बुधवार, सितंबर 13, 2006

सिर मुडाते ही ओले पड़े...

आज चिठ्ठा चर्चा पर लिखने का मेरा प्रथम प्रयास है और जैसा कि हमेशा होता है, सिर मुडाते ही ओले पड़े. ऎन वक्त पर नारद जी बीमार पड़ गये. हम खोजते रहे इस गली से उस गली कि कौन कौन नया कांड किये है, उसकी रिपोर्ट बनायी जाये. तो पूरी ताकत झौंककर जितना ला पाये, ले आये. जो छूट गये, क्षमा करें मगर अब तो छूट ही गये, कृप्या टिप्पणी के माध्यम से इस रपट का हिस्सा बन जायें. नारद की गैर मौजूदगी मे इसे बहुतों ने अपना अस्थाई जरिया बनाया है आपके चिठठे तक पहुँचने का.


गिरीराज जोशी जी ने तो कुछ दिनों से हाईकु की ऎसी बारिश शुरु की है मानो गुजरात की बारिश. अब तो वो हर बात हाईकु मे ही करते हैं. सभी चिठ्ठाकारों के चहेरे पर नारद के बीमार पडने से मुर्दानगी छायी है. जोशी जी इसे भी हाईकु मे ही बयान कर रहे हैं:

आजा नारद
हुए बेहाल हम
जल्दी वापस
*
बिना तुम्हारे
लग रहा ऎसे, हूँ
जैसे निर्जीव.


साथ ही पढ़े गिरीराज जी के कुछ क्षणिकायें .

सागर चन्द्र नहार साहब फिर अपने चिरपरिचीत अंदाज मे एक और चित्र पहेली लेकर दस्तक देने लगे और उनकी उम्मीद से विपरीत बागला जी चन्द घंटों मे जबाब लेकर हाजिर हो गये.

नारद की बीमारी से विचलीत उन्मुक्त जी हाजिर हुये चिठ्ठाकारों की सूची लेकर और नयी परिविष्टियों को देखने की अन्तरिम व्यवस्था को लेकर. आप भी देखें अगर आप छूट गये हो उसमे, तो उन्मुक्त जी को सूचित करें. जैसा कि मैने कहा कि उन्मुक्त जी अति विचलीत है नारद की बीमारी को लेकर, इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि वो पुनः यही बात छुट-पुट पर भी बताने लग गये.

रवि रतलामी जी तो अनुगूंज में अनुवादित शब्दों की गूंज के तहत पूरा शब्दकोष ही तैयार कर लाये है. अब हमे तो इस अनुगूंज मे हिस्सा लेने के लिये शब्दों का ही जुगाड़ मुश्किल हो गया, कोई बचा हो तो अनुवाद करें. आप तो इसी के कुछ हिस्से को " हमने भी यही सोचा था" मान कर काम चला लें. इस जबदस्त संकलन और अनुवाद के लिये रवि जी साधुवाद के पात्र हैं. बधाई स्विकारें, समस्त हिन्दी प्रेमियों की तरफ़ से.रवि भाई के रचनाकार पर तैयार हो जायें फिर से हंसने के लिये चुटकुलों की अगली कड़ी हाजिर है.

प्रियंकर जी अनहद नाद पर श्री मानिक बच्छावत जी को ‘गंगाशरण सिंह पुरस्कार’ से सम्मानित होने पर बधाई देते हुये इस पुरस्कार से जुडी काफी रोचक जानकारी देते हुये बता रहे हैं:

केन्द्रीय हिन्दी संस्थान की हिन्दी सेवी सम्मान योजना के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के उन्नयन,विकास एवं प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए समर्पित विद्वानों को प्रति वर्ष सम्मानित किया जाता है . ....

उधर अनुभूति कलश पर रमा द्विवेदी जी की मां को समर्पित एक बहुत ही सुंदर गीत मां के आंचल को तरसती रही लेकर आई है:

मेरी सांसों की घडियां बिखरती रहीं,
फूल से पंखुरी जैसे झरती रही ।


नीरज दीवान जी आज वन्दे मातरम भाग चार मे इतिहास की तारीखों पर अपनी पैनी नजर गडाते हुये कह रहे है:
वंदेमातरम् पर हुई राजनीति पर बहुत से आलेख पिछले दिनों लिखे गए. यहां कोशिश की गई कि इतिहास की तारीख़ों पर नज़र डालते हुए कुछ संशय आपके सामने रखूं.

सुनील जी इटली मे अपने निराले अंदाज मे अपनी डायरी के बेतरतीब पन्ने समेटते नजर आये.अपनी भतीजी की एक बेहद सुंदर रचना भी इन्ही पन्नों से निकाल कर पेश की:

"आशा के पथ पे"-

निराशा का लिहाफ
आरामदायक है
अपने अन्धेरे आगोश मे
भर लेता है
असलियत की कडी धूप से
बचने का आसरा है
राह मे वही थम जाने काबहाना है..........

आगे की कविता आप उनके ब्लाग पर पढ़ें. साथ ही उन्होने ऋतुपूर्ण घोष की बँगला फिल्म "अंतरमहल" की बहुत अच्छी समीक्षा की है.


अपनी तिरछी नजरिया से हितेन्द्र जी वो एक सुबह थी नयी सुबह रचना के माध्यम से दो दिन पूर्व शुरू की गई प्रातः भ्रमण की आदत को कम से कम महिने भर तक संभाल कर रखने के लिये संकल्पित होते दिखे. हमारी शुभकामनाऎं उनके साथ हैं:

वो एक सुबह थी नयी सुबह
जब आलस भीतर का टूटा
एक दाग़ था वो छूटा
जब बरसों की आदत छोड़्कर
निकल पड़ा मैं
तड़के सुबह पाँच बजे सैर पर..........


पलाश पर पढ़ें एक मानसून गीत.


धरती गाती जा रही है,नये तराने

इठलाने के ढूँढ,नित नये बहाने



भारतीय सिनेमा के लिये मील के पत्थर राज कपूर के विषय मे देखिये भारतीय सिनेमा .


शैलेष भारतवासी लेकर आये हैं अपनी नई रचना न रहे उजाला


जीतू भाई के जुगाड लिंक पर नये जुगाड देखिये.


अपील:

नारद पर अक्षरग्राम कोष की स्थापना कर दी गई है. आपके अपने नारद को जल्द वापस लाने के लिये कृप्या अपना योगदान करें.


बधाई: आज दुबई नरेश शुऎब जी जन्म दिन है,
वो अपने २६ बसंत पूर्ण कर २७ वें की राह तकते पाये गये. उनको बहुत बहुत बधाई.


आज की टिप्प्णी:

संजय बेंगाणी said... सुनील जी के चिठ्ठे पर

आप सरल शब्दो में सहजता से विचार बयान कर जाते हैं.हिन्दी की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी की नहीं हमारी हैं, हमे हिन्दी को कमाने लायक भाषा बना कर छोड़ना होगा.फिल्म की अच्छी समिक्षा की हैं आपने.


आज का चित्र: सुनील जी के चिठ्ठे से


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8 टिप्‍पणियां:

  1. प्यारे शुएब को जन्मदिन की अनेकानेक बधाइयां
    और मंगलकामनायें.दुआ है आप अपनी अम्मी
    की इच्छायें पूरी करते हुए मस्त रहें.समीर जी
    को बधाई यहां धांसू शुरुआत के लिये.बस कमीं
    लग रही है एकाध कुंडलियों की ताकि लगे कि
    यह कुंडलिया गुरू ने ही लिखा है.

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  2. समीर जी को इस प्रयास के लिये बधाई। वाकई नारद की अनुपस्थिति में यह कार्य बहुत कठिन है।
    अनूप जी के पिछले प्रयास भी तारीफ के काबिल हैं।
    नारद की अनुपस्थिति में चिठ्ठा चर्चा का महत्व और भी बढ़ गया है।

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  3. शुएब को जन्मदिन की बधाई !
    समीर जी , उडन तश्तरी बढिया उडाये

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  4. नहीं भाई साहब
    सही हल नितिन बागला जी से भी पहले पंकज बेंगानी जी दे चुके थे, परन्तु इतनी जल्दी पहेली के हल होते देख हमने उत्तर को हटा देने का निश्चय किया ताकि ज्यादा लोग मेहनत कर सकें। बाद में पंकज भाई ने टिप्पणी बदल दी मानों उन्हें इसका हल पता नहीं है। यहाँ उनकी टिप्पणी प्रस्तुत कर रहा हुँ जो उन्होने पहेली के प्रकाशित होने के तीन चार मिनीट बाद मेरे चिट्ठे पर की थी।
    ये महान सैनिक जोनाथन नेतन्याहु थे। जो इज़रायल के कमांडो सैनिक थे। इज़रायल के अपहृत विमान के बन्दीओं को छुडाने के लिए इनका दस्ता युगांडा में घुस गया था। सभी बन्दी बचा लिए गए पर इनको जान से हाथ धोना पडा।
    बाद में इनके भाई बेंजामिन नेतन्याहु इज़रायल के प्रधानमंत्री बने।
    क्यों भाईसा अबकी फुल मार्क्स ना? :-)

    उत्तर देंहटाएं
  5. नहीं भाई साहब
    सही हल नितिन बागला जी से भी पहले पंकज बेंगानी जी दे चुके थे, परन्तु इतनी जल्दी पहेली के हल होते देख हमने उत्तर को हटा देने का निश्चय किया ताकि ज्यादा लोग मेहनत कर सकें। बाद में पंकज भाई ने टिप्पणी बदल दी मानों उन्हें इसका हल पता नहीं है। यहाँ उनकी टिप्पणी प्रस्तुत कर रहा हुँ जो उन्होने पहेली के प्रकाशित होने के तीन चार मिनीट बाद मेरे चिट्ठे पर की थी।
    ये महान सैनिक जोनाथन नेतन्याहु थे। जो इज़रायल के कमांडो सैनिक थे। इज़रायल के अपहृत विमान के बन्दीओं को छुडाने के लिए इनका दस्ता युगांडा में घुस गया था। सभी बन्दी बचा लिए गए पर इनको जान से हाथ धोना पडा।
    बाद में इनके भाई बेंजामिन नेतन्याहु इज़रायल के प्रधानमंत्री बने।
    क्यों भाईसा अबकी फुल मार्क्स ना? :-)

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  6. नहीं भाई साहब
    सही हल नितिन बागला जी से भी पहले पंकज बेंगानी जी दे चुके थे, परन्तु इतनी जल्दी पहेली के हल होते देख हमने उत्तर को हटा देने का निश्चय किया ताकि ज्यादा लोग मेहनत कर सकें। बाद में पंकज भाई ने टिप्पणी बदल दी मानों उन्हें इसका हल पता नहीं है। यहाँ उनकी टिप्पणी प्रस्तुत कर रहा हुँ जो उन्होने पहेली के प्रकाशित होने के तीन चार मिनीट बाद मेरे चिट्ठे पर की थी।
    ये महान सैनिक जोनाथन नेतन्याहु थे। जो इज़रायल के कमांडो सैनिक थे। इज़रायल के अपहृत विमान के बन्दीओं को छुडाने के लिए इनका दस्ता युगांडा में घुस गया था। सभी बन्दी बचा लिए गए पर इनको जान से हाथ धोना पडा।
    बाद में इनके भाई बेंजामिन नेतन्याहु इज़रायल के प्रधानमंत्री बने।
    क्यों भाईसा अबकी फुल मार्क्स ना? :-)

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  7. चलिये, सागर भाई, तो पंकज जी को पूरे १००/१००.

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  8. चिट्ठा चर्चा में तो अब दोहरी जान आ गई है. कुंडलियों के बारे में विचार अवश्य किया जाए.

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