रविवार, मार्च 08, 2009

गीत-संगीत के चिट्ठों की चर्चा

कुछ दिनों पहले चैट के दौरान फुरसतिया भाई साहब का आदेश हुआ- क्यों ना गीत-संगीत के चिट्ठों की चर्चा तुम किया करो! अनूपजी का आदेश का पालन नहीं करने की धृष्टता करने की हिम्मत मुझमें नहीं सो मैने कहा जी करूंगा, पर रोजाना नहीं कर सकूंगा। अनूपजी ने कहा जब तुम चाहो।
बात आई गई हो गई, मैं आलस्यवश उस आदेश पालन कर नहीं पाया पर मन में वह बात कचोटती रही। बाद में सोचा कि इसकी शुरुआत कैसे हो! जितने संगीत चिट्ठों को जानता था उनकी फीड लिंक को एक ब्लॉग पर लगाया और उसका नाम रखा गीत गाता चल ताकि सभी चिट्ठों की ताजा पोस्ट की जानकारी मिल सके।
इस ब्लॉग की सूचना के आधार पर पिछले दिनों संगीतमय चिट्ठों पर जो पोस्ट्स आई उनके बारे में लिखना चाहूंगा।
सबसे पहले बात करते हैं हिन्द युग्म के संगीत ब्लॉग आवाज की। यहां सुजॉय चटर्जी आज ओल्ड इज गोल्ड श्रंखला में लता जी का गाया हुआ एक बहुत ही मधुर गीत सुना रहे हैं- तुम क्या जानो तुम्हारी याद में हम कितना रोये

और अमितजी (मीत)के ब्लॉग पर इसे भी एक बार जरूर सुने। होरी के रंगों में तरबतर होने से पहले इकबाल बानो की शिकायत भी सुन लेने में कोई हर्ज नहीं है- इकबाल बानो की शिकायत है
हम तो रुसवा हुए वफ़ा करके
आपको क्या मिला जफ़ा करके।

होली आने में अब ज्यादा दिन नहीं बचे पर छोटे बच्चों की तरह हमारे चिट्ठाकारों ने अपने ब्लॉग पर होली/होरी से संबधित गीत चढ़ा कर होली का आगाज़ कर दिया है... आगाज़! अरे हाँ इस शब्द से याद आया हमारे प्रिय श्री अफलातून जी के इसी ब्लॉग पर भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी गाते हुए दिख रहे हैं राम रंगी रंग ले
कबाड़खाना में कबाड़ की बजाय अबीर- गुलाल के बादल छाये हुए हैं, यहाँ सिद्धेश्वर जी हमें शोभा गूर्टू की आवाज में एक फगुनाया रसिया सुनवा रहे हैं - आज बिरज में होली रे रसिया। इसे सुनकर आप एकदम मदमस्त हो जायेंगे।

ठुमरी वाले विमल जी पर भी होली का रंग कई दिनों से चढ़ा है, जरा देखिये तो मार्च के पहले हफ्ते में ही फागुन ने इन पर अपना असर डारा है। विमल जी आपको होली के रंगों में सराबोर करने का बहुत सा सामान अपने ब्लॉग पर सजाये बैठे हैं। २ तारीख को आप अपने ब्लॉग पर छाया गांगुली जी की आवाज में सुनवाया था जब फागुन रंग झमकते हों देख फुहारे होली की उसके बाद एक बार फिर आप हमें रंगो में भिगोये बिना उसका असर डारने के लिये ले आये हैं एक ही दादरा दो अलग अलग आवाजों में। ये दो आवाजे हैं शोभा गूर्टू और उस्ताद शुजात खां साहब की। गीत है रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे मोहे मारे नजरिया संवरिया रे........ ध्यान से पूरा सुनने पर मुझे लगा कि शायद विमलजी शोभा गूर्टू की आवाज में यह गीत पोस्ट करना भूल गये हैं, क्यों कि यहां सिर्फ उस्ताद शुजात खां साहब का गीत ही बज रहा है।

मयंक जी के नये नवेले चिट्ठे का तो नाम ही रंग बिरंगा है- क्या रंग है ज़माने का? इस चिट्ठे पर तीसरी ही पोस्ट में मयंक जी कमाल करते हैं और आबिदा परवीन की आवाज में गाये गीत से हमें बता रहे हैं कि आज रंग है।

इधर पारुल पर भी होरी की या भंग की मस्ती चढ़ी है, वे तनि बौराई हुई कहती हैं तनि धीरे बोलो कोई सुन लईगा..तोरी तिरछी नजरिया पर मर लेगा... भई पारुल जी इस सुंदर गीत को सुनने के बाद गीत और गायकी पर कौन ना मर मिट जायेगा!

अब इतने रंगों के बाद भी मुझे लगता है कि कुछ और रंग होने चाहिये थे... इधर उधर खोज करने पर पता चलता है कि Indian Raga पर भी होली के कई शेड्स (Holi:Five Shades) बिखरे पड़े हैं यहां आपको एक से एक लाजवाब कलाकार रंगों में भिगोने तैयार बैठे हैं, देखिये शोभा गूर्टू, अबिदा परवीन तो हैं ही ओ हो हो.. पण्डित छन्नू लाल मिश्र और गिरिजा देवी भी हैं।
पंण्डित छन्नू लाल मिश्र जहां राधाजी के स्वर में नंद के लाल को कहते हैं-
रंग डारूगी.. रंग डारूंगी,
सांवरे रंग लाल कर दूंगी,
मली गुलाल दोऊ गुलाल पे रंग डारूंगी
गिरिजा देवी कहती हैं उड़त अबीर गुलाल लाली छाई हैं.... और दूसरे गीत में शिकायत करती हैं आँखन भरत गुलाल... रसिया ना माने रे..
आ हा हा.... अब मैं एकदम मस्त हो चुका हूं, कैसा अदभुद नशा छाया है बिना भंग चखे ही।
अब और कुछ सुनने सुनाने की जरूरत नहीं रही।

संगीतमय चिट्ठाचर्चा आपको कैसी लगी, अपनी राय जरूर बतायें।
सागर चन्द नाहर
॥दस्तक॥,गीतों की महफिल,तकनीकी दस्तक

होली चित्र Indian Raga की इस पोस्ट से साभार

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24 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा है आपने चर्चा भी कर ली और गाने भी सुन लिये... सुरमयी चर्चा..

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  2. बहुत बेहतरीन संगीतमय चर्चा रही. सबसे अच्छा यह हुआ कि कम से कम सागर भाई इसी बहाने दिखे. अब दिखते रहिये. होली की बहुत मुबारकबाद.

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  3. होली के मौके पर संगीतमय चर्चा ... बहुत सुंदर ... होली की बधाई।

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  4. "मैं आलस्यवश उस आदेश पालन कर नहीं पाया"-जागो नाहर जागो:)

    संगीत के सागर की यह नहर आगे चल कर विशाल रूप भी ले लेगी, ऐसी आशा है॥ होली की शुभकामनाएं॥

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  5. इस गीत-संगीत के चिट्ठों की संगीतमय चर्चा के लिये धन्यवाद । अब इस चिट्ठा-चर्चा की एक और विमा स्पष्ट हुई ।

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  6. आपकी चर्चा और गीत दोनों मधुर .

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  7. सुरों की चर्चा और होली की बहुत-बहुत बधाई।

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  8. शानदार!
    चिट्ठाचर्चा में एक और रंग. बहुत बढ़िया पहल है.

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  9. बहुत बढ़िया। इस प्रकार विषय-केन्द्रित चर्चा की यह दिशा हिन्दी-ब्लॊगिंग के लिए काफ़ी सकारात्मक है।

    सागर जी को लम्बे समय पश्चात् सक्रिय देखना भला लगा।

    अनूप जी को इस जीत पर लख लख बधाइयाँ।

    यह क्रम बना रहेगा. ऐसा वादा भी झटपट नाहर कर दें, तो सोने पर सुहागा हो जाए।

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  10. होली पर इस संगीत मयी चर्चा के लिये बहुत धन्यवाद और आपको होली की घणी रामराम.

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  11. बहुत सुंदर चर्चा रही, ओर सुंदर सुंदर गीत भी सुने.
    धन्यवाद



    आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी भीगी भीगी बधाई।
    बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है

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  12. वाह संगीत मय चरचा और वो भी होली के रंग मे रंगी जोरदार लगी ।

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  13. वाह जी वाह सागर जी संगीतमय चर्चा देख सुन कर तो हम भी झूम लिए। होली की आप को सपरिवार शुभकामनाएं

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  14. अनूप ने तो होली की भेंट दे दी जामवन्त-धर्म निभा कर । बुनियादी रचनात्मक काम किया है - 'हनुमान' जी ने - 'गीत गाता चल' की रचना द्वारा । यह हो गई गीतों की ब्लॉगवाणी ।

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  15. वाह सागर वाह!!

    आज तो मजा आ गया. इस मधुर "संगीत" के लिये आभार! लगभग सारे "सुर" मौजूद हैं.

    सस्नेह -- शास्त्री

    -- हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

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  16. सागरभाई सा, तो वो आप थे। मैं ये ही सोच रहा था कि ये किस का काम है और इसने भी इसका नाम गीत गाता चल क्यों रखा है, भई हमारे चिट्ठे का नाम जो है। लेकिन आपने बहुतों का काम आसान कर दिया। और चर्चा बहुत ही संगीतमय रही। इसी बहाने सही आप मैदान में खेलने आये।

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  17. सागर जी आपका मेरे चिट्ठे indianraga पर स्वागत है। आप क्यूंकि 100001 वें अतिथि हैं, इसलिए आपका मेरे दिल में विशेष स्थान है। आते रहिएगा। धन्यवाद।

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  18. होली पर रंग-बिरंगी संगीत चिठ्ठो की जानकारी का उपहार मिला मुझे!!! आप को होली की शुभकामनाएं!!!

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  19. नाहर भाई हम आपकी पारखी नज़र के कायल रहे हैं...होली पर विशेष इस पोस्ट के लिये हमारी शुभकामनाएं......नाहर भाई आपने लिखा शोभाजी वाली आवाज़ नहीं सुन पा रहे...तो चढ़ाई तो दोनों ही हैं...और कई अलग अलग जगहों पर मैने सुना है...शोभाजी वाली ऑडियो फ़ाईल थोड़ा देर में खुलती है पर सुनी जा सकती है...होली की ढेर सारी शुभकामनाएं.

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