सोमवार, नवंबर 13, 2006

मध्यान्हचर्चा दिनाकं 13-11-2006

छुट्टी के बाद सैर-सपाटे से लौटे धृतराष्ट्र आज काफी चुस्त लग रहे थे. अपनी कोफि स्वयं बनाई तथा संजय के सामने पड़ी कुर्सी पर घंस गए.
धृतराष्ट्र : कैसा है आज दुपहर तक का हाल. कौन कौन हैं मैदान में?
संजय : महाराज महारथी खुब कुंजिपटल टकटका रहे है, इधर गांधीगीरी का असर इंसानों से होते हुए कुत्ते-बिल्ली तक पहुंच गया है. देखने के लिए उडनतश्तरी पर सवार होना पड़ेगा.
साथ ही देख रहा हूँ, रात को बारिस हुई तो बेजी जी भीगने से बचने की कोशीष करते हुए मिट्टी की सौन्धी खुश्बू का आनन्द ले रही है.
धृतराष्ट्र : उन्हे आनन्दीत होता छोड़ हम आगे बढ़ते है. आगे और कौन हैं, संजय?
संजय : महाराज, सुखसगर से भारतवर्ष का वर्णन कर रहे हैं अवधियाजी. तथा गुयाना से छायाचित्रकार देखा रहे हैं अपने मेजबान जूड के पुत्र को.
धृतराष्ट्र : तस्वीर तो अच्छी ली गई है.
संजय : तो महाराज जितुजी भी कोई कम अच्छी जुगड़ नहीं लाए है. साथ ही पंकज बेंगाणी बता रहे है गुगल के हिन्दी टूलबार के बारे में.
धृतराष्ट्र : दोनो जुगाड़ो के लिए कह सकते हैं, उपयोग करो तो जानो क्या मस्त जुगाड़ है.
संजय : और महारज यहाँ लिंक है, मस्त गुदगुदाते चुटकुलो के ई-बुक की. रचनाकार हैं व्यंजलकिंग रविजी.
तो महाराज आप टहाके लगाईये. मैं कल तक के लिए लोग-आउट होता हूँ.

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