बुधवार, मार्च 18, 2009

बीन बजाना शुरू कर भाय!

  1. भैंस पड़ी पगुराय : बीन बजाना शुरू कर भाय!

  2. मैं तेरे इश्क में मर न जाउं कहीं... : जो मन आये करो लेकिन लिख के मत जाना

  3. मच्छरिया ग़ज़ल: मच्छर दानी लगा के पढ़ें

  4. आज की कारस्तानियाँ:रोज की तरह ही हैं!

  5. ये दिल मांगे मोर: जन्मदिन के दिन ही मचाया शोर!

  6. बोलना सही समय पर सही बात का : ही तो नहीं हो पाता

  7. तभी अपने लिए उम्मीद कर पाओगे-हिंदी शायरी : की तरह हाल हो जायेंगे वर्ना

  8. हम आजाद हुए थे आधी रात को और सबेरा अभी तक नही हुआ: तो सोऒ आराम से तान के यार! जब सबेरा हो जागना

  9. बाल विकास में असफल भारत : अब दूसरे क्षेत्रों में भी असफ़ल होकर दिखाये!

  10. कवि का बात कवि ही जाने :वो भी बेचारा क्या जानेगा?

  11. कदम दो कदम :चलने में ही सांस फ़ूल गयी भाई!

  12. काम बस काम ये कब तक चेलेगा :जब तक काम रहेगा!

  13. समाज में किस-किस तरह के लोग हैं:भांति-भांति के लोग हैं जी

  14. कुछ सनसनी फ़ैलायी जाये ! ऐसी सनसनी जो हिलाकर रख दे : जो चीज हिलती है वह सनसनी कैसे मचायेगी!

  15. मंगलेश डबराल को पहचानिए ! : उनकी मेल देखकर

  16. आज उस लड़की का जनमदिन है जो मुम्बई के एक कालेज में अध्यापिका है!

  17. ताऊ को शेर की सीख :हमेशा निर्दलीय लड़ना बारगेनिंग अच्छी हो जायेगी!

  18. कुछ समाज सेवा भी तो की जाय ! : इसके बाद उसको ब्लाग पर डाल दिया जाये

  19. शर्म से होती है सत्ता-नीति को हानि :बेशर्म बनो सत्तासीन हो जाओ

  20. इस चमकदमक के पीछे दर्दनाक है राज!! : दर्दनिवारक गोली लो खिचखिच दूर करो

  21. पाठक या ब्लॉगर इसे सही-सही हल करेंगे उन्हें एक-एक हथगोला इनाम में दिया जायेगा : गलत हल करने वाले के लिये सजा अभी तय नहीं हुई

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10 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. गलती से दूसरे नाम से पोस्ट कर दी थी, इसलिए हटानी पड़ी.

    अनूप जी, हम अपना इल्जाम वापस लेते हैं...काश आपसे आज के नेता कुछ सीख ले सकते. ये चर्चा तो मस्त रही...एक लाईना पढ़ कर सोने जा रहे हैं...क्या बेहतरीन अंत है आज के दिन का...अब कल की शुरुआत भी अच्छी होगी ऐसा मानना है :)

    चर्चा में फर्स्ट आके अच्छा लगा, लोग बेकार भैंस को गरियाते हैं अकाल बड़ी या भैंस...भाई हम तो कहते हैं की भैंस, ऐसे थोड़े कोई फर्स्ट आ जाए, और देखिये कमेन्ट भी पहला ही है.

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  3. श्श्श श श ! कोई देख रहा है..
    ई आधी रात में भईंस कहाँ से टपक पड़ी भाई.. तो आज्ञा है... हम चलें ?
    लिंक पकड़ने का लालच किये तो सुबह हो जायेगी !

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  4. शब्दों के कबाड़खाने को,

    ब्लाग-जगत पर लाए हो।

    बन कर श्रेष्ठ कबाड़ी,

    खुद ही उनसे बतियाए हो।।

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  5. बीन बजाते बजाते हम सारी एक लाईना पढ़ आये .
    बहुत अच्छी चर्चा .

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  6. *‘बोलना सही समय पर सही बात का : ही तो नहीं हो पाता’
    यही तो हम यहां आकर सीख रहे हैं:)

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  7. भाई हम कोई ऐसे ही दो दो भैंसे रखे हैं क्या?

    रामराम.

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  8. # कुछ समाज सेवा भी तो की जाय ! : इसके बाद उसको ब्लाग पर डाल दिया जाये
    नेकी कर दरिया में डाल- बड़े बुजुर्ग कहते भये हैं -मैंने ब्लॉग पर डाल दिया .शार्टकट का जमाना है शुकुल जी !

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