मंगलवार, जनवरी 23, 2007

यह कवि है अपनी जनता का

पहले एक सूचना लिखता हूँ शोकाकुल शब्दों से मैं
कविता का प्रासाद भव्य यों लगता है क्षतिग्रस्त हो गया
आँख मूंद कर विदा ले गये,कल संध्या कविराज अवस्थी
काव्य गगन पर दीप्तिमान था जो,वह सूरज अस्त हो गया

राष्ट्र कवि थे श्री ब्रजेन्द्रजी ओज जगाती उनकी वाणी
आशुकाव्य की परिभाषा क्या, हम सबने उनसे ही जानी
पंत और पांडेय, निराला, बेढब जी हों या हों त्यागी
सबने उनकी सरस लेखनी बार बार जानी पहचानी

कविता की ही बात आज लेकर आये हैं फ़ुरसतियाजी
वर दे वीणावादिनि वर दे के लेखक श्री सूर्य निराला
रचनाकार सुनाने आये एक कहानी चन्तारा की
पढ़ें, नीरजा माधवजी ने क्या कमाल देखो कर डाला

उथल पुथल जो हुई अभी बंगलूर नगर में, खबर आपको
जीतूभाई की पदरज का ये कमाल लगता शायद था
मिडलईस्ट से भटक भटक कर, खींच रहे थे फोटू आकर
महल किले सा खड़ा हुआ था, भीड़ भड़क्का पर गायब था

अगली किस्त लिये आये हैं , साथ बताशों में ले पानी
श्री अनुराग अनुभवों वाली इस्कूली इगलिसी कहानी
क्रमश: क्रमश: क्रमश: करके संभव है फिर क्रमश: कर दें
इनकी कलम अनूठी जिसकी कोई थाह नहीं हम जानी

आज की फोटो की बात

कम्प्यूटर से मैं अज्ञानी, पढ़ कर लिंक जुगाड़ी पूछूँ
रवि भैय्या इतना बतलाओ, वाट इज द वे आई शुड डू
और सहज वे बतला देते, कट और पेस्ट करो तुम पहले
और बाद में इतना करना " हिट ANY की टू कन्टीन्यू "




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2 टिप्‍पणियां:

  1. बृजेन्द्र अवस्थी के निधन का समाचार दुखद है! ओज कवि को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि!

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  2. अवस्थी जी को विनम्र श्रद्धांजलि.

    -आपकी आज की फोटो वाला मुक्तक जबरदस्त है, एक नया अंदाज.

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