सोमवार, सितंबर 29, 2008

बेटी दिवस के बाद कद्दू दिवस

कद्दू दिवस

  • कल इतवार को होने के कारण चिट्ठाबाजी लगता है कुछ कम हुई। टिपा-टिपौव्वल में भी मंदी सी दिखी। बहरहाल चलिये थोड़ा चर्चा हो जाये।


  • विभूति नारायण राय प्रख्यात पुलिस अधिकारी, साहित्यकार हैं। उनका उपन्यास’शहर में कर्फ़्यू’ काफ़ी चर्चित रहा। उन्हें हाल ही में महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय ,वर्धा का कुलपति बनाया गया है। कल हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान में उनका साक्षात्कार छ्पा। एक सवाल के जबाब में उन्होंने कहा:
    पुलिस सेवा किसी भी अन्य नौकरशाही की तरह रचनात्मकता विरोधी है। मैंने पिछले तैतींस वर्षों की सेवा के दौरान यह अनुभव किया है कि यदि आप नौकरी के अतिरिक्त दिलचस्पी के दूसरे क्षेत्र नहीं रखेंगे तो धीरे-धीरे आप जानवर में तब्दील होते जायेंगे।

    जो भाई लोग केवल नौकरी में मशगूल रहते हैं वे समझ लें। फ़िर न कहें कि बताया नहीं।


  • अनुराधा प्रसाद जिन अनुभवों से गुजरीं उनको साझा करते हुये लिखती हैं:
    ...लेकिन स्तन क्या इतने ही अवांछनीय और शर्मिंदगी का विषय हैं कि उनके बारे में चर्चा भी सहज होकर न की जा सके? दरअसल यह बात मुझे काफी देर हो जाने के बाद समझ में आई कि ये शर्मिंदगी का विषय तब हैं, जब छोटी-छोटी अनभिज्ञताओं की वजह से नवजात शिशु दूध न पी पाए। समय पर उनका वास्तविक इस्तेमाल न हो पाए।


  • दिनेश राय द्विवेदी बताते हैं आज कद्दू दिवस है। लो भैया खाओ कद्दू, मनाओ कद्दू दिवस। मतलब जिसको खाओ उसी का दिवस मनाओ। बलिहारी है। डर लग रहा है। गांधी दिवस आने वाला है!


  • अमेरिका में बड़े-बड़े बैंक दनादन दिवालिया होते जा रहे हैं। ई-स्वामी आज बता रहे हैं कि अमेरिका के आर्थिक संकट में फ़ेडरल रिजर्व की भूमिका क्या रही!:
    अत: अमरीका का अर्थ-तंत्र कर्ज आधारित है. उपभोक्तावाद का बोल-बाला है. वैसे तो काफ़ी कुछ है लिखने के लिये पर लब्बो-लुआब ये की पिछली उछाल वाली साईकल में उत्पादकता और तरलता की दर अधिक होने से बेरोजगारी और महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही हैं. लोगों में सुरक्षा की भावना थी - यूं समझा जाए की इसका फ़ायदा उठाने वाली साईकल शुरु की गई थी


  • अभिषेक ओझा ने बताया कि सौंदर्य अनुपात दुनिया में सब जगह पाया जाता है। यह सूचना पाते ही समीरलाल चल पड़े अपने चेहरे में सौंदर्य अनुपात देखने।


  • हिंदी ब्लाग जगत को तमाम बेहतरीन आलेख पढ़वाने में कबाड़खाना की बेहतरीन भूमिका रही है। आज कबाड़खाने का एक साल पूरा हुआ। कबाड़खाना के बारे में अपनी राय व्यक्त करते हुये ई-स्वामी ने कहा:
    ब्लागस्पाट की अपनी कुछ सीमितताएं हैं - जिनके चलते कबाडखाना वर्डप्रेस या टाईप-पैड आधारित ब्लाग्स जितना ‘स्ट्रक्चर्ड’ नहीं हो पाता वर्ना यह सामूहिक ब्लाग अन्य हर मानक पर हिंदी में सर्वश्रेष्ठ है!
    कबाड़ाखाना को जन्मदिन मुबारक।

  • नये चिट्ठाकार



    1. Media Watch


    2. lovenewthinking


    3. Vijay Verma

    4. SWEET MEMORIES

    5. सचिन

    6. विचार संकलन

    7. President of isgsbvnn

    एक लाइना



    1. टीवी पर मास्टरमाईण्ड शब्द कई बार दिखाने से भडक गये स्कूल के मास्टर लोग :और बोले ससुर मास्टरी का माइंड से क्या लेना-देना?




    2. तय करो किस ओर हो
      इस ओर हो, उस ओर हो.

      बातों को मनवाना हो तो
      तर्कों में कुछ जोर हो.
      या फिर
      कुछ ऐसा कर जाओ कि
      सदियों तक उसका शोर हो.

      तय करो किस ओर हो
      इस ओर हो, उस ओर हो. साधवी

    3. भाग रे भाग, पुलिस:पकड़ के ले जायेगी


    4. भारत में चुनाव और पी-फैक्टर : के दिन बहुरने वाले हैं


    5. हम अपनी बेटियों को क्या सिखा रहे हैं? : यह हमें ही नहीं पता


    6. आज कद्दू खाएँ, कद्दू दिवस मनाएँ : कद्दू महाराज की पूरी देवी से शादी के किस्से भी सुने


    7. किताबों की खुसर-फुसर… :अच्छी, गुदगुदी लग रही है


    8. 2020 का ऑफिस यानी मौजां ही मौजां: दिल को बहलाने को गालिब ये ख्याल अच्छा है


    9. जिम्मेदारी रायते की है : उसे देखकर फ़ैलना चाहिये था


    10. बापू को बख्श दो, प्लीज :उनका तो कोई माई बाप भी नहीं बचा अब


    11. प्रोफ़ेसर मुशीरुल हसन के वक्तव्य पर इतनी बेचैनी क्यों ?: तब क्या आप दो वक्तव्य दे लो कोई रोकता है क्या!


    12. फ़िर से ३ : १३ के चक्कर में पड़ गये


    13. आशाजी की गाई एक गजल:तुम तो ऐसे न थे कभी पहले


    14. पीली क्यों हो ऋतंभरा ?:मैं बार-बार पूछ रही हूं तुम जबाब नहीं देती


    15. आप भले, जग भला : कह रही हैं रंजना भाटिया तो मान लो


    16. हिंदी ब्लागिंग और हमारी व्यवसायिक चिंता: के क्या होगा भैये कुछ बताते तो सही


    17. अमर उजाला में गूंजे लफ्ज:इस्लाम तो इन्सानियत का मजहब है


    18. रिश्तों की गरिमा ई कौन चीज होती है भाई कुमारेन्द्र :


    19. अब और लिखने को क्या बाकी रह गया योगेश...बिना कलम ,स्याही, दवात इत्ता लिख गये ये कम है क्या भाई! :


    20. जागों हिंदुस्तान.. जागो हिंदुस्तानियों :उठो और अपना-अपना ब्लाग लिखो


    21. भर्ती मे देरी हुई तो प्राचार्य दोषी माने जाएंगें...:और उनको उन्हीं के स्कूल में भर्ती करा दिया जायेगा।


    22. जब मैं लूँगा हिसाब! :तो सबके होश ठिकाने लग जायेंगे


    23. तू सी ग्रेट हो : कहते हो तो मान लेते हैं


    24. क्यों नहीं श्मशान चला जाता? :और वहीं से अपना ब्लाग लिखता


    25. मेरा 'चौथा खड्डा' नवभारत टाईम्स पर :नवभारत टाइम्स में भी खड्डा खोद दिया पासपोर्ट के लिये


    26. फायदेमंद है मुहब्बत :चल गुरु हो जा शुरु


    27. बाढ़ है, मजाक नहीं : जो मुंह फ़ाड़ के हंस रहे हो, हाथ पर हाथ धरे


    28. जीरो साइज ठानी बाबा:कैसी कही कहानी बाबा


    29. इक बार तेरा चेहरा फिर देख लूँ :इसके बाद एक बार फ़िर देखेंगे इसके बाद फ़िर...


    30. भगत सिंह की सुनो :वो तुम्हारी सुनेगा


    31. मेरी रंगत का असर :पड़ेगा जमाने पर


    32. अलविदा ब्लागरो, फीर कभी और मीलेंगे (आखरी बार मूलाकात) :अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं


    33. आज विश्व ह्रदय दिवस पर सचित्र कुछ शायरियां :दिल शायरी में भी कूद पड़ा


    34. प्लेन में धक्का :लगाना पड़ता है तब स्टार्ट होता है जी


    35. आजमगढ़- कासे कहूं मैं जिया की बतियां:कहो हम सुन रहे हैं यार


    36. भारत नहीं है बेटियों का देश नहीं फिर क्यों मना रहे हैं डाँटर्स डे ?:लेकिन मना लेने में हर्ज क्या है जी?



    मेरी पसन्द


    दर्द में भी जो हंसना चाहो,
    तो हंस पाओगे,
    टूटे फूलों को भी पानी में डालो,
    तो उनमें भी महक पाओगे।

    जिन्दगी किसी ठहराव में,
    कंही रुकती नहीं,
    हिम्मत जो करोगे तो
    मन्जिल में दोस्तों को पाओगे,
    टूटे फूलों को भी पानी में डालो,
    तो उनमें भी महक पाओगे।


    अरमान कभी पूरे नहीं होते,
    जो देखे जाते हैं,
    वो भी आंसुओं के साथ,
    आंखों से निकल जाते हैं,
    फिर भी, किसी की खातिर,
    खुद को सवांरोगे तो,
    सराहे जाओगे,
    टूटे फूलों को भी पानी में डालो,
    तो उनमें भी महक पाओगे।
    प्रीति बड़्थ्वाल’तारिका’

    और अंत में


  • बिरादर जीतेन्द्र भगत ब्लागिंग और मौजूद दोहरेपन के बारे में कुछ ज्यादा ही परेशान हैं और कहते हैं-ब्‍लॉग: रि‍श्‍तों की समानांतर दुनि‍या और दोहरी छवि‍!!

    हमने तो उनको समझाया कि-ब्लागिंग अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। बस। दुनिया के लोग यहां भी हैं। वैसा ही होगा सब कुछ जैसा दुनिया में होता है। समझे बिरादर!

    और भी लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं। आप भी कुछ कहेंगे इस बारे में?


  • कुछ खास नहीं। हफ़्ता शुरू हुआ। धांस के काम करें। मौज मजे से रहें। ब्लागिंग तो चलती ही रहती है। है कि नहीं?
  • Post Comment

    Post Comment

    16 टिप्‍पणियां:

    1. बरोब्बर!
      सई कया आपने "धांस के काम करें। मौज मजे से रहें। ब्लागिंग तो चलती ही रहती है."
      काए परेसान हैं लोग अपने कबी लोग कै गए हैं-
      'रहिमन यहु संसार में भांति-भांति के लोग,
      कुछ तो...

      चिन्ता कछु नांय.

      उत्तर देंहटाएं
    2. .
      पहले शीर्षक पर ही टिपिया लूँ, फिर बाकी पोस्ट पढूँगा...
      कद्दू दिवस ! आनन्दम आनन्दम...
      कभी एक पोस्ट लिखी थी भारत एक दिवसप्रधान देश है...
      पर मुझ् हतभगी के सूक्ष्म खोपडी में यह विचार क्यों न आया ?
      डायनिंग टेबल पर कटने के इंतज़ार में रखा कद्दू मुँह चिढ़ा रहा है..
      टके का आदमी मुझ 20 रूपये किलो के कद्दू का मज़ाक बना रहा है..
      बाभन जिमाने को मुझे कल हेरता फिर रहा था ।
      यह ब्राह्मण लोग इतने कद्दूप्रेमी क्यों हुआ करते हैं जी ?

      उत्तर देंहटाएं
    3. पुलिस सेवा किसी भी अन्य नौकरशाही की तरह रचनात्मकता विरोधी है। मैंने पिछले तैतींस वर्षों की सेवा के दौरान यह अनुभव किया है कि यदि आप नौकरी के अतिरिक्त दिलचस्पी के दूसरे क्षेत्र नहीं रखेंगे तो धीरे-धीरे आप जानवर में तब्दील होते जायेंगे।
      DITTO ....

      उत्तर देंहटाएं
    4. आज सिर्फ इतना कि कद्दू खाओ सेहत बनाओ, जो चले गए उन्हें याद करो और प्रसन्न रहो।

      उत्तर देंहटाएं
    5. कद्दू की कोई पाक विधि किसी के पास हो तो कृपा कर हमारे साथ शेयर करे

      उत्तर देंहटाएं
    6. हमेशा की तरह समग्र और उत्कृष्ट चर्चा।
      कद्दू तो हमारा पारिवारिक खाद्य है! :-)

      उत्तर देंहटाएं
    7. बहुत ही कद्दू चिटठा चर्चा है :).यह चिटठा चर्चा भी .पसंद आई ,क्यूंकि कद्धू पसंद है :)

      उत्तर देंहटाएं
    8. सबसे पहले बधाई ....आपने जिन चार पोस्टो को उनके सन्दर्भ सहित चुना .....वाकई काबिले तारीफ.....आज की कई एक लाइना ...धाँसू है....सबको यहाँ समेटना मुश्किल है.......इसलिए फ़िर एक बार .....लाजवाब चर्चा

      उत्तर देंहटाएं
    9. शुक्रिया अनूप जी आपकी चिटठा चरचा से हमें कद्दू दिवस के बारे मे पता चला । :)

      उत्तर देंहटाएं
    10. शुकल जी , बड़ी उत्तम चर्चा ! आज लगता है सर्व पित्री अमावस्या है सो आदरणीय द्विवेदी जी ने
      सबको याद दिला दिया ! और लगता है अधिकतर घर में आज कद्दू अवश्य बना होगा ! भाई हमारे
      यहाँ तो बना है ! और जिनको नही बनाना आता हो वे जाकर आदरणीय द्विवेदी जी के ब्लॉग पर
      स्मार्ट इंडियन जी की टिपणी में विधी पढ़ कर बना ले ! बड़ा उत्तम स्वाद है कद्दू महाराज का !

      उत्तर देंहटाएं
    11. बेहतरीन कद्दुमय चर्चा-आनन्द आया. जारी रहें.

      उत्तर देंहटाएं
    12. वाह मजा आ गया.. आच की चिट्ठा चर्चा में तो कद्दू ही कद्दू है..अब तो हम लोगों से कह सकते हैं कि भाई कद्दू खेत, छप्‍पर, और छत पर ही नहीं फलता.. हमारे ब्‍लॉगजगत में भी इसकी बहुतायत है :)

      उत्तर देंहटाएं
    13. बहुत सुंदर चिठ्ठा चर्चा ! कद्दू दिवस याद दिलाने के लिए धन्यवाद ! वैसे आज अमावस पर भरपूर खीर, इमरती और कद्दू की सब्जी भूत लोगो ( दिवंगत ) के नाम पर डकारी गई hai ! धन्यवाद !

      उत्तर देंहटाएं
    14. अनूप जी मेरी रचना को पसन्द करने के लिए शुक्रिया। फिर वही आपकी वन लाइना मेरी पहली पसन्द है। धन्यवाद

      उत्तर देंहटाएं
    15. पूरी चर्चा में अतिम लाइन बहुत पसंद आई। शुक्रिया।

      उत्तर देंहटाएं

    चिट्ठा चर्चा हिन्दी चिट्ठामंडल का अपना मंच है। कृपया अपनी प्रतिक्रिया देते समय इसका मान रखें। असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।

    नोट- चर्चा में अक्सर स्पैम टिप्पणियों की अधिकता से मोडरेशन लगाया जा सकता है और टिपण्णी प्रकशित होने में विलम्ब भी हो सकता है।

    Google Analytics Alternative