सोमवार, अगस्त 25, 2008

उजाला निठल्लों के कब्जे में।

डायरी


राधिका ने अपनी हौसला आफ़जाई के लिये शुक्रिया अदा किया। आप क्या कहते हैं? -शुभकामनायें हैं!

दिनेशजी ने अपनी पोस्ट का सैकड़ा पूरा किया।कहते हैं:
सो न जाना कि मेरी बात अभी बाक़ी है
अस्ल बातों की शुरुआत अभी बाक़ी है


बेजी की बातों की थाह लीजिये| विनय प्रजापति सही ही कहते हैं:बेजी जो भाव प्रदर्शित करना चाहती है, उसमें हमेशा सफल रहती हैं, यही उनकी कविता है!

पडो़सी नाकामयाब है। ऐसा कहना है अभय तिवारी का। वे बताते हैं बजरियेमैक्स बेबर:
जो राज्य बलप्रयोग के वैध इस्तेमाल पर इजारेदारी क़ायम रख सकता है वो राज्य एक सफल राज्य है अन्यथा असफल।


अमित की मजेदार जानकारी भरी पोस्ट देखना न भूलें। कितने समझदार होते हैं पत्रकार!

निवेदिता रविरतलामी जी की भांजी हैं। उनकी आशीष के साथ शादी में ब्लागिंग का रोल रहा। उन्होंने अपना ब्लाग शुरू किया है। लघु कथा के माध्यम से उन्होंने लड़कियों का दर्द बताया है। देखिये।:
"मम्मी लेकिन भैया इंजीनियरिंग करेगा तो मै क्यो नही ?"
"वो लड़्का है , तु लड़की है। तु इंजीनियरिंग करेगी तो तेरे लिये लड़्का भी तो इंजिनियर ढुंढना पड़ेग।इतना पैसा नही है हमारे पास। अब रोना धोना छोड़ ! भैया अभी क्रिकेट खेल आने वाला होगा। उसके लिये चाय बना। "


ये जरूर सुने: नज़ीर की रचना--कन्‍हैया का बालपन

ऊपर का चित्र: महमूद दरवेश की डायरी से

एक लाइना



देश और शरीर में बड़ा फरक है: जे भली बताई भैया तुमने। हमें तो पता ही नही था।

कितना नहीं लजाइये,खाली थेथरई में गाल बजाइये।: थेथरई क्या होती है? जानने के लिये इधर आइये!

बापू कथा में मेरी कथा : घुसा तो दी लेकिन मेहनत बहुत पड़ गयी।

उजाला : निठल्लों के कब्जे में।

मैं तब भी आगे बढूंगा : सही है, पीछे होने वाले काम में बरक्कत नहीं है जी!

चाहा था एक शक्स को:लेकिन वो ब्लागर निकला।

बाज़ार में करता हूँ अभिनय का होमवर्क : जियो रजा! लगे रहो, किये रहो।

सात राज्यों की सैर और अलास्का क्रूझ: चलिये फ़टाफ़ट चलिये। जहाज तैयार है।

प्रेम गली अति सांकरी : एक-एक करके घुसें। हड़बड़ायें नहीं सबको मौका मिलेगा।

प्‍यार में पसरता बाजार ...; एक दिन बबाल करेगा, हम बता रहे हैं।

ऐसा था बाँसुरी के बजैया का बालपन: अभी तक बचपना करता है जी!

कंट्रेक्ट के वैध-अवैध उद्देश्य और प्रतिफल : सब सामने आ जायेगे जी।

मेरी पसंद


सभी लोग बराबर हैं
सभी लोग स्वतंत्र हैं
सभी लोग हैं न्याय के हक़दार
सभी लोग इस धरती के हिस्सेदार हैं
बाक़ी लोग अपने घर जाएँ

सभी लोगों को आज़ादी है
दिन में, रात में आगे बढने की
ऐश में रहने की
तैश में आने की
सभी लोग रहते हैं सभी जगह
सभी लोग, सभी लोगों की मदद करते हैं
सभी लोगों को मिलता है सभी कुछ
सभी लोग अपने-अपने घरों में सुखी हैं
बाक़ी लोग दुखी हैं तो क्या सभी लोग मर जाएँ

ये देश सभी लोगों के लिये है
ये दुनिया सभी लोगों के लिये है
हम क्या करें अगर बाक़ी लोग हैं सभी लोगों से ज़्यादा
बाक़ी लोग अपने घर जाएँ.
संजय चतुर्वेदी

पोस्टिंग विवरण



समीरलाल को कोसते हुये सबेरे सवा सात बजे शुरु हुये। इसलिये कि उनको एक दिन चर्चा तो करनी चाहिये। उन लोगों पर भी झुल्लाये जिनके ब्लाग से शीर्षक कापी नहीं हो सकता और हमें देख-देख के टाइप करना पड़ता है। चाय अम्मा ने बना दी। हालांकि हमने कहा -लाओ हम बना लेते हैं। अम्मा बोलीं -चलो भागो। लेकिन दुबारा पी तो खुद गर्म करके। चर्चा की शुरुआत मेरी पसन्द से की। इसके बाद ऊपर का मसाला लिखा। एक लाइना लिखा। फ़ोटो सबसे आखिर में लगाई! पाण्डेय जी की पोस्ट में मौज लेने का कोई स्कोप नहीं दिखा। अफ़सोस। रीता भाभी की संवेदनशील पोस्ट थी भाई। आलोक पुराणिक को एबीसीडी तक नहीं आती जानकर ताज्जुब हुआ और खुशी भी कि हमको तो आती है। पत्नी को फ़ोन करने की सोची लेकिन सोचा आराम से करेंगे। सोचा था कि आठ बजे पोस्ट करके नहाने जायेंगे लेकिन सवा आठ बजे गये। तमाम पोस्ट छूट गयीं लेकिन क्या करें जी! छूटे हुये लोगों को गुस्साने का मौका तो मिला! अब भागते हैं। मौज करें। ज्यादा परेशान हों तो टिपिया दें।

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14 टिप्‍पणियां:

  1. लो जी टिपिया दिये लेकिन अब सोच रहे हैं कि हम परेशान तो हुए नही फिर काहे टिपिया दिये, बहुत खूब

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  2. हमने सोचा था कि वहाँ जाकर ही आशीष को गरियायेंगे लेकिन आप भी निवेदिता के ब्लोग के जरिये आपना लिंक सरका दिये, ये अच्छी बात नही है (वाजपेयी हिस्टायल में पढ़ें),

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  3. आप ने जो कहा वह क्या कम है? गुण करे तो बहुत है।

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  4. निवेदिता रविरतलामी जी की भांजी हैं।
    achcha kiya bataa diyaa blog jagat ko ab koi anaam unkae blog par nahin kament dae kar unkae naari honey ko apmaanit karegaa aur unko " yae achchi auratey nahin haen kahega " unsaey kahey apnaa email id bhi uplabdh karaaye taaki aap kii aagyaa ko maan kar unklo naari blog kaa sadsy banaaya jaaye

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  5. मैं पुन: यह कह दूं कि आपकी ब्लॉगूर्जा (ब्लॉग ऊर्जा) से इम्प्रेस्ड हूं - अत्यधिक।

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  6. .

    आप शीघ्र स्वस्थ हों....
    परमपिता ब्लागजगत को ऎसी बेमन की चिट्ठाचर्चा सहने की शक्ति प्रदान करे

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  7. रचनाजी, मुझे निवेदिता की ई-मेल आई.डी. पता नहीं है। उसके ब्लाग का लिंक दिया है। आप उस पर कमेंट करके निमंत्रित कर सकती हैं।

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  8. फिर से पोस्टिंग विवरण अच्छा लगा।

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  9. मौज करें। ज्यादा परेशान हों तो टिपिया दें।

    आपके आदेश अनुसार आज दिन भर मौज करेंगे !
    मौज कर रहे हैं तो परेशान होने का सवाल ही नही
    उठता अत: बिना परेशान हुए टिपिया रहे हैं की आपकी दूकान का माल सुथरा ( बढिया ) है ! स्वाद बेजोड़ है !

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  10. चाहा था एक शक्स को:लेकिन वो ब्लागर निकला।

    ye baat jam gayi....

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  11. जियो रजा! लगे रहो, किये रहो। :-)

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  12. चिठ्ठा चर्चा तो अच्छी पोस्टॊं का ब्लॉगरोल हो गया है। मजेदार, सुलभ, और सटीक टिप्पणी सहित।

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  13. दिनेश जी को हमारी भी बधाई। आज की एक लाइना मस्त रहीं
    उजाला- निठ्ठलों के कब्जे में
    चाहा था एक शक्स को:लेकिन वो ब्लागर निकला।
    प्रेम गली अति सांकरी : एक-एक करके घुसें। हड़बड़ायें नहीं सबको मौका मिलेगा।
    बड़िया।
    ये सही है कि चिठ्ठाचर्चा तो रोज का अखबार हो गया, यहां से पता चलता है क्या पढ़ें।
    आप की ब्लोग ऊर्जा को सच में सलाम्…:)

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