गुरुवार, सितंबर 25, 2008

100 % रीयल हाईस्कूल फेयरवेल स्पीच...

आमतौर पर फेयरवेल स्पीच (अलविदा व्याख्यान?) बड़ी मेहतन से तैयार किए जाते हैं, मगर उनमें से कुछेक ही याद रखे जाते हैं. ये वाला फेयरवेल स्पीच भी ऐसा ही है, और अनंत मर्तबा, युगों युगों तक फारवर्ड होने का माद्दा भी रखता है. क्यों? क्योंकि यही है 100% रीयल. शतप्रतिशत असली फेयरवेल स्पीच. परंतु अकसर हम असलियत छुपा जाते हैं और मक्खन पालिश कर जाते हैं.

इस असली फेरयवेल स्पीच के मजे लें:

कुछ बीती बातों का छोड़ रहा हूँ फव्वारा,
सायोनारा|
दिल कि डायरी का है यह सार सारा,
सायोनारा|
इस कविता में अपनी पहचान ख़ुद से है करारा यह बेचारा,
सायोनारा|
सुबह घंटी बजने के ५ मिनट बाद नियमपूर्वक क्लास में है आरा,
सायोनारा|
बिना पास के साइकिल स्टैंड वाले को दस रुपये का किया इशारा,
सायोनारा|
बिन पॉलिश के जूतों और लंबे बालों को लिए क्लास में है घुसा जारा,
सायोनारा|
डायरी न लाने पर एक दोस्त के कवर व बाकी से पन्ने लेकर असेम्बली में जाने की जुगाड़ है बिठारा,
सायोनारा|
एडवर्ड सर की नजरों से बचने के लिए गंदे जूते पैंट से है घिसे जारा,
सायोनारा|
छोटे कद का होकर भी असेम्बली की लाइन में सबसे पीछे है लगा जारा,
सायोनारा|
प्रयेर के टाइम पे गर्लफ्रैंड के किस्से है सुनारा,

आगे पूरा स्पीच पढ़ें अर्पित गर्ग के चिट्ठे पर

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4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया,मज़े के साथ-साथ बहुत कुछ याद भी आ गया।

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  2. जय हो रतलामी जी की ! समझ गए !! सायोनारा !!!

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  3. उअतई टिपिया आए इत्तै सुयी टिपियाएंगे
    हजूर चिठन-जगत पे बैठ खैं बीढ़ी सुलगाएँगे
    मन भावन कुछ लुभावन चिट्ठे मिलतई भैज्जा
    चिट्ठे तक हम जाएँगे टिपियाएँगे
    सायोनारा|सायोनारा|सायोनारा|सायोनारा|सायोनारा|
    फ़िर गाएंगे
    फ़िर गाएंगे

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