और आगे कुछ लिखने से पहले नये चिट्ठों की जानकारी दे दें। तीन महिला चिट्ठाकारों ने हिंदी में अपने चिट्ठे लिखने शुरू किये। कलकत्ता से निधि ने अपना ब्लाग अनपढ़ शुरू किया। वे अंग्रेजी में पहले से लिखती रहीं। महिला समस्यायों को लेकर भी वे अंग्रेजी में एक ब्लाग लिखतीं रहीं हैं। मूलत: नासिक की रहने वाली सोनल ने कनाडा से अपना ब्लाग शुरू किया। इंदौर से शिल्पा शर्मा ने अपनी ओपनिंग पोस्ट में इंदौर में दंगों के बारे में लिखा।
सभी चिट्ठाकारों को लिखना शुरू करने पर स्वागत बधाई और नियमित लेख्नन के लिये शुभकामनायें!
कल की सबसे उल्लेखनीय घटना का गवाह बना अहमदाबाद का बेंगाणी बंधुओं का आफिस और घर! वेलेंटाइन दिवस पर प्यारे ब्लागर्स मिले। नितिन बागला, बेंगाणी बन्धु,खुशी और अभिजीत मुलाकात का जिक्र है। मिले तो घर वाले भी लेकिन फोटो केवल ब्लागरों के हैं। खूबसूरती छिपाने का प्य्रास:) संजय ने मुलाकात का जिक्र करते हुये लिखा:-
उनके (नितिन के)आने से पूर्व मैं निरंतर को पढ़ रहा था, उन्हे नए अंक की जानकारी दी तथा चर्चा रविशंकरजी, अनुपजी, सूनील दीपकजी, जीतुभाई, समीरलालजी, देबाशीषजी से होती हुई नए ब्लोगरों तक पहूँच गई. प्रशंसा तथा टीका (सामने तो कोई था नहीं अतः टीका-टिप्पणीयों का आनन्द लिया जा सकता था :) ) टिप्पणी करते हुए ब्लोग से पैसे नहीं कमा सकते तक विचार कर डाला. विकि पर हिन्दी सामग्री के टोटे को लेकर रोना भी रोया गया. करीब दो घंटे इन्ही सब बातो में गुजर गया. तब तक पेट में चुहे दौड़ने लगे थे. मैने घर चल कर सुबह का खाना निपटा लेने का प्रस्ताव रखा, मगर बागलाजी ना-नकुर पर उतर आए. ऐसे में हमे थोड़ा दबाव बनाना पड़ा, ऐसे कैसे हाथ लगे को जाने देते.
संजय बेंगाणी ने जानकारी दी कि याहू ने गुजराती चिट्ठाकार विवेक भाई टेलर का लेख अपनी साइट से हटा दिया है। इसकी जानकारी देते हुये विवेक के उद्गार हैं:-
याहू गुजराती द्वारा मेरा लेख बिना पूर्वानुमतिके उठाये जानेकी बात पर आप सभी दोस्तों के मिले समर्थन के लिए मैं आप सभी दोस्तों का तहे-दिलसे शुक्रिया अदा करता हूँ. आज यदि आप याहू पर यह पृष्ठ ढूँढने की कोशिश करेंगे तो यह पेज अब नहीं मिलेगा. और यह सब हम सबकी सजगता का ही नतीजा है. फिरसे एकबार शुक्रिया.
कल हमारे गीतकार चर्चाकार राकेश खंडेलवाल जी ने अपनी सौंवी प्रस्तुति की। काव्य का व्याकरण मैने जाना नहीं छंद आकर स्वयं ही संवरते गये कहते हुये गीतकलश छलकाते रहने वाले राकेश जी के गीतों में प्रेम का स्वर प्रधान रहता है इसलिये वेलेंटाइन दिवस पर सैकड़ा मारने का मौका भी अच्छा था और दस्तूर भी (कौन मना करेगा)। राकेशजीलिखते हैं:-
चाँदनी की गली में सितारे उगे
कोई पहचान अपनी नहीं पा सके
सरगमों की तराई में खिलते हुए
राग नूतन कोई स्वर नहीं गा सके
धूप की कामनायें किये जा रहे
छोड पाये घटाओं का साया नहीं
हम प्रतीक्षा बहारों की करते रहे
जिनको हमने कभी था बुलाया नही
राकेशजी को बधाई देते हुये शुभकामनायें कि वे अपने गीत-शतकों शतक पूरा करें!ये रहा आजकी चिट्ठा चर्चा का आगाज! ये अभी शुरू हुआ है! खतम आज शाम तक होगा। किसी के चिट्ठे छूटेंगे नहीं। इसे देखते रहें यह लगातार अपडेट होगा !
आपने तो सभी चिट्ठों को छोड़ दिया..क्या वोट नहीं चाहिये. लगता है मध्य चर्चा करनी पडॆगी...काहे इतने सस्ते में निपटने के लिये आ गये. आपसे ऐसी आशा न थी...खैर जैसी हरि इच्छा.
जवाब देंहटाएंचलो आज आपकी चर्चा से ३ नये चिट्ठे का पता चला, हम भी देखते रहेंगे अपडेट। ये भी अच्छा तरीका निकाला आपने
जवाब देंहटाएंपहले तो हम सोचे कि अनूप भैया के नाम से कोई नकली पोस्ट लिख गया, इतनी छोटी। खैर फिर अंतिम लाइन पढ़कर तसल्ली हुई।
जवाब देंहटाएंशुरूआत अच्छी है, तो परिणाम भी उत्तम ही मिलेगा. :)
जवाब देंहटाएंअहमदाबाद में ब्लोगर-मीट रविवार को हुई थी. मैं विवरण समयसर पोस्ट नहीं कर पाया था.
शिल्पा के चिट्ठे का लिंक सही कीजिए, खुल नहीं रहा।
जवाब देंहटाएंअनूप भाई,
जवाब देंहटाएंहमेशा की तरह झकास…तीन नये चिट्ठों की भी जानकारी मिली और उसे प्रारंभ मे लिखकर बहुत अच्छा किया…धन्यवाद!!
अनूपजी
जवाब देंहटाएंआपको धन्यवाद देते हुए केवल इतना ही कह सकता हूँ
एक आशीष मुझको मिला आपका, दूजे वरदान इक शारदा दे गई
होठ की कोर पर से फिसलती हुई,शब्द की एक गंगा स्वयं बह गई
योग मेरा न इसमें अधिक देखिये, मैने शब्दों में केवल पिरोया उसे
मेरी खिड़की की सिल पे आ बैठी हुई एक गारेय्या, जो बात है कह गई
चिठ्ठा चर्चा तो उत्तम थी ही, राकेश जी की कवितामयी टिप्पणी भी अत्यंत सराहनीय है।
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