रविवार, सितंबर 17, 2006

चवन्नी भर सरक गया इतवार

सबेरे से बांचते रहे अखबार
चवन्नी भर सरक गया इतवार
अब कितनी देर करोगे यार
चलो चिट्ठाचर्चा करो तैयार.


आज इतवार का मौज मजे का दिन.पूरे भारत में जहां भी छेनी-हथौड़े चलती है,जहां भी पहिया घूमता है वहां आज भगवान विश्वकर्मा की पूजा हो रही है.उत्पादन संस्थानों में सजावट है,मौज-मजे हैं.पुरानी मशीनें धुल-पुंछ कर सावन सुंदरी सी सजी खड़ी हैं.पुरानी मशींने नई मशीनों को देखकर अपने दिन याद कर रही हैं.

उधर नेट पर जीतेंद्र चौधरी में बैठे नाना पाटेकर के अब तक छ्प्पन वाले अंदाज में नारद का चंदा गिनते हुये अब तक ६०० डालर गिन चुके हैं.कल की पोस्ट में
फुरसतिया की जन्मदिन के बहाने खिंचाई करके वे बडे़ खुश हैं कि अब तक के सारे हिसाब बराबर कर लिये. जन्मदिन पर अनूप शुक्ला के बारे में लिखते हुये जीतू नेलिखा:-
शुकुल भाई चिकाई करने मे बहुत आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी है, कभी भी किसी की चिकाई करने मे विदेशी सहायता पर निर्भर नही रहते। अकेले अपने बलबूते पर चिकाई लेते है। सार्वजनिक रुप से भरपूर चिकाई लेते है और व्यक्तिगत रुप से मेल मुलाकात कर आते है। जैसे भारत और पाकिस्तान के हुक्मरान, सार्वजनिक रुप से बयानबाजी (चिकाई) करते है, मिलने पर हैंहैं करते हुए पाए जाते है। अगला बन्दा इनका ब्लॉग (दो तीन बार पढकर) सोचता है कि इसने चिकाईबाजी तो की है, लेकिन कुछ उखाड़ने की सोचे इस बीच शुकुल गूगलटाक पर चहकते हुए, पब्लिक रिलेशन करते हुए नजर आते है।बन्दा अभी कुछ कहे, उससे पहले ही ये कहते है, अरे वो हम सिर्फ़ मौज ले रहे थे। वो लेख तुम्हारे लिए थोड़े ही था, वो तो पब्लिक के लिए था। बन्दा लुटा पिटा, ठगा सा रहा जाता है। इसे बोलते जबरी मारे और रोने भी ना दे।

जीतेंदर की इस बहादुरी को साथी ब्लागर सराहते हुये क्या कहते हैं आप खुद देखिये.इसके अलावा फुरसतिया से कल की रवि रतलामी और ई-स्वामी से हुई बातचीत पढ़ी हो तो पढ़ लीजिए.
रवि रतलामी के ही सौजन्य से पढ़िये स्वयं प्रकाश की हृदयस्पर्शी कहानी : बलि.


वीर रस के प्रसिद्ध कवि ब्रजेंद्र अवस्थी की एक कविता की पंक्तियां हैं:-


सब तो इतिहास देखते हैं,निर्दिष्ट पथों पर चलते हैं,
पर कम मिलते हैं जो अपने पथ पर इतिहास बदलते हैं.


ऐसे ही लीक छोड़कर अपनी रास्ता खुद तय करने वाले अपनी मेहनत से रास्ता बनाने वाले उद्यमी शरतबाबू की कहानी विस्तार से बताई है आशीष ने:-

उस साहसी युवक का नाम सरतबाबू है, जिनकी प्रेरणाश्रोत है, उनकी अपनी मां। वो मां जिन्होने उसे और उसके भाई बहनो को पढाने के लिये झुग्गी झोपडीयो मे ईडली बेची थी। उस युवक का सपना उस वक्त सच हुआ था जब एन आर नारायणमुर्थी ने परंपरागत विधी से सरतबाबू के इस उद्योग का दिप जलाकर उदघाटन किया था।

यह पोस्ट आज की खास पोस्ट है और आशीष इसके लिये बधाई के पात्र हैं.
संगीता मनराल अपने सपने के बारे में बात करते हुये लिखती हैं:-
जिन चिटीयों को
पैरों तले
दबा दिया था
मैंने
कभी अनजाने में
वो अक्सर
मुझे मेरे
सपनों मे आकर
काटतीं ह


मोहम्मद रफ़ी ने किशोर कुमार के लिये गाना गाया इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं अवधियाजी.

राजेश आज आनंदमग्न हैं:-
आनंद सिर्फ़ इन्द्रियों के सुख में ही नहीं है ।
और आनंद कोई जीवन की शर्त नहीं है ।
पर इसके बिना जीवन का अर्थ नहीं है



अमिताभ त्रिपाठी पोप १६ के द्वारा दिये विवादास्पद बयान की जानकारी दी गयी है.पोप बयान बाजी करते हुये कहते हैं:-

किसी जनसंख्या को कायम रखने के लिये आवश्यक है कि महिलाओं का सन्तान धारण करने का औसत 2.1 हो परन्तु पूरे यूरोपीय संघ में दर एक तिहाई 1.5 प्रति महिला है और वह भी गिर रही है . एक अध्ययन के अनुसार यदि जनसंख्या का यही रूझान कायम रहे और आप्रवास पर रोक लगा दी जाये तो 2075 तक आज की 375 मिलियन की जनसंख्या घटकर 275 मिलियन हो हो जायेगी. यहाँ तक कि अपने कारोबार के लिये यूरोप को प्रतिवर्ष 1.6 करोड़ आप्रवासियों की आवश्यकता है. इसी प्रकार वर्तमान कर्मचारी और सेवानिवृत्त लोगों के औसत को कायम रखने के लिये आश्चर्यजनक 13.5 करोड़ आप्रवासियों की प्रतिवर्ष आवश्यकता है.इसी रिक्त स्थान में इस्लाम और मुसलमान को प्रवेश मिल रहा है. जहाँ ईसाइयत अपनी गति खो रही है वहीं इस्लाम सशक्त, दृढ़ और महत्वाकांक्षी है. जहाँ यूरोपवासी बड़ी आयु मे भी कम बच्चे पैदा करते हैं वहीं मुसलमान युवावस्था में ही बड़ी मात्रा में सन्तानों को जन्म देते हैं.यूरोपियन संघ का 5% या लगभग 2 करोड़ लोग मुसलमान हैं. यदि यही रूझान जारी रहा तो 2020 तक यह संख्या 10% पहुँच जायेगी.जैसा कि दिखाई पड़ रहा है कि गैर मुसलमान नयी इस्लामी व्यवस्था की ओर प्रवृत्त हुये तो यह महाद्वीप मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र बन जायेगा. इन तथ्यों की पृष्ठभूमि में यह स्पष्ट हो जाता है कि इस्लाम के सम्बन्ध में पोप का बयान कोई भावात्मक या आवेशपूर्ण उक्ति नहीं है वरन् यूरोप और ईसाई समाज की असुरक्षा की भावना की अभिव्यक्ति है. पोप बेनेडिक्ट के दृष्टिकोण से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में इस्लाम और ईसाइयत के मध्य आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चलेगा और उसका परिणाम आने वाले वर्षों
में विश्व स्तर पर नये राजनीतिक और सांस्कृतिक ध्रुवीकरण के तौर पर देखने को मिल सकता है.


जैसा के होता है आज के अखबारों में खबर है कि पोप ने अपने बयान का गलत मतलब लगाये जाने की बात कहते हुये खेद व्यक्त कर दिया.बात खत्म.
प्रतिभा वर्मा सोचती हैं:-

सोचती हुँ कि गर वो पराया है तो अपना क्या है,
शाम से चाँद तो साथ है मेरे ,
फिर आज आसमान में निकला क्या है ?


आगे वे अपनी योजना बताती हैं:-

तेरा प्यार हम इस तरह निभायेंगे,
तुम रोज खफा होना,हम रोज मनायेगें
पर मान जाना मनाने से तुम,
वरना ये भीगी पलके ले कर कहाँ जायेंगे हम ?



सूचना:- कल का चिट्ठाचर्चा हमारे साथीरवि रतलामी लिखेंगे -चिट्ठा आपको पसंद आयेगा क्योंकि वह संभवत: व्यंजलमय होगा.

आज की टिप्पणी


1.ऐसे लोगों का जीवन-वृतांत स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होना चाहिए। आज की चमकीली दुनिया में गरीबी और संघर्ष से घबराए बच्चे उत्साह और मनोबल बढ़ा सकते हैं। इतना प्रेरणादायी परिचय पढ़वाने हेतु साधुवाद।
प्रेमलता
2.ऐसा लगा फुरसतियाजी ने फुरसतियाजी के लिए लिखा हैं. महिला चिट्ठाकार के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की तथा हिट-कांउटर वाली बाते पढ़ कर उस रस की प्राप्ति हुई जिसकी उम्मिद में यहाँ आया था.
फुरसतियाजी को जन्मदिवस की बहुत-बहुत बधाई.

संजय बेंगाणी

आज की फोटो:-


आज की फोटो रवि रतलामी की रचनाकार की पोस्ट से:-
कला
> दो सहेलियां

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1 टिप्पणी:

  1. 'सबेरे से बांचते रहे अखबार
    चवन्नी भर सरक गया इतवार"
    वाह क्या लिखा है भाई साहब।

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