हाथों में ले के हाथ |
नज़रों में ख्वाब ले के,
महकेंगें साथ साथ |
ये इरादे हमारे नहीं हैं जी। न हम कोई चुनाव में खड़े हो रहे हैं जो आपको वोटर समझ के भरमा रहे हों। ये योजना अनुपम अग्रवालजी की है। देखिये आगे-आगे होता है क्या?
निशान्त मिश्र ऐसी बातें पेश करते रहते हैं जो शायद पता सबको होती हैं लेकिन उनके प्रति गंभीर होकर सोचना मुश्किल होता है। निशांत जिस तरीके से ज्ञान और समझ की बाते बताते हैं उससे एक बारगी लगता तो है कि हां इसको करना चाहिये। कल उन्होंने उन बीस बातों को लिखा जो उनको लगता है कि अगर वे उनको पहले पता होतीं तो बेहतर होता! उन बीस बातों में से एक है:
कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, अपना शौक पूरा करो - मैं हमेशा से ही लेखक बनना चाहता था। मैं चाहता था कि एक दिन लोग मेरी लिखी किताबें पढ़ें लेकिन मेरे पास लिखने का समय ही नहीं था। पूर्ण-कालिक नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियां होने के कारण मुझे लिखने का वक़्त नहीं मिल पाता था। अब मैं यह जान गया हूँ कि वक़्त तो निकालना पड़ता है। दूसरी चीज़ों से ख़ुद को थोड़ा सा काटकर इतना समय तो निकला ही जा सकता है जिसमें हम वो कर सकें जो हमारा दिल करना चाहता है। मैंने अपनी ख्वाहिश के आड़े में बहुत सी चीज़ों को आने दिया। यह बात मैंने १५ साल पहले जान ली होती तो आजतक मैं १५ किताबें लिख चुका होता। सारी किताबें तो शानदार नहीं होतीं लेकिन कुछेक तो होतीं!
संयोग कि ज्ञानजी ने आज की अपनी पोस्ट में लिखा निशांत मिश्र के बारे में लिखा:
मेरे और निशान्त मिश्र में क्या साम्य है? शायद कुछ भी नहीं। निशान्त एक दक्ष अनुवादक लगते हैं। उनकी जेन/ताओ/सूफी/हिन्दू प्रेरक कथाओं के अनुवाद मुझे अपने मोहपाश में बांध चुके हैं। इतना सुन्दर अनुवाद --- और मैं अंग्रेजी से हिन्दी बनाने के अटपटे शब्दों से उलझता रहता हूं।
मुझसे बीस साल छोटे निशान्त मुझे ईर्ष्याग्रस्त कर रहे हैं अपनी केपेबिलिटीज से। अपने बौनेपन पर केवल हाथ ही मल सकता हूं मैं! और यह आशा कर सकता हूं कि फुरसतिया इससे मौज न निचोड़ लें!
अब चूंकि ज्ञानजी की आशा है कि हम इसमें मौज न निचोड़ लें इसलिये हम इस बारे में और कुछ न कहेंगे।
बी.एस.पाबला जी की ब्लाग पोस्ट से पता चला कि आज एक लड़की का जन्मदिन है। लड़की है अनीता कुमार जी जो मुम्बई में प्रोफ़ेसर हैं। अनीताजी अपने बारे में कहती हैं:
मेरी हालत उस लड़की जैसी है जो मेले में घूम रही है और ललचाते हुये, सब कुछ देखकर अपने दामन में समेट लेना चाहती है। एक बार तो उन्होंने लिखा कि भगवान से कहना पड़ेगा …जितनी बार मैंने कहा था कि उठा ले उतने ही साल का इज़ाफा दे दे, सब सीख लूँ तो तेरे ही स्वर्ग की वेबसाईट बना दूँ। बागवानी, संगीत, उपन्यासों, फिल्मों, ब्लॉगरों के बारे में भी उनकी जानकारी काबिलेतारीफ है।
अनीताजी को उनका जन्मदिन मुबारक हो!
फ़िलहाल के लिये इतना ही। बाकी चर्चा और एक लाइना शाम को देखिये।
अनीताजी कोजन्मदिन की शुभकामनाये....
जवाब देंहटाएंRegards
सुन्दर चर्चा। आपका तो मैं मुरीद हूँ।
जवाब देंहटाएंमैने एक नया ब्लॉग शुरू किया है आप सबके लिए। एक बार देखें जरूर। टिप्पणी न भी करें तो चलेगा। ब्लॉगवाणी वाले इसे कैसे अपने यहाँ शामिल करेंगे यह भी बताने का कष्ट करें।
अनिता जी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ।
जवाब देंहटाएंअनिता जी को जन्मदिन की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ..
जवाब देंहटाएंहमारी भी अनिता जी को जन्म दिन की शुभकामनाएं ।
जवाब देंहटाएंअनीता जी को हमारी भी शुभकामनाएं
जवाब देंहटाएंफूलों की क्यारियों में ,
जवाब देंहटाएंहाथों में ले के हाथ |
नज़रों में ख्वाब ले के,
महकेंगें साथ साथ |
हम तो समझ रहे थे कि होली के बाद फुरसतिया जी पर प्रेम का रंग चढा है पर नहीं SSSSSSSSSSSSSSS
अनिताजी को जन्मदिन की बधाई, पर हमारी हालत तो उस बच्चे जैसी है जो ‘हैपी बर्थडे’ गाने के बाद केक की तरफ घूरता रहता है:)
संक्षिप्त किंतु सुंदर चरचा देव....
जवाब देंहटाएंनमस्कार
अनिता जी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनायें ।
जवाब देंहटाएंअच्छी चर्चा ... अनीताजी को उनका जन्मदिन मुबारक हो!
जवाब देंहटाएंअनीता जी को बधाई दे आई, अब आपको धन्यवाद दे रही हूँ
जवाब देंहटाएंअनिता जी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनायें ।
जवाब देंहटाएंसुन्दर और सार्थक चर्चा. अनीता जी को हमारी भी शुभकामनायें
जवाब देंहटाएंअनीता जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई । पर अनूप जी आपके लिए कुछ भी नहीं
जवाब देंहटाएंआप सभी मित्रों का तहे दिल से शुक्रिया। पाबला जी के लिए क्या कहूं उन्हों ने तो मुझ जैसी साधारण सी हस्ती को बहुत सम्मान दे दिया। अनूप जी आप को भी खास तौर से धन्यवाद, हमें चिठ्ठाचर्चा जैसे प्रतिष्ठित चिठ्ठे में जगह देने के लिए।
जवाब देंहटाएंघणा तेज चैनल है आप का! पोस्ट लिखने से पहले ही चर्चा तैयार कर लेता है शायद। इम्प्रेसिव!
जवाब देंहटाएंऔर अनीताजी को जन्मदिन मुबारक!
अनीता जी को जन्मदिवस की मंगलकामनाएँ।
जवाब देंहटाएंअनीता जी को जन्मदिन की बधाई ।
जवाब देंहटाएंमहकते ख्वाबोँ पर नज़र आखिर नज़र है.
जवाब देंहटाएंआखिर हर ख्वाब भी तो चाहता एक घर है .
वाह जी, फोटो भी चर्चा सरीखी ही सुंदर...-:)
जवाब देंहटाएं
जवाब देंहटाएंकितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, अपना शौक पूरा करो
वही तो कर रहा हूँ, सभी काम छोड़ टीपने बैठा हूँ..
इसे फटे में टाँग अड़ाना तो नहीं न मानते हैं, आप ?
बीस साल छोटे निशान्त मुझे ईर्ष्याग्रस्त कर रहे हैं..
यह तो आप होते ही रहते हैं.. ऎसे में निर्लिप्त श्री कृष्ण का ध्यान किया करें !
घणा तेज चैनल है.. ..
सुबह फोन लाइनें व्यस्त नहीं न होती हैं, इसीलिये !
आप सभी मित्रों का तहे दिल से शुक्रिया ।
अभी कैसे.. अभी तो मैंने उखड़े दिल से भी शुभकामनायें नहीं दीं हैं !
चलिये इसी बीच मेरी शुभकामनायें भी प्रोमोट होकर तहे-दिल का ग्रेड पा चुकी हैं ।
आप ग्रहण कर के पावती भेज दें !
मुझ जैसी साधारण सी हस्ती को...
पाबला जी ने यह कब कहा कि ' जस्सी जैसी कोई नहीं .. '
आपने सुबह एक लाईना और बाकी चर्चा का आश्वाशन दिया था, अभी तक तो आधी लाइन भी नज़र नहीं आई...चुनावी मौसम में आप भी नेताओ वाला काम करने लगे. कहीं पञ्च वर्षीय योजना में तो नहीं डाल देंगे.
जवाब देंहटाएंअनिता जी को जन्मदिन की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ..
जवाब देंहटाएंरामराम.
अनूप जी
जवाब देंहटाएंआप बहुत सुन्दर चर्चा करते है भाई आपका जबाब नहीं . धन्यवाद.
आनन्द आ गया शुक्ला साहब आपकी चर्चा में।
जवाब देंहटाएं