सोमवार, फ़रवरी 08, 2010

आपां तो ऐसे ही चलेगे


अभिनया

अभिनया की जय हो

सागर अपने काम की व्यस्तता के चलते आजकल ब्लॉग कम लिख पाते हैं। कल उन्होंने एक बहुत ही प्यारी पोस्ट लिखी-हेट्‍स ऑफ यू, अभिनया ! अभिनया जन्मजात बोलने-सुनने में असमर्थ बालिका है। लेकिन अपनी इस ईश्वर प्रदत्त कमी को उसने अपने जीवन पर हावी नहीं होने दिया और अपने आशावाद से सारी अपंगताओं के धुर्रे उड़ा दिये। अभिनय की बारीकियां सीखीं तथा जो किया वह सागर के ही शब्दों में सुने!
... क्या कभी किसी मूक-बधिर को, फिल्मों में सामान्य व्यक्ति का रोल करते हुए देखा है? जी हाँ, यह असंभव- सा लगने वाला कार्य कर दिखाया है- हैदराबाद की ही अभिनेत्री ’अभिनया’ ने। सुनहरे पर्दे पर उस सुंदरी के चेहरे को देखकर किसी को विश्‍वास ही नहीं होगा कि इतना अच्छा अभिनय करने वाली इस युवती से प्रकृति ने सुनने और बोलने की शक्‍ति छीन ली है। श्रव्य और वाक शक्‍तियों से वंचित होने के बावजूद उसने अपनी मस्तिष्क की तीसरी शक्‍ति के द्वार खोल दिये हैं और तमिल फिल्म ’नडोदिगल’ एवं तेलुगु फिल्म ’शम्भो शिव शम्भो’ में अपने अभिनय से ’अभिनया’ ने अपनी विकलांगता को ही विकलांग कर दिया।

सागर की यह पोस्ट पढ़कर मन खुश हो गया। अभिनया ने हमारे लिये एक नजीर रखी। जय हो।

रॉनी और मिसेज मुखर्जी


खुशदीप ने चुनौती दी यह पोस्ट लिखकर कि पढ़कर रोक सको तो रोक लो आंसू। उनकी उनकी पोस्ट में एक बच्चे का जिक्र है जो अपनी अध्यापिका के व्यवहार के चलते अपने जीवन में तमाम सफ़लतायें हासिल करता है। वहीं अध्यापिका मिसेज मुखर्जी का मानना है कि रॉनी ने ही उनको सिखाया कि एक अध्यापक क्या सकता है एक बच्चे के जीवन में। इसे बांचकर आमिर खान की फ़िल्म तारे जमीं पर याद आती है। लगता है रॉनी बच्चे के रोल में है और मिसेज मुखर्जी आमिर खान। अवश्य पढिये-आंसू रोक कर दिखाओ इसे पढ़ने के बाद...खुशदीप

"आपां तो ऐसे ही चलेगे "

डा.अनुराग की पोस्ट चाहे जब आये ,उस पर चाहे जित्ती टिप्पणियां आ जायें हम उसको दो-तीन दिन तक नहीं पढ़ते। केवल शीर्षक देखते हैं, फ़िर टिप्पणियां फ़िर टिप्पणियां पढ़ते हैं इसके बाद जब मन एकदम फ़्री होता है तब पढ़ते हैं आराम से। उनको पढ़ना का अपना यहिच फ़ुरसतिया तरीका है। उनकी नवीनतम पोस्ट पर मैंने लिखा भी:
दो दिन लटकाये रहे इसे अपने लैपटाप पर! अब सोचा पढ़ा ही जाये। पढ़ भी गये।
पढ़ते हुये जो मुस्कराना शुरु किये तो अभी तक मुस्करा रहे हैं!आखिर न्यूटन साहब के जड़त्व के नियम की इज्जत भी तो करनी है!

डिम्पल ने उनकी पोस्ट पर टिपियाया-
अच्छे ब्लॉग मैं घूँट घूँट कर पढ़ती हूँ.
जैसे सर्दी की रात काली कॉफ़ी घूँट घूँट करके पी जाती है.

नीलिमा की शिकायत को कई लोगों ने दोहराया है-
आप लड़की से मुलाकात वाला हिस्सा सफाई से गोल कर गये. ये भी के नुक्स क्यों निकालकर मना कर देते थे

आपां तो ऐसे ही चलेगे

डा.अनुराग
बांचिये। इसमें डा.अनुराग के माउस और दिल की बातें हैं। डा.वर्मा तो माध्यम हैं। उनके जरिये डा.अनुराग ने अपने दिन दुबारा जिये। डा.अनुराग की यह पोस्ट जब पढ़ी तो लगा कि ये वर्माजी लोग आजकल बहुत याद आ रहे हैं। सुबह ही हमारे एक सीनियर कैलाश वर्मा से सालों बाद फोन पर बातचीत हुई। सत्ताइस साल पहले की यादें सिलसिलेवार तहाये और स्मृति पिटारी में सहेजे गये- पहली बार कब मिले थे। कौन से डायलाग बोले गये। क्या क्या कहा, क्या क्या नहीं कहा। अरे कहां फ़ंसा रहे हैं! आप इधरिच रहिये और बांचिये जी-आपां तो ऐसे ही चलेगे

राजकमल से छपेगा शब्दों का सफर


शब्दों का सफर
येल्लो अब पता चला ई बात अजित वडनेरकर जी को। उनकी किताब वे हमको अब बता रहे हैं कि वह राजकमल से छपेगी। हमको तो भौत पहले से पता था। बहरहाल इस जानकारी के बहाने उन्होंने दिल्ली में चल रहे पुस्तक मेले के किस्से भी सुनायें। देख लीजिये। यह जानकारी भी कि आज अभय तिवारी की फ़िलिम सरपत दिखायी जायेगी गोरखपुर के फ़िल्म फ़ेस्टीवल में। अभय को हमारी शुभकामनायें इधरिच से।

दिल्ली में ब्लॉगर मुलाकात


ब्लॉगर दिल्ली में
माने नहीं और मिल ही लिये ब्लॉगर दिल्ली में। अविनाश वाचस्पति के मुताबिक कल शाम तक छ्ह पोस्टें इस पर आ गयीं थीं। देखिये दिल्ली ब्लॉगर मिलन के किस्से। फोटो-सोटो भी हैं। विस्तार से बयान भी आते ही रहेंगे। देखना है कौन क्या बोला कौन क्या सुनिस कौन क्या बोलिस। बाहर से आने वालों में कविता वाचक्नवी और राज भाटिया थे। चाय-पानी खर्चा अविनाश वाचस्पति और अजय झा ने उठाया। लेकिन बहुत पूछने पर भी खर्चे का वजन नहीं बताया भाया। कुछ पोस्टों के लिंक ये रहे: दिल्ली ब्लागर मीट- जहर है कि प्यार है उम्मा उम्मा (पद्म सिंह)बकिया के लिंक आपको इस पोस्ट में मिल जायेंगे।

कविता वाचक्नवी सम्मानित


ब्लॉगर दिल्ली में
कविता वाचक्नवी जी आजकल दिल्ली में हैं। कल उनको 8वें अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दी उत्‍सव में अक्षरम सूचना सम्मान प्रदान किया। कविता जी को हमारी हार्दिक बधाई।

इसके अलावा कविताजी ने दिल्ली के कई कार्यक्रमों में शिरकत की। ब्लॉगर मुलाकात के अलावा विद्यार्थियों के बीच हो लीं , खालसा कालेज में कविता जी के बारे में और विस्तार से फ़िर कभी। अभी तो उनके दिन की चर्चा करनी है जी।

गिरीश बिल्लौरे की पॉडकास्टिंग

गिरीश बिल्लौरे आजकल ब्लॉग जगत से जुड़े लोगों से बातचीत कर रहे हैं। इस कड़ी में उन्होंने अभी तक कुलवंत हैप्पी , राजीव तनेजा, संगीता पुरी, सुरेश चिपलूनकर , समीरलाल से बातचीत कर रखी थी। कल हम भी टकरा गये। सो उन्होंने हमारे आगे भी माइक सटा दिया।देखिये आप भी अनूप शुक्ल जी से संवाद सुन लीजिये इस पर ज्ञानजी का कहना तो ये है-
बहुत बहुत अच्छा इण्टरव्यू। "ऑन द रिकार्ड" इससे बेहतर हो ही नहीं सकता था!
आपने बहुत सटीक प्रश्न/चर्चा की। और अनूप जी ने डक नहीं किया प्रश्नों को!


और अंत में

फ़िलहाल इतना ही। अभी दफ़्तर का समय हो गया। बाकी फ़िर आते हैं शाम को। तब तक मौज से रहिये। मस्त, बिन्दास! झकास!
अच्छा ये कार्टून देख लीजिये

कार्टून

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19 टिप्‍पणियां:

  1. मिल ही लिये नहीं अनूप जी

    मिलते ही रहेंगे सदा सर्वदा

    पहले भी मिलने की लगती रहीं हैं दफा
    हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की जय बोलते हुये सदा

    इस युद्ध में तो कीबोर्ड ही है आधुनिक गदा।

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  2. सुंदर बहुत सुंदर. चर्चा का एक जो सबसे बड़ा फायदा होता है वह ये कि कुछ पोस्टें जो देखने से रह गई होती हैं उनकी समुचित जानकारी भी मिलती है. आभार.

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  3. बहूत अच्छे लिंक जो पढने से रह गए...सबसे अच्छा शीर्षक लगा क्यूंकि ब्लॉगजगत में मारवाड़ी लिखने वाले कम हैं ...!!

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  4. आपां तो ऐसे ही चलेंगे... हम तो जबरिया लिखबै, कोई हमार का करिहै का जाटीकृत वर्जन लग रहा है..

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  5. अजी आपको तो सब पता रहता है अनुप जी,
    मगर हमें सफर के साथियों को भी तो बतानी थी ये सूचना। अब हमारा काम तो आप करते ही रहे हैं।
    शुक्रिया इसे आगे बढ़ाने के लिए।

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  6. ये चर्चा अच्छी लगी लगता है आपने बहुत ध्यान से ये सभी पोस्ट पढी हैं वाडनेगर जी की पुस्तक के बारे मे जान कर खुशी हुयी। उन्हें बधाई धन्यवाद्

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  7. बड़े काम के लिंक दिए आपने...इसके वजह से बहुत सुन्दर पोस्टें पढने का अवसर मिला...

    छोटी सही पर,बहुत ही सार्थक रही चर्चा...आभार...

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  8. सादर अभिवादन! सदा की तरह आज का भी अंक बहुत अच्छा लगा।

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  9. अभिनया के बारे में जानकर अच्छा लगा और कविता जी को पुरस्कार मिलने की सूचना मिली. और ब्लॉगर मीट की क्या कहें. हम भी दिल्ली में ही रहते हैं, पर हमें पता चला मीट होने के बाद.

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  10. बहुत ख़ूब चर्चा अनूप जी।

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