रविवार, मार्च 25, 2007

जस्ट कूल ड्यूड, कुछ पॉजिटिव तो ढूंढ


जिया खान

कल का दिन भारत के विश्वकप से निकलने पर स्यापे के नाम रहा। स्यापा टसुये बहाकर नहीं खिलखिलाते हुये किया गया।
यह आधा भरा हुआ गिलास देखने की आशावादी नजर थी। साथियों ने भारत की हार में अच्छाइयां तलाशी। सबसे पहले निद्रा प्रेमी मृणाल ,जो कि आमतौर पर सबेरे चार बजे तक नेट पर दिखते हैं, ने इससे नींद के घंटे बढ़ जाने के खुशी जाहिर की। तरुण बोले जो हारा सो चुकन्दर। इस पर अनुनाद ने कहा -जीतने की कुछ टिप्स भी तो दो। आशीष को इंतजार है कि कब बीसीसीआई पर ताला लगे। इसी को देखते हुये संजय बसाक बो बीसीसीआई को बंद काहे नहीं कर देते? अरे ये संजय कनपुरिया हैं और अभी तक भेंटाये नहीं हमलोग! ये कैसा जुलुम है भाई। अपन मोहल्ला पता बताओ मिलते हैं।

बात मोहल्ले की चली तो देखिये मोहल्ले वाले भी दुखी हैं भारत के निकलने की खबर से। उमाशंकर सिंह सचिन और धोनी को शून्य पर आउट होने की बधाई देते हुये कहते हैं-
तुम जैसा खेल सकते थे, वैसा ही खेले। अपना बेहतरीन जो दे सकते थे, दिया। तुम्‍हारी इस भूल से अब हमें सीखने को मिलेगा। हम अब तुम्‍हें शायद इतनी जगह नहीं दे पाएंगे। दो चार दिन लानत मलामत झेल लो, फिर हम अपनी ज़ि‍म्‍मेदारियों पर आ जाएंगे। तुम भी अपने रेस्‍टोरेंट और बाकी के कारोबार में लग जाना। और कभी अच्‍छा क्रिकेट मत खेलना। तुम लोगों का ये खेल हमारी भूख भुला देता है, भ्रष्‍टाचार भुला देता है। तुम लोग तो हार के भी करोड़ों में खेलते हो, कभी कभार की तुम्‍हारी जीत में नाच कर भी करोड़ों भूखे सोते हैं।

अच्छी-अच्छी चीजें लिखने वाली मनीषा तो हारने के लिये एक अच्छा प्रस्ताव भी पेश करती हैं। लेकिन हार से सबसे तार्किक खुशी खोजी है अपने बिहारी बाबू प्रियरंजनझा ने।
इस हार को पाजिटिव तरीके से लेते हुये वे- कैसे बाल धूप में सफ़ेद हो सकते हैं से लेकर बच्चों का हित, आफिस में चैन , नींद के घंटे बचने की बात कहते हुये देश के काम के करोड़ों घंटे बचने की खुशी खोजते हैं-
और अब जबकि भारत विश्व कप से बाहर हो गया है हमारे-आपके जैसे करोड़ों लोग क्रिकेट को भूल अपने काम को ढंग से अंजाम दे पाएंगे, यानी क्रिकेट के निठल्ले चिंतन से बचने का मतलब है देश के लिए श्रम के करोड़ों घंटे बचा लेना! है न खुशी की बात! आखिर इससे आप ही के देश की प्रगति होगी न।

हमें डर है कि कौनौ मंत्री ई पोस्टवा देख लिहिस तो कहो अनाउंस कर दे- देश के जे है न से करोड़ों घंटे बचाने के लिये हर साल बर्ल्ड कप इंडिया में कराया जायेगा। हर बार इंडिया हारकर करोड़ों घंटे बचायेगा। घंटे कम बचे तो साल में दू-दू बार बर्ल्ड कप कराया जायेगा।

अब ये रोना-गाना हो गया। इसके आगे की चर्चा के लिये देखते रहिये चिट्ठाचर्चा। आज ही करेंगे। कहीं जाइयेगा नहीं। वर्ना मिस हो जायेगा। फिर आपकी मिसेज हड़कायेंगी। फिर हमसे मत कहियेगा कि बताया नहीं।

तो फिर मिलते हैं ब्रेक के बाद! मिलेंगे न!

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