सोमवार, जनवरी 01, 2007

नए साल के वही, पुराने घिसे-पिटे संकल्प



चित्र ‘कुछ मेरी कलम से' से

लगता है चिट्ठाकारों ने नए साल में अपने पुराने, घिसे-पिटे संकल्पों को दोहराया है - वैसे भी, संकल्प, लेने के लिए होते हैं, निभाने के लिए नहीं.

आइए, देखते हैं कि किनके कैसे संकल्प थे जो निभाए नहीं गए तो उन्हें दोहराया जा रहा है -

और चिट्ठाकारों के उलट, अंतर्मन ने सीधे सपाट शब्दों में अपने रिजॉल्यूशन्स की बातें कीं :

१. ब्लागिंग बन्द!

२. रोज़ ‘जिम' (व्यायाम-कक्ष) / ‘योगा' या सुबह की सैर के लिये जाना

३. ‘डाइट' पर ‘कंट्रोल' करना - मिठाइयाँ और ‘जंक फ़ूड' इत्यादि कम!

४. कार्य-स्थल (ऑफ़िस) में अपने काम पर ज़्यादा ‘फ़ोकस' और 'वाटर-कूलर डिस्कशन्स' पर कम :-)!

५. नए साल में सारे ‘बिलों' का समय पर भुगतान

६. नए साल में सारी ई-मेल्स का समय पर ज़वाब

७. नए साल में एक नए शगल/'हॉबी'/विधा/खेल में मास्टरी

८. अगले साल ‘नो प्रोक्रैस्टिनेशन' याने आज का काम कल पर टालना बंद

९. (नोट: इस 'रिज़ाल्यूशन' के बारे में कल सोचता हूँ)

१०. अगले साल के लिये ‘रिज़ाल्यूशंस' बनाना (देखें - उपरोक्त बिन्दु १ से ९)

हम सब को मालूम है, यह भी सिर्फ संकल्प है, जिसे अगले साल के प्रारंभ में फिर से लिया जाएगा.

डिवाइन इंडिया के संकल्प का लहजा भी स्पष्ट है :

संकल्प बृहत उत्थान...का Happy New Year...!

मना लें ज़श्न उन बीती हई... हर काली रात पर

हर हालात, प्रत्येक कसमसाते-से... उद्गार पर

सफलता की कुछ सीढ़ियो पर चढ़कर लगालो

एक छलांग......

आने वाले नव-वर्ष में तुम-भी कर लो कुछ निर्माण,

बंद कर लें कर्म की मुट्ठी में हर झिलमिलाते सपनों,

सुनहरे अरमानों को कैद...और बुन डालें उमंगों में

तैरते बृहत चित्र को, भर दें थोड़ा रंग और थोड़ा प्यार इसमें

रच डालें बिल्कुल नवीन, इस पूरे जीवन-वृत में...

संकल्पमय कविता बहुत लंबी है, और जाहिर है अगले साल भी दोहराई जाएगी लिहाजा, इससे पहले कि मुझे पेचिश हो जाए मैं अगले संकल्प की ओर रुख करता हूँ.

जोगलिखी का संकल्प अनोखा है. वे कोई संकल्प लेना ही नहीं चाहते, या फिर वे संकल्प लेना चाहते हैं कि वे कोई नया साल-वाल नहीं मनाएंगे. वे तो नए साल पर ही प्रश्नचिह्न लगाते हैं - किसका नया साल?

मेरे पास कई तरह के संगठनो के ई-पत्र आते रहते है, अभी एक पत्र मिला की आप न्यू-ईयर का जश्न न मानाएं, यह हमारा नया साल नहीं है. हमारा नया साल गुड़ी-पडवा के दिन से शुरू होता है. मैं भी सोच में पड़ गया, रात को जाग कर भले ही हो-हल्ला न मचाऊँ, पर कहीं हैप्पी-न्यूयर करने वालो की श्रेणी में आ कर खाँमखाँ देश-द्रोही तो नहीं बन रहा ?!

आखिर साल ईशा का बदल रहा है, हम क्यों जश्न मनाएं?....

मुझे इस झगड़े से दूर रहना होगा, नहीं तो मेरा नया साल खराब होने का अंदेशा है. चलिए अगले चिट्ठे का संकल्प देखा जाए.

बिहारी बाबू कहिन के भी कई संकल्प हैं. एक बढ़िया, प्रिंस वाले संकल्प की चर्चा करते हैं:

कुएं में पहुंचा प्रिंसः आसमान पर पहुंची किस्मत

साठ फीट गहरे कुएं में गिरकर बचता कौन है और बचता भी है, तो कुएं से लाखों कमाता कौन है! लेकिन कुरुक्षेत्र के एक साधन विहीन गांव में पैदा हुए पांच साल के प्रिंस की चमकती तकदीर जैसे उस ६० फीट गहरे ट्यूबवेल में दफन थी, जिसमें वह इस साल जुलाई में गिरा। दो दिन की जद्दोजहद के बाद प्रिंस को कुएं से निकाला गया, तो जैसे उस पर मेहरबानियां बरस पड़ीं। दो दिन पहले तक एक जून रोटी को तरसने वाले प्रिंस के परिवार को सरकार और लोगों से लाखों मिले, तो किसी ने प्रिंस की जिंदगी भर की पढ़ाई के खर्च का जिम्मा लिया। प्रिंस के गड्ढे में गिरने से गांव की बदहाली दुनिया भर में दिखी और सरकार के लिए कलंक बनी, तो राज्य सरकार ने छह महीने के अंदर गांव की काया पलट कर दी। किसने सोचा होगा कि कल तक गांव की गलियों में धूल फांकने वाला बच्चा दो दिन में गांव का भाग्यविधाता बन जाएगा! ऐसा प्रिंस बनने के लिए तो हर कोई गड्ढे में गिरने को तैयार हो जाएगा।

सही कहत हो बिहारी बाबू, बुड़बक से बुड़बक आदमी भी गड्ढे में गिरने को तैयार हो जाएगा - जब लाखों मिले और मीडिया में चर्चा हो. कम से कम मैं तो संकल्प लेता हूँ कि ऐसे हर गड्ढे में गिर ही जाऊँगा.

चलिए गड्ढा खुदकर कहीं तैयार हो तब तक दूसरे चिट्ठे के संकल्प में गिर कर देखें.

हिन्दी बात - अच्छी चीज़ों का हिन्दी ब्लॉग - में संकल्प है चिट्ठाकारी सीखने का. यहाँ पर भी ढेरों संकल्प हैं, और धारा के विपरीत कुछ संकल्प निभाए गए प्रतीत होते हैं:

2006 में जून-जुलाई के महीने से अपनी चिठ्ठाकारी की शुरूआत रही और सबसे पहले तो वो काम किया जिसका कई वर्षों से सपना था यानी की सरकारी नौकरी चाहने वालों के लिये एक ऐसी वेबसाइट का निर्माण जहां पर सभी सरकारी नौकरी प्रदर्शित हों, तो सबसे पहले सरकारी नौकरी ब्लाग का निर्माण किया और यह प्रयोग काफी सफल भी रहा।...

परंतु न जाने क्यों आपके संकल्प की भाषा में मुझे मनीषा नहीं, मनीष-मनीष दिखाई देता है...

सलाह फ़ायदे की का संकल्प है :

मैं एक वित्तीय सलाहकार हूँ और हिन्दी लिखने- पढ़ने का बहुत शौक है। म्यूचूअल फ़ंड के बारे में हिन्दी मे जानकारी बहुत कम उपलब्ध है सो मैं एक ऐसा मंच बनाने का प्रयास कर रहा हूँ, जहाँ से अंग्रेजी कम जानने वालों को आसानी से हिन्दी में म्यूचूअल फ़ंड और पूंजी निवेश के बारे में जानकारी मिल सके।

वाह! क्या संकल्प है. चिट्ठा-चर्चा छोड़ छाड़कर मैं सीधे फ़ायदे की सलाह लेने वहाँ पहुँच गया. लौटकर आने में देर हो गई अतः यह पोस्ट भी देरी से आ रहा है, जिसका मुझे कोई अफसोस नहीं है.

ई-लेखा नए साल पर उर्दू शायरी पेश करने का संकल्प लेते दीखते हैं:

मित्रों,

नये वर्ष के अवसर पर कुछ उर्दू शायरी पेश है । ये खुशवंत सिंह की आत्मकथा से ली गई हैं ।

मेरा प्रयास तो इन्हें एक जगह पर इकट्ठा करने का रहा है ।

पैदा हुए वकील तो इबलीस ने कहा

अल्लाह ने मुझे साहिबे औलाद कर दिया ।

( The Day a lawyer was born, Satan Exulted,

Allah has blessed me with progeny of my own )

आपका प्रयास सफल हो, आपका संकल्प मात्र संकल्प भर न रहे. और इस संकल्प में वर्ष भर ऊर्जा बनी रहे. अरे! मैं ये क्या सूफ़ियाना बातें करने लगा? शायद ये शायरी का असर है. वरना संकल्प तो संकल्प होता है - उसे निभाते तो बुड़बक ही हैं. अब आप पूछेंगे कि ये बुड़बक क्या होता है? बिहारी बाबू से पूछें.

छुट-पुट पर मुजरिम उन्मुक्त कानूनी राय देते हैं और, उनका संकल्प है कि ऐसी कानूनी राय वे आगे भी देते रहेंगे. गलत सही कदमों के बारे में बताने का भी उनका संकल्प है:

यदि आपको यह लगता है कि यूरोपियन यूनियन का यह गलत कदम है तो आप अपना सहयोग यहां दे सकते हैं। मुझे यह बताने की जरूरत नहीं कि मैं अपना सहयोग (हस्ताक्षर नम्बर १२२६) दे चुका हूं।

मेरी कविताएँ का संकल्प कविता से ही प्रकट होता है:

नाचो-गाओ, धूम मचाओ

कहीं ये पल जाये ना बीत।

आपस में खुशियाँ बाँटो

राहों के सारे काँटे छाँटो

भाई, इस संकल्प को तो मैं चाहूंगा कि हर कोई ले व सख्ती से पूरा करे. पर काश! ऐसा हो पाता!

कुछ इसी तेवर का संकल्प मुझे भी कुछ कहना है पर लिया जा रहा है-

छोड निराशा आशा बाँधो,

अब अपने लक्ष्यों को साधो!

क्यूँ छोटा करते अपना मन,

है बहुत सुन्दर ये जीवन!

बस खुद से ही रखो आशा,

जीवन की बदलो परिभाषा!

मैं भी अपने लक्ष्यों को साधने का संकल्प लेता हूँ और अपना अगला लक्ष्य अगले चिट्ठे के संकल्प पर साधता हूँ.

ओह! रत्ना की रसोई पर तो अगले साल को जबरदस्त बनाने का व्यंजन पक रहा है. ऐसे व्यंजन बनाने का संकल्प तो भई हम भी लेते हैं. अब निभाने के बारे में न पूछिएगा.

इससे पहले कि-

2006 का अन्तिम सूरज अस्त हो

इस साल का कलैन्डर नष्ट हो

आप खुशी के माहौल में मस्त हो

फोन का नेटवर्क व्यस्त हो

दुआ है आपका आने वाला साल

ज़बरदस्त हो

देखते हैं कि नया साल जबरदस्त होता है या नहीं, परंतु एक शाम मेरे नाम आपके लिए जबरदस्त वार्षिक संगीत माला लाने के लिए संकल्प ले रहे हैं-

'एक शाम मेरे नाम' पर आने वाले दोस्तों । साल का अंत आ पहुँचा है और हमेशा की तरह मेरे लिये ये मौका होता है अपनी वार्षिक संगीतमाला :) शुरु करने का । दरअसल बचपन से रेडियो सीलोन से आने वाली बिनाका गीत माला के हम लोग जबरदस्त फैन थे । जैसे ही बुधवार का दिन आता था और घड़ी की सुइयाँ सात के पास आती थीं हम तीनों भाई-बहन शार्ट वेव के २५ मीटर बैन्ड पर रेडियो सीलोन के स्टेशन लगाने की जुगत में भिड़ जाते थे । फिर अगले एक घंटे तक अमीन सयानी की दिलकश आवाज के साथ गीतों को पायदान पर चढ़ता उतरता देखना अपने आप में हमारे लिये एक जबरदस्त मनोरंजन था ।

जब से चिट्ठाकारी शुरु की गीत -संगीत मेरे चिट्ठे का अहम हिस्सा रहे हैं इसलिए संगीतमाला का ये सिलसिला मेरे रोमन ब्लॉग पर जारी रहा । गीतों को सुनना, उन्हें दिल से महसूस करना, गुनगुनाना और फिर उन्हें अपने दोस्तों में बाँटना मेरे दिल को हमेशा से बेहद सुकून देता है ।

इसीलिए २००४ एवं २००५ के बाद पहली बार ये सिलसिला पहली बार हिन्दी चिट्ठाजगत में शुरु कर रहा हूँ। २५ की उलटी गिनती से शुरु होगी ये श्रृंखला ... और अंत होगा सरताज गीत के साथ :) ...

आप क्या रोज वही पुरानी बातें करते रहते हैं. नई बातें क्यों नहीं करते? रोज नई बातें करने का संकल्प कुछ मेरी कलम से:

आज फिर से इस कोई नयी बात करो

इस महकती चाँदनी को फिर से गुलज़ार करो

चिट्ठाकार तो चिट्ठाकार, टिप्पणीकार भी संकल्प ले रहे हैं और चिट्ठाकारों को नए संकल्प लेने को मजबूर कर रहे हैं -

बढ़ियां है. नये साल के लिये शुभकामनायें. आगे भी आपके अंदाज का इंतजार रहेगा. :)

चलो अपन भी अगली दफ़ा फिर से कोई नई बात, नए अंदाज में कहने का संकल्प ले ही लेते हैं.

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3 टिप्‍पणियां:

  1. वर्ष की प्रथम चिठ्ठाचर्चा करने के लिये आपका अभिनन्दन और साधुवाद. अब वर्ष भर यूँ ही मजेदार चर्चा करते रहें. शुभकामनायें.

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  2. मैं मनीषा ही हूँ, आपने कहां से मनीष-मनीष समझ लिया । यह सचमुच मेरा एक सपना था कि सरकारी नौकरी ढूंढ़ने वालों के लिये एक साइट हो ।
    मनीषा

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  3. संजय बेंगाणीजनवरी 01, 2007 6:48 pm

    नए साल की पहली चर्चा के लिए अभिनन्दन स्वीकारे.

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