गुरुवार, सितंबर 25, 2008

सर्वेश्वर, चक्रधर और जावेद अख्तर

 सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
कल सर्वेश्वर दयाल सक्सेनाकी पुण्यतिथि थी (जन्मदिन 15 सितम्बर) । इस मौके पर दिव्यांशु शर्मा ने उनको याद किया। अन्य किसी मीडिया चैनेल ने उनको याद करने की जहमत नहीं उठाई।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के विकिपेज पर उनका परिचय मात्र है। कविताओं के लिंक दिये हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के संजय द्विदेदीने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी के बारे में काफ़ी विस्तार से सामग्री जुटाई है। संजय जी के ब्लाग पर मौजूद सामग्री के आधार पर विकिपेज समृद्ध किया जा सकता है।

कल रवीश कुमार ने दैनिक हिन्दुस्तान में अपने कालम ब्लागवार्ता में रविरतलामी के द्वारा चलाये जा रहे रचनाकार और लिटरेचर इंडिया का उल्लेख किया। उन्होंने हिंदी के साहित्यकारों को नयी तकनीक से जुड़ने का आवाहन करते हुये लिखा:
ब्लागर न होते तो किस टीवी चैनल ने आपको बताया कि मशहूर साहित्यकार प्रभाखेतान नहीं रहीं। बताया भी तो क्या स्क्रीन के नीचे चलने वाली पट्टी से से ज्यादा बताया? इस बीच मशहूर इतिहासकार डी.एन.झा ने मुझसे कहा कि वे भी ब्लागर बनना चाहते हैं। मुझे सिखा दो। ब्लागर बनने की उम्र नहीं होती। हिंदी के साहित्यकार सुन रहे हैं न!


अशोक चक्रधरजी जामिया मिलिया इस्लामिया कालेज से जुड़े रहे हैं। उन्होंने दिल्ली बम धमाकों के बाद जामिया के लड़कों के पकड़े जाने पर अपनी बात कहते हुये लिखा:
लोग हमसे सवाल करते हैं कि क्या आप बच्चों को यही सिखाते हैं। पूछने वालों को क्या जवाब दें? किसी के माथे पर तो कुछ लिखा नहीं होता। लेकिन ये जो नई नस्ल आई है, हिंदू हो या मुसलमान, इसमें कई तरह का कच्चापन है। जामिआ के सभी कुलपतियों ने विश्वविद्यालय के विकास को लगातार गति दी और इस मुकाम तक ला दिया कि इसकी एक अंतरराष्ट्रीय पहचान बनी। तरह-तरह के सैंटर, नए-नए विभाग, बहुत तरक़्क़ी की जामिआ ने। और अब देखिए। बिगड़ैल बच्चों के कारण मां-बाप को भी शर्मिंदगी का सा सामना करना पड़ रहा है।

वसीम बरेलवी ने कुछ ये लिखा था-
नये जमाने की खुद मुख्तारियों को कौन समझाये
कहां से बच निकलना है, कहां जाना जरूरी है।


रंजना भाटिया के किस्से आप पढ़ रहे हैं। आज वे अपने पहले झटके के बारे में बता रही हैं- फर्स्ट क्रश- कपिलदेव। कल ही उनकी नयी किताब छपकर आई। उनको बधाई।

आपने तमाम भाषण सुने होंगे। लेकिन जावेद अख्तर का ये भाषण कुछ अलग किस्म का है। दुर्गाप्रसाद जी इसे तमाम लोगों को पढ़ा चुके हैं-
मान्यवर, यह काफी नहीं है कि अमीरों को यह सिखाया जाए कि वे सांस कैसे लें. यह तो अमीरों का शगल है. पाखण्डियों की नौटंकी है. यह तो एक दुष्टता पूर्ण छद्म है. और आप जानते हैं कि ऑक्सफर्ड डिक्शनरी में इस छद्म के लिए एक खास शब्द है, और वह शब्द है: होक्स(HOAX). हिन्दी में इसे कहा जा सकता है, झांसे बाजी!


और अंत में


कल कुश कहीं व्यस्त हो गये शायद इसलिये न चर्चा कर पाये न सूचना दे पाये। आश्रम में लगता है ज्यादा ही गुरु सेवा हो रही है।

आज अभी सुबह पता चला कि समीरलालजी भी अस्पताल भागे हुये हैं। भाभीजी की तबियत कुछ बिगड़ गयी। सो चलते-चलते हड़बड़िया चर्चा कर दी। शाम तक एक लाइना पोस्ट करेंगे। कल की चर्चा मसिजीवी करेंगे, परसों निठल्ले तरुण।
हम चलें। चिंता न करें फ़िर मिलते हैं शाम तक कभी अपने एक लाइना के साथ।

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16 टिप्‍पणियां:

  1. अनूप जी सर्वेश्वर जी पर आलेख के उद्धरण का आभार। साहित्य शिल्पी मंच पर इस आलेख का लिंक हमने लगाया है...पुनश्च धन्यवाद। आपकी प्रस्तुति व चिट्ठो की चर्चा सराहनीय कार्य है व कठिन भी। जिस श्रम से आप सब इसे अंजाम दे रहे हैं उसे नमन।

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  2. आज तो गागर में सागर ..!
    भई...!! कमाल है !!!

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  3. भाई शुक्ल जी, आपका इंतजार करेंगे शाम के प्रकाशन में !

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  4. μ - चिटठा चर्चा? पर फिलर के हिसाब से ठीक ही है. एक लेना का इन्तजार है.

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  5. बहुत आभार शुक्ल जी ! आपका यह मुश्किल और सराहनीय प्रयास हमारे जैसे नए चिट्ठाकारों को एक ही मंच पर सभी जानकारी न केवल मुहैया करा रहा अपितु आरम्भ से ही आप जैसे लोगों से जुड़ने, सीखने और अर्जित करने के लिए सतत् प्रेरणा भी दे रहा है. पुनः धन्यवाद् !

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  6. सर्वेश्वर जी पर आलेख के उद्धरण का धन्यवाद | बस एक बात थी , दरअसल संशोधन था , कि कल उनका जन्मदिन नहीं पुन्युतिथि थी | उद्धरण हेतु पुनः आभार |

    दिव्यांशु शर्मा

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  7. सच कहु तो चर्चा करने का मन ही नही हो रहा.. किस पोस्ट की चर्चा करू? उसकी जिसमे शहीद शर्मा को श्रद्धांजलि दी जा रही हो या उसकी जिसमे उन पर सवालिया निशान उठ रहे हो.. सच कहु तो चर्चा करने के लिए बैठा भी था कल.. पोस्ट पर नज़र डाली तो गिनती की चन्द पोस्ट मिली जिनके बारे में कुछ लिख सके..

    फिर ऐसा करता तो और इल्ज़ाम अलग लग जाता की कुश गुटबाजी करता है.. या फिर कोई टिप्पणी कर जाता की गुरु जल्दी में निबटा दिया इस बार...

    खैर उम्मीद का दिया बुझा नही है.. अच्छा लिखने वेल भी है.. और अच्छा पढ़ने वेल भी.. और हम किसी को निराश नही करते.. अगले बुधवार सभी से मिलूँगा..

    इस बार के लिए क्षमा..

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  8. कुश की परेशानी जायज है... पर 'इग्नोर' करो. सब लोग करते हैं...

    ये करना नहीं सीखोगे तो भाई ऐसी समस्या तो आएगी ही !

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  9. कुश मियां की परेशानी सुनी लेकिन ये ही एक ऐसा मंच है जिसमें कि आप को या फिर जिसने भी चिट्ठा चर्चा की हो उसको पढ़ता है तो इस भाव से कि पूरे एक दिन की चिट्ठा चर्चा है और साथ ही कोई भेदभाव नहीं किया गया होगा। लेकिन जब सीता मां को कोई नहीं बख्शा तो हू आर यू मिस्टर कुश, जस्ट ए मैन। सो डोंट वरी कोई भी आरोप लगाने नहीं आ रहा। आए भी तो अपनी बला से।

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  10. चिटठा चर्चा ठीक लगी ।
    अरे अब तो शाम हो गई है एक लाईना कहाँ है । :)

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  11. मशहूर साहित्यकार डी.एन.झा या मशहूर इतिहासकार डी.एन.झा?
    जल्‍दबाजी में भी आप इतनी अच्‍छी चर्चा कर लेते हैं, दाद देनी होगी।
    @ कुश भाई आप बहुत सोचते हैं। फुरसतिया भइया की तरह जबरिया लिखिए ना कोई का करिहैं?

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  12. .

    भाई कुश की व्यथा से सहमत.. ..
    ज़बरिया लिखने के लिये ज़बरिया धोती खोले जाने
    का अनुभव होना चाहिये । हिचकिचाहट जाती रहेगी, तो..
    वह भी कहेंगे... " हमार कोऊ का करिहे "
    माहौल कुछ ऎसा ही बन गया है !

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  13. कोई बात नहीं हो जाता है कभी कभी, आप के वन लाइनर का इंतजार है।

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  14. पिछले दो बार से तो पोस्ट डालने से पहले न चिटठा जगत खोलता हूँ न ब्लोगवाणी ...मन अजीब सा हो जाता है....अगर खोलू तो कुछ अजीब सी बातें पढने को मिलती है .फ़िर मन नही करता..कोसी का पानी अभी सूखा नही है की दूसरे धमाके अब तक दीवारों को हिला रहे है....कभी कभी मन में उब सी होने लगती है....कुश का नही सबका यही हाल है....सच तो ये है की अब हम सच बोलने से भी डरते है.


    एक लाइना को मिस किया आज

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  15. @आदरणीय डॉक्‍टर अमर कुमार साहब, लेकिन मैंने सहज हास्‍य भाव से टिप्‍पणी की थी, आप इसे कहां ले जा रहे हैं :)

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