रविवार, जनवरी 07, 2007

जाड़े की धूप

तो साथियों, हम प्रस्तुत है आपके लिए शनिवार दिनांक ६ जनवरी, २००७ के चिट्ठों की विवेचना करने के लिए। आज हम उन गिने चुने चिट्ठों की बात करेंगे जिन्होने अपने सप्ताहंत की परवाह ना करते हुए, चिट्ठे लिखे ( बाकी तो सप्ताहंत का आनन्द उठाने निकल लिए), बात करेंगे उन शूरवीरों की जिनकी बदौलत हमे यह चिट्ठा चर्चा करने को मिली।

चिट्ठा चर्चा शुरु करने से पहले, मै बधाई देना चाहूंगा भाई संजय बैंगानी को, क्योकि आज उनका ?वा जन्मदिन है। जिस तरह से पौराणिक काल मे संजय ने महाभारत का सजीव प्रसारण किया, ठीक उसी तरह आधुनिक संजय बैंगानी, चिट्ठों की चर्चा करते है। संजय को उनके जन्मदिन पर बहुत बहुत बधाई हो, आप चिट्ठाजगत के आकाश पर सदैव जगमगाते रहे और अपने चिट्ठों और चर्चाओ से चिट्ठा जगत की सेवा करते रहे।

नारायण भाई राजसमंद जिले के टांटोल बाँध की बात कर रहे है, प्रभाकरगोपालपुरिया की भोजपुरी कहावतों की अगली कड़ी हाजिर है, साथ ही वे परिचय करवा रहे है देवरिया के संगीतकारों का ।अविनाश ने अपने ब्लॉग के टैम्पलेट मे सुखद बदलाव किया है, लेकिन अक्ल को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति मे है। रचनाकार मे पढिए, शौकत थानवी का एक जोरदार व्यंग "नेता" ।शैशव मे पढिए भणसाळीकाका का अगला भाग। गिरिनाथ झा को गाँव की याद आ रही है, लिखते है:

याद आ रही है गांव
की
पता नही क्यों इस शहर का हर शख्स परेशां लगता है
सच्चाई क्या है..इसे खोजने मे लगा हुं
इसी उधेडबुन में कि यह शहर इतना परेशान क्यो है..

अब एक ब्लॉगर दु:खी हो तो दूसरा कैसे खुश हो सकता है, इधर रंजू भी बहुत दु:खी है, उदास रातों मे वे लिखती है:

खोई खोई उदास सी है मेरी ज़िंदगी की रात
दर्द की चादर ओद के याद करती हूँ तेरी हर बात
तुम बिन ना जीती हूँ ना मरती हूँ मैं
होंठो पर रहती है हर पल तुमसे मिलने की फ़रियाद
बहुत उदास सी है मेरी ज़िंदगी की रात


लेकिन अपने उड़नतश्तरी वाले समीर लाल बहुत खुश है, हो भी क्यों ना, आप सभी ने उन्हे सबसे तेजी से उभरते हुए चिट्ठाकार का सम्मान जो दिलवाया है, समीर भाई तो गदगद है और खुशी से फूले नही समा रहे है (शुकुल चैट पर बोले, समीर को बोलो कि इससे ज्यादा नही फूलना, ब्लॉस्ट हो सकता है।) समीर (उधार के शेरो शायरी में) लिख रहे है:

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों
यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया
सौ बार शुक्रिया अरे सौ बार शुक्रिया.....

मन भाव विभोर है आप सबका स्नेह पाकर. कृप्या मुझे यूँ ही आशीष देते रहें.
आप सबका का आभार और हार्दिक अभिनन्दन.


नारायण आपको राजसमंद का कोना कोना घुमाकर रहेंगे, अब देखिए रणमुक्तेश्वर महादेव व प्रताप गुफा। सच ही है, यदि हम सभी चिट्ठाकार अपने अपने इलाके की एक वैबसाइट बनाए तो ना जाने कितनी जानकारी हम वैब पर जुटा सकते है। नारायण की इस पहल पर साधुवाद। महाशक्ति मे पढिए भारत मे राफाएल नाडल

सीमा कुमार बता रही है जाड़े की धूप के बारे में:
जाड़े की धूप
जैसे किसी प्यासे को
रेगिस्तान में
मीठा पानी मिल गया हो ।

भागती - दौड़ती जिन्दगी
और वातानुकूलित कमरों के बाहर
जाड़े की धूप में बैठ
ऐसा लगा जैसे
बरसों से चैन की नींद
सोए नहीं;
पुकारने लगी
सुहानी धूप
अपनी गोद में
सुलाने को ।


जगदीश भाई पुनर्जन्म हो यदि मेरा पर व्यंग कविता लिखे है पढिए जरा। उधर अनुनाद भाई बता रहे है कि अब शिशुओं का विद्यालय मे प्रवेश साक्षात्कार नही होगा। जगदीश भाई, यदि पुनर्जन्म हो तो साक्षात्कार से बच ही गए समझो। राग दरबारी मे पढिए अगला अंक

नए चिट्ठाकारों मे रजत पदक विजेता रहे उन्मुक्त बता रहे कि कैसे एक शब्द आपकी जिन्दगी बदल सकता है। मनीष गीतों की महफिल सजाए हुए है, २२वी पायदान पर आज है तेरे प्यार में ऐसे जिए हम..। ई पंडित जी है कि विन्डोज लाइव को छोड़ ही नही रहे, अब उसके प्लग-इन की टेस्टिंग मे लगे हुए है।


आज की टिप्पणी : आईना से

अमिताभ बच्चन को इस प्रचार में देख कर और उत्तर प्रदेश की हालत देख कर शर्म आती है। प्रशासन के लिए पैसा है नहीं और अमिताभ बच्चन को इस प्रचार के लिए देने के लिए करोड़ों रुपए हैं। भ्रष्टाचार की असीम पराकाष्ठा है उत्तर प्रदेश। - अनुराग मिश्रा


पिछले साल इसी सप्ताह :
स्वदेशी अंगना, परदेशी बिजली

अतुल सिबनिस के ठेले पर हिमालय से एक कविता:
कहीं दूर
हजारों मील दूर घर से
किसी पार्क मे किसी बेंच पर
बैठा देख रहा था चाँद कि ओर
मेरे इर्द-गिर्द सब बदला है
पर मैं
वहीं हूँ।

आज का एकलौता चित्र : जाड़े की धूप से



अच्छा भाई, राम राम, चिट्ठा चर्चा पढते रहिए, और हाँ शनिवार को भी लिखिए, ताकि हमे भी चर्चा करने मे मजा आए।

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3 टिप्‍पणियां:

  1. "शुकुल चैट पर बोले, समीर को बोलो कि इससे ज्यादा नही फूलना, ब्लॉस्ट हो सकता है।"
    कोई चक्कर नी जी, हाम तो हिन्दुस्तान म्ह बैठे सैं। :)

    संजै भाई नै जन्म-दिन की ब्‍होत-ब्‍होत बधाईयाँ। राम करा वो जीदें रहां अर न्यू ई मुस्करांदे रहां।

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  2. जाड़े की धूप की फोटो बढ़िया है! संजय बेंगाणी को जन्मदिन की बधाई और आगे के जीवन के लिये मंगलकामना! अच्छा लगा आज रात को नौ बजे तुम्हारा लिखा पढ़ रहा हूं! अब तुम भी आ जाओ मैदान में बबुआ और नये सिरे से लिखना शुरू करो!

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  3. बहुत बेहतरीन लिखा गया है. और वरिष्ठों सलाह मानते हुये अब फुलना बंद तो विस्फोट का खतरा टला ही समझो.

    और भईये, उसमें दो उधार के हैं तो दो खुद के भी तो शेर हैं, मामला बराबर. :) :)

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