गुरुवार, फ़रवरी 22, 2007

पाँच प्रश्न - शीर्षक चर्चा

1. चिट्ठाकार होने का मतलब क्या है?
2. जिन ताजा प्रविष्टियों की ख़बर प्रभू नारद नहीं दे पाते है, उनकी चर्चा कैसे की जाये?
3. यह पाँच-प्रश्नों का सिलसिला कब थमेगा?
4. क्या पाँच-प्रश्न सोये चिट्ठाकारों को जगाने में उपयोगी हो सकते है?
5. आपने आज का चिट्ठाचर्चा क्यों पढ़ा?

अनुपजी ने उम्र का लिहाज किये बगैर अपनी फ़ुरसत को आमजन की फ़ुरसत समझकर आमजन को फ़ुरसत का भी फ़ुरसत से आनन्द नहीं लेने दिया। बेजीजी ने लम्बी पोस्ट लिखने का कष्ट शुरूआत में ही यह लिखकर जता दिया कि – “अनुपजी जवाब लिख रही हूँ” तो मैथिली जी घबरा गये। उन्हें लगा कि चिट्ठाजगत के चाचु गुस्से में आकर कहीं फिर से चोर-चोर का चक्कर ना चला दें इसलिए कहे उठे – “मेरे जवाब हाज़िर है”… यह माहामारी पानी के बताशे में भी मिक्स हो गई, इल्ज़ाम प्रत्यक्षाजी पर लगा... श्रीशजी घबराने लगे कि अब पंडितजी को तकनीकी ज्ञान छोड़कर इन बकवास प्रश्नों के जवाब देने पड़ेंगे।

हालांकि मौहल्लें में रहने वाले इसे पसंद नहीं करते मगर लोकमंच के लिए तो यह भी एक सच है। मगर मौसम और प्यार का जादू चलाकर प्रमेन्द्रजी पुनमजी को हौसला दिया तो उन्होनें वक्त को रोक लिया। जो कह ना सके वो मानवाधिकार की बाते करने लगे और कांतजी नयनों के चक्कर में नयनाभिमुख होकर कहते दिखे कि “वो नयनों में अपलक नयनों से ताकती थी”, अज़दक ने गिनाये ब्लॉग के फायदे और आशीष जी अपनी पोस्ट चोरी होने पर ढ़ोल-नगाड़े-ड्र्म और भी पता नही क्या-क्या बजाने लगे।

रितेश गुप्ताजी की भावनाओं को समझे बगैर गिरिन्द्र नाथा झाजी अपने अनुभवों से रीति-रिवाजों का किला तोड़ कर मुक्त होने की कोशिश में लगे रहे। अवधियाजी ने रामायण में पिनाक की कथा सुनाई, राजेशजी विश्व-कप क्रिकेट की समय सारणी बाई-मार्फत गुगलदेव लेकर हाजिर हुए, हरिरामजी “एड्स से बचाती हैं या बढ़ाती है- डिस्पोजेबल सीरिंज?” में खोये रहे और छायाचित्रकार फूलों की टोकरियों में मगर इन सबसे अलग गुरूदेव ने जो किया उसके लिए बाकि चिट्ठों की चर्चा को संक्षिप्तता में शीर्षक चर्चा बनाकर निकलना पड़ रहा है। मगर जाते-जाते मार्फत जीतु भाई से यह लिंक ले जाइये, काम आयेगा।

(नोट : गुरूदेव की पोस्ट को पढ़ने के बाद कल चर्चा विस्तार से करने को बाध्य हूँ इसलिए देर होने की प्रबल संभावनाएँ है, अब तक दिखी प्रविष्टियों की संक्षिप्त चर्चा तो कर चुका हूँ मगर कोशिश रहेगी की कल गुरूदेव की पोस्ट के साथ-साथ इनकी भी विस्तार से चर्चा की जाये)

कल चर्चा विस्तार से की जायेगी, अवश्य पधारें।

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4 टिप्‍पणियां:

  1. . चिट्ठाकार होने का मतलब क्या है?
    समय का सद(दुरुपयोघ )
    2. जिन ताजा प्रविष्टियों की ख़बर प्रभू नारद नहीं दे पाते है, उनकी चर्चा कैसे की जाये?
    क्या जरूरी है ? लेखक लिंक भेज देंगे ना
    3. यह पाँच-प्रश्नों का सिलसिला कब थमेगा?
    भैय्ये, यह चक्कर तो गोल गोल ही घूमेगा. रूकेगा तब्म जब पाठक नहीं पढ़ेंगेम
    4. क्या पाँच-प्रश्न सोये चिट्ठाकारों को जगाने में उपयोगी हो सकते है?
    छोड़ो यार. क्यों नींद खराब कर रहे हो
    5. आपने आज का चिट्ठाचर्चा क्यों पढ़ा?

    आपने कैसे सोच लिया कि हमने पढ़ी /

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  2. पांच बातें:
    यह चिट्ठा चर्चा तो फैल रही है।
    पढ़ी नहीं जा रही है।
    कुछ गड़बड़ है।
    क्या जस्टीफाई के दी है।
    कृप्या इसे ठीक कर दें।

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  3. बात शुरु तो "फुरसत" से हुई पर अंत में देखा कि "कल चिट्ठा चर्चा विस्तार से होगी" यानि फुरसत की ही कमी है! बहुत अच्छे.

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  4. लो जी ५ जवाब हाजिर है-
    १. लिखना, पढना!
    टिप्पणी देना और टिप्पणी पाना!!

    २. वो तो चिट्ठाकार को खुद टिप्पणी करके ही बताना पडेगा.

    ३. जब आप भी किसी के ५ प्रश्नों के उत्तर दे चुकेंगे तब!

    ४. जी नही! प्रश्न जागे हुए को ही पूछने मे मजा है.

    ५. हमने आदतन पढा!

    उत्तर देंहटाएं

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