15. aapki post ki taraf mera dhyan aaj gayaa. bahut achha kaam kiya hai aapne. kalaa ki charcha karake blogon par uske liye upyukt jagah banae ke liye badhai. ho sake to www.ami-charan-singh.blogspot.com aur www.kalashruti.blogspot.com ko dekhen.

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