मंगलवार, अगस्त 12, 2008

जीडीपी मतलब!!! अरे , वही अपने गजा-धर पंडित

अभिनव बिन्द्रा अभिनव बिन्द्रा
कल अभिनव बिन्द्रा अधिकतर ब्लाग पोस्ट पर छाये रहे। स्वामीजी ने अभिनव को बधाई देते हुये लिखा:
मिल्खा सिंह नें कहा की भारत को हमारे इतिहास का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण दिलवाने वाले अभिनव बिंद्रा को भारत रत्न दिया जाना चाहिये! इस एक कथन से पता चलता है कि हमारे तंत्र में निकल कर एक ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना एक सीनियर एथलीट की निगाह में कितना अधिक कठिन काम है!

अभिनव का शुक्रिया, जिन्होंने यह काम कर दिखाया है.
आप अभिनव को बधाई उनके ही ब्लाग पर दे सकते हैं।

संजीत और अंबरीश कुमार ने मिलकर बस्तर ब्लाग शुरू किया है। ब्लाग का प्रोफ़ाइल बस्तर का परिचय देता है:
हजारों-हजार साल का जिन्दा इतिहास हूं मैं, मुझे बस्तर कहते हैं। जैव विविधता को अपने में समेटे। कहते हैं मैं हजारों-हजार साल एक साथ जीता हूं, आज मेरे बच्चे हजार साल पुरानी संस्कृति भी जीते हैं तो आज की आधुनिक संस्कृति भी। पहाड़ी मैना भी मेरा ही अंश है तो प्रकृति की देन वह खूबसूरती भी जिसे निहारने देश-दुनिया से लोग आते हैं।



पहाड़ी मैना पहाड़ी मैना

पहला लेख बस्तर की अंश पहाड़ी मैना पर था तो दूसरा लेख आपको बरसात में बस्तर की यात्रा कराता है:
सुबह तक बरसात जारी थी। पर जैसे ही आसमान खुला तो प्रमुख जलप्रपातों की तरफ हम चल पड़े। तीरथगढ़ जलप्रपात महुए के पेड़ों से घिरा है। सामने ही पर्यारण अनुकूल पर्यटन का बोर्ड भी लगा हुआ है। यहां पाल और दोने में भोजन परोसा जाता है तो पीने के लिए घड़े का ठंडा पानी है। जलप्रपात को देखने के लिए करीब सौ फिट नीचे उतरना पड़ा पर सामने नजर जाते ही हम हैरान रह गए। पहाड़ से लिपटती जैसे कोई नदी रुक कर आ रही हो। यह नजारा कोई भूल नहीं सकता।


कल डा. अनुराग आर्य ने मजेदार और मौजूं लेख लिख मारा:
क्रोध ..अंहकार .. ?दोनों आपस में गुथ गये है ,मिल गये है .इतने की अलग –अलग शक्ल पहचानना मुश्किल है …सड़क पे आप हार्न बजाते है .. ऑफिस में मातहत को धकियाते है ओर ब्लॉग पे ?.किसी ने जरा सी वैचरिक असहमति हमसे दिखायी ….उसके गुण - दोषों पे माइक्रोस्कोप टिका दी …यही व्यक्ति जब आपकी प्रशंसा कर रहा था तब आप इस मुई माइक्रोस्कोप को धूल चटाते है ? हम उन्हें हमेशा सराहते है जो हमें पसंद करते है ..जिन्हें हम सरहाते है उन्हें हमेशा पसंद नही करते ….


डाक्टर साहब की बात -क्रोध में पर एक खासियत है ये जाति धर्मं ,उम्र , लिंग - भेद जैसी सामान्य बातो से ऊपर उठ गया है भेदभाव नही करता पढ़कर हमें अपना एक लेख याद आ गया- क्रोध किसी भाषा का मोहताज नहीं होता
अनायास याद आ गया। और इसी बहाने उसे हम दुबारा भी पढ़ गये लेकिन आप बेकार क्यों जहमत उठायेंगे दोबारा बांचने की? आप आगे देखें।

कल तमाम जगह रुद्राभिषेक हुआ। आज शिव कुमार अपने पूरे मूड में थे। ब्लाग प्रोफ़ाइल चर्चा करने लगे:
जब प्रोफाइल लिखने की बात आती है तो जिस विषय पर सबसे पहले हाथ फेरता हैं वह है दर्शनशास्त्र. कोशिश रहती है कि अपने बारे में कुछ ऐसा लिख दिया जाय कि पढने वाले को लगे कि उसकी आँखें अचानक जेठ की दुपहरिया के सूरज से टकरा गई हैं. ऐसा कुछ लिख देने की ललक रहती है जिससे पढ़नेवाले को पता चल जाए कि आदमी ऊंची सोच वाला है. ऊंची सोच मतलब माडर्न आर्ट समझता है, सत्यजीत रे की फिल्में न केवल देखता है बल्कि समझता भी है और बचपन से ही ऋत्विक घटक जैसे लोगों के संपर्क में था.


घुघुती बासूती जी की कविता मां के विविध रूपों का अद्भुत कोलाज है:
आज जब मंदिर जाती हो
या जब घर में पूजा होती है
तो क्या आशीर्वाद देते हैं
पंडितजी तुम्हें माँ ?
क्या अचानक सौभाग्यवती भवः
की जगह बुद्धिमती भवः कहते हैं ?
या फिर कहते हैं चिरंजीवी भवः ?
पूरे जीवन इस आशीर्वाद के बिन
तुम जीयी और खूब लम्बी उम्र जीयीं
पिताजी तो चिरंजीवी भवः सुनते सुनते चले गए
और तुम सौभाग्यवती सुनते सुनते
दुर्भाग्यवती बन गईं।
तुम्हें पुत्रवती भवः के आशीर्वाद भी खूब मिले होंगे
किन्तु फिर भी तुम्हारी गोद में
मैं आ ही गई
तब तुम क्या रोई थीं माँ
या केवल उदास हुईं थीं ?


निवेदिता-आशीष मिलन हिन्दी ब्लाग जगत की एक उपलब्धि है। ब्लाग जगत के पितामह रविरतलामी की भांजी निविदिता भी ब्लागजगत में आ गयीं। उम्मीद है वे आशीष को भी अपने साथ लिखने के लिये उकसायेंगी।

जहां चाह वहां राह एक पठनीय लेख।

महादेव देसाई जी के बारे में प्रभाकर माचवे जी का लेख अफ़लातूनजी के सौजन्य से।

नेह निमंत्रण:
जो महिलायें घर में बोर हो रहीं हों यानी कई दिनों से पति के साथ पट रही है, सास-ननद से कहा-सुनी नहीं हुई हो मतलब आपके जीवन में कोई एक्साइटमेंट नहीं रहा तो उनको हमारी तरफ़ से खुला न्योता है, हमारे घर आयें और किटियाएं।
प्रज्ञा

ये भी जानिये: भारत की जॉन ऑफ़ आर्क -- भीखाजी कामा ।

अब कुछ एकलाइना
सुलगे मन में जीने की इच्छा सुलगी : और सब तरफ़ जिंदगी की आग फ़ैल गयी।

जब मजबूरियां खूबसूरत हों? : तो बेवफ़ाई अपने आप हसीन हो जाती है।

चीख और हुल्लड़ के बीच संगीत: 'गुड टेस्ट' पर सीधा हमला करना चाहता है|

अभिनव बिन्द्रा 10 मी राइफ़ल में स्वर्ण पदक: 20 की होती तो दो मिलते।

रेड लाइट के बहाने कुछ गुफ़्तगू: गुफ़्तगू के लिये भी बहाना चाहिये क्या?

ब्लॉगर प्रोफाइल - लालमुकुंद जी के विचार :ऊंची सोच मतलब माडर्न आर्ट।

आओ किटियाएं : काहे से कि बहुत दिनों से पतिदेव से भी पंगा नहीं हुआ कि कुछ इंटरटेनमेंट ही हो जाता।

अगर हम कहें र वो मुस्करा दें : पता तो चल ही जायेगा कि वे कौन से दंतमंजन में पैसा फ़ुकाते हैं।

गीता पाठ की उम्र : फ़ौरन शुरू करें।

जीडीपी मतलब!!! अरे , वही अपने गजा-धर पंडित:गजाधर या गजोदर या गदाधर?

डुगडुगी अपनी बजाता जा रहा हूँ : पता नहीं आपको सुनाई दे रही है कि नहीं!

जाने क्युं लोग मोहब्बत किया करते हैं : बहुत टाइम वेस्टिंग हरकत है गुरू वाकई!

क्या वादा करूं तुमसे: जो पूरा न करना पड़े।

कम्प्यूटर पीड़ित : अपनी पीड़ा बांटे।

तुम कैसी मोहब्बत करते हो : भैया रामचन्द्र, अभी तक कोई किस्सा नहीं उछला।

भारत ने मैच और श्रृंखला गंवाई : ससुर बवाल कटा।

वो बोली “इट्स ओके!”: हम बोले थैंक्यू मैम!

तथ्य : है कि ये पोस्ट बेजी की है।

बहुत याद आ रहे हैं जसदेव सिंह : अपना रूमाल जरा इधर बढ़ाओ भाई।

बुढ़ापे की चाकलेट : खाने के लिये आलोक पुराणिक ने अपनी संवेदनायें रानी आंटी के साथ नत्थी की।

मेरी पसंद

मेरा नाम मुसलमानों जैसा है
मुझको कत्‍ल करो और मेरे घर में आग लगा दो
मेरे उस कमरे को लूटो जिसमें मेरी बयाने जाग रही हैं
और मैं जिसमें तुलसी की रामायण से सरगोशी करके
कालीदास के मेघदूत से यह कहता हूं
मेरा भी एक संदेश है।
मेरा नाम मुसलमानों जैसा है
मुझको कत्‍ल करो और मेरे घर में आग लगा दो
लेकिन मेरी रग-रग में गंगा का पानी दौड़ रहा है
मेरे लहू से चुल्‍लू भर महादेव के मुंह पर फेंको
और उस योगी से कह दो-महादेव
अब इस गंगा को वापस ले लो
यह जलील तुर्कों के बदन में गढा गया
लहू बनकर दौड़ रही है।

राही मासूम रजा

आज की तस्वीर:

गीत चतुर्वेदी के सौजन्य से
किताबेंकिताबें

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17 टिप्‍पणियां:

  1. किताब पढ़ता हुआ किताबी आदमी पसंद आया।

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  2. बहुत बढ़िया.
    आपकी पसंद और गीत जी की तस्वीर अच्छी लगी.

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  3. hamesha ki terah time se, ab baar baar taarif karne ki tippanni se bachne ke liye keh rahe hain ki agali baar meri pasand ke neeche humari teraf se hi apni taarif ke do shabd bhi thel dijyega.

    waise abhinav ke blog link me aapne dot unicode me de diya hai. Hum abhi thik kar daalte hain

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  4. हमेशा की तरह शानदार चिट्ठाचर्चा। किताबी आदमी बहुत अच्छा लग रहा है

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  5. शुक्रिया सर जी....
    तस्वीर ओर रजा जी की कविता सटीक है.......आपकी लाइनों की तरह.....

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  6. बढ़िया चर्चा रही। चित्र बहुत अच्छा लगा।
    घुघूती बासूती

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  7. यह बात सही है कि फ़ुरसतिया के पास "कुछ नया लिखने" की फ़ुर्सत तो नहीं ही होगी लेकिन इस ब्लाग अपनी विशिष्टता के साथ है. जारी रखें. शुभकामनाएं।

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  8. लेकिन यह ब्लाग अपनी विशिष्टता के साथ है।

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  9. अभिनव का ब्लोग नहीं खुल रहा। किताबी आदमी की फ़ोटो सुंदर है।

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  10. हमेशा की तरह शानदार चिट्ठाचर्चा...नियमितता ऐसे ही बनाये रहें और आनन्द रस का पान कराते रहें. शुभकामनाऐं.

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  11. .

    सुबह तो शीर्षक देख कर ही सटक लिया, भाई ।
    कुछ अमरजेन्सी रही, दिन में कई बार ख़्याल आया,कि..
    आज चिट्ठाचर्चा के संध्यावदन पर GDP यानि के अपने
    मेलापलट सरकार ज्ञानदत्त पांडेय से मुलाकात होयेगी ।

    लेकिन ईहाँ तो ऊई नदारत हैं, अरे प्रोटेक्टेड हैं,
    कोनो बायकाटेड तो नहीं, भाई ।
    उनकी सुधि लेयो, गुरु !

    एक अउर विचार आया है, ई आपके शुभकामनायें
    खाता में श्री समीर भाई की कितनी शुभकामनायें
    जमा होय गयीं, पब्लिक हिसाब माँगा चाहती है !

    सादर चि्च अभिवादन ।

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  12. चर्चा अच्छी है..पुस्तकों वाले आदमी की फ़ोटो बहुत ज्यादा अच्छी है..

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  13. चिट्ठाचर्चा तो हमेशा की तरह बढिया.... लेकिन पुस्तक बाबा के चित्र का जवाब नहीं..

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  14. वादा नहीं था कमेंट का पर करना पड़ता है खानापूर्ति को , अरे भई बुरा न माने शानदार चित्र साझा करने का शुक्रिया तो ले लें!

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