मंगलवार, अगस्त 04, 2009

सब जगह यही रिश्ते रिसते

नमस्कार ! चिट्ठों की सम्बन्ध चर्चा में आपका स्वागत है ।

पिछली चर्चा में सुरेश चिपलूणकर के चिट्ठे की चर्चा हुई । जिसमें मीडिया के संबन्धों की चर्चा हुई । चन्द्रमौलेश्वर ने चिट्ठा चर्चा के संबन्धों को उजागर कर दिया । उन्हीं का आइडिया चुराकर हम हिन्दी चिट्ठों और चिट्ठाकारों के सम्बन्धों पर चर्चा करना चाहते हैं । पर शुरू कहाँ से करें ? जिसका आइडिया है, क्यों न उसी से शुरू किया जाय :

अभी तो कितने ही रिश्ते बाकी हैं । पर क्या करें समय का अभाव है । अगले मंगलवार फ़िर मिलते हैं । तब तक के लिए नमस्कार !


चलते-चलते


राजनीति, मीडिया, ब्लॉग सब जगह यही रिश्ते रिसते ।

अपनी न निजी औकात रही, चलते रहते कंधे घिसते ॥

रिश्तों में प्रेम न हो तो फ़िर किसलिए इन्हें कोई ढोए ।

इस दुनिया में कैसे रिश्ते, कोई हँसता कोई रोए ॥


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42 टिप्‍पणियां:

  1. चिट्ठा चर्चा के जरिये इतनी सारी जानकारी एकसाथ मिली । बहुत-बहुत बधाई।

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  2. विवेक भाई हम तो हमारे ब्लोग का नाम ही ढूढते रहे।

    आभार/ मगल भावनाऐ
    हे! प्रभु यह तेरापन्थ
    मुम्बई-टाईगर
    SELECTION & COLLECTION

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  3. इसे कहते हैं
    लिंकिंग चर्चा
    ऐसी चर्चाएं
    कभी संपन्‍न
    नहीं होती हैं
    जारी रहती हैं
    अनवरत।

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  4. रिसते रिश्ते!!
    पिसते रिश्ते!!
    घिसते रिश्ते!!
    टिकते रिश्ते!!
    मिटते रिश्ते!!
    बिकते रिश्ते!!
    पिटते रिश्ते!!
    मिलते रिश्ते!!
    खिलते रिश्ते!!
    छिलते रिश्ते!!
    लिखते रिश्ते!!
    रिश्ते रिश्ते!!
    दिल के रिश्ते!!


    --वाह जी!! बस रिश्ते ही रिश्ते!!

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  5. एक निवेदन - बचे हुए रिसते रिश्तों को इसी तरह कुछ पीसते।
    अच्छी चर्चा।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  6. धन्यवाद विवेकजी। रिश्ते के रिक्शे में ब्लाग जगत की सैर कराने का:) हम तो मात खा गए जी:-)

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  7. भाई आपने पूरी रिश्तो की डोर ही लिख दी . ....

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  8. आज तो चर्चा बिल्कुल नए अंदाज मिली पढ़कर मजा आ गया !

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  9. रिश्ते ही रिश्ते -एक बार पढ़ तो लें।

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  10. @Udan Tashtari

    रिसते रिश्ते!!
    पिसते रिश्ते!!
    घिसते रिश्ते!!
    टिकते रिश्ते!!
    मिटते रिश्ते!!
    बिकते रिश्ते!!
    पिटते रिश्ते!!
    मिलते रिश्ते!!
    खिलते रिश्ते!!
    छिलते रिश्ते!!
    लिखते रिश्ते!!
    रिश्ते रिश्ते!!
    दिल के रिश्ते!

    aapne matlaa aur radeef to padhvaa diya pooree gajal kab padhvayenge ???:)

    venus kesari

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  11. और इस रिश्‍ते में हम कहां हुए.... वही आम आदमी... जो देख और पढ़ रहा है :)

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  12. एक सँशोधन : मज़े की बात तो यह है कि यह सब रिश्ते में रीसते हुये ब्लागर भी है !

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  13. रिश्ते ही रिश्ते
    इतने सारे रिश्ते
    बहुत अच्छा लगता कि आपके इतने सारे रिश्तेदार हैं..
    मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं...

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  14. रिश्‍ते नहीं चिट्ठे
    एक बार सभी
    पढ़ तो लें और
    बन जायें असली
    चिट्ठाकार
    जो पढ़ता है
    और करता है
    कमेंट
    वही कहलाता है
    चिट्ठाकार
    बाकी सारा
    खेला बेकार।

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  15. विवेक जी ने जिनका उल्लेख किया,
    उन सबको बधाई।
    बाकी ब्लॉगर्स निराश न हों,
    अपना नाम देखने लिए चिट्ठा चर्चा पर आते रहें।
    कभी न कभी तो तसल्ली मिल ही जायेगी।

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  16. वाह रिश्ते ही रिश्ते.:)

    रामराम.

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  17. रिश्तों का मिजाज होता ही कुछ ऐसा है कि पूँछ बढ़ती ही जाती है ।
    बेहतर चर्चा । धन्यवाद ।

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  18. गोल गोल जलेबी जैसा हो गया. :)


    मिसिजीवी का असली नाम उनसे पूछ कर ही उजागर किया गया होगा, या उन्होने स्वयं ही कर दिया होगा. जो भी हो कभी असली नाम जानने की ओर ध्यान नहीं दिया, आज पता चल गया.

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  19. कई बातें नई पता चली.. हम तो ये ही मसिजिवी ही मसिजिवी है.. ये तो कोई और निकले.. कई पुराने ब्लोग भी मिले.. आभार.. :)

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  20. अच्छा, जीतेन्द्र चौधरी ही ताऊ हैं। नयी बात पता चली। धन्यवाद।

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  21. चर्चा के मंच पर लोगो की निजता को ला कर आप
    क्या कर रहे हैं . यहाँ ब्लॉग की चर्चा हो या ब्लॉग
    आधारित विषयों की . चर्चा का मंच इस लिये नहीं
    हैं की हम जिसकी चाहे उसकी निजता को उजागर
    करे . इस प्रकार की पोस्ट अपने निज के ब्लॉग
    डाली जाए तो सही होगा ताकि लोग अपने विचार
    दे . सांझा ब्लॉग { क्युकी इस मंच पर बहुत
    चर्चाकार हैं } ये पोस्ट डालने का अर्थ हैं की बाकी
    सब चर्चाकार भी आप से सहमत हैं .
    निज की दोस्ती , रिश्ते दारी को इस प्रकार से
    सांझा ब्लॉग के मंच पर नहीं डालना चाहिये और
    इस पोस्ट को भी हटा देना चाहिये

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  22. "सांझा ब्लॉग { क्युकी इस मंच पर बहुत
    चर्चाकार हैं } ये पोस्ट डालने का अर्थ हैं की बाकी
    सब चर्चाकार भी आप से सहमत हैं ."


    यह अध्यादेश कब जारी हुआ ? अभी तो संसद का सत्र चल रहा है तो यह अवश्य ही अध्यादेश न होकर कानून होगा .

    इस कानून के हिसाब से तो चिट्ठा चर्चा की सभी पोस्ट ( हमारी को छोड़कर) डिलीट कर दी जानी चाहिये , क्योंकि हमसे सहमति किसी पोस्ट के लिये नहीं ली गयी :)

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  23. Phir se pusht hua ki charcha ke manch par Vachaknavee ke blogs ke link bhool kar bhi dena varjit kiya hua hai.

    Thanks for this kind of teamwork.

    "
    # इस चिट्ठे पर कविता वाचक्नवी भी दिखाई देती हैं ।

    # कविता वाचक्नवी हिन्दी भारत, और "

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  24. रचना जी, आपने अपने ब्लॉग पर जो बात कही है उससे बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ
    मुझे तो इस पोस्ट में ऐसी जानकारियाँ मिली जो किसी नए ब्लोगर को शायद ही हो और रही बात निजता का यहाँ ऐसी कोई बात नहीं कही गई जो अत्यंत गोपनीय हो क्योकि चर्चा कार ने भी तो ये बातें ब्लॉग को पढ़ते पढ़ते ही जानी होंगी

    न की "किसी ने अपना राज़ इनसे शेयर किया होगा, इस वादे के साथ की भाई तुझको बता रहा हूँ किसी को बतइयो मत''

    वीनस केसरी

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  25. अभी तक की सबसे बेमिसाल चर्चा....शुक्रिया विवेक भाई इस रिश्ते की चर्चा के लिये....समझ सकता हूँ कितनी मेहनत से लिखी गयी है पोस्ट....

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  26. भाई बहुत मेहनत की है आपने मेरे पाँच ब्लोग हैं शरद कोकास,पुरातत्ववेत्ता,आलोचक, ना जादू ना टोना ,पास पडोस और इन पर मै अकेले ही लिखता हूँ आपकी बात से प्रेरित होकर अन्य से रिश्ते बनाने की सोच रहा हूँ धन्यवाद्

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  27. छिलते, रिसते, भभाते और भाति भाति दुःख देते रिश्ते -एक की आर्तनाद सामने ही है !

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  28. लो, रिसाव शुरु हो ही गया रिश्तों में...अब टेको..वरना बाढ़ ही न आ जाये. :)

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  29. अरे इधर मुझे तो कुछ निजी दिखा ही नहीं क्या निजी दिख रहा है जरा हमें भी अपनी आँखों का चश्मा पहना कर दिखवायें।

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  30. सुजाता की बहन नीलिमा हैं, मसिजीवी और कोई नहीं बल्कि नीलिमा के पति विजेन्द्र सिंह चौहान ही हैं ।

    ज्ञानदत्त पाण्डेय के छोटे भाई हैं शिवकुमार मिश्र जो कोलकाता में रहते हैं ।
    डॉक्टर अनुराग कुश के अच्छे मित्र हैं ।

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  31. हमें तो लगता है.. ये चर्चा इस टिपण्णी की प्रति टिपण्णी चर्चा है..

    cmpershad ने कहा… @ August 04, 2009 10:35 AM

    बडी़ लम्बी दूर तक रिश्ता निभाती चर्चा:) वैसे रिश्ते यहां भी कम नही है... अब देखिए विवेकजी चिठाचर्चा पर, चिठाचर्चा अनूप जी चलाते हैं, विवेकजी उनके अच्छे मित्र है, विवेकजी तेल पिलाते हैं और ज्ञानजी रेल चलाते हैं और दोनों के अच्छे मित्र दुर्योधन की डायरी [डायेरिया नहीं] रखने वाले है.....इस तरह चिठाचर्चा हुई ना रिश्तेदारी की डोर:)
    डिस्क्लेमरः यदि इस डोर में कहीं राखी की गांठ दिखाई दे तो कृपया बता दें ताकि वह रिश्ता काट दिया जाय:-)



    अब लगने में कोनौ बुराई थोड़े ही है.. किसी को भी लग सकती है.. मेरा मतलब है लग सकता है..

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  32. सुजाता की बहन नीलिमा हैं, मसिजीवी और कोई नहीं बल्कि नीलिमा के पति विजेन्द्र सिंह चौहान ही हैं ।

    ज्ञानदत्त पाण्डेय के छोटे भाई हैं शिवकुमार मिश्र जो कोलकाता में रहते हैं।
    डॉक्टर अनुराग कुश के अच्छे मित्र हैं।


    निजता की परिभाषा और उदाहरण यही है। ब्लॉगर मित्र इसे नोट करें और आगे के लिए गाँठ बाँध लें। किसी ने जो टॉप-सीक्रेट छिपाकर रखा था उसे उजागर करना निन्दनीय है।

    अलबत्ता जिन लोगों की निजता का अतिक्रमण हुआ है उन्हें स्वयं अपना विरोध जरूर दर्ज करना चाहिए था। अब वे इतने जागरूक तो हो ही लें कि अपनी बात खुद कह सकें। किसी प्रवक्ता या वकील की जरूरत यहाँ भी पड़ जाय तो लानत है।

    ब्लॉगर तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे...

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  33. मेरा नाम हर्षवर्धन है। मैं इसी नाम से लिखता हूं बतंगड़- ब्लॉग का नाम है। आपने जिक्र नहीं किया ना इसीलिए। ... काफी मेहनत की भई

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  34. @ सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    निजता की परिभाषा और उदाहरण आप "छिपकली" के नाम से भी कमेन्ट देते हैं हैं

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  35. ‘छिपकली’ नाम से कोई कमेण्ट मैने अभी तक नहीं देखा। कृपया लिंक दें तो पता लगाऊँ।

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  36. इन रिश्तों में कोई भी रिश्ता ऐसा नहीं है जो मुझे पहले से पता नहीं था..
    मुझे इन रिश्तों के बारे में किसी ने बताया हो ऐसा मुझे याद नहीं है.. मगर फिर भी मुझे पता है, मतलब मैं कहीं ना कहीं ये सब बाते पढ़ी ही होंगी.. और निश्चित रूप से नेट पर ही पढ़ी होगी.. तो इसमे निजता कैसी??

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