गुरुवार, अगस्त 21, 2008

यार तुम पोस्ट लिखो, आत्महत्या लोग अपने आप कर लेंगे

परसों कुश की चर्चा के बाद से चिट्ठाचर्चा के पाठक दोगुने हो गये। अब उनसे लोगों की आशायें हैं कि वे नियमित अपने जलवे दिखायें। पंगेबाज खांसी से हलकान हैं। ज्ञानजी कलकतिया लफ़ड़े की जांच करने के लिये घटनास्थल के लिये रवाना हो गये हैं। शिवकुमार मिश्र ने पत्र पुराण आगे बढ़ाते हुये अनूप भैया को जबाबी खत लिखा है। अब देखना है वो क्या जबाब देते हैं।

प्रमोद सिंहजी वैसे ही पटकनी खाये पड़े थे मुम्बई में लेकिन बारिश में घुटना भी तुड़वा बैठे। आह से उपजा होगा गान की तर्ज पर ये दर्द निकला उनका।

चवन्नी चैप पर आजकल सिने अभिनेताओं के इंटरव्यू आ रहे हैं। आज बिपासा से मिलिये। कहती हैं- जो काम मिले, उसे मन से करो: अब जिसके पास काम ही न हो वो क्या करे? आयोडेक्स मले, काम पे चले?

अनिल रघुराज ने अनंतमूर्ति का लेख अनुदित करके पेश किया पठनीय लेख।

वसूली एजेंटवसूली एजेंट

गुलाबी शहर जयपुर के बासिन्दे अभिषेक नित-नये कार्टून पेश करते हैं। आज उनकी निगाह में वसूली एजेंन्ट आ गये। आप भी बनियेगा?

दीपक भारतदीप समझाते हैं हिट की परवाह की तो ब्लाग पर लिखना कठिन होगा:
अंतर्जाल पर बेहतर साहित्य लिखने वालों का भविष्य उज्जवल है पर उसके लिये उनको धैर्य धारण करना होगा। इन फोरमों पर अपने ब्लाग अवश्य पंजीकृत करवायें पर हिट के लिये आम पाठक की दृष्टि से ही लिखने का विचार करें। ब्लाग लेखकों से संपर्क रखना आवश्यक है क्योंकि इनमें कई लोग तकनीकी रूप से बहुत कुछ सीख गये हैं और उनके ब्लाग पढ़ते रहना चाहिए।

लेकिन लोगों की समझ में कहां आता है जी?

समीरलाल जी आज मास्टरी पर उतारू होकर अंदर की बात बताने लगे।

रक्षंदा ने अपनी बात साफ़ करते हुये कहा-
हम एक देश यानी एक घर में रहते हैं, अगर हम ही एक दूसरे को नही जानेंगे और समझेंगे तो क्या कोई दूसरा देश आकर हमें समझेगा?

लेकिन--खुशी हो, गम हो या गुस्सा...कभी एकतरफा नही होता, एक तरफा हो तो इंसान थक जाता है और फिर उसे कहीं ना कहीं अपने नज़र अंदाज़ किए जाने का अहसास ज़रूर होता है

नही....आप बुरा बड़ी जल्दी मान जाते हैं, लेकिन सच्चाई को स्वीकार नही करते, अरे , हम करीब आना चाहते हैं, आप को अपने करीब लाना चाहते हैं लेकिन आप आने तो दें..हम जितना करीब आयेंगे,दूरिया उतनी ही मिटेंगी,ये त्यौहार दूरियां मिटाते हैं, एक दूसरे के करीब लाते हैं, और जब हम एक हैं तो एक होने से डरते क्यों हैं?


चलिये इस खूबसूरत बात पर एकजुट होकर एक लाइना पढ़ते हैं:

एक लाइना


जापानियों की प्रगति का राज : देशप्रेम!

ऐड्डी, हैरी और सिड भी टूंगते रह जाएंगे! : इन चोंचलों के समुद्र में।

बुढ़ापा और मैं : अक्सर बातें करते हैं।

बीती रात रस्किन बॉण्ड मेरे सपने में आए : बाइट दी और कहा हमारे बारे में भी ब्लागिंग करो जी!

पब्लिक की मांग पर -रात की हसीना: पब्लिक की मांग बड़े काम की चीज है!

श्रम संस्कृति का अपमान है बिहरी को भिखारी कहना : सत्यवचन!

कुछ करिये इससे अच्छा मौका न मिलेगा: हम करेंगे तो फ़िर ऊ लोग का करेंगे।

मेघा छाए आधी रात:बैरन बन गई निंदिया !

एक चिट्ठी अनूप भइया के नाम : लेकिन टिपिया सब दूसरे लोग रहे हैं।

जाने कितने मीत होंगे...! : सच में, गिनना और हिसाब रखना आफ़त है।

ओलंपिक में एक खास दिन : बीत गया कल।

दोराहे पर पाकिस्तान.. : चौराहे तक भी जायेगा।

एक अकेला व्यक्ति पहाड़ तोड़ सकता है ? : हां अगर हौसला हो!

पतझड़ के बाद का दुख : झेलोगे?

महाकवि निराला की कविता : चर्खा चला : खेती बाड़ी होने लगी।

कुछ नया करना तो चाह रही थी लेकिन .... : लेकिन हो न सका।

रायपुर से धमतरी जाने वाला ट्रक उड़ने को तैयार है : यात्रीगण कृपया अपना स्थान ग्रहण करें।

कौन सी दवा ले रहे हैं...इस का ध्यान तो रखना ही होगा !!: वर्ना और दवायें लेनी पड़ेंगी।

जाने होगा क्या?
: जो होगा देखा जायेगा।

समयचक्र के उड़ जाने का मुझे काफी दुःख है ?: हम भी दुखी हैं जी।

हिट की परवाह की तो ब्लाग पर लिखना कठिन होगा-संपादकीय :फ़िट बात!

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु बोल रे मिट्ठु तपत कुरु।

मेरी डायरी के पुराने पन्ने : यादों को ताजा करते हैं।

मेरे कन्ने माइंड रीडर है.: इसका अचार डालने की तरकीब खोज रहा हूं।

हरे हरे घाव हरे!..: मलहम-पट्टी से इश्क करें।

पत्रकार सुदामा, शिष्य सुदामा : माने डबल रोल चोचला।

यह मीडिया क्‍या वही चाहता है, जो पुलिस चाहती है? : बताते काहे नहीं जी!

आज का आदमी केवल पॉवर से चलता है: पावरकट है, आदमी सो गया।

तुम हो जाओ ग्लोबल, अपन तो ‘कूपमंडूक’ ही भले: यहीं मजे में हैं हम!

साहित्य अकादमी मे बे-कार जाने का अंजाम:अर्से बाद एक पोस्ट!

पार्टनर आपकी बीट क्या है : और उसे करते कैसे हैं?

आत्‍महत्‍या करूं मैं क्‍या : यार तुम पोस्ट लिखो, आत्महत्या लोग अपने आप कर लेंगे।

अंदर की बात : आखिर बाहर आ ही गयी।

डायमेंडस आर अ गर्ल्स बेस्ट फ्रेंड {?} :सच में? हाऊ स्वीट!

मेरी पसन्द



देश में सब कुछ कमल के लिए हो रहा है
पहले तो लोग समझते रहे
यह एक अच्छी योजना है
क्योंकि कमल एक लड़के का नाम है जो अभी बेरोज़गार है
उसे नौकरी मिल जाएगी

फिर पता चला
कि कमल कोई लड़का नहीं है
देश में चारों तरफ कमल की ही चर्चा है
पहले तो लोग समझते रहे कमल एक सिनेमा टाकीज़ है
जिसकी दीवार अचानक गिर गई रात के शो में
और सैकड़ों लोग दबकर मर गए
फिर पता चला चला कि कमल नाम की कोई टाकीज़ नहीं

देश में आजकल सभी स्कूलों में
कमल के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं
पहले तो बच्चे समझते रहे कि कमल एक राष्ट्रीय फूल है
तालाब में कीचड़ में खिलता है
लेकिन बाद में पता चला कि कमल फूल का नाम भी नहीं है
तो फिर कमल क्या है?
जिसके लिए रात-दिन इतना प्रचार किया जा रहा है
कि जहां जहां झोपिड़यां थी शहर में
वहां कभी घास थी
और घास का ऐतिहासिक महत्व है
इसलिए सभी झोपिड़यों को तोड़कर
घास पैदा की जाएगी

मंहगाई के बोझ तले दबे लोगो
सावधान रहना
कमल एक विचार है
जो आज़ादी के बाद तेज़ी से फैल रहा है
पहले यह कभी दीपक था
जिसके तले अंधेरा जगजाहिर है !

विमल कुमार
सौजन्य: शिरीष कुमार मौर्य

आज की तस्वीर


सफ़र से
और चोखेरबाली से।
सफ़रसफ़र



चोखेरबाली सेचोखेरबाली से

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12 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया चर्चा चली है इस बार तो.. एक लाईना की क्वांटिटी और क्वालिटी दोनो ही बढ़ गयी है जी.. अमर कुमार जी की प्रतीक्षा कर रहा हू.. देखता हू स्वामी आचार साहिता से इस बार क्या टीपियाते है..

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  2. चर्चा सुंदर है, सब से सुंदर आप की पसंद की कविता।

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  3. 'wah great debate, interesting to read, dekhen aage kya hotta hai"

    Regards

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  4. .

    सारी बास,
    अभी तो ' लगे रहिये, उखाड़े रहिये... ' इत्यादि इत्यादि
    पर ही गुज़र बसर करिये..

    लगे हाथ आप भी प्रोत्साहित हो लीजिये...
    प्रोत्साहन युग चल रहा है, सो समीक्षा नहीं चलेगा..

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  5. आपकी चिटठा चर्चा से बहुत सारे ब्लॉग पढने मे आसानी हो गई।

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  6. तस्वीर झकास है......लाइने अपनी लय में है ......लगे रहिये

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  7. जानकारी, हास्‍य-व्‍यंग्‍य, चित्र, कविता, विचार, कार्टून - इन सबको समाहित करनेवाला चिट्ठा चर्चा का यह कलेवर संपूर्णता का अहसास करा रहा है। सुंदर प्रस्‍तुति।

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  8. बहुत दिल लगाकर की गई बेहतरीन चिट्ठाचर्चा. आपके नियमित स्तरीय लिखते रहने हमारी हिम्मत जबाब दे गई है कि हम कैसे लिख पायेंगे चिट्ठाचर्चा. अतः तारीफी पुल बांधने का ठेका लिए बइठे हैं. आप नियमित जारी रहें. साधुवाद!!

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  9. चित्र और कविता ! दोनों बेहतरीन !
    आज यहाँ फ़िर आपने उलझा लिया !
    एक से बढ़ कर एक ब्लॉगस के बारे
    में जान कर पढ़ने का लोभ संवरण
    नही हो पाता और नतीजा ? दुसरे
    काम लेट ! वाकई जबरदस्त है !
    धन्यवाद !

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  10. वाह अनूप जी क्या टाइटिल दिया है ! बहुत दिनों बाद खुलके हंसे !:)

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  11. आज बिपासा से मिलिये। कहती हैं- जो काम मिले, उसे मन से करो: अब जिसके पास काम ही न हो वो क्या करे? आयोडेक्स मले, काम पे चले?
    ha ha...kya baat kahi.

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