मंगलवार, जनवरी 23, 2007

मध्यान्हचर्चा दिनांक : 22-01-2007

धृतराष्ट्र कोफी का आनन्द ले रहे थे, संजय लैपटॉप की स्क्रीन पर आँखें टिकाए हुए थे.

कक्ष की शांति को भंग करते हुए धृतराष्ट्र ने पुछा ,”क्या हुआ संजय?”
संजय : कुछ नहीं महाराज, हिन्दी में समाचार पढ़ने लग गया था.

धृतराष्ट्र : ठीक है, अब देखो आज क्या गतिविधियाँ हो रही है.
संजय : महाराज, चिट्ठाकार आज खास तौर पर नेताजी को याद कर रहे है. सृजन-शिल्पी को नेताजी को याद करते समय महाभारत के महारथी कर्ण का स्मरण हो आता है, तो जोगलिखी के अनुसार भारत का नाम ऐसे ही सपूतो से सूरज बन कर जग पर चमका है.

महाराज आज जनता के कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ को भी याद किया जा रहा है. उनके जीवन पर प्रकाश डाल रहे है, फुरसतीयाजी. वहीं अपने शब्दो में महाप्राण को याद कर रहे हैं, उपस्थित.

धृतराष्ट्र : हमारा भी नमन.

संजय : महाराज, हमारा देश संयुक्त परिवारों के लिए भले ही जाना जाता हो, पर कुछ अनोखे संयुक्त परिवारों के बारे में बता रहे है सुनीलजी.
और तो और वंशवाद भी अब भारत की बपौती नहीं रहा.

धृतराष्ट्र चर्चा सुनते हुए कोफी के घूँट भर रहे थे.

संजय : पृथ्वी पर वसंत ऋतु का मन से स्वागत हो रहा हैं, तो अंतरिक्ष में सूर्य के बौने बेटों का. सुखसागर में स्वागत हो रहा है, मुदगल ऋषि का.

धृतराष्ट्र : अतिथि देवो भवः, अब फोटोग्राफरों को भी देख लो.
संजय : महाराज, छायाचित्रकार रोमन स्नानागार की भव्यता दिखा रहें है, तो केरल की सुन्दरता दिखा रहे है, जितेन्द्रजी.

धृतराष्ट्र : खुब. अब कवियों का हालचाल भी देख लो.
संजय : महाराज, रंजूजी के अनुसार तेरी आवाज़ एक रोशनी की किरण है मेरे लिए मेरी ज़िंदगी को यह रात रानी सा मेहका जाती है.
बेजीजी का कहना है टिका कर निगाहें मुझे तुमने खींचा…अपने स्नेह से मेरे मन को सींचा....पहलू में तेरे जगी....फिर सोई...सुबह जब जागी, हल्की हो गई थी.....
रचनाजी आव्हन कर रही है, देश है पुकारता, सुन लो उसकी आह तुम देश की जरूरतों पर डालो एक निगाह तुम.
इसके अलावा रचनाकार की कथा भी है.


अब आप जुगाड़ी कड़ीयों का आनन्द लें, साथ ही जाने ऑन-लाइन मार्केटिंग के गूर, या फिर गुरू फिल्म की समीक्षा पढ़े, मैं होता हूँ लोग-आउट.

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5 टिप्‍पणियां:

  1. Sir yadi bura na mane to , mera naam upasthit nahi ravindra hai... ise anyatha hi len plzz.

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  2. सही है, बहुत सही...लगे रहो और रविन्द्र भाई का नाम याद रखें आगे से.... :)

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  3. भाई रविन्द्र हमारे पास ऐसा कोई उपकरण नहीं जिससे आपका नाम जान सकते. आपके चिट्ठे पर जो दिखा वही हमने लिखा. यहाँ भी टिप्पणी उपस्थित के नाम से की गई है.

    आप इसे अन्यथा ले सकते है. चिट्ठा छद्मनाम से न लिख कर अपना नाम दर्शाएं.
    अगर आपके चिट्ठे पर आपका नाम है, और मेरे ध्यान में नहीं आया है, तो क्षमा चाहता हूँ.

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  4. Chaliye kshama kiya....Baki mera chiththa agar chadma naam se hai to sameer uncle kaa bhi hai...:)

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  5. और हां उपकरण की बात की अपने , तो एक About Me भाग है(होता है, तकरीबन हर ब्लोग मे), उसमे से देख लें । बुरा ना मानें तो एक और बात कि मेरा नाम रवीन्द्र है, रविन्द्र नहीं :) । बाकी आप मुझ नौसिखिये को भी शमिल करते हैं अपनी चर्चा मे, इसके लिये धन्यवाद, और धन्यवाद मेरी बात अन्यथा ना लेने के लिये भी :) ।

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