सोमवार, सितंबर 08, 2008

एक दोस्त के लिये सुन्दर तोहफ़ा

गुलस्ता


एक दोस्त के लिये इससे अच्छी कोई भेंट नहीं हो सकती कि उसका कोई दोस्त दस साल बाद फ़ोन करे और कहे:
"Accidentally तुम्हारा ब्लॉग देखा .... बहुत अच्छा लगा. हालांकि न जाने क्यों मुझे ये लगा कि वो कुछ कवितायें, कुछ क़ता'त जो मुझे बहुत पसंद थे, और जो तुम्हें ज़बरदस्ती बार बार मुझे सुनाने पड़ते थे, वो तुम ने ज़रूर पोस्ट किए होंगे ................... लेकिन ऐसा था नहीं ...."

ऐसा ही कुछ मीत के साथ हुआ और उन्होंने अपने दोस्त के लिये ये पोस्ट लिखी।

"कोई दुनिया में अब नहीं मेरा
मेरे बारे में लोग कहते है
मैं, मेरा दर्द, मेरी तन्हाई
जब कि हर वक़्त साथ रहते हैं" मीत


आज ज्ञानजी को अपनी टेस्ट-ट्यूब खाली होने का खतरा दिखाई दिया:
अपने से मैं पूंछता हूं - मिस्टर ज्ञानदत्त, तुम्हारी ट्यूब भी खलिया रही है क्या? और जवाब सही साट नहीं मिलता। अलमारी में इत्ती किताबें; टीप कर ठेला जाये तो भी लम्बे समय तक खोटी चवन्नी चलाई जा सकती है। फिर रेलवे का काम धाम; मोबाइल का कैमरा, पंकज अवधिया/गोपालकृष्ण विश्वनाथ/रीता पाण्डेय, आस-पड़ोस, भरतलाल, रोज के अखबार-मैगजीनें और खुराफात में सोचता दिमाग। ये सब ब्लॉग पर नहीं जायेगा तो कहां ठिलायेगा?


उनके मूड से गठबंधन करते हुये समीरलाल भी आ गये:
  • कुछ थक सा गया हूँ. कुछ दुखी सा भी हूँ मगर खुद से. कुछ जरुरत से ज्यादा ही आप लोगों का सम्मान, स्नेह, लाड़-प्यार पाकर लेखन के मुख्य कार्य से विचलित हो चला हूँ. सही शब्दों में-बिगड़ सा गया हूँ.



  • मेरे लेखन में कहीं कुछ बहुत बड़ी कमी आ रही है आजकल. आ क्या रही है, है ही. जो कहना चाहता हूँ वो भाव न जाने कैसे मतलब बदल कर पहुँच रहे हैं. निश्चित ही लेखन की कमजोरी है, जो अपनी बात सही तरीके से नहीं रख पा रहा.


  • ये दोनों महान लोग हिंदी ब्लागजगत के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले ब्लागर हैं। जब इनके हाल ऐसे हैं तो बकिया क्या कहेंगे? इस पर डा.अमर कुमार की फ़ड़कती हुई टिप्पणी की दरकार है।

    जो बजे वह बाजा
    जो सजे वह साज !
    पर मैं क्या करूं ?
    न अपने पास कोई गुन
    न अपनी कोई आवाज ! कर्मनाशा



    एक लाइना




    1. क्या गड़बड़ है? कोई नहीं जी बस आप लिखती रहें भावनाजी अस्तबल बेंच के


    2. शाकाहार-कुछ तर्क कुतर्क : इससे क्या पड़ेगा फ़र्क



    3. नये चिट्ठाकार
      1. फ़र्जीवाड़ा: माल भी फ़र्जी होगा क्या?


      2. : ज्ञानकोष की शुरुआत स्पैम ई-मेल से


      3. अभिव्यक्ति:भावनाओं की , विचारों की!


      4. मेरी कवितायें :लेकिन मैं कवि नहीं!


      5. यादें : हेमन्त जयपुरी की


      6. कर्मभूमि:मेरा समाज, मेरे लोग और मेरे विचार।


      7. जज्बात : अनवार के।


      8. VOID IS NOT REALLY EMPTY:वहां अंग्रेजी धंसी पड़ी है।


      9. परावाणी : प्यार करने के लिये पैदा हुये शख्स की।


      10. आनंद पुरोहित का ब्लाग: पढि़ये



      11. नन्हें-मु्न्ने:बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है!


      12. अच्छी सोच :से खुशी मिलती है।


      13. कथा संसार:अभी निर्माणाधीन है यार



    4. आप अपनी ट्यूब कैसे फुल रखते हैं, जी?: ये अन्दर की बात है जी!



    5. मेरा नया ब्लॉग है यह तो ब्लॉग लिख कुँए में डाल



    6. शिवकुमार मिश्र के प्रयत्न से फीड-यातायात में जबरदस्त उछाल!: ज्ञानदत्त पाण्डेय का यातायात में अवरोध का प्रयास



    7. कश्मीर के बहाने एक नया सवाल : येल्लो ससुरा एक और बबाल!


    8. यह कैसे अल्पसंख्यक हें? : बूझो तो जानें



    9. कुछ हमारे आसपास के चित्र: ये चित्र तो सर्वत्र बिखरे हैं मित्र।



    10. स्कूलों के लिये शिक्षक दिवस बड़ा या परीक्षा :ये तो इस पर निर्भर है कि शिक्षक पढ़ने-पढ़ाने-परीक्षा के लिये हैं या दिवस बिताने के लिये



    11. आइये कुछ हंस भी लें: आप हंसो भाई हम तो हर काम प्लानिंग से करते हैं/सिर्फ़ सन्डे को हंसते हैं!



    12. एक कविता आप सब के लिए.. : अमां यार! तुम्हारे लखनऊ में और कुछ नहीं है क्या!


    13. आइये कुछ हंस लें : आपै हंसो! हम तो हर काम प्लानिंग से करते हैं, केवल इतवार को हंसते हैं



    14. एक बहुत पुराने दोस्त के लिये: इससे अच्छी भेंट क्या हो सकती है?



    15. वंदना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला लो :मेरे बाजे को शामिल बाजा बना दो!



    16. दीदी को जैसी है वैसी रहने दो!



    17. उनकी तलाश जारी है : एफ़.आई.आर. तो करवा दो!


    18. आप खुद ही पढ़ लें : ये भी कोई पढ़ने की चीज है!




    19. पुरूष की नैतिक ज़िम्मेदारी क्या हैं , इस पर क्यों नहीं डिस्कशन होता ??
      बताइये भला!



    20. काश मैं भी बादलों को छू सकता: तो लिखता -आजकल पाँव ज़मीँ पर, नहीँ पडते मेरे



    21. लगता है भारत फ़िर गुलाम हो गया है: कन्फ़र्म हो जाये तो फ़िर से आजादी की लडा़ई लड़ी जाये!



    22. पुस्तक मेले में काउंटर पर... डिसटर्ब मत करो: वर्ना मंहगी किताबें खरीदनी पड़ेंगी


    23. प्रेम करने वालों के लिए भी कुंडली मिलाना जरुरी है क्या ??? : क्या फ़ायदा दिल तो मिल ही गये!



    24. आपदा और दलाल : बड़ा बुरा है हाल!



    25. जल जाते हैं : फ़िर पोस्ट लिख के बताते हैं।




    और अंत में



    कल इतवार होने के कारण ब्लाग पोस्ट कम लिखी गयीं लगता। लिखी भी गयीं तो टिपियायी कम गईं। कल डा.अमर कुमार की पोस्ट शब्दों की तलाश में निकली एक प्राणहीन पोस्ट का जिक्र छूट गया। इसके प्राण अब वापस आ गये।

    ज्ञानदत्त जी और समीरलाल ने अपनी चुकेली और थकेली पोस्टें लिखी हैं। ये पोस्टें इन महाब्लागरों के टिप्पणियों के रिकार्ड तोड़ेगी। यह चुकने और थकने का दर्द ब्लागिंग के शायद दूसरे या तीसरे स्तर का दर्द है (जीतेन्द्र बतायेंगे)। पेन्स शुरू हुये तो कोई जन्म भी होगा। कहा भी है:

    अजब सी छटपटाहट
    घुटन ,कसकन
    है असह पीड़ा
    समझ लो साधना की
    अवधि पूरी है।
    अरे घबरा न मन
    चुपचाप सहता जा
    सृजन में
    दर्द का होना जरूरी है।


    बहरहाल इस पर फ़िर कभी। वैसे अगर किसी सामूहिक काम में लगा जाये (पचास काम हैं)तो इस तरह के चिरकुट कष्ट नहीं होते।

    आज नेट कनेक्शन गड़बड़ रहा सो बहुत कुछ छूट गया। बहरहाल जो हुआ वह पेशे पोस्ट है।

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    12 टिप्‍पणियां:

    1. फटाफट चुकेली थकेलीश्च टिप्पणी कर दूं - बहुत जानदार चर्चा है।
      अब यह बताया जाय कि ट्यूब कैसे भरें?!

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    2. bahut baariki se padane ke baad charcha ki gai hai....
      ek dam mast...

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    3. अच्छे चुनाव, सही प्रोत्साहन!!



      -- शास्त्री जे सी फिलिप

      -- हिन्दी चिट्ठाकारी अपने शैशवावस्था में है. आईये इसे आगे बढाने के लिये कुछ करें. आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!

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    4. जी हाँ कल रविवार कि छुट्टी के कारन बहुत सारे ब्लॉग पोस्ट नही पढ़ पाया .....शुक्रिया आपका डॉ अमर कि पोस्ट अभी पढ़ लेता हूँ......समीर जी के कथन में ईमानदारी है यही चीज उन्हें दूसरो से अलग करती है.....
      आज कि एक लाइना
      पुरुषों कि नैतिक जिम्मेदारी क्या है....वाली .....झकास....

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    5. बहुत बढिया चर्चा रही ! आज ज्ञान और सुचनाए
      ज्यादा गृहण करने में आई ! आगे से रविवार को
      पोस्ट ठेलन कार्यकृम बंद रखेंगे ! धन्यवाद और शुभकामनाएं !

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    6. .

      वाह गुरु, ये भी खूब रही...

      भाई मेरे, पर-वक्ता हूँ... प्रवक्ता नहीं
      मैंने तो ऊँगली पकड़ायी.. आप बाँह ही मरोड़े दे रहे हो
      डा. अमर कुमार टिप्पणी करें, काहे करें भाई ?

      ईहाँ दिग्गज़ लड़खड़ा रहे हैं,अउर हम फड़फड़ायें ?
      ये लाज़ शरम तज़ के आये होते, तो ऎसा थोड़े ही सोचते ?
      अग़र शर्मदार होते.. तो भला ब्लागिंग में आते ?
      अब नकटों की टोली छोड़ा चाहते हैं,

      भेद मिल गवा है.... CBI की रिपोर्ट है, ईहाँ
      एक चिट्ठाचर्चा करने से डेराय रहा है,
      दूसरा चिट्ठाचर्चा न मिलने से बिरझाय रहा है

      यह लोग अन्यथा न लें.. पर मैं तो गिन रहा हूँ
      भादों जाय रहा.. आश्विन बीते देयो... कार्तिक तक लौट आवेंगे..
      ब्लागिंग अउर ब्लागर तो कुत्ता-कुतिया का जोड़ा है

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    7. 'आप का क्या कहना है?'

      क्या कहें, रोज ही कहते हैं चर्चा तो बड़िया होती ही है। हम सोच रहे हैं कि अगर ये चुकेली और थकेली की बिमारी महामारी बन कर टिप्पणीकारों में भी फ़ैल गयी तो क्या सीन होगा जी। कोसी का कहर बिहार में ज्यादा होगा या इस महामारी का कहर ब्लोगजगत में।

      मीत का शेर तो दिल को छू गया
      "कोई दुनिया में अब नहीं मेरा
      मेरे बारे में लोग कहते है
      मैं, मेरा दर्द, मेरी तन्हाई
      जब कि हर वक़्त साथ रहते हैं" मीत
      वाह

      जो बजे वह बाजा
      जो सजे वह साज !
      पर मैं क्या करूं ?
      न अपने पास कोई गुन
      न अपनी कोई आवाज ! कर्मनाशा
      ये लिंक देने के लिए भी शुक्रिया। सुनना बहुत मधुर लगा ये हम उनके ब्लोग पर लिखेगें आप को तो सिर्फ़ धन्यवाद जो आप रोज रोज हमारे लिए ऐसे चुनिंदा लिंक्स जमा कर पेश करते हो।

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    8. ये जो दिगाज लाद्खादा रहे हैं! अच्छा संकेत नही है !

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    9. जोरदार एक लाइना

      वीनस केसरी

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    10. भाई पहले नही पता था, कि यहा उदास दुर की जाती हे, क्या हाजिर जबाबी हे.
      धन्यवाद

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