रविवार, दिसंबर 31, 2006

इस वर्ष की अंतिम चिट्ठा चर्चा

लो जी जनाब! २००६ कब आया और कब चला गया, पता ही नही चला। यूं तो प्रत्येक वर्ष अपने साथ कुछ ना कुछ नया जरुर लाता है। यही हुआ भी हमारे चिट्ठा जगत के साथ। २००६ मे हमारे परिवार मे ४० से ज्यादा चिट्ठाकार शामिल हुए है। इन नये चिट्ठाकारों की लेखन शैली भी कमाल की है। ऊर्जा और जोशोखरोश तो हम बुजुर्गों से ज्यादा तो है ही। तो भई इस वर्ष तरकश वाले संजय जी के आह्वान पर हिन्दी चिट्ठाजगत तीन उदीयमान चिट्ठाकारों को सम्मानित करने जा रहा है। पूरी तैयारियां हो गयी है, बिगुल बज चुका है, आप भी शामिल हो जाइए, चिट्ठाकारों को चुनने में। पूरी जानकारी इधर है

आइए पहले हम अपना दिहाड़ी वाला काम निबटा लें, दिन शनिवार, दिनांक ३० दिसम्बर, २००६, साल खतम होने की तरफ़ बढ रहा था। लोग बाग, छुट्टियां मनाने, इधर उधर हो लिए,लेकिन अपने रवि भाई अपना तकनीकी ज्ञान बदस्तूर बाँटते नजर आए। रवि भाई जमजार के बारे मे बता रहे है, रवि भाई कहते है:

जमजार - वैसे तो एक ऐसा ऑनलाइन दस्तावेज़ परिवर्तक है जिसके जरिए आप कई किस्म के दस्तावेज़ों को कई अन्य किस्म के दस्तावेज़ों में मुफ़्त में परिवर्तन कर सकते हैं, परंतु यह हिन्दी भाषा के वर्ड फ़ाइलों को बखूबी पीडीएफ़ फ़ॉर्मेट में बदलता है.


अभी कुछ दिन पहले पता चला था कि चिट्ठाकारों को लैपटाप बाँटे जा रहे है तो हम भी खुश हो लिए, चेहरा साफ़ सूफ़ करके,इमेल का इन-बाक्स खोलकर, फोन के पास बैठ गए कि पता नही कहाँ से कॉल आ जाए, कि आओ भैया अपना लैपटाप ले जाओ। लेकिन मार पर इस उन्मुक्त को अब इ खबर दे रहा है कि लैपटाप वापस लिए जा रहे है। इसे बोलते है, सपनो पर कुठाराघात, इसी सदमे से हम आज की चिट्ठा चर्चा देर से किए।

गिरिन्द्र याद कर रहे है मरहूम मिर्जा ग़ालिब को। गिरिन्द्र लिखते है:
गालिब का जन्मोत्सव जोश के साथ दिल्ली मे मनाया गया.पुरानी दिल्ली से लेकर निजामुद्दीन तक गालिब के नज्म महकते रहे.देश और विदोशो से आए शायर दिल्ली की वही रोनक लौटाने की कोशिश करते नज़र आए जैसा गालिब चचा किया करते थे.पाकिस्तान के मशहुर शायर फरहाज़ अहमद ने समां को बनाये रखा.वही विख्यात डांसर उमा शर्मा ने गालिब की गज़लो और शायरी के साथ बेले डांस पेश किया तो गालिब की ये चंद लाईने जुबां पे आ गयी-
इश्क ने गालिब निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के....


मिर्जा ग़ालिब का जन्म आगरा मे हुआ था, आगरा मे उनके मकान के बारे मे प्रतीक लिखते है:

ग़ालिब से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम १९६० तक बाक़ायदा वहीं आयोजित किए जाते रहे हैं। ट्रस्ट द्वारा बड़े पैमाने पर की गई तोड़-फोड़ और निर्माण के चलते अब भवन काफ़ी बदल चुका है। विख्यात शायर फिराक़ गोरखपुरी और अभिनेता फ़ारुक़ शेख़, जिन्होंने ग़ालिब पर एक फ़िल्म का निर्माण किया था, भी इस इमारत को देखने आए थे। ऐतिहासिक तथ्य पुख़्ता तौर पर इशारा करते हैं कि वही भवन मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्मस्थल है, जहाँ आज एक गर्ल्स इंटर कॉलेज चल रहा है। हालाँकि इस बारे में अभी और शोध की ज़रूरत है कि क्या वही इमारत ग़ालिब की पुश्तैनी हवेली है।



रचनाकार मे पढिए, रवीन्द्र नाथ त्यागी की रचना, किस्से अदालतों के। शशि भाई सबको नववर्ष की बधाई दे रहे है तो उधर प्रमेन्द्र सद्दाम हुसैन को फांसी दिए जाने से दु:खी है। इसी विषय पर संजय भाई लिखते है:
सद्दाम को मरना तो था ही. ऐसे नहीं तो किसी इराकी की गोली का निशाना बनता. तानाशाहो का यही अंजाम होता रहा है.
पर यहाँ फाँसी देने वाले तथा खाने वाले दोनो ही कायर लग रहे है. असल बहादुरी यह होती की सद्दाम लड़ते हुए मरता. लेकिन जैसा की कहते है तानाशाह कायर होते है, सत्ता के लिए शंकास्पद लोगो पर अत्याचार करते हुए एक दिन खुद फाँसी के तख्ते तक पहूँच जाते है. आज इराक में एकता व शांति सबसे महत्वपूर्ण है. क्या सद्दाम को मार कर इसे प्राप्त किया जा सकेगा ?

मनीषा बता रही है मिस इन्डिया यूएसए के बारे में। साथ ही बता रही है जर्मनी की गर्भवती महिलाएं क्यों अपने बच्चे को २००७ मे जन्म देना चाहती है। उधर सागर चन्द नाहर भाई से हम पतियों की खुशियां बर्दाश्त नही हो रही है इसलिए सभी औरतों का आहवान करते हुए कहते है "पति से झगड़ो, लम्बी उम्र पाओ" । अमां सागर भाई, मुसीबत जितनी छोटी हो उतनी ही अच्छी, आप तो उनकी लम्बी उम्र की दुवाएं कर रहे हो। जस्ट किडिंग...

देबाशीष लाए है इस हफ़्ते के जुगाड़, उधर अमित निकल लिए, नये साल के नए सफ़र पर
भाई अफलातून से सुनिए बापू की यादें। इधर मास्साब के बन्दर को फोटू खिंचवाने का शौंक चर्राया है। आज का कार्टून देखिए, देसीटून्स पर । सुख-सागर मे खांडव वन का दहन पढिए। इसके अतिरिक्त मन की बात , समीर लाल की उड़नतश्तरी और कानपुर ने नवोदित चिट्ठाकार अनिल सिन्हा द्वारा नववर्ष की मंगल कामना पढिए। तुषार जोशी की कविता तुम्हारा ख्याल देखिए।


आज का चित्र शशि के ब्लॉग से:




आज की टिप्पणी :डा. प्रभात टन्डन द्वारा, महाशक्ति पर:
अगर सद्दाम को 148 शियायों की हत्या के एवज मे फ़ांसी दी जा सकती है तो बुश को लाखों अफ़गानी और तमाम निर्दोष इराकियों के कत्लेआम का भी सजा झेलने के लिये तैयार रहना चाहिये। - डा. प्रभात टन्डन


अब दुकान बढाने का समय हो गया, जिन मित्रों का उल्लेख छूट गया हो वे मेरी गलती को नज़रान्दाज करते हुए, अपने नववर्ष को मनाने मे कोई कमी ना रखें। जाने से पहले, हिन्दी चिट्ठाकारों के परिवार की तरफ़ से आपको और आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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6 टिप्‍पणियां:

  1. सागर चन्द नाहरदिसंबर 31, 2006 8:39 pm

    भाई साहब आप को और सारे चिठ्ठाकारों को नव वर्ष की हार्दिक बधाई

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  2. मेरी तरफ से भी चिट्ठाचर्चा मंडली को नव वर्ष की शुभकामनाएं।

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  3. वाह मेरे शेर निपटा दिये साल को। नये साल की बधाई !

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  4. संजय बेंगाणीजनवरी 01, 2007 10:54 am

    मैं संजय अपने बॉस धृतराष्ट्र के साथ आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ.

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  5. तुमचा ब्लॉग फार छान आहे..तुम्ही मराठीत काबरा ल्हिवना!!!
    ही साइट पहा www.quillpad.in/marathi फार मदाद वाहील...वापरुन पहा...

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